ऑर्गेज्म, महिलाओं के लिए शारीरिक आनंद और अनुभूति की एक भावना है। सेक्स के दौरान क्लाइमेक्स तक या ऑर्गेज्म तक पहुंचने में महिला के शरीर के कुछ अंगों का खास योगदान होता है।
ऑर्गेज्म, महिलाओं के लिए शारीरिक आनंद और अनुभूति की एक भावना है। सेक्स के दौरान क्लाइमेक्स तक या ऑर्गेज्म तक पहुंचने में महिला के शरीर के कुछ अंगों का खास योगदान होता है।

महिलाओं में ऑर्गेज्म सिर्फ क्लिटोरिस से शुरू होकर वहीं खत्म नहीं हो जाता है। महिला साथी को सेक्स के अंतिम चरण यानी ऑर्गेज्म तक पहुंचाने में शरीर के अन्य अंग भी आपकी मदद कर सकते हैं। आइए, जानते हैं महिलाओं को उत्तेजित करने वाले बॉडी पॉइंट्स के बारे में?
ऑर्गेज्म के दौरान यौन अंगों में रक्त का प्रवाह बढ़ जाता है जिससे वो ज्यादा संवेदनशील हो जाते हैं।
ऑर्गेज्म होने पर दिल की धड़कन, ब्लड प्रेशर और सांस लेने की दर में वृद्धि होती है। हो सकता है ऑर्गेज्म होने पर मांसपेशियों में ऐंठन भी हो। कई महिलाओं को ऑर्गेज्म के दौरान योनि की मांसपेशियों में ऐंठन सी महसूस होती है।
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जिस तरह सेक्स करने के फायदे होते हैं, ठीक उसी तरह ऑर्गेज्म तक पहुंचने के भी लाभ होते हैं। ऑर्गेज्म से सेहत को होने वाले फायदों को लेकर बहुत कम अध्ययन किए गए हैं। वैज्ञानिक ऑर्गेज्म से होने वाले स्वास्थ्य लाभों के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं जुटा पाए हैं।
लेकिन इतना तो कहा जा सकता है कि चरम सुख तक पहुंचने पर तन और मन को जो खुशी मिलती है, वो भी किसी स्वास्थ्य लाभ से कम नहीं है। इससे इंसान का मूड बेहतर होता है, तनाव में कमी आती है, इम्यूनिटी बढ़ती है और दोनों पार्टनर्स के बीच अच्छे संबंध बन पाते हैं।
प्रेग्नेंट होने के लिए महिलाओं को ऑर्गेज्म की जरूरत नहीं होती है लेकिन कुछ अध्ययनों में यह बात सामने आई है कि इससे फर्टिलिटी पावर बढ़ सकती है।
महिलाओं को उत्तेजित करने का एकमात्र तरीका योनि ही नहीं है। निपल्स भी इरोजेन जोन में आते हैं और ये बेहद संवेदनशील होते हैं। निपल्स को उत्तेजित करने पर, यह कुछ महिलाओं को पूर्ण संभोग सुख की ओर ले जाते हैं। इससे महिला को ऑर्गेज्म मिलता है।
महिला को ऑर्गेज्म या चरम सुख प्राप्ति के लिए योनि के क्लिटोरिस की भूमिका काफी अहम होती है। सेक्स के दौरान पुरुष साथी अगर महिला क्लिटोरल जोन को अलग-अलग तरीके से छूता है तो महिला को ऑर्गेज्म आसानी से मिल सकता है। हालांकि, कभी-कभी क्लिटोरल ऑर्गेज्म को पाने के लिए, 70 से 80 प्रतिशत महिलाओं को सीधे क्लिटोरल स्टिमुलेशन की जरूरत होती है।
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जी-स्पॉट, वजायना का एक ऐसा हिस्सा होता है जिसके बारे में कहा जाता है कि यहीं महिलाओं का सेक्सुअल प्लेजर छिपा होता है।
सेक्स के दौरान इसको खोजना मुश्किल हो सकता है। दरअसल, यह वजायना के अपर वॉल के ठीक पीछे होता है और इसे उत्तेजित करने पर महिला को ऑर्गेज्म महसूस होता है।
अनल जोन को उत्तेजित करके महिला को ऑर्गेज्म तक पहुंचाया जा सकता है। सेक्स या फोरप्ले के दौरान महिलाओं के इस जोन को उत्तेजित करने के लिए हल्का स्पर्श और अनल वाइब्रेटर प्रयोग किया जा सकता है।
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कुछ महिलाओं में योनि के शुरुआती हिस्से में, मूत्रमार्ग के आसपास की त्वचा अत्यधिक संवेदनशील पाई जाती है। यह योनि के चारों तरफ होती है।
सेक्स के दौरान महिला को चरम सुख या ऑर्गेज्म तक पहुंचाने के लिए महिलाओं के इस पार्ट को छूना कारगर साबित हो सकता है। महिला को ऑर्गेज्म महसूस कराने का यह बहुत आसान तरीका है।
ए-स्पॉट, योनि के अंदर गहराई में गर्भाशय ग्रीवा और मूत्राशय के बीच पाया जाता है। पुरुष साथी इसे जी-स्पॉट की तरह ही ढूंढ सकते हैं। ए-स्पॉट महिलाओं को ऑर्गेज्म तक पहुंचाने में मदद करता है। कुछ महिलाओं को इस हिस्से के द्वारा उत्तेजित होने के लिए गहरी पेनिट्रेशन की जरूरत होती है।
ऑर्गेज्म बेशक एक शारीरिक क्रिया है लेकिन इसे आप मानसिक शांति के बिना महसूस नहीं कर सकते हैं। जब तक आपका शरीर और दिमाग रिलैक्स नहीं होंगे, आप ऑर्गेज्म प्राप्त नहीं कर सकती हैं। इसलिए, सेक्स के हर पहलू का पूरा आनंद उठाने के लिए रिलैक्स रहें और इस प्रक्रिया को महसूस करने की कोशिश करें।
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कमरे का माहौल आपकी मानसिक शांति पर काफी असर डालता है। रोमांस से पहले कमरे की लाइट थोड़ी मद्धम रखें या फिर एक रोमांटिक वॉल्क का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
पुरुष साथी को महिला पार्टनर को ऑर्गेज्म तक पहुंचाने में शरीर के अलग-अलग हिस्सों का ख्याल रखना चाहिए। महिलाओं के शरीर में कई ऐसे पॉइंट्स होते हैं जिससे सेक्स के दौरान उन्हें ऑर्गेज्म दिया जा सकता है।
यह बहुत ही दुखद किंतु सत्य है कि महिलाओं के लिए ऑर्गेज्म पाना बहुत कठिन होता है यानी उन्हें चरम सुख नहीं मिल पाता है।
एक रिपोर्ट के अनुसार केवल 10% महिलाएं ही आसानी से ऑर्गेज्म का सुख (चरम सुख) प्राप्त कर पाती हैं। अन्य 90% को कई कारणों की वजह से ऑर्गेज्म का सुख भोगने में कठिनाई आती है। तो आज हम आपको उन कुछ मुख्य कारणों के बारे में बताने जा रहे हैं जिनकी वजह से महिलाओं को ऑर्गेज्म नहीं मिल पाता है।
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ऑक्सीटोसिन को आमतौर पर “लव” हार्मोन के नाम से भी जाना जाता है। ऑर्गेज्म यानी चरम सुख के लिए शरीर में इस हार्मोन का रिलीज होना बहुत जरूरी है।
कई यौन रोग विशेषज्ञों के अनुसार, यदि शरीर में पर्याप्त मात्र में यह हार्मोन नहीं बन पा रहा है, तो महिला को ऑर्गेज्म तक पहुंचने में दिक्कत आती है। ज्यादा तनाव होने की वजह से भी ऑक्सीटोसिन का उत्पादन कम हो सकता है।
कई यौन रोग विशेषज्ञ ऐसा मानते हैं कि कई दवाओं के सेवन के साइड इफेक्ट्स के रूप में ऑर्गेज्म से वंचित होना पड़ सकता है। इन दवाओं के सेवन से आपके शरीर में प्रोलैक्टिन (prolactin) के स्तर में बढ़ोतरी होती है।
यह एक ऐसा प्रोटीन है जो आपकी सेक्स ड्राइव को कम करता है और ऑर्गेज्म तक पहुंचने से रोकता है। आमतौर पर, ब्लड प्रेशर की दवाएं, गर्भ निरोधक गोलियां, और एंटीडिप्रेसेंट की गोलियां मुख्य रूप से इस समस्या का कारण बन सकती हैं।
पूरे दिन पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से थकान और कब्ज जैसी रोजमर्रा की स्वास्थ्य समस्याओं से तो बचा जा ही सकता है साथ ही इसकी मदद से यौन जीवन से गायब ऑर्गेज्म को भी वापस लाने में मदद मिल सकती है।
मास्टरबेशन से भी महिलाओं के ऑर्गेज्म पाने का संबंध होता है। यदि आपने बार-बार हस्तमैथुन द्वारा ऑर्गेज्म का आनंद लिया है, तो इसका असर आपकी पार्टनर के ऑर्गेज्म तक पहुंचने की संभावना को सीधे प्रभावित कर सकता है।
हस्तमैथुन के दौरान आप अपनी कल्पना की मदद से मानसिक अवरोधों को खत्म करते हुए ऑर्गेज्म का सुख पाने में सफल हो सकती हैं।
इस प्रकार आपको अपने शरीर के उन हिस्सों के बारे में भी पता चलता है जहां स्पर्श करने से आप उत्तेजित होती हैं। सेक्स के दौरान इन अनुभवों का बहुत लाभ मिलता है।
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हर कोई यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन को रोकने के लिए सेक्स के ठीक बाद पेशाब करता है, लेकिन इससे भी स्मार्ट उपाय यह है कि आप सेक्स के पहले भी पेशाब करें।
इसके पीछे का कारण बहुत सरल है। दरअसल, गॉल ब्लैडर भरे होने की वजह से आपका ध्यान सेक्स की बजाय पेशाब करने के लिए बन रहे दबाव पर रहता है। जिस वजह से आप भावनात्मक रूप से सेक्स का हिस्सा बन ही नहीं पाते और ऑर्गेज्म तक नहीं पहुंच पाते।
नए संशोधन की डॉ. प्रणाली पाटिल द्वारा समीक्षा
डिस्क्लेमर
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Current Version
16/06/2021
Aamir Khan द्वारा लिखित
के द्वारा मेडिकली रिव्यूड Dr. Pooja Bhardwaj
Updated by: Nikhil deore
के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
Dr. Pooja Bhardwaj