स्टडी: ब्रेन स्कैन (brain scan) में नजर आ सकते हैं डिप्रेशन के लक्षण

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Update Date जनवरी 31, 2020
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विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार “डिप्रेशन यानी दुनियाभर में फैली सबसे सामान्य बीमारी है। विश्व भर में लगभग 350 मिलियन लोग अवसादग्रस्त हैं।” दरअसल, अवसाद एक मानसिक स्वास्थ्य विकार है। डिप्रेशन (depression) के इलाज के लिए दी जाने वाली साइकोथेरपीजो और एंटी-डिप्रेसेंट्स दवाइयों की बेहतर प्रतिक्रिया के लिए ब्रेन इमेजिंग तकनीक का उपयोग किया जाने लगा है। शोधकर्ताओं का कहना है कि ब्रेन स्कैन डिप्रेशन को ठीक करने में मदद कर सकता है, जिससे बेहतर निदान और उपचार हो सकता है। आइए जानते हैं कि ब्रेन स्कैन क्या है और ब्रेन स्कैन डिप्रेशन से लड़ने में कैसे मदद करता है। 

ब्रेन स्कैन क्या है? (What is Brain Scan)

ब्रेन स्कैन से डिप्रेशन का निदान किया जा सकता है जिससे डॉक्टरों को उपचार करने में मदद मिल सकती है। जिस तरह एक इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (ईसीजी) हार्ट के फंक्शन को दिखाता है, उसी प्रकार फंक्शनल एमआरआई मस्तिष्क की गतिविधियों को दर्शाता है। ब्रेन स्कैन का उपयोग मस्तिष्क की बीमारियों का सही तरीके से इलाज करने के लिए किया जाता है। इसके अलावा सिर के एमआरआई के जरिए मरीज की सही बीमारी की पुष्टि की जाती है। MRI का पूरा नाम मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग (Magnetic resonance imaging ) है। एमआरआई कई तरह की बीमारियों के निदान के लिए सबसे सुरक्षित और सटीक इमेजिंग परीक्षणों में से एक है।

ब्रेन स्कैन के लिए कब कहा जाता है?

डॉक्टर स्ट्रोक, ट्यूमर या अन्य समस्याओं की पहचान करने के लिए ब्रेन स्कैन का उपयोग कर सकते हैं, जो डिमेंशिया का कारण बन सकते हैं। ब्रेन स्कैन के सबसे कॉमन प्रकार हैं कम्प्यूटेड टोमोग्राफिक (CT) स्कैन्स और मेग्नेंटिक रेजोनेंस इमेजिंग (MRI)। डॉक्टर ब्रैन स्कैन के लिए तब कहते हैं जब वे आपके अंदर डिमेंशिया की जांच करना चाहते हैं। ब्रैन स्कैन भले ही वह (MRI) हो या (CT) स्कैन दोनों में एक्स रे के द्वारा ब्रेन स्ट्रक्चर की जांच की जाती है।

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एमआरआई स्कैन का इस्तेमाल किसलिए किया जाता है?

किसी भी तरह के मानसिक आघात या सिर में चोट लगने पर एमआरआई कराने की आवश्यकता पड़ती है। इसकी सहायता से दिमाग में आई सूजन, ब्लीडिंग, मस्तिष्क की धमनी में समस्या (brain aneurysms) आदि असामान्यताओं का निदान किया जाता है। साथ ही चोट लगने के बाद मस्तिष्क की संरचना का पता लगाने और स्पाइनल कॉर्ड में हुए किसी तरह के विकार के निदान के लिए न्यूरोसर्जन एमआरआई स्कैन करते हैं। ब्रैन स्कैन की तरह ही एमआरआई स्कैन भी बीमारी का पता लगाने में सहायक है। 

एमआरआई टेस्ट कराने से पहले ये बातें भी जान लें

एमआरआई टेस्ट के पहले आपको कुछ सवालों के सही-सही जवाब देने होते हैं। इन प्रश्नों के जवाबों के माध्यम से डॉक्टर आपके बारे में सारी जानकारी प्राप्त कर लेते हैं और आपकी सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाते हैं। इन सवालों के माध्यम से रेडियोलॉजिस्ट ये भी जान लेते हैं कि पहले आपकी किसी तरह की सर्जरी तो नहीं हुई या कोई डिवाइस आपके शरीर में लगाया तो नहीं गया। क्योंकि एमआरआई के दौरान ऐसी स्थिति में समस्या पैदा हो सकती है।

एमआरआई स्कैनर तस्वीरें लेते वक्त बहुत आवाज करता है और यह बेहद सामान्य है। हो सकता है डॉक्टर इस दौरान आपको किसी तरह के हैडफोन लगाने के लिए दे सकता है या आप गाने भी सुन सकते हैं।

अगर इस टेस्ट में डाई या कॉन्ट्रास्ट की मदद होती है तो इसे इंजेकशन के माध्यम से आपकी नसों में डाला जा सकता है। इससे ठंडक जैसा अहसास होता है। डाई के माध्यम से शरीर के कुछ अंग ठीक तरह से तस्वीर में नजर आते हैं।

याद रखें कि डॉक्टर ने आपको एमआरआई की सलाह इसलिए दी है, जिससे शरीर के बारे में कुछ जरूरी जानकारियां जुटाई जा सकें। अगर आपको इसकी प्रक्रिया को लेकर कोई और सवाल हैं, तो डॉक्टर से इस बारे में जरूर पूछें। ब्रेन स्कैन के पहले क्या-क्या सावधानियां बरतनी चाहिए ये भी पता कर लें।

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क्या कहती है रिसर्च ब्रेन स्कैन के बारे में?

बायोलॉजिकल साइकेट्री: कॉग्निटिव न्यूरोसाइंस एंड न्यूरोइमेजिंग स्टडी के अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया कि फंक्शनल एमआरआई (एफएमआरआई) द्वारा किसी व्यक्ति के मस्तिष्क में विशिष्ट न्यूरॉन्स की पहचान करने के लिए किया जाता है, जो डिप्रेशन की वजह से हुए बायपोलर डिसऑर्डर के लिए जिम्मेदार होता है। 

यूनिवर्सिटी ऑफ सिडनी के एसोसिएट प्रोफेसर और लेखक मयुरेश एस. कोरगांवकर का कहना है कि “मानसिक बीमारी, विशेष रूप से बायपोलर विकार और डिप्रेशन का निदान करना मुश्किल हो सकता है क्योंकि कई स्थितियों में समान लक्षण होते हैं। इन स्थितियों में गलत निदान खतरनाक हो सकता है, जिससे रोगी की स्थिति और खराब हो सकती है।”

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ऑस्ट्रेलिया की यूनिवर्सिटी ऑफ सिडनी में वेस्टमेड इंस्टीट्यूट फॉर मेडिकल रिसर्च की एक टीम के नेतृत्व में शोधकर्ताओं ने 81 मरीजों पर एफएमआरआई (fMRI) के जरिए पता लगाया कि मरीजों में क्रोध, भय, उदासी, घृणा और खुशी के समय में अमिग्डाला (amygdala) की प्रतिक्रिया कैसी थी। जिनमें से 31 रोगी बायपोलर विकार से और 25 मेजर डिप्रेसिव डिसऑर्डर से ग्रस्त पाए गए। बाकी के 25 स्वस्थ पाए गए।

कुल मिलाकर, बायपोलर मरीजों की तुलना 25 यूनिपोलर मेजर डिप्रेसिव डिसऑर्डर के मरीजों से करने पर पाया गया कि बायपोलर पेशेंट्स में अमिग्डाला (amygdala) कम सक्रिय था। दोनों के बीच अंतर करने में ब्रेन स्कैन की यह टेक्निक 80 प्रतिशत सटीक थी।

इन निष्कर्षों से पता चलता है कि डिप्रेशन जैसी मनोदशा से जुड़ी बीमारियों के इलाज में नई उपचार पद्धतियां विकसित करने में भविष्य में मदद मिल सकती है। ब्रेन स्कैन पर यह रिसर्च अवसाद के निदान और उपचार के लिए सहायक साबित हुई है। ब्रेन स्क्रेन के बारे में अधिक जानकारी के लिए आप डॉक्टर की सलाह ले सकते हैं। ब्रेन स्कैन के बारे में जानने के बाद जानते हैं कि डिप्रेशन के संकेत क्या है। इसकी पहचान कैसे कर सकते हैं।

डिप्रेशन के संकेत

जिस शख्स को डिप्रेशन होता है, वह अक्सर इसे पहचान नहीं पाता है। अगर पहचान भी लेता है तो स्वीकार नहीं कर पाता है। ऐसे में मरीज के करीबियों की जिम्मेदारी है कि वे डिप्रेशन के लक्षण देखकर बीमारी को पहचानकर जल्द से जल्द उसे ट्रीटमेंट दें-

व्यवहारिक (Behavior)

  • खूब सोना या बिल्कुल न सोना
  • किसी से मिलने से बचना
  • निगेटिव बातें करना
  • खुशी के मौकों पर भी दुखी रहना
  • चिढ़कर या झल्लाकर जवाब देना
  • लोगों से अलग-थलग रहना

सायकोलॉजिकल (Psychological)

  • उदास रहना
  • खुद को कोसते रहना
  • निराशाजनक होना
  • चिड़चिड़ापन
  • आत्मविश्वास में कमी
  • दुविधा में पड़े रहना

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फिजिकल (Physical)

हम उम्मीद करते हैं कि डिप्रेशन के निदान में ब्रेन स्कैन कैसे सहायक है इस पर लिखा गया यह आर्टिकल आपके लिए उपयोगी साबित होगा। ब्रेन स्कैन के बारे में अधिक जानकारी चाहते हैं तो डॉक्टर से संपर्क करें। हैलो हेल्थ ग्रुप किसी प्रकार की चिकित्सा सलाह, उपचार और निदान प्रदान नहीं करता।

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