आजकल ऑफिस में लगातार बैठ कर काम करने से पीठ या कमर दर्द की समस्या हो जाती है। ऐसे में लोगों को चलने, बैठने और लेटने में समस्या का सामना करना पड़ता है। इसके लिए आप हॉस्पिटल और क्लीनिक के चक्कर लगाते हैं और फिर भी परेशान रहते हैं। अगर आप आयुर्वेद चिकित्सा में विश्वास करते हैं तो कमर दर्द का आयुर्वेदिक इलाज करा सकते हैं। इसके लिए आप चाहें तो अपने डॉक्टर से भी परामर्श ले सकते हैं। आइए जानते हैं, कमर दर्द का आयुर्वेदिक इलाज क्या है और इसमें कौन सी औषधियों का प्रयोग होता है?
आजकल कमर में दर्द होना एक सामान्य बात है। कमर दर्द को लंबर स्ट्रेन भी कहा जाता है, ये एक्यूट या क्रॉनिक भी हो सकता है। इसमें पीठ या कमर के निचले हिस्से की मांसपेशियां और टेंडॉन डैमेज हो जाता है, जिसके कारण कमर में ऐंठन और दर्द महसूस होता है। आपको बता दें कि रीढ़ की हड्डी पीठ में कई मांसपेशियां और लिगामेंट्स के मिलने से जुड़ी रहती है।

पीठ की मांसपेशियों में ज्यादा तनाव होने के कारण टिश्यू में छोटी दरारे या टीयर्स आ जाते हैं। जिसके कारण मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं और रीढ़ की हड्डी अपनी जगह से खिसक जाती है जिससे कमर दर्द शुरु हो जाता है।
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आयुर्वेद में कमर दर्द को कटिशूल के रूप में जाना जाता है। आयुर्वेद में कमर दर्द को वात दोष बताया गया है, जो शरीर में वात के असंतुलित होने से होता है। कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं के कारण भी कमर दर्द हो सकता है, जैसे- रूमेटाइड आर्थराइटिस, ल्यूकोरिया, सयाटिका, पाचन तंत्र संबंधी बीमारियां, पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS), एन्काइलोसिंग स्पॉन्डिलाइटिस के कारण भी कमर दर्द हो सकता है।
कमर दर्द से पीड़ित व्यक्ति में अक्सर अन्य कई बीमारियों के जैसे लक्षणों से ग्रसित होता है। जो लक्षण निम्न हैं :
इस लक्षणों के अलावा अन्य कई लक्षण भी सामने आ सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए अफने डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं।
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कमर दर्द आमतौर पर पीठ या बैक पर चोट लगने से होता है। कमर में टेंडॉन और मांसपेशियां डैमेज हो जाती हैं जिसके कारण कमर में दर्द की समस्या होने लगती है। इसके अलावा पुशिंग और पुलिंग स्पोर्ट्स जैसे वेट लिफ्टिंग, फुटबॉल खेलने से भी कमर में दर्द हो सकता है।
इसके अलावा पीठ और कमर को अचानक मोड़ने के कारण मांसपेशियों में चोट हो सकती है। ज्यादा शारीरिक मेहनत करने के कारण भी कमर दर्द की समस्या हो जाती है।
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कमर दर्द का आयुर्वेदिक इलाज थेरिपी, जड़ी-बूटी और औषधियों की मदद से किया जाता है :
कमर दर्द का आयुर्वेदिक इलाज निम्न कर्म के द्वारा की जाती है :
स्वेदन कर्म
कमर दर्द का आयुर्वेदिक इलाज स्वेदन कर्म के द्वारा किया जाता है। इसमें व्यक्ति को तेल या भाप की सहायता से शरीर से पसीना निकलवाया जाता है जिससे शरीर में वात का संतुलन हो सके और यह किसी भी तरह से शरीर में कोई समस्या ना उत्पन्न कर सके.
उद्वर्तन कर्म
उद्वर्तन कर्म एक आयुर्वेदिक थेरिपी है, जिसमें पाउडर की मदद से मालिश की जाती है। ये हेल्थ प्रोफेशनल्स ही करते हैं। कुछ जड़ी-बूटी के पाउडर की सहायता से उद्वर्तन कर्म किया जाता है। उद्वर्तन कर्म को करने के लिए पहले औषधीय पाउडर को गर्म किया जाता है, इसके बाद 45 से 60 मिनट तक कमर में दर्द होने वाले स्थान पर मालिश की जाती है। इसके बाद व्यक्ति को आधे घंटे तक आराम कराया जाता है। फिर गर्म पानी से नहाने के लिए कहा जाता है। इससे कमर में होने वाली अकड़न से राहत मिलती है, साथ ही दर्द में भी आराम मिलता है।
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विरेचन कर्म
विरेचन कर्म में शरीर को डिटॉक्स किया जाता है, इसके लिए आपको किसी भी तरह से औषधियों के द्वारा डिटॉक्स किया जाता है। इसमें मल मार्ग के द्वारा पाचन तंत्र को साफ किया जाता है। वहीं, इससे अमा में राहत होती है, जिससे वात दोष के लक्षण कम होते हैं। साथ ही कमर दर्द में भी राहत मिलती है।
बस्ती कर्म
बस्ती कर्म आयुर्वेद में किया जाने वाला एनिमा है। एनिमा को मल मार्ग में डाल कर मलाशय से सारा मल बाहर निकाला जाता है, जिससे शरीर में किसी भी प्रकार का अपशिष्ट पदार्थ ना रह जाए। इस बस्ती कर्म में जड़ी-बूटियों की मदद से मल त्याग कराया जाता है। इससे वात संतुलित होता है और कमर दर्द में राहत मिलती है।
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पंचकर्म
पंचकर्म थेरिपी से भी कमर दर्द में राहत मिलती है। इसके लिए आपको अपने डॉक्टर से मिल कर पंचकर्म थेरिपी को प्लान करना होगा। पंचकर्म कराने के लिए आपको डॉक्टर के पास जाना होगा, जहां पर प्रभावित स्थान पर तेल के द्वारा सिकाईं की जाएगी। चने के आटे की लोई बना कर कमर पर एक घेरा बनाया जाएगा।
इसके बाद उसमें महानारायण तेल डाला जाएगा, फिर ऊपर से एक इलेक्ट्रिक बल्ब को लटाकाया जाएगा। जिसकी गर्माहट से तेल धीरे-धीरे गर्म हो जाएगा और फिर ज्यादा गर्म होने पर तेल को चम्मच की सहायता से निकाल लिया जाएगा। इससे कमर दर्द में काफी राहत मिलती है।
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अग्नि कर्म
अग्नि कर्म को करने के लिए एक उपकरण का सहारा लिया जाता है। जिसे गर्म किया जाता है और कमर दर्द वाले स्थान पर सीधे रख कर सिकाईं की जाती है।
कमर दर्द का आयुर्वेदिक इलाज निम्न जड़ी बूटियों के द्वारा किया जाता है :
सोंठ
सोंठ सूखी हुई अदरक होती है, जिसके सेवन से पाचन तंत्र, श्वसन तंत्र और वात दोष संबंधी समस्या से राहत मिलती है। सोंठ को सेंधा नमक के साथ सेवन करने से वात दोषों में कमी आती है। सोंठ को काढ़े, अर्क, पाउडर, टैबलेट, रस आदि के रूपों में सेवन किया जा सकता है, जिससे आपको कमर दर्द में राहत मिलेगी।
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अरंडी
अरंडी को अंग्रेजी में कैस्टर कहते हैं। अरंडी हर मायने में बहुत फायदेमंद होता है। अरंडी का तेल या कैस्टर ऑयल से मालिश करने पर कमर दर्द में राहत मिलती है। अरंडी के पाउडर या गोली का सेवन करने से भी कमर दर्द में राहत मिलती है।
लहसुन
लहसुन पेट संबंधी समस्या के लिए एक बेहतरीन औषधि मानी जाती है। इससे आपकी अमा घटेगी और वात दोष भी कम होंंगे। आप चाहें तो लहसुन को सरसों के तेल में पका कर रोजाना एक बार सेवन कर सकते हैं। इसके अलावा इसका रस, पाउडर, अर्क, पेस्ट और टैबलेट भी बाजारों में मौजूद है।
रासना
रासना एक जड़ी-बूटी है, जो आर्थराइटिस के लिए एक बेहतरीन औषधि मानी जाती है। इसमें एंटी-इन्फ्लमेटरी गुण पाए जाते हैं जो कमर दर्द के कारण होने वाली सूजन से राहत दिलाती है।
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कमर दर्द का आयुर्वेदिक इलाज निम्न औषधियों के द्वारा किया जाता है :
सिंहनाद गुग्गुल
सिंहनाद गुग्गुल कमर दर्द और वात दोषों के लिए एक अच्छी औषधि है। कमर दर्द के लिए सिंहनाद गुग्गुल की एक से दो गोलियों को पानी के साथ दिन में तीन बार ले सकते हैं। इसके अलावा अपने डॉक्टर के परामर्श पर ही सिंहनाद गुग्गुल खाएं।
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योगराज गुग्गुल
योगराज गुग्गुल एक ऐसी औषधि है, जिसे कफ, वात और पित्त तीनों दोषों का इलाज करने की क्षमता होती है। डॉक्टर की सलाह पर आप योगराज गुग्गुल की दो गोलियां दिन में दो या तीन बार खा सकते हैं। कमर दर्द में योगराज गुग्गुल के सेवन से काफी राहत मिलता है।
त्रयोदशांग गुग्गुल
त्रयोदशांग गुग्गुल को कमर दर्द के लिए अच्छी औषधि के रूप में जाना जाता है। आप दो से चार गोलियों को डॉक्टर के परामर्श पर दिन में तीन बार गुनगुने पानी से सेवन कर सकते हैं। इसके सेवन से कमर दर्द में राहत मिलती है।
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बालारिष्ट
बालारिष्ट एक प्रकार का सिरप होता है, जो अश्वगंधा, गुड़, अरंडी की जड़, लौंग, इलायची आदि जड़ी-बूटियों से मिला कर बनाया जाता है। बालारिष्ट वात असंतुलन को संतुलित करता है, जिससे कमर दर्द में राहत मिलती है।
दशमूल कषाय
दशमूल कषाय दस जड़ी-बूटियों से बना एक काढ़ा होता है, जो बेल, कथेरी, कलशी आदि बूटियों के मिलने से बना होता है। दशमूल कषाय गठिया रोग और कमर दर्द के लिए एक बेजोड़ इलाज है। इसका सेवन दो महीने तक दिन में दो बार करने से पुराने कमर दर्द में राहत मिलती है।
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कमर दर्द का आयुर्वेदिक इलाज निम्न योगासन के द्वारा किया जाता है :
मार्जरासन
कमर दर्द के लिए इस योगासन को काफी फायदेमंद माना गया है। इस आसन की मदद से कमर की मांसपेशियों की अकड़न को दूर किया जा सकता है। मार्जरासन को निम्न स्टेप्स से करें :
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बालासन
बालासन को चाइल्ड पोज आसन के नाम से भी जाना जाता है। कमर दर्द को दूर करने के लिए इसे काफी फायदेमंद माना गया है। इसे निम्न तरीके से करते हैं :
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आयुर्वेद के अनुसार कमर दर्द के लिए डायट और लाइफ स्टाइल में बदलाव बहुत जरूरी है। हेल्दी लाइफ स्टाइल और हेल्दी खाने के लिए :
क्या करें?
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क्या ना करें?
कमर दर्द का आयुर्वेदिक इलाज आप ऊपर बताए गए तरीकों से कर सकते हैं। लेकिन आपको ध्यान देना होगा कि आयुर्वेदिक औषधियां और इलाज खुद से करने से भी सकारात्मक प्रभाव नहीं आ सकते हैं। इसलिए आप जब भी कमर दर्द का आयुर्वेदिक इलाज के बारे में सोचें तो डॉक्टर का परामर्श जरूर ले लें। उम्मीद करते हैं कि आपके लिए कमर दर्द का आयुर्वेदिक इलाज की जानकारी बहुत मददगार साबित होगी।
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डिस्क्लेमर
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Current Version
12/10/2020
Shayali Rekha द्वारा लिखित
के द्वारा एक्स्पर्टली रिव्यूड डॉ. पूजा दाफळ
Updated by: Surender aggarwal