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वैलव्युलर हार्ट डिजीज: दिल से जुड़ी इस बीमारी की पूरी जानकारी जानें यहां!

वैलव्युलर हार्ट डिजीज: दिल से जुड़ी इस बीमारी की पूरी जानकारी जानें यहां!

मनुष्य का शरीर जन्म लेने के साथ काम करना शुरू कर देता है और शरीर के कुछ अंगों को तो आराम करने का मौका भी नहीं मिलता। अगर ये बात आपको अटपटी लग रही है, तो मैं इसे एक एग्जाम्पल की मदद से आसान शब्दों में बताती हूं। जैसे हम अक्सर ही किसी न किसी से कहते हैं या सुनते हैं कि थोड़ा आराम कर लो। अब जब आप आराम करते हैं, तो बॉडी रिलैक्स पुजिशन में होती है, हाथ-पैर स्थिर होते हैं और आंखें बंद हो सकती हैं। वैसे आप कितना भी आराम करें, लेकिन शरीर का कुछ खास अंग जैसे की हमारा दिल एक स्पीड में धड़कता रहता है। इसलिए आज दिल की बीमारी वैलव्युलर हार्ट डिजीज (Valvular Heart disease [VHD]) से संबंधित जानकारी आपसे शेयर करेंगे। अब बस आप दिल से इस आर्टिकल को पढ़ें, क्योंकि क्या पता आपकी ये जानकारी किसी को दिल की बीमारी यानी वैलव्युलर हार्ट डिजीज (Valvular Heart disease) से बचाने में सहायक हो सकें।

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वैलव्युलर हार्ट डिजीज क्या है?
वैलव्युलर हार्ट डिजीज कितने तरह के होते हैं?
वैलव्युलर हार्ट डिजीज के लक्षण क्या हैं?
वैलव्युलर हार्ट डिजीज के कारण क्या हैं?
वैलव्युलर हार्ट डिजीज का निदान कैसे किया जाता है?
वैलव्युलर हार्ट डिजीज का इलाज कैसे किया जाता है?

चलिए अब वैलव्युलर हृदय रोग (Valvular Heart disease [VHD]) से जुड़े इन सवालों का जवाब जानते हैं।

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वैलव्युलर हार्ट डिजीज (Valvular Heart disease) क्या है?

वाल्वुलर हार्ट डिजीज (Valvular Heart disease)

हार्ट में मौजूद 4 वाल्व (Valve) में से जब एक वाल्व डैमेज होने लगे या कोई अन्य परेशानी शुरू हो जाये, तो इसे वाल्वुलर हार्ट डिजीज (Valvular Heart disease) कहते हैं। वाल्व डिजीज (Valve disease) के कई कारण हो सकते हैं। दिल के वाल्व ब्लड को दिल के अंदर आने में अपनी खास भूमिका निभाते हैं। हालांकि अगर किसी भी कारण वाल्व ब्लड फ्लो को बैलेंस करने में सक्षम नहीं हो पाता है, तो वैलव्युलर हृदय रोग का खतरा बढ़ने लगता है। वैलव्युलर हार्ट डिजीज की समस्या जन्म से भी हो सकती हैं या फिर इंफेक्शन, हार्ट अटैक या दिल से जुड़ी बीमारी के कारण भी हो सकती है। सेंटर फॉर डिजीज प्रिवेंशन एंड हेल्थ प्रमोशन (Center for Chronic Disease Prevention and Health Promotion) में पब्लिश्ड रिपोर्ट के अनुसार जब हार्ट के अंदर ब्लड सर्क्युलेशन (Blood Circulation) में समस्या शुरू होने लगती है, तो दिल की धड़कन की आवाज में बदलाव आने लगता है, जिसे हार्ट मर्मर कहते हैं। हार्ट मर्मर ही वैलव्युलर हार्ट डिजीज की ओर इशारा करता है। वैलव्युलर हार्ट डिजीज (Valvular Heart disease) भी अलग-अलग तरह के होते हैं, जिनके बारे में आगे पढ़ेंगे।

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वैलव्युलर हार्ट डिजीज कितने तरह की होती हैं? (Types of Valvular Heart disease)

वाल्वुलर हार्ट डिजीज (Valvular Heart disease)

ये डिजीज दो अलग-अलग तरह की होती हैं-

  1. वैलव्युलर स्टेनोसिस (Valvular stenosis)- जब वाल्व (Valve) पूरी तरह से खुल नहीं पाता है दिल में ब्लड ठीक तरह से नहीं पहुंच पाता है, तो ऐसी स्थिति को वैलव्युल स्टेनोसिस कहते हैं।
  2. वैलव्युलर इंसफिशिएंसी (Valvular insufficiency)- अगर वाल्व (Valve) ठीक तरह से बंद नहीं हो पाता है, तो हार्ट से ब्लड बाहर आने लगता है। ऐसी स्थिति को वैलव्युल इंसाफेसिएन्सी कहते हैं।

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वैलव्युलर हार्ट डिजीज के लक्षण क्या हैं? (Symptoms of Valvular Heart disease)

वैलव्युलर हृदय रोग के लक्षण निम्नलिखित हो सकते हैं। जैसे:

  • दिल के धड़कने की आवाज में बदलाव आना।
  • सांस (Breathing) लेने में कठिनाई महसूस होना।
  • घबराहट या बेचैनी महसूस होना।
  • सीने में दर्द होना।
  • चक्कर आना।
  • बार-बार सिरदर्द (Headache) होना।
  • खांसी आना।
  • बेहोश होना।
  • पेट, पैर या जोड़ों में सूजन आना।
  • पल्मोनरी एडिमा होना।
  • दिल की धड़कन (Irregular heartbeat) से जुड़ी परेशानी होना।

ऊपर बताये गए लक्षण वैलव्युलर हृदय रोग के ओर इशारा करते हैं। इसलिए अगर ऐसी कोई भी परेशानी महसूस हो, तो जल्द से जल्द डॉक्टर से कंसल्ट करें।

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वैलव्युलर हार्ट डिजीज के कारण क्या हैं? (Cause of Valvular Heart disease)

वाल्वुलर हार्ट डिजीज (Valvular Heart disease)

वैलव्युलर हार्ट डिजीज के निम्नलिखित कारण हो सकते हैं। जैसे:

ये कारण हो सकते हैं, लेकिन इस बीमारी का इलाज डायग्नोसिस कर किया जा सकता है।

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वैलव्युलर हार्ट डिजीज का निदान कैसे किया जाता है? (Diagnosis of Valvular Heart disease)

वाल्वुलर हार्ट डिजीज (Valvular Heart disease)

नैशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन (NCBI) में पब्लिश्ड रिपोर्ट के अनुसार दिल की इस बीमारी का निदान निम्नलिखित टेस्ट से किया जाता है। जैसे:

  • इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (Electrocardiogram [ECG])- इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम टेस्ट की मदद से पेशेंट के हार्ट रेट्स, कार्डियक रिद्म को मॉनिटर करना, हार्ट और ब्लड वेसेल्स में जुड़ी परेशानियों की जानकारी मिलती है।
  • चेस्ट एक्स-रे (Chest X-ray)- चेस्ट एक्स-रे की मदद से चेस्ट इंफेक्शन (Chest infection) की जानकारी मिलती है।
  • कार्डियक एमआरआई (Cardiac MRI)- एमआरआई की मदद से हार्ट प्रॉब्लेम एनालिसिस करने में सहायता मिलती है।
  • एक्सरसाइज टेस्ट या स्ट्रेस टेस्ट (Exercise tests or stress tests)- इस टेस्ट की सहायता से हार्ट में हो रहे ब्लड फ्लो (Blood flow) की जानकारी मिलती है।
  • कार्डियक कैथीटेराइजेशन (Cardiac catheterization)- अगर हार्ट में ब्लड क्लॉट होने लगे, तो कार्डियक कैथीटेराइजेशन टेस्ट की मदद से ब्लड क्लॉटिंग (Blood clotting) की जानकारी मिलती है।

ये अलग-अलग जांच वाल्वुलर हृदय रोग (Valvular Heart disease) की पहचान के लिए आवश्यक हो सकते हैं। इसके अलावा अगर पेशेंट किसी अन्य बीमारी से पीड़ित हैं, तो अन्य बॉडी चेकअप (Body checkup) या टेस्ट (Test) करवाने की सलाह दी जा सकती है, जिससे इलाज के दौरान पेशेंट को कोई और परेशानी ना हो।

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वैलव्युलर हार्ट डिजीज का इलाज कैसे किया जाता है? (Treatment for Valvular Heart disease)

वैलव्युलर हार्ट डिजीज (VHD) का इलाज पेशेंट की हेल्थ कंडिशन को ध्यान में रखते हुए किया जाता है। जैसे:

दवाएं (Medication)-

  • बीटा ब्लॉकर (Beta blocker) या कैल्शियम चैनल ब्लॉकर (Calcium channel blocker)
  • डायरेटिक्स (Diuretics)
  • वैसोडाइलेटर (Vasodilators)

इन दवाओं को प्रिस्क्राइब किया जा सकता है।

नोट: दवाओं के नाम सिर्फ आपकी जानकारी के लिए दी गई है। आप अपनी मर्जी से किसी भी दवाओं का सेवन ना करें, क्योंकि इससे साइड इफेक्ट्स का खतरा बना रहता है। इसके साथ ही डोज भी डॉक्टर द्वारा बताये अनुसार लें। कई बार हमसभी ये गलती करते हैं कि प्रिस्क्राइब्ड ड्रग्स डोज से ज्यादा सेवन करने लगते हैं, क्योंकि प्रिस्क्रिप्शन होने की वजह से इन दवाओं को कभी भी खरीदना खरीदना आसान होता है.

सर्जरी (Surgery)-

  • वाल्व को डॉक्टर सर्जरी की मदद से ठीक करने की कोशिश करते हैं।
  • जिन लोगों के वल्व पूरी तरह से डैमेज हो जाते हैं, वल्व को सर्जरी की मदद से बदला जा सकता है।

इन दो अलग-अलग तरहों से वैलव्युलर हार्ट डिजीज (Valvular Heart disease) का इलाज किया जाता है।

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वैलव्युलर हार्ट डिजीज (Valvular Heart disease) से होने वाली अन्य परेशानी क्या हो सकती है?

 हार्ट डिजीज

अगर वैलव्युलर हृदय रोग (HVD) हो जाए और वक्त रहते इसका इलाज शुरू ना किया जाए, तो इससे निम्नलिखित परेशानियों का खतरा बढ़ सकता है। जैसे:

  • हार्ट फेल (Heart failure) होना।
  • स्ट्रोक (Stroke) आना।
  • खून जमना (Blood clots)।
  • दिल की धड़कन (Heart beat) एब्नॉर्मल होना।
  • कभी-कभी ब्यक्ति की इस बीमारी की वजह से मृत्यु भी हो सकती है।

वैलव्युलर हृदय रोग (Valvular Heart disease) का इलाज करवाना बेहद जरूरी है। इसके साथ ही अगर कुछ महत्वपूर्ण बातों पर ध्यान दिया गया, तो वैलव्युलर हार्ट डिजीज (Valvular Heart disease) के लक्षणों को कम करने में मदद मिल सकती है। इसलिए बैलेंस और हेल्दी डायट (Healthy diet) रोजाना फॉलो करें। अगर आपका वजन जरूरत से ज्यादा बढ़ा हुआ है, तो वेट (Weight) को बैलेंस करें। वेट कंट्रोल करने के लिए नियमित रूप से एक्सरसाइज या योग करना जरूरी है। इसके अलावा स्मोकिंग (Smoking) और एल्कोहॉल (Alcohol) से दूरी बनायें रखें। दिल की इस बीमारी (Heart problem) के खतरे को कम करने के लिए 7 से 8 घंटे की नींद रोजाना लें और टेंशन फ्री रहें।

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अगर आप वैलव्युलर हार्ट डिजीज (Valvular Heart disease) से जुड़े किसी तरह के कोई सवाल का जवाब जानना चाहते हैं, तो आप हमें कमेंट बॉक्स में लिखकर पूछ सकते हैं। हमारे हेल्थ एक्सपर्ट आपके सवालों के जवाब देने की कोशिश करेंगे। हालांकि अगर आप वैलव्युलर हार्ट डिजीज (Valvular Heart disease) से पीड़ित हैं, तो डॉक्टर से कंसल्टेशन करें, क्योंकि ऐसी स्थिति में डॉक्टर आपके हेल्थ कंडिशन को ध्यान में रखकर और वैलव्युलर हार्ट डिजीज के लक्षण को समझकर जल्द से जल्द इलाज शुरू करेंगे।

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सूत्र

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2020 ACC/AHA Guideline for the Management of Patients With Valvular Heart Disease: A Report of the American College of Cardiology/American Heart Association Joint Committee on Clinical Practice Guidelines/https://www.ahajournals.org/doi/10.1161/CIR.0000000000000923/Accessed on 03/06/2021

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Nidhi Sinha द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 25/05/2022 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड