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टाइप 2 डायबिटीज और सेरेब्रोवैस्कुलर डिजीज का क्या है कनेक्शन

टाइप 2 डायबिटीज और सेरेब्रोवैस्कुलर डिजीज का क्या है कनेक्शन

डायबिटीज (Diabetes) एक ऐसी बीमारी है जिसकी वजह से मरीज को कई प्रकार के कॉम्प्लिकेशन का सामना करना पड़ता है या यह कह सकते हैं कि डायबिटीज के साथ अन्य बीमारियां भी दस्तक देने के लिए तैयार रहती हैं। इनमें से एक है सेरेब्रोवैस्कुलर डिजीज। सेरेब्रोवैस्कुलर डिजीज कंडिशन्स का एक ग्रुप है जो ब्रेन की ब्लड वेसल्स और ब्लड फ्लो को प्रभावित करता है। टाइप 2 डायबिटीज और सेरेब्रोवैस्कुलर डिजीज (Type 2 diabetes and cerebrovascular disease) के बीच क्या कनेक्शन है, सेरेब्रोवैस्कुलर डिजीज क्या हैं? इस बारे में इस आर्टिकल में विस्तार से बताया जा रहा है।

सेरेब्रोवैस्कुलर डिजीज (Cerebrovascular Disease) क्या है?

सेरेब्रोवैस्कुलर डिजीज ब्रेन में ब्लड फ्लो में परेशानियां आने से होती हैं। ब्लड फ्लो में परेशानी ब्लड वेसल्स के नेरो होने (Stenosis), क्लॉट बनने (Thrombosis), आर्टरी में ब्लॉकेज (Embolism) या ब्लड वेसल्स के रप्चर (Hemorrhage) होने से होती है। पर्याप्त मात्रा में ब्लड फ्लो नहीं होने से ब्रेन पर प्रभाव पड़ता है और जिससे स्ट्रोक हो सकता है। स्ट्रोक सेरेब्रोवैस्कुलर डिजीज का सबसे कॉमन इवेंट है। सेरेब्रोवैस्कुलर डिजीज में निम्न कंडिशन्स शामिल हैं।

  • एन्यूरिज्म (Aneurysms)
  • आर्टरीवेनस मालफॉर्मेशन (Arteriovenous malformations)
  • सेरेब्रल कार्वनस मालफॉर्मेशन (Cerebral cavernous malformations)
  • आर्टियोवेनस फिस्टुला (Arteriovenous Fistula)

चलिए अब जान लेते हैं कि टाइप 2 डायबिटीज और सेरेब्रोवैस्कुलर डिजीज (Type 2 diabetes and cerebrovascular disease) के बीच क्या कनेक्शन है।

और पढ़ें: टाइप 2 डायबिटीज के मरीजों में डिमेंशिया प्रिवेंशन के लिए एस्प्रिन का उपयोग कितना कारगर है?

टाइप 2 डायबिटीज और सेरेब्रोवैस्कुलर डिजीज (Type 2 diabetes and cerebrovascular disease)

सेरेब्रोवैस्कुलर डिजीज दो प्रकार की होती हैं जो ब्लड वेसल्स के डैमेज पर निर्भर करती हैं। इस्केमिक और हेमोरेजिक (Ischemic and hemorrhagic)
इस्केमिक सेरेब्रोवैस्कुलर डिजीज में ब्लड का फ्लो कम हो जाता है। ऐसा तब हो सकता है कि जब ब्लड वेसल्स नैरो हो जाती हैं या उनमें ब्लॉकेज हो जाता है। हेमोरेजिक सेरेब्रोवैस्कुलर डिजीज ब्लड में कमी है जो ब्लड वेसल्स के रप्चर होने के कारण होती है। ये दोनों प्रकार की बीमारियां स्ट्रोक का कारण बन सकती हैं। ज्यादातर स्ट्रोक्स इस्केमिक टाइप के होते हैं।

टाइप 2 डायबिटीज और सेरेब्रोवैस्कुलर डिजीज के कनेक्शन को लेकर कई स्टडीज की गई हैं जिसमें टाइप 2 डायबिटीज और सेरेब्रोवैस्कुलर डिजीज (Type 2 diabetes and cerebrovascular disease) के लिंक के बारे में बताया गया है। अमेरिकन एकेडेमी ऑफ न्यूरोलॉजी में छपी स्टडी के अनुसार टाइप 2 डायबिटीज सेरेब्रोवैस्कुलर डिजीज के लिए रिस्क फैक्टर है, लेकिन इस दोनों के संबंध के पीछे क्या मेकेनिज्म है यह स्पष्ट नहीं है। यह स्टडी लार्ज आर्ट और स्माल वेसल स्ट्रोक पर टाइप 2 डायबिटीज और हायपरग्लाइसीमिया के प्रभाव को सपोर्ट करती है।

स्टडी के अनुसार बड़ी धमनी और स्माल वेसल स्ट्रोक पर आनुवंशिक रूप से निर्धारित इंसुलिन प्रतिरोध और β-सेल डिसफंक्शन के अंतर प्रभाव दिखाते हैं जो इन तंत्रों को लक्षित करने वाले एंटी डायबिटिक ट्रीटमेंट्स के लिए निहितार्थ हो सकते हैं। टाइप 2 डायबिटीज और सेरेब्रोवैस्कुलर डिजीज (Type 2 diabetes and cerebrovascular disease) के संबंध के विषय में अधिक अध्ययन करने की आवश्यकता है। बता दें डायबिटीज से पीड़ित लोगों में स्ट्रोक होने की आशंका उन लोगों की तुलना में जिन्हें डायबिटीज नहीं है 1.5 गुना ज्यादा होती है।

टाइप 2 डायबिटीज और सेरेब्रोवैस्कुलर डिजीज के कनेक्शन का कारण (Cause of the connection of type 2 diabetes and cerebrovascular disease)

ऐसी ही एक अन्य स्टडी की टीम का सुझाव है कि टाइप 2 डायबिटीज और सेरेब्रोवास्कुलर डिजीज के बीच एक लिंक के लिए जैविक स्पष्टीकरण जटिल और अस्पष्ट होने की संभावना है। टाइप 2 मधुमेह वाले लोगों के रक्त में वसा का असामान्य स्तर होता है। वे एथेरोजेनेसिस की बहुत तेज दर का भी अनुभव कर सकते हैं, एक ऐसी स्थिति जिसमें आर्टरीज में फैट डिपॉजिट का विकास होता है।

विभिन्न कारकों से उत्पन्न मेटाबोलिक व्यवधान (Metabolic disruption) एक और कारण हो सकता है कि टाइप 2 डायबिटीज के कारण सेरेब्रोवैस्कुलर डिजीज की संभावना को बढ़ा सकता है। इन कारकों में बड़ी हुई रक्त शर्करा और फैटी डिपॉजिट, सूजन, इंसुलिन प्रतिरोध और इनका इंसुलिन प्रोडक्शन पर प्रभाव शामिल हैं। टाइप 2 डायबिटीज और सेरेब्रोवैस्कुलर डिजीज (Type 2 diabetes and cerebrovascular disease) के बीच एक लिंक की कमी की व्याख्या करने के लिए, शोधकर्ताओं का सुझाव है कि ऐसा इसलिए हो सकता है कि टाइप 2 डायबिटीज रक्त वाहिकाओं की परत को ऑल्टर करती है

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एक कारण ये भी

डायबिटीज आपके शरीर के लिए स्ट्रोक या किसी सेरेब्रोवैस्कुलर डिजीज का जवाब देना भी कठिन बना सकती है। जब बॉडी में ऑक्सीजन की आपूर्ति बंद हो जाती है, तो अन्य धमनियां आमतौर पर बाईपास के रूप में काम कर सकती हैं, लेकिन अगर व्यक्ति को मधुमेह है, तो वे वाहिकाओं सख्त हो सकती हैं या उनमें प्लाक की वजह से अवरुद्ध हो सकती है। यह एक ऐसी स्थिति जिसे एथेरोस्क्लेरोसिस (Atherosclerosis) कहा जाता है। इससे आपके मस्तिष्क में रक्त का पहुंचना कठिन हो जाता है। इतना सब जानने के बाद सेरेब्रोवैस्कुलर डिजीज के लक्षण जानना जरूरी हो जाता है।

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सेरेब्रोवैस्कुलर डिजीज होने पर क्या लक्षण दिखाई देते हैं? (What are the symptoms of cerebrovascular disease?)

या किसी अन्य सेरेब्रोवैस्कुलर डिजीज के लक्षण निम्न हैं जिनके दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर की मदद लेनी चाहिए।

  • चेहरे, हाथ या पैर में अचानक सुन्नता या कमजोरी (विशेषकर शरीर के एक तरफ)
  • शब्दों या सरल वाक्यों को बोलने या समझने में परेशानी
  • एक या दोनों आंखों में अचानक धुंधली दृष्टि या बदतर दृष्टि
  • अचानक निगलने में परेशानी
  • चक्कर आना, संतुलन की हानि, या समन्वय की कमी
  • शरीर के किसी अंग को हिलाने में अचानक असमर्थता (लकवा)
  • अचानक, अस्पष्ट, और तीव्र सिरदर्द
  • होश में ना रहना

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सेरेब्रोवैस्कुलर डिजीज का इलाज कैसे किया जाता है? (Cerebrovascular disease Treatment)

टाइप 2 डायबिटीज और सेरेब्रोवैस्कुलर डिजीज (Type 2 diabetes and cerebrovascular disease) के बीच लिंक समझने के बाद यह जानना जरूरी है कि सेरेब्रोवैस्कुलर डिजीज का ट्रीटमेंट ऑप्शन्स क्या हैं? चलिए इनके बारे में जान लेते हैं।

  • एक सेरेब्रोवास्कुलर इवेंट के लिए आपातकालीन उपचार की आवश्यकता होती है। तेजी से मूल्यांकन और उपचार महत्वपूर्ण हैं क्योंकि किसी व्यक्ति को लक्षणों की शुरुआत से एक निश्चित समय के भीतर स्ट्रोक की दवाएं मिलनी चाहिए।
  • एक तीव्र स्ट्रोक के मामले में, आपातकालीन टीम टिशू प्लाज्मिनोजेन एक्टीवेटर (Tissue plasminogen activator) नामक दवा दे सकती है जो रक्त के थक्के को तोड़ती है।
  • एक न्यूरोसर्जन को उस व्यक्ति का मूल्यांकन करना चाहिए जिसे ब्रेन हैमरेज (Brain hemorrhage) है। रक्तस्राव के कारण बढ़े हुए दबाव को कम करने के लिए वे सर्जरी कर सकते हैं।
  • कैरोटिड एंडाटेरेक्टॉमी (Carotid endarterectomy) में कैरोटिड धमनी में चीरा लगाना और प्लाक को हटाना शामिल है। इससे रक्त फिर से बहने लगता है। सर्जन तब टांके या ग्राफ्ट के साथ धमनी की मरम्मत करता है।
  • कुछ लोगों को कैरोटिड एंजियोप्लास्टी और स्टेंटिंग की आवश्यकता हो सकती है, जिसमें एक सर्जन धमनी में बैलून-टिप्ड कैथेटर सम्मिलित करता है। फिर वे गुब्बारे को फुलाते हैं ताकि यह धमनी को फिर से खोल दे।

उम्मीद करते हैं कि आपको टाइप 2 डायबिटीज और सेरेब्रोवैस्कुलर डिजीज (Type 2 diabetes and cerebrovascular disease) के लिंक से संबंधित जरूरी जानकारियां मिल गई होंगी। अधिक जानकारी के लिए एक्सपर्ट से सलाह जरूर लें। अगर आपके मन में अन्य कोई सवाल हैं तो आप हमारे फेसबुक पेज पर पूछ सकते हैं। हम आपके सभी सवालों के जवाब आपको कमेंट बॉक्स में देने की पूरी कोशिश करेंगे। अपने करीबियों को इस जानकारी से अवगत कराने के लिए आप ये आर्टिकल जरूर शेयर करें।

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Manjari Khare द्वारा लिखित आखिरी अपडेट कुछ हफ्ते पहले को
Sayali Chaudhari के द्वारा मेडिकली रिव्यूड