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स्लीप ट्रैकर क्या है और यह कैसे काम करता है?

के द्वारा मेडिकली रिव्यूड Dr. Pooja Bhardwaj


Nidhi Sinha द्वारा लिखित · अपडेटेड 19/04/2021

    स्लीप ट्रैकर क्या है और यह कैसे काम करता है?

    बेहतर सेहत के लिए रोजाना सात से आठ घंटे की नींद लेनी जरूरी है। अगर नींद ठीक से पूरी नहीं होती, तो सेहत से जुड़ी कई सारी परेशानी शुरू हो जाती हैं। हालांकि, बदलते दौर और नई टेक्नोलॉजी की मदद से घर बैठे आसानी से सेहत का हाल जान लिया जाता है। इन्हीं नई टेक्नोलॉजी में से एक है स्लीप ट्रैकर जिसकी मदद से आप अपने शरीर का हाल जान सकते हैं।

    स्लीप ट्रैकर की मदद से नींद और इस दौरान शरीर में होने वाले मूवमेंट का अनुमान लगाना आसान हो जाता है। स्लीप ट्रैकर में मौजूद उपकरण डेटा का इस्तेमाल एक ‘एल्गोरिद्म’ में किया जाता है। 

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    जानिए स्लीप ट्रैकर से जुड़ी जरूरी बातें

    • बाजार में उपलब्ध ऐसे कई डिवाइस हैं, जिसे स्लीप ट्रैकर का नाम तो दिया गया है, लेकिन, ऐसे कई डिवाइस भी हैं, जिसकी जांच एक्सपर्ट्स द्वारा नहीं की गई है। 
    • सिर्फ एक रात की जांच को भी सही नहीं माना जा सकता है।
    • अगर स्लीप डिसऑर्डर की समस्या है और ऐसे में सिर्फ एक रात स्लीप ट्रैकर से जांच के रिजल्ट पर भरोसा नहीं किया जा सकता।
    • स्लीप ट्रैकर का चयन करने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें कि किस तरह की डिवाइस से जांच करना चाहिए।

    नींद नहीं आने की परेशानी के पीछे जो भी कारण हो, डॉक्टर से संपर्क करना सबसे बेहतर विकल्प हो सकता है।

    नींद से जुड़े एक्सपर्ट्स के अनुसार, स्लीप ट्रैकर डिवाइस पहनकर सोने का चलन तेजी से बढ़ता जा रहा है और इससे लोगों को अपने सोने का पैटर्न भी जानने और समझने का मौका मिल रहा है। स्लीप ट्रैकर की मदद से नींद से जुड़ी समस्याओं को समझने में आसानी भी हो रही है। ज्यादातर लोगों के लिए, स्लीप मॉनीटर का उपयोग करके नींद को ट्रैक किया जा सकता है और नींद आने में हो रही परेशानी को दूर करने में आसानी भी हो सकती है। 

    स्लीप ट्रैकर की मदद से नींद के स्वास्थ्य और नींद के मुद्दों के बारे में जागरूकता बढ़ाया जा सकता है। इस ट्रैकर की मदद से यह आसानी से पता चल जाता है कि नींद से आने में परेशानी होती है या नहीं।  

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    अच्छी और पूरी नींद के लिए करें यह उपाए

    1. सोने का समय निर्धारित करें और इसे नियमित रूप से अपनाएं। 
    2. पौष्टिक आहार का सेवन करें। 
    3. तनाव से बचने की कोशिश करें। 
    4. योगा और व्यायाम की आदत डालें। 
    5. रात के खाने के बाद और सोने से पहले चहलने (टहलने) की आदत डालें। 
    6. सिगरेट, तंबाकू और नशीले पदार्थों के सेवन से भी नींद नहीं आने की परेशानी शुरू हो सकती है।

    इसलिए, इनका सेवन न करें। हालांकि, यह अभी तक नहीं पता चल सका कि स्लीप ट्रैकर से पता लगाने से पहले भी यह समस्याएं थी या नहीं। नेशनल स्लीप फाउंडेशन के मुताबिक, अडल्ट्स को सात से नौ घंटे की नींद की जरूरत होती है। यह अवधि हर व्यक्ति के हिसाब से अलग हो सकती है।

    लेकिन, सोकर उठने के बाद फ्रेश फील होने का मतलब है कि अच्छी नींद आई। अगर सुबह जगाने पर शारीरिक परेशानी महसूस होती है, तो ऐसे में डॉक्टर से संपर्क करना समझदारी भरा कदम होगा।  इसके अलावा स्लीप ट्रैकर खरीदने या उसका इस्तेमाल करने से पहले आपको इन बातों को भी जान लेना चाहिएः

    स्लीप ट्रैकर के मुकाबले पॉलीसोमोग्राफी के परिणाम

    स्लीप ट्रैकर्स आमतौर रातभर सोने के समय को मापते हैं। अगर कोई स्लीप ट्रैकर के तौर पर हाथ में पहनने वाली घड़ी का इस्तेमाल करते हैं, तो यह दिल की धड़कन के हिसाब से स्लीप मूड को अपने आप ही कवर करता है। हालांकि, अगर आप किसी स्लीव ट्रैकर एप का इस्तेमाल करते हैं, तो आपको इसमें सोने से पहले सोने का समय और जागने पर जागने का समय नोट करना होता है। इसके अलावा किसी व्यक्ति के नींद की गुणवत्ता मापने के लिए एक नींद विशेषज्ञ हमेशा पॉलीसोमोग्राफी की सलाह देते हैं। इस उपकरण के जरिए विशेषज्ञ आसानी से व्यक्ति के नींद की गुणवत्ता को माप सकते हैं। साथ ही, इसके गणना अन्य विधियों के मुकाबले काफी भरोसेमंद भी होती है।

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    पॉलीसोमोग्राफी के दौरान क्या होता है?

    पॉलीसोमोग्राफी की सटीक नतीजे पाने के लिए नींद विशेषज्ञ आमतौर पर एक या दो रातों तक व्यक्ति के नींद को ट्रैक करते हैं। इस दौरान वे आपके नींद के चरणों और चक्रों को मापने वाले विभिन्न उपकरणों का इस्तेमाल करते हैं। इसके अलावा आपके सोने के दौरान, विशेषज्ञ आपकी हरकतों को भी नोटिस करते हैं। सोते समय आपके शरीर में किस तरह ही हलचलें होती है, आप कितनी बार उठते हैं या नींद में किस तरह की हरकत करते हैं इन सब बातों को विशेषज्ञ नोट करते हैं। वहीं, नींद विशेषज्ञ नींद की गुणवत्ता को जांचने के लिए व्यक्ति के चेहरे की अलग-अलग नसों को पॉलीसोमोग्राफी के उपकरण से जोड़ते हैं। जिससे वे निम्न जानकारी एकत्रित करते हैं। जिसमें शामिल हैं:

    • मस्तिष्क तरंगें
    • सांस लेने की गति
    • हृदय गति
    • शरीर की हरकत
    • पैर की गति
    • आंखो का आंदोलन
    • रक्त में ऑक्सीजन का स्तर
    • रात में आप जिन अवस्थाओं में सोते हैं

    इस जानकारी का उपयोग नींद विशेषज्ञों द्वारा व्यक्ति के नींद का आकलन करने के लिए किया जाता है। इसके आधार पर नींद से जुड़े विकारों का निदान करने और उपचार करने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा किसी एक एप ट्रैकर के मुकाबले पॉलीसोमोग्राफी के नतीजे एकदम सटीक होते हैं।

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    जब आप सो रहे होते हैं तो स्लीप ट्रैकर्स को कैसे पता चलता है?

    स्लीप ट्रैकर्स आपके शरीर की गति को मापने के लिए एक्टिग्राफी या एक्सेलेरोमेट्री का उपयोग करते हैं, यह दर्शाता है कि आप सो रहे हैं या जाग रहे हैं। हालांकि, इसके परिणाम अलग-अलग स्लीप ट्रैकर्स में अलग-अलग हो सकते हैं। मार्केट में ऐसे कई स्लीप ट्रैकर्स हैं, जो किसी विशेषज्ञ की देखरेख में बनाएं गए हैं, वहीं कुछ ऐसे भी हैं जो बिना किसी चिकित्सक जांच के ही मार्केट में जारी कर दिए गए हैं। जिनके गलत परिणाम भी आ सकते हैं। हालांकि, जब आप सो रहे होते हैं, तो स्लीप ट्रैकर्स मुख्य मार्ग के जरिए आपके शरीर की गति के माध्यम से यह पता कर लेता है कि आप क्या कर रहे हैं। आमतौर पर सोते समय हमारे दिल की धड़कन धीमी हो जाती है और शरीर का तपमान भी धीरे-धीरे कम होने लगता है।

    हैलो स्वास्थ्य किसी भी तरह की मेडिकल सलाह नहीं दे रहा है। अगर आपको किसी भी तरह की समस्या हो रही है, तो आप अपने डॉक्टर से जरूर पूछ लें।

    डिस्क्लेमर

    हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

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