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पेरिफेरल आर्टियल डिजीज : पैरों में दर्द से हो सकती है इस बीमारी की शुरुआत!

पेरिफेरल आर्टियल डिजीज : पैरों में दर्द से हो सकती है इस बीमारी की शुरुआत!

पेरिफेरल आर्टियल डिजीज (Peripheral arterial disease) को पेरिफेरल आर्टरी डिजीज भी कहा जाता है। यह एक क्रोनिक डिजीज है जिसमें पैरों की आर्टरीज में धीरे-धीरे प्लाक का बिल्ड अप होता है। इस स्थिति के जारी रहने पर आर्टरीज में ब्लड फ्लो बहुत कम होता है या ब्लॉक हो जाता है। कभी-कभी यह दोनों स्थितियां एक साथ भी हो सकती हैं। यह बीमारी उम्र बढ़ने पर होती है, लेकिन कई बार यह कम उम्र में भी हो सकती है।

पेरिफेरल आर्टियल डिजीज (Peripheral arterial disease) एक कॉमन सर्कुलेटरी प्रॉब्लम (Circulatory problem) है। जिसमें आर्टरीज के संकरा होने से हाथों और पैरों (सामान्य तौर पर पैरों) को डिमांड के अनुसार ब्लड फ्लो नहीं मिल पाता। ऐसा होने पर कुछ लक्षण भी दिखाई देते हैं जिसमें चलने पर पैर दर्द होना शामिल है। इस बीमारी का इलाज एक्सरसाइज, हेल्दी ईटिंग और तंबाकू के हर रूप को छोड़कर सफलतापूर्वक किया जा सकता है। इस आर्टिकल में इस बीमारी के बारे में पूरी जानकारी दी जा रही है।

पेरिफेरल आर्टियल डिजीज के लक्षण (Peripheral arterial disease symptoms)

कई लोगों में पेरिफेरल आर्टियल डिजीज (Peripheral arterial disease) के माइल्ड या फिर लक्षण ही दिखाई नहीं देते। वहीं, कुछ लोगों को चलते वक्त पैर में दर्द होता है। पैर या हाथों में दर्द मसल पेन या क्रैम्प के रूप में हो सकता है। यह किसी एक्टिविटी से ट्रिगर होता है जैसे कि वॉकिंग, लेकिन आराम करने से यह ठीक हो जाता है।दर्द की जगह नैरो आर्टरी की लोकेशन पर निर्भर होती है। पिंडली में दर्द सबसे कॉमन लोकेशन है। दर्द कम से ज्यादा तक हो सकता है। तीव्र दर्द होने पर चलना या किसी प्रकार की फिजिकल एक्टिविटी करना मुश्किल हो सकता है। पेरिफेरल आर्टियल डिजीज के लक्षणों (Peripheral arterial disease symptoms) में निम्न शामिल हैं।

  • दोनों हिप्स, थाईज या काफ मसल्स में किसी एक में कुछ निश्चित एक्टिविटीज के बाद क्रैम्प आना।
  • जैसे कि वॉकिंग और सीढ़िया चढ़ना।
  • पैरों का सुन्न होना या पैरों में कमजोरी लगना।
  • पैरों में ठंड़क का एहसास होना। खासतौर पर जब दूसरे साइड से तुलना की जाए।
  • अंगूठे या पैरों में घाव होना जो भर नहीं रहे हों।
  • पैरों के रंग में बदलाव।
  • पंजों और पैरों के बालों का झड़ना या ग्रोथ कम होना।
  • पैर के अंगूठे के नाखून ना बढ़ना।

पेरिफेरल आर्टियल डिजीज के बढ़ने पर लेटे रहने के समय भी पैर में दर्द हो सकता है। यह दर्द इतना तीव्र हो सकता है कि आपको नींद ना आए। अपने पैरों को अपने बिस्तर के किनारे पर लटकाने या अपने कमरे में घूमने से अस्थायी रूप से दर्द से राहत मिल सकती है।

और पढ़ें: Peripheral Vascular Disease: पेरिफेरल वैस्कुलर डिजीज क्या है?

पेरिफेरल आर्टियल डिजीज के कारण (Peripheral arterial disease causes)

पेरिफेरल आर्टियल डिजीज अक्सर एथेरोस्क्लेरोसिस (Atherosclerosis) के कारण होती हैं। इस कंडिशन में आर्टरी वाल्स में फैट डिपोजिट हो जाता है जिससे ब्लड फ्लो में कमी आती है। हालांकि, एथेरोस्क्लेरोसिस कंडिशन हार्ट से संबंधित है। जो बॉडी में मौजूद सभी आर्टरीज को प्रभावित करती है। जब यह उन आर्टरीज को प्रभावित करती है जो ब्लड को लिम्ब तक सप्लाय करती हैं, तो यह पेरिफेरल आर्टियल डिजीज का कारण (Peripheral arterial disease causes) बनती है।

पेरिफेरल आर्टियल डिजीज का कारण (Peripheral arterial disease causes)

पेरिफेरल आर्टियल डिजीज के रिस्क फैक्टर्स क्या हैं? (Peripheral arterial disease Risk factors)

निम्न फैक्टर्स पेरिफेरल आर्टियल डिजीज के रिस्क को बढ़ा सकते हैं।

और पढ़ें : जान लीजिए इस गंभीर हार्ट इंफेक्शन के कारण, ताकि समय रहते कर सकें बचाव

पेरिफेरल आर्टियल डिजीज का पता कैसे लगाया जाता है? (Diagnosing of PAD)

डॉक्टर एंकल ब्रैंकियल इंडेक्स (Ankle-brachial index) टेस्ट का उपयोग इस स्थिति को डायग्नोस करने के लिए करता है। जिसमें हाथ और एड़ियों के ब्लड प्रेशर को कंपेयर किया जाता है। अगर एड़ियों में ब्लड का प्रेशर हाथों के ब्लड प्रेशर से कम है तो आपको पीएडी हो सकती है। अगर डॉक्टर इस टेस्ट से स्थिति को पूर्ण रूप से डायग्नोस नहीं कर पाते, तो वे कुछ दूसरे टेस्ट भी रिकमंड कर सकते हैं। जिसमें मैग्नेटिक रेजोनेंस एंजियोग्राफी, डोप्लर अल्ट्रासाउंड आदि शामिल हैं। टेस्ट के आधार परही मरीज को ट्रीटमेंट रिकमंड किया जाता है।

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पेरिफेरल आर्टियल डिजीज का इलाज (Peripheral arterial disease treatment)

पेरिफेरल आर्टियल डिजीज (Peripheral arterial disease) के इलाज के दो उद्देश्य होते हैं:

  • लक्षणों को मैनेज करना जैसे कि पैरों में दर्द ताकि आप फिजिकल एक्टिविटीज को फिर से शुरू कर सकें।
  • पूरी बॉडी में एथेरोस्क्लेरोसिस के प्रोग्रेशन को रोकना ताकि हार्ट अटैक या स्ट्रोक के रिस्क को कम किया जा सके।
  • मरीज इन गोल्स को लाइफ में बदलाव के द्वारा अचीव कर सकता है। खासतौर पर पेरिफेरल डिजीज की अर्ली स्टेज में।

अगर आप स्मोकिंग करते हैं तो उसे पूरी तरह बंद कर दें। इससे कॉम्प्लिकेशन का रिस्क कम होगा। वॉकिंग और रेगुलर बेसिस पर दूसरी एक्सरसाइज करना, एक्सरसाइज ट्रेनिंग आपके लक्षणों को कम कर सकती है। पेरिफेरल आर्टियल डिजीज (Peripheral arterial disease) के इलाज के लिए एडिशनल मेडिकल ट्रीटमेंट की जरूरत भी होती है। डॉक्टर उन दवाओं को प्रिस्क्राइब करते हैं जो ब्लड क्लॉट्स को रोकने के साथ ही ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल को कम कर करती हैं और दर्द जैसे लक्षणों में राहत प्रदान करती हैं। निम्न मेडिसिन मरीज को प्रिस्क्राइब की जा सकती हैं।

पेरिफेरल आर्टियल डिजीज

नोट: किसी भी प्रकार की दवा का उपयोग डॉक्टर की सलाह के बिना ना करें। साथ ही दवा का सही डोज, सही समय पर लें। दवा के साइड इफेक्ट्स के बारे में भी डॉक्टर से सलाह लें।

और पढ़ें : एब्नॉर्मल हार्ट रिदम: किन कारणों से दिल की धड़कन अपने धड़कने के स्टाइल में ला सकती है बदलाव?

सर्जरी (Surgery)

कुछ मामलों में पेरिफेरल आर्टरी डिजीज के इलाज के लिए एंजियोप्लास्टी और सर्जरी रिकमंड की जाती है। कुछ मामलों में बायपास सर्जरी भी की जाती है। यह मरीज की कंडिशन पर निर्भर करता है।

लाइफ स्टाइल में बदलाव (life style changes for PAD)

पेरिफेरल आर्टियल डिजीज को मैनेज करने के लिए लाइफ स्टाइल में निम्न बदलाव करने चाहिए।

  • स्मोकिंग को छोड़ने के साथ ही बैलेस्ड डायट को फॉलो करें जो ब्लड ग्लूकोज लेवल और वजन को कम करने में मददगार है।
  • डायट में कोलेस्ट्रॉल, सैचुरेटेड फैट और सोडियम की मात्रा कम करें ताकि ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल के लेवल को कम किया जा सके।
  • किसी प्रशिक्षित के गाइडेंस में एक्सरसाइज प्रोग्राम को फॉलो करें। जिसमें दर्द के समय आप आराम भी कर सकें। अधिकांश डॉक्टर वीक में तीन दिन 30 मिनट की वॉकिंग रिकमंड करते हैं।
  • ओवर द काउंटर मिलने वाली सर्दी- खांसी की दवाओं का उपयोग अवॉयड करें। ये ब्लड वेसल्स को सिकोड़ने के साथ पीडीए के लक्षणों को बढ़ाने का काम करती हैं।

क्या पीएडी (PAD) को रोका जा सकता है? (Can PAD be cured)

(PAD) का कोई क्योर नहीं है। धूम्रपान छोड़ना, नियमित रूप से व्यायाम करना, फैट को सीमित करना और हेल्दी डायट को फॉलो करना, और रिस्क फैक्टर्स को मैनेज करना – जैसे कि मधुमेह, उच्च कोलेस्ट्रॉल और उच्च रक्तचाप – इस बीमारी की प्रोग्रेस को कम करने में मदद कर सकते हैं।

और पढ़ें : एरिथमिया के घरेलू उपाय क्या हार्ट बीट को कर सकते हैं कंट्रोल?

उम्मीद करते हैं कि आपको पेरिफेरल आर्टियल डिजीज (Peripheral arterial disease) से संबंधित जरूरी जानकारियां मिल गई होंगी। अधिक जानकारी के लिए एक्सपर्ट से सलाह जरूर लें। अगर आपके मन में अन्य कोई सवाल हैं तो आप हमारे फेसबुक पेज पर पूछ सकते हैं। हम आपके सभी सवालों के जवाब आपको कमेंट बॉक्स में देने की पूरी कोशिश करेंगे। अपने करीबियों को इस जानकारी से अवगत कराने के लिए आप ये आर्टिकल जरूर शेयर करें।

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

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Manjari Khare द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 11/08/2021 को
और Admin Writer द्वारा फैक्ट चेक्ड
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