स्टडी: ब्रेन स्कैन (brain scan) में नजर आ सकते हैं डिप्रेशन के लक्षण

By Medically reviewed by Dr. Hemakshi J

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार “डिप्रेशन यानी दुनियाभर में फैली सबसे सामान्य बीमारी है। विश्व भर में लगभग 350 मिलियन लोग अवसादग्रस्त हैं।” दरअसल, अवसाद एक मानसिक स्वास्थ्य विकार है। डिप्रेशन (depression) के इलाज के लिए दी जाने वाली साइकोथेरपीजो और एंटी-डिप्रेसेंट्स दवाइयों की बेहतर प्रतिक्रिया के लिए ब्रेन इमेजिंग तकनीक का उपयोग किया जाने लगा है। शोधकर्ताओं का कहना है कि ब्रेन स्कैन डिप्रेशन को ठीक करने में मदद कर सकता है, जिससे बेहतर निदान और उपचार हो सकता है। 

ब्रेन स्कैन क्या है? (What is Brain Scan)

ब्रेन स्कैन से डिप्रेशन का निदान किया जा सकता है जिससे डॉक्टरों को उपचार करने में मदद मिल सकती है। जिस तरह एक इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (ईसीजी) हार्ट के फंक्शन को दिखाता है, उसी प्रकार फंक्शनल एमआरआई मस्तिष्क की गतिविधि को दर्शाता है। ब्रेन स्कैन का उपयोग मस्तिष्क की बीमारियों का सही तरीके से इलाज करने के लिए किया जाता है। इसके अलावा सिर के एमआरआई के जरिए मरीज की सही बीमारी की पुष्टि की जाती है। MRI का पूरा नाम मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग (Magnetic resonance imaging ) है। एमआरआई कई तरह की बीमारियों के निदान के लिए सबसे सुरक्षित और सटीक इमेजिंग परीक्षणों में से एक है।

यह भी पढ़ें- कैसे स्ट्रेस लेना बन सकता है इनफर्टिलिटी की वजह?

एमआरआई स्कैन का इस्तेमाल किस लिए किया जाता है?

किसी भी तरह के मानसिक आघात या सिर में चोट लगने पर एमआरआई कराने की आवश्यकता पड़ती है। इसकी सहायता से दिमाग में आई सूजन, ब्लीडिंग, मस्तिष्क की धमनी में समस्या (brain aneurysms) आदि असामान्यताओं का निदान किया जाता है। साथ ही चोट लगने के बाद मस्तिष्क की संरचना का पता लगाने और स्पाइनल कॉर्ड में हुए किसी तरह के विकार के निदान के लिए न्यूरोसर्जन एमआरआई स्कैन करते हैं। 

यह भी पढ़ें- डिप्रेशन (Depression) होने पर दिखाई ​देते हैं ये 7 लक्षण

क्या कहती है रिसर्च?

बायोलॉजिकल साइकेट्री: कॉग्निटिव न्यूरोसाइंस एंड न्यूरोइमेजिंग स्टडी के अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया कि फंक्शनल एमआरआई (एफएमआरआई) द्वारा किसी व्यक्ति के मस्तिष्क में विशिष्ट न्यूरॉन्स की पहचान करने के लिए किया जाता है, जो डिप्रेशन की वजह से हुए बायपोलर डिसऑर्डर के लिए जिम्मेदार होता है। 

यूनिवर्सिटी ऑफ सिडनी के एसोसिएट प्रोफेसर और लेखक मयुरेश एस. कोरगांवकर का कहना है कि “मानसिक बीमारी, विशेष रूप से बायपोलर विकार और डिप्रेशन का निदान करना मुश्किल हो सकता है क्योंकि कई स्थितियों में समान लक्षण होते हैं। इन स्थितियों में गलत निदान खतरनाक हो सकता है, जिससे रोगी की स्थिति और खराब हो सकती है।”

यह भी पढ़ें- बिना दवा के कुछ इस तरह करें डिप्रेशन का इलाज

ऑस्ट्रेलिया की यूनिवर्सिटी ऑफ सिडनी में वेस्टमेड इंस्टीट्यूट फॉर मेडिकल रिसर्च की एक टीम के नेतृत्व में शोधकर्ताओं ने 81 मरीजों पर एफएमआरआई (fMRI) के जरिए पता लगाया कि मरीजों में क्रोध, भय, उदासी, घृणा और खुशी के समय में अमिग्डाला (amygdala) की प्रतिक्रिया कैसी थी। जिनमें से 31 रोगी बायपोलर विकार से और 25 मेजर डिप्रेसिव डिसऑर्डर से ग्रस्त पाए गए। बाकी के 25 स्वस्थ पाए गए।

कुल मिलाकर, बायपोलर मरीजों की तुलना 25 यूनिपोलर मेजर डिप्रेसिव डिसऑर्डर के मरीजों से करने पर पाया गया कि बायपोलर पेशेंट्स में अमिग्डाला (amygdala) कम सक्रिय था। दोनों के बीच अंतर करने में ब्रेन स्कैन की यह टेक्निक 80 प्रतिशत सटीक थी।

इन निष्कर्षों से पता चलता है कि डिप्रेशन जैसी मनोदशा से जुड़ी बीमारियों के इलाज में नई उपचार पद्धतियां विकसित करने में भविष्य में मदद मिल सकती है। ब्रेन स्कैन पर यह रिसर्च अवसाद के निदान और उपचार के लिए सहायक साबित हुई है।

और पढ़ें-

बेबी ब्लूज और पोस्टपार्टम डिप्रेशन का कारण और इलाज

बच्चे की डिलिवरी पेरेंट्स के लिए खुशियों के साथ ला सकती है डिप्रेशन भी

डिप्रेशन रोगी को कैसे डेट करें?

अभी शेयर करें

रिव्यू की तारीख नवम्बर 7, 2019 | आखिरी बार संशोधित किया गया नवम्बर 7, 2019

शायद आपको यह भी अच्छा लगे