कुट्टू का आटा इस्तेमाल कर रहे हैं तो, जानें यह जरूरी बातें

चिकित्सक द्वारा समीक्षित | द्वारा

अपडेट डेट दिसम्बर 13, 2019 . 3 मिनट में पढ़ें
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कुट्टू का आटा (Buckwheat flour) अनाज नहीं फल से बनाया जाता है। कुट्टू के आटे में बहुत सारे पौष्टिक तत्व होते हैं। यह प्रोटीन से भरपूर होता है। कुट्टू का आटा सेहत के लिए कई कारणों से फायदेमंद माना जाता है। यही कारण है कि इसे अनाज का बेहतरीन विकल्प माना जाता है और व्रत में खाया जाता है। कुट्टू के आटे में काफी मात्रा में मैग्नीशियम, विटामिन-बी, आयरन, कैल्शियम, फॉलेट, जिंक, कॉपर, मैग्नीज और फॉसफोरस होता है। आइए जानते हैं इसके फायदे क्या हैं और इसे इस्तेमाल करने से पहले किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

कुट्टू के आटे  (Buckwheat flour) के फायदे

  • ताकत से भरपूर : चाइना रिसर्च फॉर ए​ग्रिकल्चरल मॉडनाइ​जेशन जर्नल (China’s Research for Agricultural Modernization Journal)  में प्रकाशित एक रिसर्च के मुताबिक कुट्टू का आटा ताकत से भरपूर होता है। यही कारण है कि नौ दिन के व्रत में कुट्टू का आटा आपके लिए एनर्जी का स्त्रोत बन सकता है।
  • वजन कम करने में कारगर : वजन कम करने में कु्ट्टू का आटा मददगार साबित हो सकता है। यह 75 फीसदी जटिल कार्बोहाइड्रेट  (Complex Carbohydrate) और 25 फीसदी हाई क्वॉलिटी प्रोटीन का मिश्रण होता है। जो की आपकी सेहत के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।
  • बैड कोलेस्ट्रोल को कम ​करता है : कुट्टू के आटे में अल्फा लाइनोलेनिक एसिड होता है। इस कारण कुट्टू का आटा लो डेंसिटी लिपोप्रोटिन (एलडीएल) (Low Density Lipoprotein ) यानी बैड कोलेस्ट्रोल को कम करता है। वहीं कोलेस्ट्रोल हाई डेंसिटी लिपोप्रोटिन (एचडीएल) (High Density Lipoprotein) यानी गुड कोलेस्ट्रोल को बढ़ाता है।
  • डायबिटीज में फायदेमंद : जिलिन एग्रिकल्चरल यूनिवर्सिटी (Jilin Agricultural University) के शोध के अनुसार यह ब्लड ग्लूकोस का लेवल कम करता है। इस कारण यह डायबिटीज में फायदेमंद साबित हो सकता है। कुट्टू के आटे का ग्लिसेमिक इंडेक्स (Glycemic Index) भी कम होता है। इस कारण भी इसे डायबिटीज के मरीजों के लिए अच्छा विकल्प माना जा सकता है।                                                                                                यह भी पढ़ें : रुजुता दिवेकर : नवरात्रि व्रत के दौरान खाने में जरूर शामिल करें ये फूड्स
  • पत्थरी नहीं होने देने में मददगार :  घुलनशील फाइबर (Soluble fiber) का अच्छा स्रोत होने के कारण गॉलब्लैडर में पत्थरी होने से बचा सकता है कुट्टू का आटा। अमेरिकन जरनल ऑफ गेस्ट्रोएनट्रोलॉजी के मुताबिक ज्यादा घुलनशील फायबर लेने से गॉलब्लैडर की पत्थरी होने का खतरा कम हो सकता है।

 

कुट्टू का आटा (buckwheat flour) इस्तेमाल करने से पहले जान लें यह 

कुट्टू के आटे में ग्लूटन नहीं होता। इसलिए इसे बांधने के लिए ज्यादातर लोग आलू का इस्तेमाल करते हैं। इससे पूड़ी कचौड़ी आदि बनाए जाते हैं। कुट्टू के आटे को चबाना आसान नहीं होता। इसलिए इसे कई घंटे पहले भिगोना पड़ता है। ऐसे ही कई और बातें हैं जो कुट्टू के आटे को इस्तेमाल करने से पहले जान लेनी चाहिए।

  • पुराना आटा न खरीदें : कुट्टू का पुराना आटा न खरीदें। हर अन्य आटे की तरह इसके उपयोग की एक निश्चित अवधि होती है। इसलिए पुराना आटा सेहत को फायदे पहुंचाने के बजाए नुकसान पहुंचा सकता है।
  • सही तेल का उपयोग करें : हाईड्रोजेनरेट तेल या वनस्पति (Hydrogenated oil) का उपयोग कुट्टू के आटे के पकवान बनाने में नहीं करने चाहिए। इससे इसके पौष्टिक तत्व खत्म होने का डर रहता है।
  • पुराने आटे की निशानी : यदि कुट्टू का आटा खुरदुरा हो या इसके बीच में काले दाने नजर आएं तो, यह फंगस लगने की निशानी हो सकती है। ऐसे आटे को न खरीदना ही उचित है।                                                                     यह भी पढ़ें : इन मेडिकल कंडिशन में नवरात्रि में नौ दिन का व्रत रखना पड़ सकता है भारी
  • सफेद कीड़े हो सकते हैं : इसमें सफेद रंग के बहुत ही छोटे कीड़े हो सकते हैं। जिन्हें बहुत ही ध्यान से देखने की जरूरत होती है।
  • छानना जरूरी : कुट्टू के आटे का इस्तेमाल छानने के बाद ही करें।        यह भी पढ़ें : वेज दिखने वाली ये 7 चीजें असल में हैं नॉन वेज, कहीं आपको भी तो नहीं ये गलतफहमी

कुट्टू का आटा फायदों से भरपूर है। इससे आप विभिन्न प्रकार के पकवान भी बना सकते हैं। व्रत के अलाव इसे आप रोजमर्रा के भोजन में भी इसका उपयोग किया जा सकता है। बस जरूरत है कि आप ध्यान रखें कि इसे खरीदने से पहले कौन सी बातों का ख्याल रखना है।

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