स्किन लाइटनिंग क्रीम क्या कोमा के लिए जिम्मेदार हो सकती है?

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Update Date दिसम्बर 26, 2019
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वो अपने 12 साल के दोस्त के साथ क्रीम खरीदने गई थी लेकिन उसे क्या पता था कि ये स्किन लाइटनिंग क्रीम उस पर भारी पड़ जाएगी। मैक्सिको में ऐसा वाकया सामने आया है। मैक्सिकन स्टेट जलिस्को में स्किन लाइटनिंग क्रीम में टॉक्सिक कंपाउड पाया गया जिससे 47 वर्षीय महिला कोमा में जा चुकी है। सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा कि वो अभी आपातकालीन कक्ष में है। चलने में असमर्थता के साथ ही उसे हाथ और पैर हिलाने में दिक्कत महसूस हो रही है। अधकारियों ने महिला का नाम नहीं बताया है लेकिन यू.एस. में कॉस्मेटिक में मेथिलमरकरी के कारण ऐसा पहला मामला सामने आया है। मेथिलमरकरी एक धातु है जिसका उपयोग थर्मामीटर, बैटरी या मिरर जैसी चीजों में किया जाता है। शरीर के साथ लंबे समय तक संपर्क से किडनी डैमेज, पेरीफेरल विजन का लॉस और कॉर्डिनेशन में कमी हो सकती है।

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स्किन लाइटनिंग क्रीम का इस्तेमाल करना जोखिम भरा हो सकता है

स्किन लाइटनिंग क्रीम में पाए गए मेथिलमरकरी रसायन कम गुणकारी होने के साथ ही जहरीला होता है। मेथिलमरकरी को केलोमेल के नाम से भी जाना जाता है। स्किन लाइटनिंग क्रीम में इसे यूज किया जाता है। ऐसा कहा जा रहा है कि महिला ने जिस क्रीम का यूज किया था, उसके साथ छेड़छाड़ की गई थी। लॉस एंजिल्स में ऑक्सिडेंटल कॉलेज में एसोसिएट प्रोफेसर, भावना शमसुंदर ने कहा कि पारा स्किन की रंजकता (Pigmentation) को दूर करता है और और जहरीला प्रभाव छोड़ता है। बता दें कि पिछले 9 सालों से कैलीफोर्निया में 60 अधिक ब्रांड बिना किसी लेबल के बेचे जा रहे हैं। हालांकि अमेरिका में 1 पार्ट पर मिलियन (ppm) पारा का यूज सौंदर्य प्रसाधनों में किया जा रहा है। लोग इन्हें आसानी से खरीद रहे हैं। एफडीए ने इस बारे में बात करने से इंकार कर दिया है। एफडीए सौंदर्य प्रसाधनों की निगरानी खराब तरह से कर रहा है। इसका असर ये है कि उपभोक्ता बीमार पड़ रहा है। मार्केट रिसर्च ग्लोबल इंडस्ट्री एनालिस्ट्स के मुताबिक, ‘2024 तक स्किन लाइटिंग क्रीम और प्रोडक्ट्स दुनिया भर में लोकप्रिय हो जाएंगे और मार्केट के 20.2 बिलियन डॉलर तक बढ़ने का अनुमान है। स्किन लाइटनिंग क्रीम या प्रोडेक्ट को ब्लीमेज और स्किन टोन को निखारने के लिए विज्ञापित किया जाता है।

सील बंद स्किन लाइटनिंग क्रीम खरीदें

गार्सिया का कहना है कि वो खुद स्किन लाइटनिंग क्रीम का यूज करती हैं। वो इस खबर को सुनकर खेद महसूस कर रही हैं। उसका कहना है कि उपभोक्ता को सील बंद सामान का यूज करना चाहिए। जब हम कोई भी सामान खरीदते हैं तो हमे नहीं पता होता है कि आखिर अंदर क्या है?

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स्किन लाइटनिंग क्रीम के नुकसान क्या हैं?

स्किन लाइटनिंग क्रीम का इस्तेमाल चेहरे की त्वचा को कम समय और कम खर्च में गोरा दिखाने के लिए किया जाता है। आम भाषा में उन्हें गोरा बनाने वाली क्रीम भी कह सकते हैं। इससे चेहरे पर नजर आने वाले दाग-धब्बे हल्के हो जाते हैं और त्वचा में निखार भी आ जाती है। आजकल मार्केट में ये बहुत महंगी और सस्ती कीमतों पर भी उपलब्ध है, जिनके कई अलग-अलग ब्रांड भी हैं। इस स्किन लाइटनिंग क्रीम का इस्तेमाल न सिर्फ महिलाएं बल्कि, पुरुष भी करते हैं। दोनों के लिए ही अलग-अलग ब्रांड और विभिन्न विकल्प बाजार में मौजूद हैं। लेकिन, स्किन लाइटनिंग क्रीम त्वचा और स्वास्थ्य से जुड़ी कई गंभीर बीमारियों का कारण भी बन सकती हैं, इसलिए थोड़ा सतर्क रहने की जरूरत है।

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स्किन डिजीज का कारण बन सकती है स्किन लाइटनिंग क्रीम

स्किन लाइटनिंग क्रीम या कहें गोरा बनाने वाली क्रीम विभिन्न स्किन डिजीज का कारण बन सकती है। इस मामले पर शोधकर्ताओं ने एक शोध किया, जिसमें 406 लोगों को शामिल किया गया, जो स्किन लाइटनिंग क्रीम का इस्तेमाल करते थे। इनमें से अधिकतर लोग डर्मेटोलॉजी क्लीनिक में इलाज करा रहे थे। जिन्होंने बताया कि उनके चेहरे के इलाज के दौरान गोरा बनाने क्रीम का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल किया गया जाता है। अध्ययन में शामिल सभी लोगों के स्किन टाइप की जांच की गई और यह भी पता लगाया गया कि स्किन लाइटनिंग क्रीन के इस्तेमाल के कारण उन्हें किस तरह के त्वचा रोगों का खतरा बढ़ सकता है और उनकी यह बीमारी कितनी गंभीर हो सकती है। स्किन लाइटनिंग क्रीम के इस्तेमाल से ज्यादातर मरीजों में मेलास्मा (इस स्थिति में चेहरे की त्वचा पर कत्थई से लेकर भूरे रंग के कई पैच नजर आते हैं) और पोस्ट इन्फ्लेमेटरी हाइपरपिगमेंटेशन का जोखिम पाया गया। वहीं, अध्ययन में शामिल आधे से कम मरीजों का यह भी कहना था कि स्किन लाइटनिंग क्रीन के इस्तेमाल के कारण उन्हें अपनी रंगत में काफी सुधार नजर आई है। जिनमें से लगभग 27 फीसदी इसके नतीजों से काफी संतुष्ट भी थे।

किडनी के लिए जोखिम भरी है स्किन लाइटनिंग क्रीम

स्किन लाइटनिंग यानी गोरा बनाने की क्रीम और अन्य उत्पादों में मर्क्युरी का इस्तेमाल किया जाता है। स्किन लाइटनिंग क्रीम के अलावा आई मेकअप प्रॉडक्ट्स में भी मर्क्युरी का इस्तेमाल किया जाता है। जो सबसे ज्यादा नुकसान किडनी को पहुंचा सकती हैं। मर्क्युरी युक्त मेकअप प्रॉडक्ट्स का इस्तेमाल करने से कई तरह के साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं, जिनसे किडनी डैमेज होने का खतरा भी अधिक बढ़ जाता है। साथ ही, मर्क्युरी के अधिक  इस्तेमाल करने से नर्वस सिस्टम, पाचन तंत्र और फेफड़ों को भी नुकसान होता है। साथ ही साथ यह एंग्जाइटी, डिप्रेशन, ड्राईनेस और स्किन रैशेज का भी कारण बन सकती है।

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स्किन लाइटनिंग क्रीम के साइड इफेक्ट्स क्या हैं?

हाल ही में सेंटर फौर साइंस एंड एनवार्नमेंट नामक संस्था द्वारा कराए अध्ययन में इसका दावा किया गया है कि, भारत में सबसे ज्यादा इस्तेमाल की जाने वाली स्किन लाइटनिंग क्रीम में 44 फिसदी मर्क्यूरी यानि पारा की मात्रा होती है। जिनका जिक्र गोरा बनाने वाली क्रीम के उत्पादों या पैक के लेबल पर नहीं किया जाता है। जिसके कारण निम्न तरह के साइड इफेक्ट्स का जोखिम भी बना रहता हैः

  • स्किन लाइटनिंग क्रीम के कारण स्किन हमेशा के लिए डैमेज हो सकती है
  • स्किन लाइटनिंग क्रीम चेहरे की परता को बहुत ज्यादा पतला बना सकती है
  • चहरे की त्वचा पर अनचाहे बाल उग सकते हैं
  • चेहरे की त्वचा में खिंचाव की समस्या हो सकती है
  • प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो सकती है
  • चेहरे की त्वचा लाल पड़ सकती है
  • चेहरे पर दाग-धब्बे और दानों की समस्या भी बढ़ सकती है।

ऊपर दी गई स्किन लाइटनिंग क्रीम से जुड़ी सलाह किसी भी चिकित्सा को प्रदान नहीं करती हैं। स्किन लाइटनिंग क्रीम के बारे में अधिक जानकारी के लिए कृपया अपने डॉक्टर से बात करें।

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संबंधित लेख:

    सूत्र

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