साइनस को दूर करने वाले सूर्यभेदन प्राणायाम को कैसे किया जाता है, क्या हैं इसके लाभ, जानिए

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अपडेट डेट सितम्बर 4, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
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सांस लेने के लिए मनुष्य के पास दो नासिकाएं होती हैं। योगा में, उन्हें नाड़ी कहा जाता है, जिसमें दाहिनी नासिका को सूर्य नाड़ी कहा जाता है, और बाईं नासिका चंद्र नाड़ी के रूप में जाना जाता है। दाहिनी नासिका को सूर्य नाड़ी से जोड़ा जाता है और इससे ही जुड़ा है सूर्यभेदन प्राणायाम। सूर्यभेदन प्राणायाम एक सरल और प्रभावी श्वास तकनीक है। इसके कई लाभ हैं। जानिए, इसके बारे में विस्तार से। 

सूर्यभेदन प्राणायाम क्या है? 

सूर्यभेदन प्राणायाम दो शब्दों से मिलकर बना है एक सूर्य और दूसरा भेदना  जिसमे सूर्य का अर्थ है सूरज और भेदना यानी किसी चीज से छेदना या तोड़ना। लेकिन, इस प्राणायाम में सूर्य को भेदने या तोड़ने की बात नहीं हो रही है। इस प्राणायाम का नाम शरीर पर इससे पड़ने वाले प्रभाव से लिया गया है। सूर्यभेदन प्राणायाम को करते हुए केवल एक नथुने का उपयोग किया जाता है। इस क्रिया को नाक के दाएं छिद्र से किया जाता है। नाक के दाएं छिद्र को सूर्य स्वर और बाएं को चंद्र स्वर कहा जाता है। दाहिने छिद्र से सांस अंदर लेने की प्रक्रिया में, ऊर्जा पिंगला नाड़ी यानी सूर्य नाड़ी से होकर बहती है। वहीं, बाएं छिद्र से सांस छोड़ने से ऊर्जा चंद्र नाड़ी से बहती है।

सूर्यभेदन प्राणायाम को करना जड़ चक्र को उत्तेजित करता है, शरीर की जीवन शक्ति को बढ़ाता है और साथ ही चिंता, अवसाद और मानसिक बीमारी से राहत देता है। जानिए इस प्राणायाम को करने के तरीके और फायदों के बारे में।

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सूर्यभेदन प्राणायाम को कैसे करें

सूर्यभेदन प्राणायाम को करने का तरीका इस प्रकार है:

  • सूर्यभेदन प्राणायाम को करने के लिए सबसे पहले किसी शांत जगह का चुनाव करें।
  • इस जगह पर दरी या मैट बिछा लें। 
  • मैट पर पद्मासन या सिद्धासन या क्रॉस लेग्ड पोज में बैठ जाएं।
  • अपने दाहिने नथुने के माध्यम से धीरे-धीरे और गहराई से सांस अंदर लें। इसके साथ ही अपनी बायीं नासिका को अपनी अनामिका और छोटी उंगली से बंद करें।
  • आगे, अपने दाहिने हाथ के अंगूठे के साथ अपने दाहिने नथुने को बंद करें। और फिर अपने दाहिने नथुने को बंद रखते हुए अपने बाएं नथुने के माध्यम से सांस बाहर छोड़ें।
  • इसे चार से पांच बार दोहराएं। 
  • जितनी आपकी क्षमता है, उसके अनुसार भी आप इस प्राणायाम को कर सकते हैं।

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सूर्यभेदन प्राणायाम के फायदे

योगा के अन्य आसनों और मुद्रा की तरह इस आसन को करने के कई लाभ हैं, जानिए इसके फायदों के बारे में:

पाचन क्रिया बढ़ाए

सूर्यभेदन प्राणायाम को करने से आपकी पाचन शक्ति बढ़ेगी। जिससे आपका पेट सही रहेगा और आपको पेट संबंधी समस्याओं से छुटकारा मिल सकता है। पेट की गैस को दूर करने में यह तकनीक प्रभावी है।

साइनस के लिए लाभदायक 

हठ योग के अनुसार सूर्यभेदन प्राणायाम साइनस को साफ करता है। सांस संबंधी अन्य रोगों को दूर करने में भी यह योग सहायक है। यह आसन वात के विकारों और आंतों के कीड़ों को नष्ट करता है।

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खून को साफ करने में फायदेमंद

इस तकनीक को करने से खून साफ होता है और लिवर को काम करने में आसानी होती है। इस आसन के अभ्यास से सांस से संबंधित ज्यादातर समस्याओं का हल किया जा सकता हैं।

निम्न रक्तचाप

सूर्यभेदन प्राणायाम शरीर की संवेदना तंत्रिका प्रणाली को सक्रिय करता है, इसलिए यह निम्न रक्तचाप से पीड़ित व्यक्तियों के लिए लाभदायक है।

अवसाद और तनाव को करे दूर

तनाव, अवसाद आदि आजकल की मुख्य समस्याएं हैं। सूर्यभेदन प्राणायाम सुस्ती और अवसाद को कम करने में मदद करता है। इसे करने से चिंता और अन्य मानसिक बीमारियों से भी छुटकारा मिलता है।

अन्य लाभ 

  • सूर्यभेदन प्राणायाम महिलाओं में बांझपन को कम करने में प्रभावी है
  • इस तकनीक को करने से शरीर का तापमान बढ़ता है और कफ असंतुलन कम होता है। यह आसन तकनीक मोटापा कम करने में प्रभावी होता है। यानी, यह वजन कम करने में मददगार है।
  • यह तकनीक वायु से होने वाले विकार दूर कर वात या गठिया को ठीक करने में मददगार होता है
  • अगर आप सिर दर्द से परेशान हैं तो आपको इस प्राणायाम अभ्यास को करना चाहिए। इससे आपको राहत मिलेगी।
  • सूर्यभेदन प्राणायाम प्राणिक ऊर्जा को सक्रिय करता है और शरीर को शक्ति प्रदान करता है।
  • सूर्यभेदन प्राणायाम का प्रयोग मानसिक और भावनात्मक ऊर्जा की उत्तेजना के लिए होता है। इससे शरीर की गर्मी बढ़ती है।

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सूर्यभेदन प्राणायाम के सर्वोत्तम परिणामों के लिए टिप्स 

  • इस योगासन को करते हुए जितनी देर तक हो सके सांस को रोक कर रखें। अपनी क्षमता से अधिक इसे न करें।
  • दिन के किसी भी समय इस योगासन को किया जा सकता है। लेकिन ध्यान रहे, भोजन करने के दो या तीन घंटे बाद ही इसे करें।
  • इस सूर्यभेदन प्राणायाम को करते हुए केवल मूल चक्र पर ध्यान केंद्रित करें। अपने आसपास के शोर या मन में आ रहे फालतू विचारों आदि पर ध्यान न दें।
  • आप इसे सुबह या शाम या दोनों समय कर सकते हैं। अगर आपके पास सुबह या शाम भी समय नहीं है, तो आप इसे दिन के किसी भी समय कर सकते हैं।
  • सूर्यभेदन प्राणायाम में सांस लेना और सांस छोड़ना 1: 2 के अनुपात में होना चाहिए। अगर आपको थोड़ी भी असुविधा महसूस होती है तो आप सांस लेने के अनुपात को कम कर सकते हैं।

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किन परिस्थितियों में इस योगासन को न करें 

किन्हीं परिस्थितियों में इस योगासन को करना आपके लिए हानिकारक हो सकता है। जानिए, किन परिस्थितियों में इसे नहीं करना चाहिए।

  • हृदय रोग, उच्च रक्तचाप या मिर्गी से पीड़ित लोगों को इस प्राणायाम से बचना चाहिए।
  • जिन लोगों की ब्रेन सर्जरी, हार्ट सर्जरी या पेट की सर्जरी हुई है, उन्हें इस प्राणायाम को करने से पहले मेडिकल एक्सपर्ट या कंसल्टेंट से सलाह लेनी चाहिए।
  • इस प्राणायाम को करने से शरीर की गर्मी बढ़ती है, इसलिए बुखार की स्थिति में इसे न करने की सलाह दी जाती है।
  • अगर आप दस्त से पीड़ित हैं तो भी इस आसन को न करें।
  • जिन लोगों को पित्त या एसिडिटी की समस्या होती है ,तो उन्हें भी इस आसन को करने से बचना चाहिए।
  • हृदय संबंधी शिकायतों से पीड़ित लोगों को भी इसे नहीं करना चाहिए।
  • गर्भावस्था में इसे करने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह आवश्यक लें और साथ ही किसी योग एक्सपर्ट के मार्गदर्शन में ही इसे करें

योग से दर्द नियंत्रण करने के लिए देखिए यह वीडियो:

योग की किसी मुद्रा या आसन का अभ्यास स्वयं से नहीं करना चाहिए। ऐसा करना आपके लिए हानिकारक साबित हो सकता है। किसी भी आसन या मुद्रा को करने से पहले इसे किसी योग विशेषज्ञ से सीखें। इसके साथ ही डॉक्टर की सलाह लेना भी अनिवार्य है।

ऊपर दी गई जानकारी चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं है। इसलिए किसी भी योग को करने से पहले डॉक्टर से परामर्श जरूर करें। हैलो स्वास्थ्य किसी भी प्रकार का चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार प्रदान नहीं करता है।

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