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लंग कैंसर में क्या एक्युपंक्चर दिखाता है अपना असर?

लंग कैंसर में क्या एक्युपंक्चर दिखाता है अपना असर?

कैंसर एक ऐसी बीमारी है, जिसका इलाज यदि समय पर न कराया जाए, तो ये शरीर में तेजी से फैलती है और फिर मृत्यु का कारण बन जाती है। कैंसर के दौरान सेल्स तेजी से खुद की संख्या बढ़ाती हैं और एक साथ इकट्ठा हो जाती हैं। ये सेल्स अन्य स्वस्य सेल्स को भी प्रभाविक करती हैं। अगर कैसंर के शुरुआती लक्षण पता चल जाएं, तो रेडिएशन और कीमोथेरिपी की सहायता से इस बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है। कैंसर की बीमारी में चायनीज चिकित्सा में प्रचलित एक्यूपंचर बीमारी के लक्षणों को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। भारत में अब एक्यूपंचर प्रचलित हो चुका है और लोगों को इसके फायदे भी दिख रहे हैं। आज इस आर्टिकल के माध्यम से हम आपको लंग कैंसर में एक्यूपंक्चर (Acupuncture in lung cancer) के इस्तेमाल के बारे में जानकारी देंगे। लंग कैंसर में एक्यूपंक्चर कारगर है या फिर नहीं, इससे संबंधित अध्ययन जारी है। इससे संबंधित कुछ स्टडीज पब्लिश भी हो चुकी हैं। जानिए लंग कैंसर में एक्यूपंक्चर(Acupuncture in lung cancer) फायदा पहुंचाता है या फिर नहीं।

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लंग कैंसर में एक्यूपंक्चर (Acupuncture in lung cancer)

लंग कैंसर में एक्यूपंक्चर

एक्यूपंक्चर की प्रोसेस के दौरान शरीर के स्टिमुलेटिंग पॉइंट को चुना जाता है और उसमें निडिल पिंच की जाती है। ऐसा करने से शरीर में न्यूरोट्रांसमीटर रिलीज होते हैं। ये न्यूरोट्रांसमीटर शरीर को दर्द से राहत पहुंचाने का काम करते हैं। एक्यूपंक्चर इस थ्योरी पर बेस्ड है कि शरीर में असंतुलित ऊर्जा होती है, जिसके कारण बीमारियां पैदा होती हैं। एक्यूपंक्चर की सहायता से शरीर की एनर्जी को रिस्टोर करना है। एक्यूपंक्चर प्लस ड्रग थेरिपी की सहायता से कैंसर के ट्रीटमेंट के कारण होने वाले साइड इफेक्ट को दूर करने में मदद मिलती है और साथ ही लाइफ क्वालिटी में भी सुधार होता है।

स्टडी में ये बात सामने आई है कि लंग कैंसर में एक्यूपंक्चर प्रभावी असर दिखाता है। कैंसर के दौरान एक्यूपंक्चर का इस्तेमाल बिल्कुल सुरक्षित माना जाता है और ये एक इनवेसिव प्रोसीजर (invasive procedure) है और अगर कोई व्यक्ति लंग कैंसर का ट्रीटमेंट ले रहा है, तो भी लंग कैंसर में एक्यूपंक्चर को अपनाया जा सकता है।
लंग कैंसर यानी फेफड़ों के कैंसर के ज्यादातर पेशेंट्स में विभिन्न प्रकार के लक्षण दिखते हैं। ये लक्षण या तो डिजीज से संबंधित होते हैं या फिर ये लक्षण ट्रीटमेंट से जुड़े हुए होते हैं। ऐसे में कुछ लक्षण जैसे कि दर्द होना, डिप्रेशन (depression) , चिंता (anxiety), मतली (Nausea) का आभास, तबियत हर वक्त खराब लगना आदि की समस्या को एक्यूपंचर की सहायता से ठीक किया जा सकता है। यानी अगर व्यक्ति को कीमोथेरिपी लेने की सलाह दी गई है, तो व्यक्ति साथ में एक्यूपंचर भी ले सकता है, ताकि उसे बीमारी के लक्षणों में राहत मिल सके।

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लंग कैंसर में एक्यूपंक्चर : स्टडी में ये बात आई सामने

एनसीबीआई (NCBI) में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक करीब 33 लंग कैंसर पेशेंट को साल 2010 और 2012 के बीच शामिल किया गया। सभी पेशेंट्स को हफ्ते में एक से दो बार 45 मिनट का एक्यूपंचर का सेशन दिया गया। इसमें कुछ चार सेशन को शामिल किया गया। एक्यूपंक्चर के पहले और बाद में एडमॉन्टन सिम्पटम एसेसमेंट सिस्टम (Edmonton Symptom Assessment System) की हेल्प से लक्षणों की गंभीरता के बारे में जांच भी की गई। जांच के बाद ये बात सामने आई कि पेशेंट को एक्यूपंचर सेशन के बाद दर्द का कम अनुभव हुआ और वो पहले से अच्छा अनुभव कर रहे थे।

कैंसर के ट्रीटमेंट के दौरान मरीज को उल्टी और थकान में भी एक्यूपंचर ने राहत पहुंचाई। नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट की मानें तो, इस बात के पुख्ता सबूत हैं कि कैंसर में एक्यूपंक्चर कीमोथेरिपी (chemotherapy) से जुड़ी मतली और उल्टी से राहत दिला सकता है। साथ ही क्रोनिक इश्यू के कारण पैदा हुए दर्द दर्द से राहत में भी एक्यूपंक्चर असर दिखाता है। आप इस बारे में अधिक जानकारी के लिए एक्यूपंक्चर एक्सपर्ट से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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फेफड़ों के कैंसर में एक्यूपंक्चर से दूर होती हैं ये समस्याएं

साल 2007 में अमेरिकल कॉलेज ऑफ चेस्ट फिजिशियन (एसीसीपी) एक्यूपंक्चर को ऑफीशियल अनुमति दी थी। एसीसीपी ने सूची भी जारी की, जिसमें उन रेडिएशन (Radiation) और कीमोथेरिपी से पैदा होने वाले दुष्प्रभाव और उनपर एक्यूपंक्चर के प्रभावी असर के बारे में जानकारी दी गई थी। आप भी जानिए कि किन समस्याओं में एक्यूपंक्चर अपना असर दिखाता है।

अगर आपको फेफड़ों का कैंसर है और आप ट्रीटमेंट करवा रहे हैं और साथ ही आप एक्यूपंक्चर भी कराना चाहते हैं, तो आपको इस बारे में डॉक्टर को जरूर बताना चाहिए। डॉक्टर आपको सावधानियों के साथ ही अन्य जरूरी सलाह भी दे सकते हैं।

क्या है ट्रेडीशनल एक्यूपंक्चर (Traditional acupuncture)

ट्रेडिशनल एक्यूपंक्चर में एनर्जी फ्लो को बैलेंज किया जाता है। शरीर के कुछ खास पॉइंट में एनर्जी के फ्लो को बैलेंस करने के लिए निडिल इनसर्ट की जाती है। बीमारी के अनुसार ही एक्यपंक्यूचर के कौन-से प्रकार का चयन किया जाना है, इस बात का निर्धारण किया जाता है। अधिक जानकारी के लिए एक्सपर्ट से जरूर पूछें।

वेस्टर्न मेडिकल एक्यूपंक्चर (Western medical acupuncture)

आप एक्यूपंक्चर के क्लीनिक, हॉस्पिटल में करवा सकते हैं। वेस्टर्न मेडिकल एक्यूपंक्यूचर के दौरान हर्बल मेडिसिन (herbal medicine) और थ्युरोपेटिक मसाज की जाती है। आप इस बारे में एक्यूपंक्चर एक्सपर्ट से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। साथ ही आप एक्यूपंक्चर से पहुंचने वाले अन्य लाभों के बारे में भी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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अगर लंग कैंसर की स्टेज एडवांस हो जाती है, तो शरीर में एक्यूट या क्रॉनिक, दोनों ही प्रकार के दर्द हो सकते हैं। ऐसे में डॉक्टर दर्द से राहत के लिए कुछ मेडिसिंस लेने की सलाह देते हैं। आप मेडिसिंस लेने के साथ ही कुछ कॉम्प्लीमेंट्री थेरिपीज भी अपना सकते हैं। इनमें शामिल हैं योग (yoga), हायप्नोसिस (Hypnosis), डिस्ट्रेक्शन (Distraction) और एक्यूपंक्चर (acupuncture)। आप डॉक्टर से भी कॉम्प्लीमेंट्री थेरिपी के बारे में डॉक्टर से भी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

डॉक्टर से परामर्श के बाद ही एक्यूपंक्चर कराएं। हैलो हेल्थ किसी भी प्रकार की चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार उपलब्ध नहीं कराता। इस आर्टिकल में हमने आपको लंग कैंसर में एक्यूपंक्चर (Acupuncture in lung cancer) के संबंध में जानकारी दी है। आप जानकारी और सलाह लेने के बाद ही अन्य ट्रीटमेंट के बारे में विचार करें। उम्मीद है आपको हैलो हेल्थ की दी हुई जानकारियां पसंद आई होंगी। अगर आपको इस संबंध में अधिक जानकारी चाहिए, तो हमसे जरूर पूछें। हम आपके सवालों के जवाब मेडिकल एक्सर्ट्स द्वारा दिलाने की कोशिश करेंगे।

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

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Bhawana Awasthi द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 03/06/2021 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड