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ब्रेस्ट इंफेक्शन (Breast infection) क्या है?

ब्रेस्ट इंफेक्शन (Breast infection) क्या है?

ब्रेस्ट इंफेक्शन को मैस्टाइटिस (Mastitis) भी कहते हैं। ब्रेस्ट इंफेक्शन (स्तन संक्रमण) स्तनपान करवाने वाली महिलाओं या स्तनपान नहीं करवाने वाली महिलाओं में भी हो सकता है। ब्रेस्ट इंफेक्शन स्तनपान करवाने वाली महिलाओं में नवजात के मुंह में मौजूद बैक्टीरिया के कारण होता है या फिर नवजात ठीक से दूध नहीं पी पाता है, जिसे लैक्टेशन मैस्टाइटिस कहते हैं। वहीं वैसी महिलाएं जो स्तनपान नहीं करवाती हैं उनमें इंफेक्शन क्यों होता है, इसपर अभी भी रिसर्च की जा रही है।

अमेरिकन कैंसर सोसायटी के अनुसार कभी-कभी निप्पल की त्वचा में दरार पड़ने की वजह से बैक्टीरिया स्टेफिलोकोकस ऑरियस (Staphylococcus aureus) ब्रेस्ट के अंदर चला जाता है जिससे मैस्टाइटिस हो जाता है।

और पढ़ें: जानिए शिशु को स्तनपान या बोतल से दूध पिलाने के फायदे और नुकसान

ब्रेस्ट इंफेक्शन किन-किन कारणों से होता है? (What causes breast infection?)

ब्रेस्ट इंफेक्शन निम्नलिखित कारणों से होता है। जैसे-

  • बच्चे का ठीक से दूध नहीं पी पाना, ऐसी स्थिति में ब्रेस्ट इंफेक्शन का खतरा शुरू हो जाता है।
  • फीड करवाने में देरी करना या जल्दी-जल्दी फीड करवाना। डॉक्टर से सलाह लें की कितने देर के अंतराल पर शिशु को दूध पिलाना चाहिए।
  • किसी वजह से मिल्क डक्ट का ब्लॉक होना ब्रेस्ट इंफेक्शन का कारण बन सकता है।
  • स्तन में सामान्य से ज्यादा दूध बनने की वजह से भी इंफेक्शन का खतरा बना रहता है।
  • जुड़वा बच्चे को स्तनपान करवाना की स्थिति में ब्रेस्ट इंफेक्शन का खतरा बना रहता है। इसलिए अगर आप जुड़वा बच्चे को ब्रेस्ट फीडिंग करवाती हैं तो डॉक्टर से इस बारे में अवश्य सलाह लें।
  • निप्पल की त्वचा का क्रेक होना। यह परेशानी किसी भी महिला को हो सकती है। इसलिए स्तन या निप्पल में कोई भी बदलाव नजर आये या समझ आये तो जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
  • अत्यधिक टाइट कपड़े (ब्रा) पहनना और कपड़े की क्वालिटी ठीक नहीं होने के कारण ब्रेस्ट इंफेक्शन का खतरा बना रहता है।
  • इम्यून सिस्टम कमजोर होने की वजह से ब्रेस्ट इंफेक्शन के साथ-साथ अन्य बीमारियों का खतरा बन जाता है।
  • अगर महिला को एनीमिया (खून की कमी) की समस्या है तो ऐसी स्थिति में भी इंफेक्शन होने का डर रहता है।
  • आहार में अत्यधिक फैट और नमक का सेवन से वजन बढ़ने के साथ ही ब्रेस्ट इंफेक्शन की भी समस्या हो सकती है।
  • बच्चे की डिलिवरी के वक्त परेशानी होने के कारण इंफेक्शन की समस्या हो सकती है।
  • 21 से 35 वर्ष की महिलाओं को इसका खतरा ज्यादा होता है।
  • पहले कभी ब्रेस्ट इंफेक्शन हुआ हो, तो ऐसे में फिर से होने का डर बना रहता है।
  • निप्पल पियर्सिंग करवाना । शैक से महिलाएं ऐसा करवा लेती हैं लेकिन, इससे शरीर को नुकसान भी पहुंच सकता है।
  • स्मोकिंग करना सिर्फ कैंसर या इनफर्टिलिटी जैसी बीमारी या समस्या पैदा नहीं करता बल्कि स्मोकिंग की वजह से ब्रेस्ट इंफेक्शन की समस्या भी हो सकती है।
  • स्वस्थ महिलाओं में ब्रेस्ट इंफेक्शन की संभावना कम होती है लेकिन, कभी-कभी पुरानी बीमारी, डायबिटीज या इम्यून सिस्टम कमजोर होने के कारण ब्रेस्ट इंफेक्शन की संभावना बढ़ सकती है।
  • मेनोपॉज के दौरान या बाद में भी ब्रेस्ट इंफेक्शन का खतरा बढ़ सकता है।

इन ऊपर बताये गये कारणों की वजह से ब्रेस्ट इंफेक्शन की संभावना ज्यादा होती है। इसलिए इससे बचकर रहें।

और पढ़ें: वर्किंग वीमेन के लिए स्तनपान कराने के 7 टिप्स

किन कारणों से बढ़ सकता है ब्रेस्ट इंफेक्शन का खतरा? (What can increase the risk of breast infection?)

निम्नलिखित कारणों से स्तन में संक्रमण का खतरा फैल सकता है। जैसे-

  • बच्चे के जन्म के बाद पहले कुछ हफ्तों तक स्तनपान करवाने से स्तन के संक्रमण का खतरा कम हो सकता है।
  • स्तन के संक्रमण से बचने के लिए अपने शिशु को दोनों स्तन से स्तनपान करवाना चाहिए। इससे संक्रमण का खतरा कम होता है।
  • महिला का अत्यधिक कमजोर होना भी स्तन संक्रमण का कारण बन सकता है।

और पढ़ें: Breast Cancer Genetic Testing : ब्रेस्ट कैंसर जेनेटिक टेस्टिंग क्या है?

ब्रेस्ट इंफेक्शन के लक्षण क्या हैं? (What are the symptoms of breast infection?)

मैस्टाइटिस (स्तन संक्रमण) के निम्नलिखित लक्षण हो सकते हैं। इन लक्षणों में शामिल हैं:

  • स्तन (किसी-किसी जगह) का लाल होना और सूजन आना इंफेक्शन का कारण बन सकता है
  • लाल और सूजन वाली जगह छूने पर दर्द महसूस होना
  • जरूरत से ज्यादा तनाव और चिंतित रहना
  • बॉडी का ट्रेम्प्रेचर बढ़ना ब्रेस्ट इंफेक्शन के लक्षण हो सकते हैं
  • हमेशा थका हुआ महसूस करना
  • शरीर में दर्द महसूस होना
  • निप्पल से तरल पदार्थ का डिस्चार्ज होना
  • ब्रेस्ट में खुजली होना

इन लक्षणों के अलावा और भी लक्षण हो सकते हैं। इसलिए परेशानी महसूस होने पर डॉक्टर से संपर्क करें।

और पढ़ें: ब्रेस्टफीडिंग छुड़ाने के बाद स्तनों में होने वाली समस्याएं

मैस्टाइटिस से जुड़े फैक्ट क्या हैं? (What are the factors related to mastitis?)

मैस्टाइटिस से जुड़े फैक्ट्स निम्नलिखित हैं। जैसे-

  • मैस्टाइटिस एक साथ दोनों ब्रेस्ट में हो सकता है।
  • पुरुषों में मैस्टाइटिस होने की संभावना होता है लेकिन, ऐसा कम होता है। महिलाओं में मैस्टाइटिस की समस्या ज्यादा होती है।
  • मिल्क डक्ट के ब्लॉक होने के कारण मैस्टाइटिस हो सकता है।

ब्रेस्ट इंफेक्शन का इलाज कैसे किया जाता है ? (How is breast infection treated?)

इसक इलाज निम्नलिखित तरह से किया जा सकता है। जैसे-

  • एक्सपर्ट्स की माने तो फीड (स्तनपान) करवाने वाली महिला को सही गैप पर बच्चे को फीड करवाना चाहिए। इसे मिल्क डक्ट कुछ वक्त के लिए खाली और ड्राय रहेगा।
  • इंफेक्शन को कम करने के लिए एंटीबायोटिक्स दी जाती है।
  • परेशानी कम नहीं होने पर डॉक्टर से फिर से संपर्क करना चाहिए। ऐसी स्थिति में खुद से इलाज न करें।

और पढ़ें: Quiz: नए माता-पिता ब्रेस्टफीडिंग संबंधित जरूरी जानकारियाँ पाने के लिए खेलें यह क्विज

ब्रेस्ट इंफेक्शन से बचने के लिए किन-किन बातों का ध्यान रखें? (What are the things to keep in mind to avoid breast infection?)

इससे बचने के लिए निम्नलिखित बातों का ध्यान रखें। जैसे-

  • निप्पल को साफ रखें।
  • बच्चे को साफ रखें और डॉक्टर से समझे की बच्चे के मुंह को कैसे आसानी से साफ रखा जा सकता है।
  • दोनों स्तनों से बच्चे को फीड करवाएं
  • पौष्टिक आहार और तरल पदार्थों को आहार में शामिल करें।

नवजात के जन्म के बाद मां को शिशु की सेहत के साथ-साथ अपने सेहत का भी विशेष रूप से ख्याल रखना चाहिए। पौष्टिक आहार के सेवन से शरीर फिट रहने के साथ-साथ किसी भी तरह की बीमारियों से बचना आसान हो सकता है। ब्रेस्ट फीडिंग के दौरान या बाद में भी कोई परेशानी होने पर इसे छुपाये नहीं। इस बारे में और इससे जुड़ी परेशानी के बारे में हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लें। क्योंकि स्तन में हो रहे संक्रमण का बुरा प्रभाव आपके स्तनपान करने वाले शिशु पर भी पड़ सकता है।

अगर आप ब्रेस्ट इंफेक्शन से जुड़े किसी तरह के कोई सवाल का जवाब जानना चाहते हैं तो विशेषज्ञों से समझना बेहतर होगा।

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Nidhi Sinha द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 20/07/2020 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
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