जोकर फिल्म ने मेंटल हेल्थ के प्रति लोगों को किया अवेयर, किसी को भी हो सकते हैं ये 5 तरह के डिसऑर्डर

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अपडेट डेट दिसम्बर 5, 2019 . 4 मिनट में पढ़ें
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बीते दिनों रिलीज हुई जोकर फिल्म इन दिनों काफी चर्चा में हैं। जोकर फिल्म की खास बात है इसका कैरेक्टर जोकर जो वैसे तो लोंगों को हंसाता है और लोग उसको देखकर खुश होते हैं लेकिन उसके पीछे की छुपी भावनाएं समझना मुश्किल हैं। टॉड फिलिप्स की जोकर (2019) फिल्म में यह कैरेक्टर जोकिन फीनिक्स ने निभाया है।जोकर फिल्म के रिलीज होते ही हर तरफ इसके बारे में टिव्ट आने शुरु हो गए और किस तरह से जोकर फिल्म के कैरेक्टर ने मेंटल इलनेस की बारिकियों को समझा है इसके बारे में भी हर तरफ बात हो रही है। 

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एक लंबे समय से जोकिन फीनिक्स की इमेज एक मैथड एक्टर रही है, लेकिन “जोकर” फिल्म ने उनके काम को एक नए चरम पर पहुंचा दिया है। अभिनेता ने कथित तौर पर मुख्य कैरेक्टर की भूमिका निभाने के लिए 20-25 किलो वजन कम किया है, जिसने उन्हें परेशान करने वाले भयंकर रूप देने के अलावा और भी बहुत कुछ किया – इसने उनके मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित किया। जोकिन फीनिक्स ने पीपल मैगजीन से बातचीत में कहा कि “जैसा कि यह पता चला है, [ज्यादा वजन घटाना] आपके साइकोलॉजी को प्रभावित करता है, और आप वास्तव में पागल हो जाना शुरू करते हैं जब आप इतने कम समय में इतना वजन कम करते हैं।

फीनिक्स ने कहा कि गंभीर वजन घटाने ने उन्हें “एक डिसऑर्डर” दिया, जिससे उन्हें भोजन और वजन के बारे में बहुत ज्यादा सेंसिटिव बना दिया  था, जिसकी वजह से उन्हें सामाजिक कार्यक्रमों और लोगों से मिलने-जुलने से पीछे हटना पड़ा, और केवल सीढ़ियों पर चढ़ने में भी उन्हें थकान हो जाती थी। एक विशेषज्ञ ने बताया कि ये लक्षण गंभीर, यहां तक कि जानलेवा, ईटिंग डिसऑर्डर के गंभीर लक्षण हैं।

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ऐसी कुछ 5 मेंटल बीमारियों के बारे में बात करती है फिल्म जोकरः

टूरेट सिंड्रोम: टूरेट सिंड्रोम एक डिसॉर्डर है जिसमें इंसान बार-बार एक ही चीज रिपीट यानि की दोहराता है जिसे कंट्रोल करना मुश्किल होता है। जैसे कि बार-बार आँखों को झपकाना, अपने कंधों को हिलाना,बार-बार हंसना,असामान्य आवाज़ निकालना या आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल करना। जोकर फिल्म कई जगहों पर मुख्य भूमिका निभाने वाले जोकिन फीनिक्स एकदम से हंसने लगते हैं जो अपने आप में एक डरावना पल होता है।

टूरेट के दौरे जिन्हें टिक्स कहा जाता है आम तौर पर 2 से 15 साल की उम्र के बीच दिखाई देते हैं, औसतन 6 साल की उम्र के आसपास। टूरेट सिंड्रोम के विकास के लिए महिलाओं की तुलना में पुरुषों में तीन से चार गुना अधिक संभावना है।

हालांकि टूरेट सिंड्रोम का कोई क्योर नहीं है, लेकिन इसका उपचार उपलब्ध हैं। टूरेट सिंड्रोम वाले कई लोगों को इलाज की जरुरत नहीं होती है, अगर इसके लक्षण परेशान नहीं कर रहे हैं। एक उम्र के बाद टिक्स अक्सर कम या नियंत्रित हो जाते हैं।

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स्किजोफ्रेनियाः यह एक ऐसी मानसिक बीमारी है जिससे ग्रसित इंसान वास्तविक और काल्पनिक वस्तुओं को समझने में भूल कर बैठता है और वह यूं ही खोया-खोया रहता है।दुनिया भर में लगभग 23 मिलियन लोगों को इस स्किजोफ्रेनिया नाम की मानसिक बीमारी ने घेर रखा है। इस समस्या से पीड़ित रोगी के लिए काम करना, पढ़ाई करना या सामाजिक रूप से बातचीत करना बहुत मुश्किल हो जाता है। हालांकि स्किज़ोफ्रेनिया अन्य मानसिक बीमारियों की तरह आम नहीं है,और इसके लक्षण बहुत ही अलग हो सकते हैं।

स्किजोफ्रेनिया वाले लोगों को आजीवन इलाज की जरुरत होती है। शुरु में होने वाले  इलाज इसकी गंभीर परेशानियों शुरु होने से पहले लक्षणों को नियंत्रण में लाने में मदद कर सकता है और इसके आगे के लिए इसको बेहतर बनाने में मदद कर सकता है।

फिल्म को देखने के बाद इसपर लोगों का अलग-अलग रिएक्शन था और लोगों ने अपने रिएक्शन टिव्टर पर भी शेयर किए। यहां देखेंः

डिसोसिएटिव आईडेंटिटी डीसॉर्डरः डिसोसिएटिव आईडेंटिटी डीसऑर्डर (DID) को पहले कई मल्टीपल डिसऑर्डर कहा जाता था। डिसोसिएटिव आईडेंटिटी डिसऑर्डर वाले लोग एक या एक से अधिक व्यक्तित्व विकसित करते हैं जो व्यक्ति के सामान्य व्यक्तित्व  के साथ या बिना उसके अलग से काम करता रहता है।

डिसोसिएटिव आईडेंटिटी डीसॉर्डर (DID), डिसोसिएटिव डिसॉर्डर नाम के ग्रुप की एक समस्या है।डिसोसिएटिव डिसऑर्डर एक मानसिक बीमारी हैं जो यादों के टूटने से लेकर, जागरूकता, पहचान और/या धारणा पर सीधा असर करती हैं। जब इनमें से एक या अधिक कामों में हल्की सी भी रुकावट आती हैं, तो डिसोसिएटिव के लक्षण दिखने लगता हैं।  ये लक्षण शुरुआत में कम हो सकते हैं, लेकिन वे इतने भी गंभीर हो सकते हैं जहां वे किसी व्यक्ति के सामान्य कामकाज, व्यक्तिगत जीवन और काम में रुकावट डाल सकते हैं।

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साइकोसिसः साइकोसिस (मनोविकृति)  ज्यादातर लोग साइकोसिस को दुनिया से ब्रेक लेना मानते हैं और कहीं ना कहीं इसका मतलब यहीं होता भी है। सोइकोसिस यानि की मनोविकृति को किसी व्यक्ति के विचारों और धारणाओं में रुकावट के रूप में जाना जाता है जो उनके लिए यह पहचानना मुश्किल बना देता है कि वास्तविक (सच्चाई) क्या है और क्या नहीं है। इन रुकावटों की वजह से अक्सर उन चीजों को देखने, सुनने और विश्वास करने के रूप में अनुभव किया जाता है जो वास्तविकता से अलग या थोड़ा अजीब हैं, और जो आम विचारों, व्यवहार और भावनाओं के साथ नहीं होते हैं। साइकोसिस एक लक्षण है, बीमारी नहीं है, और यह जितना आप सोच सकते हैं उससे कहीं ज्यादा सामान्य है।

मनोविकृति के अलग-अलग लक्षण हो सकते है लेकिन आम तौर पर यह दो इसके मुख्य लक्षण हैं:

हैल्यूसिनेशन (भ्रम) ऐसी चीज़ों को देख, सुन या महसूस कर रहे हैं जो आपके आसपास है ही नहीं, जैसे कि:

  • अलग-अलग आवाजें सुनना (ऑडिटरी हैल्यूसिनेशन)
  • अजीब संवेदनाएं या अनमने भाव 
  • उन वस्तुओं या लोगों की झलक देखना जो वहां नहीं हैं।

डिल्यूशन इस तरह का भ्रम मजबूत विश्वास हैं जो व्यक्ति की संस्कृति के अनुसार नहीं हैं, जिसमें सच होने की संभावना नहीं है और जो दूसरों के लिए तर्कहीन लग सकते हैं, जैसे कि:

  • इस बात पर विश्वास करना कि आप बाहरी बल विचारों, भावनाओं और व्यवहारों को नियंत्रित कर सकते हैं,
  • यह मानना तुच्छ टिप्पणियों, घटनाओं या वस्तुओं का व्यक्तिगत अर्थ या महत्व है,
  • यह सोचना कि आपके पास खास शक्तियां हैं,या आप एक स्पेशल मिशन पर हैं या यहां तक कि आप भगवान हैं।

पोस्ट-ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डरः  पोस्ट-ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर एक ऐसी स्थिति है जिसका सीधा संबंध व्यक्ति के साथ घटी एक दर्दनाक या भयानक घटना के साथ होता है। जैसे यौन या शारीरिक उत्पीड़न, कोई गंभीर दुर्घटना, किसी प्रियजन की अस्वाभाविक मौत आदि। इस तरह की घटनाओं को या तो व्यक्ति अनुभव कर चुका होता है या उसे देख चुका होता है। हालांकि शारीरिक रूप से ऐसा व्यक्ति ठीक दिखता है लेकिन मानसिक रूप से वे काफी छतिग्रस्त होते हैं। इस तरह के मेंटल डिसऑर्डर से पीड़ित इंसान लंबे समय तक उन भयानक घटनाओं से उबर नहीं पाता है जिससे उसके जीवन का हर एक पहलू प्रभावित होता है। 

जहां एक तरफ लोग दिमागी बीमारी को छुपाने और इसके बारे में बात करने से कतराते हैं वहीं जोकर जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्म ने लोगों को एक ऐसा प्लेटफॉर्म दिया है कि लोग खुलकर मेंटर हेैल्थ के बारे में बात करें।

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