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ऑनलाइन शॉपिंग की लत ने इस साल भी नहीं छोड़ा पीछा, जानिए कैसे जुड़ी है ये मानसिक बीमारी से

ऑनलाइन शॉपिंग की लत ने इस साल भी नहीं छोड़ा पीछा, जानिए कैसे जुड़ी है ये मानसिक बीमारी से

ऑनलाइन शॉपिंग ने हम सब के जीवन को कितना आसान कर दिया है। खाने का सामान हो या फिर रोजमर्रा का सामान, ऑनलाइन शॉपिंग से सब कुछ बहुत आसान हो गया है। साल 2019 में कार्ड मनी के चलन के साथ ही ऑनलाइन शॉपिंग का भी बोलबाला रहा। साल 2019 में जितने भी फेस्टिवल आए, ऑनलाइन शॉपिंग करने वालों का उत्साह और भी बढ़ गया। होली, दिवाली, क्रिसमस या फिर न्यू ईयर, ऑनलाइन गिफ्ट खरीदने से लेकर घर के राशन तक, ऑनलाइन शॉपिंग की मदद से सब काम किया गया। अगर हम आपसे ये कहें कि ऑनलाइन शॉपिंग करना लत हो सकती है या फिर मानसिक बीमारी है, तो क्या इस बात को मानेंगे। हो सकता है कि आपको लगे कि ये मजाक है। ऐसा बिल्कुल नहीं है।

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ऑनलाइन शॉपिंग की लत

बाइंग शॉपिंग डिसऑर्डर (Buying shopping disorder) की पहचान पहले ही कर ली गई थी। इसके लक्षण हालिया साल में देखने को मिले हैं। यदि आपकी ऑनलाइन खरीददारी के बिना शॉपिंग पूरी नहीं होती है तो ये आदत नशे की ओर बढ़ रही हैं। ऑनलाइन शॉपिंग को लेकर रिचर्स की गई तो विशेषज्ञों ने दावा पेश किया कि इसे मानसिक स्वास्थ्य रूप में वर्गीकृत किया जाना चाहिए। कॉम्प्रिहेंसिव साइकियाट्री नामक पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन में 122 लोग को शामिल किया गया था। उन 122 लोगों को ऑनलाइन शॉपिंग की लत थी। उनमे से 34 प्रतिशत लोगों में ऑनलाइन शॉपिंग की लत के लक्षण भी थे। उन लोगों में डिप्रेशन और चिंता के लक्षण अधिक दिखाई दिए।

ऑनलाइन शॉपिंग की लत बन जाती है समस्या

शोध के अनुसार, बाइंग शॉपिंग डिसऑर्डर (बीएसडी) की विशेषता के अंदर व्यक्तियों को नया खरीदने की जिज्ञासा रहती है। साथ ही उन्हें इस बात से फर्क नहीं पड़ता है कि ऑनलाइन सामान में छूट मिल रही है या फिर नहीं। बीएसडी से पीड़ित लोग जितना खर्च कर सकते हैं उससे अधिक सामान खरीदते हैं। अधिक सामान खरीदना उन्हें खुशी देता है। सामान जरूरत का अक्सर नहीं होता है। ये केवल एक प्रकार के सेटिस्फेक्शन के लिए होता है।

हनोवर मेडिकल स्कूल के शोधकर्ताओं ने ऑनलाइन शॉपिंग डिसऑर्डर को लेकर कहा कि बीएसडी को एक अलग मेंटल इलनेस कंडीशन के रूप में पहचाना जाना चाहिए। अध्ययन में यह भी बताया गया है कि विकसित देशों में बाइंग शॉपिंग डिसऑर्डर( बीएसडी) लगभग पांच प्रतिशत युवाओं को प्रभावित करता है।

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हो जाते हैं फैमिली इश्यू

ऑनलाइन शॉपिंग की लत से न केवल पैसों की बर्बादी होती है, बल्कि फैमिली इश्यू होने के भी चांसेज रहते हैं। फैमिली में अक्सर ऑनलाइन शॉपिंग की लत के शिकार व्यक्तियों को पैसे की बर्बादी को लेकर ताने दिए जाते हैं। ऐसे में सेटिस्फेक्शन और फैमिली मैटर एक साथ सुलझ नहीं पाता है। भले ही इंसान को खरीददारी करके खुशी मिलती है, लेकिन फैमिलि मैटर के कारण वो परेशान हो सकता है। रिसर्च में ये बात सामने आई है कि जिन लोगों को ऑनलाइन शॉपिंग की लत रहती है वो जल्द ही डिप्रेशन में आ जाते हैं।

ऑनलाइन खरीददारी की लत से दिख सकते हैं ये लक्षण

  • ऑनलाइन खरीददारी से न केवल निराशा महसूस होती है, बल्कि आदतों पर नियत्रंण नहीं रहता है।
  • साथ ही ऑनलाइन खरीददारी के कारण घरवालों के कारण संघर्ष करना पड़ता है। घर वाले अक्सर ऐसी आदतों का विरोध करते हैं, लेकिन लती लोगों को इन बातों से फर्क नहीं पड़ता है। रोजमर्रा की इस तरह की बातें संघर्ष का कारण बन सकती हैं।
  • जिन लोगों को खरीददारी की आदत होती है, वो लोग जब खरीददारी नहीं कर पाते हैं तो उन्हें शर्मिंदगी महसूस होती है।
  • साथ ही ऑनलाइन खरीददारी की लत से ग्रसित लोगों को खरीदारी करते समय चिंता और उत्साह का अनुभव भी होता है।

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मिल सकते हैं ये संकेत

  • लोगों में दैनिक या साप्ताहिक आधार पर खरीददारी करने का जुनून होता है।
  • तनाव से निपटने के लिए भी लोग अक्सर खरीददारी करते हैं।
  • ऑनलाइन खरीददारी की लत इस कदर भी सवार हो सकती है कि बिना बैंक बैलेंस की परवाह किए बिना लोग खरीददारी करते हैं।
  • खरीदारी करने के बाद लोगों को तीव्र उत्साह या उत्तेजना महसूस होती है।
  • अनावश्यक चीजें खरीदने और फिर उन वस्तुओं को सजाकर रखने की आदत भी लोगों में पाई जाती है।
  • खरीदारी को बिना किसी रुकावट के जारी रखने के लिए ऐसे लोग चोरी करने या झूठ बोलना से भी पीछे नहीं हटते हैं।
  • ऐसे लोग खरीददाी पर पछतावा या पश्चाताप महसूस करते हैं, लेकिन उन्हें शॉपिंग करने में मजार आता है।
  • ऋण का भुगतान करने या धन का प्रबंधन करने में असमर्थता महसूस करते हैं, लेकिन फिर भी शॉपिंग जरूर करते हैं।
  • किसी भी प्रकार का प्रयास ऑनलाइन शॉपिंग की लत वाले लोगों के लिए विफल साबित होता है।

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क्या ऑनलाइन शॉपिंग की लत से बचने के लिए ट्रीटमेंट लिया जा सकता है?

ऑनलाइन खरीददारी की लत से बचने के लिए ट्रीटमेंट लिया जा सकता है। बिहेवियरल थेरिपी की हेल्प से या फिर पर्सन की काउंसलिंग की हेल्प से इस लत से छुटकारा मिल सकता है। जिस व्यक्ति को शॉपिंग की लत है, उसे ट्रिगर्स को आइडेंटिफाई करना बहुत जरूरी है। साथ ही इपल्स कंट्रोल करना भी बहुत जरूरी है। शॉपिंग में अधिक समय बिताना मेंटल हेल्थ इश्यू बनकर सामने आता है। ऐसे में मेडिकेशन की हेल्प भी ली जा सकती है। अगर ऐसे व्यक्ति को मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट से मिलवाया जाए तो समस्या का समाधान संभव हो सकता है। ट्रीटमेंट के दौरान कुछ साइकिल को अपनाया जाएगा। साथ ही सोचने का नया तरीका, एहसास और किसी भी काम के प्रति विभिन्न प्रकार का नजरिया उत्पन्न किया जाता है।

परिवार वालों को भी देना होगा साथ

ऑनलाइन खरीददारी भले ही आज के समय में बेहतर विकल्प बन गया हो, लेकिन अधिक खरीददारी से पैसे खर्च होने के साथ ही लत भी लग जाती है। शॉपिंग एडिक्शन के कारण पैसे का दुरुपयोग होता है। साथ ही चोरी जैसी प्रवृत्ति भी पैदा होती है। बाइंग डिसऑर्डर से बचने के लिए परिवार के सदस्यों का साथ बदलाव ला सकता है। इस लत से बचाने के लिए फैमिली के साथ ही फैंड्स भी हेल्प कर सकते हैं। ऐसे व्यक्तियों को दूसरे कामों में मन लगाना चाहिए। ऐसा करने से व्यक्ति अन्य कामों में बिजी रहेगा और उसे शॉपिंग करने के लिए खास समय नहीं होगा। साथ ही व्यक्ति का मन अन्य अच्छे कामों में भी लगेगा।

अगर आपको भी ऑनलाइन शॉपिंग की लत है तो इस बारे में डॉक्टर से संपर्क करें। शॉपिंग की लत का मामला हेल्थ से भी जुड़ा हो सकता है। बेहतर होगा कि इस बारे में फैमिली के साथ ही डॉक्टर से परामर्श करें। खुद का मन सही काम में लगाकर भी शॉपिंग की लत से बचा जा सकता है।हैलो हेल्थ ग्रुप किसी भी तरह की मेडिकल एडवाइस, इलाज और जांच की सलाह नहीं देता है।

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Bhawana Awasthi द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 31/12/2019 को
डॉ. हेमाक्षी जत्तानी के द्वारा मेडिकली रिव्यूड