बार-बार आत्महत्या के ख्याल आते हैं? जानिए इससे बचने के तरीके

By Medically reviewed by Dr. Hemakshi J

एनसीबीआई की रिसर्च के अनुसार, भारत में हर साल तकरीबन 17 हजार लोग आत्महत्या करते हैं। कभी कुछ लोग अपनी निजी समस्याओं के चलते इतने परेशान हो जाते हैं कि उनके मन में आत्महत्या तक करने के ख्याल आने लगते हैं। आत्महत्या के ख्याल आने पर जरूरी है कि आप खुद को संभालें और इस नकारात्मक विचार से खुद को दूर करने की भरपूर कोशिश करें।

आत्महत्या के ख्याल आना दोष नहीं है और इसका मतलब यह भी नहीं है कि आप पागल हैं, या कमजोर हैं। इसका केवल यह अर्थ है कि आप ज्यादा दर्द में हैं। हो सकता है आपको लग रहा हो कि ये दर्द आपके साथ हमेशा रहेगा लेकिन, समय और समर्थन के साथ, आप अपनी समस्याओं को दूर कर सकते हैं और दर्द और आत्महत्या की भावनाएं से खुद को पार ले जाएंगे।

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आत्महत्या के विचार आने पर क्या करना चाहिए?

चाहें आप कितना भी दर्द महसूस कर रहे हों, आप अकेले नहीं हैं। दर्द का इलाज किया जा सकता है और आशा को एक नई दिशा दी जा सकती है। कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपकी स्थिति क्या है। दुनिया में ऐसे लोग हैं जिन्हें आपकी जरूरत है, ऐसी जगहें जहां आप अच्छा महसूस कर सकते हैं। आपके साथ जरूर कुछ ऐसे यादगार अनुभव होंगे, जो आपको याद दिला सकते हैं कि जीवन कितना अच्छा है। मौत का सामना करने के लिए असली हिम्मत चाहिए। आप अपनी इसी हिम्मत और साहस का उपयोग जीवन की कठनाइयों का सामना करने के लिए कीजिए। अवसाद पर काबू पाने और अपने कौशल को जानने के लिए कीजिए।

हमेशा याद रखिए

  • भावनाएं निश्चित नहीं हैं, वे लगातार बदल रही हैं। आप आज जैसा महसूस कर रहे हैं, वैसा कल महसूस नहीं किया था कल या अगले सप्ताह आपको कुछ और महसूस हो रहा होगा।
  • आपकी अनुपस्थिति मित्रों और प्रियजनों के जीवन में दुख और पीड़ा पैदा करती है।
  • कई चीजें हैं, जो आप अभी भी अपने जीवन में पूरा कर सकते हैं।
  • जीवन में ढेर सारी जगहें, अनुभव हैं, जो आपको खुश करने की क्षमता रखते हैं। आपको इन चीजों से खुद को जोड़े रखना होगा।

मुझे आत्महत्या के विचार क्यों आ रहे हैं?

कई तरह के भावनात्मक दर्द आत्महत्या के विचारों को जन्म दे सकते हैं। हर व्यक्ति के लिए आत्महत्या के विचार आने के पीछे अलग-अलग कारण हो सकते हैं। इनसे निपटने की क्षमता हर व्यक्ति में अलग-अलग होती है। बात की जाए युवाओं की, तो किसी को रिलेशनशिप टूटने के चलते, जॉब की परेशानियों के चलते या अन्य किसी निजी कारणों की वजह से सुसाइड के विचार आने लगते हैं। इसके अलावा, हेल्थ या पैसों की समस्या के चलते भी सुसाइड कर लेते हैं।

आत्महत्या क्यों एकमात्र विकल्प की तरह लग सकता है?

अभी जो गहन भावनात्मक पीड़ा आप अनुभव कर रहे हैं, वह आपकी सोच को विकृत कर सकती है। इसलिए, समस्याओं के संभावित समाधान को समझ पाना कठिन हो जाता है। चिकित्सक, परामर्शदाता, मित्र या प्रियजन आपकी समस्या का समाधान करने में मदद कर सकते हैं। उन्हें मदद करने का मौका दें।

इस बारे में हैलो स्वास्थ्य ने डॉक्टर श्रुति श्रीधर से बात की। उन्होंने इस बारे में बताया कि जब किसी व्यक्ति के जीवन में सभी समस्याएं एक साथ आती हैं, तो उन्हें लगता है कि इन समस्या से वो कभी बाहर नहीं निकल पाएंगे। उन्हें इन समस्याओं से निकलने की कोई उम्मीद नहीं दिखती, जिसके चलते लोग इन समस्याओं से भागने लगते हैं और उन्हें इनका एकमात्र विकल्प सुसाइड लगता है।

सुसाइड के विचार हमेशा अस्थायी होते हैं

ऐसा लग सकता है कि आपका दर्द और दुख कभी खत्म नहीं होगा लेकिन, कोई भी संकट आमतौर पर अस्थायी होते हैं। समाधान अक्सर पाए जाते हैं, भावनाएं बदलती हैं और सकारात्मक घटनाएं घटती हैं। आत्महत्या किसी बात का स्थायी समाधान हो ही नहीं सकता इसलिए, चीजों को बदलने के लिए और दर्द कम होने के लिए खुद को पूरा समय दें।

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आत्महत्या का ख्याल आने पर इन बातों का रखें ध्यान

कुछ भी नहीं करने का वादा करें

भले ही आप अभी बहुत दर्द में हैं लेकिन, गलत विचारों और कुछ भी गलत करने से खुद को रोककर रखें। अपने आप से एक वादा करें कि मैं 24 घंटे इंतजार करूंगा और उस दौरान कुछ भी खुद के साथ गलत नहीं करूंगा।

दवाओं और शराब से बचें

अगर आपने ड्रग्स या एल्कोहॉल लिया है, तो आत्महत्या के विचार और भी मजबूत हो सकते हैं। जब आप निराशा महसूस करते हैं या आत्महत्या के बारे में सोच रहे हों, तो बिना पर्चे वाली दवाओं या एल्कोहॉल का उपयोग नहीं करना चाहिए।

अपने घर को सुरक्षित बनाएं

उन चीजों को हटा दें, जिनका उपयोग आप खुद को चोट पहुंचाने के लिए कर सकते हैं जैसे कि गोलियां, चाकू, छुरा आदि। अगर आप ऐसा करने में असमर्थ हैं, तो ऐसी जगह पर जाएं, जहां आप सुरक्षित महसूस कर सकें। यदि आप किसी दवा का ओवर डोज ले सकते हैं, तो उसे किसी साथी को देने को कहें, जो आपको जरूरत के समय उसकी सही मात्रा दे।

जब भी आत्महत्या का विचार आएं, तो किसी अपने से बात करें। किसी बेहतर माहौल में जाएं और लोगों की बात सुनें और समझें। कभी-कभी कुछ बोल देना और सुन लेने से ही दिल का बहुत भारी बोझ हल्का हो जाता है। खुद के लिए मजबूती के साथ खड़े रहें। ध्यान रहे कि कोई भी समस्या या दर्द आपके जीवन से बड़ा नहीं हो सकता।

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रिव्यू की तारीख सितम्बर 8, 2019 | आखिरी बार संशोधित किया गया अक्टूबर 28, 2019

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