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पेशाब संबंधित बीमारियां होने पर क्या संकेत दिखते हैं

पेशाब संबंधित बीमारियां होने पर क्या संकेत दिखते हैं

हमारे शरीर से वेस्ट मटेरियल और अतिरिक्त लिक्विड पेशाब के सहारे बाहर निकलता है। दरअसल, पेशाब के निर्माण में पूरा यूरिनरी ट्रैक्ट सिस्टम कार्य करता है। जिसमें, किडनी, यूरेटर, ब्लैडर और यूरेथ्रा शामिल होता है। इनमें से किसी भी अंग में बीमारी या संक्रमण होने से पेशाब संबंधित बीमारियां हो सकती है। पेशाब संबंधित बीमारियां पुरुष, महिला या बच्चे किसी को भी हो सकती है। इस आर्टिकल में जानें पेशाब संबंधित बीमारियां और उनसे होने वाले लक्षणों के बारे में

मुख्य पेशाब संबंधित बीमारियां कौन सी हैं? (What are the main urinary related diseases?)

पेशाब संबंधित बीमारियां कई हो सकती हैं जैसे-

और पढ़ें : किडनी इन्फेक्शन क्या है? जानिए इसके लक्षण, कारण और इलाज

यूरिनरी इनकॉन्टिनेंस (Urinary incontinence)

जब ब्लैडर का नियंत्रण असंयमित हो जाता है, तो इस स्थिति को यूरिनरी इनकॉन्टिनेंस कहते हैं। जिस वजह से अनचाहा यूरिन लीकेज होने लगता है। यह पेशाब संबंधित बीमारियां किसी के सामने शर्मिंदगी का कारण बन सकती है, लेकिन यह बहुत ही आम समस्या है। जो कि कई कारणों की वजह से हो सकती है। डायबिटीज, ओवरएक्टिव ब्लैडर, प्रेग्नेंसी या डिलीवरी, ब्लैडर की कमजोर मसल्स, यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन, स्पाइनल कॉर्ड में चोट आदि होने की वजह से पेशाब की यह समस्या हो सकती है।

बिनाइन प्रोस्टेटिक हाइपरप्लासिया (Benign Prostatic Hyperplasia; BPH)

प्रोस्टेट ग्लैंड के अत्यधिक बढ़ जाने की स्थिति को बिनाइन प्रोस्टेटिक हाइपरप्लासिया कहा जाता है। यह समस्या अधिक उम्र के पुरुषों में काफी आम होती है। प्रोस्टेट के बढ़ने से यूरेथ्रा पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। यूरेथ्रा एक पतली ट्यूब होती है, जो कि ब्लैडर से पेशाब को शरीर से बाहर निकालती है। इस समस्या की वजह से पुरुषों को बार-बार पेशाब आने की समस्या हो सकती है। इस समस्या के गंभीर मामलों में सर्जरी की आवश्यकता भी पड़ सकती है।

और पढ़ेंः World Kidney Day: खुद से इन दवाओं का सेवन करना आपकी किडनी पर पड़ सकता है भारी

किडनी और यूरेटरल स्टोन (Kidney and ureteral stones)

जब किडनी में फिल्टर न हो पाने की वजह से मिनरल या अन्य तत्व क्रिस्टल का रूप ले लेते हैं, तो उसे किडनी में पथरी कहा जाता है। इसके साथ ही, जब यह पथरी किडनी से निकलकर यूरेटर में पहुंच जाती है, तो उसे यूरेटरल स्टोन कहा जाता है। यह पथरी आपके पेशाब के रास्ते को ब्लॉक कर सकती है, जिससे काफी गंभीर दर्द महसूस हो सकता है। छोटी पथरियों को शरीर से निकालने के लिए कई बार चिकित्सा सहायता की जरूरत नहीं पड़ती है, लेकिन जब यह पथरी आकार में बड़ी हो जाती हैं, तो इसे निकालने के लिए कई बार सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है।

यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (यूटीआई)

जब यूरिनरी ट्रैक्ट में पैथोजेनिक बैक्टीरिया या वायरस विकसित होने लगते हैं, तो इसे यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन कहा जाता है। यह समस्या पुरुषों से ज्यादा महिलाओं में होती है। इस समस्या में पेशाब करते हुए आपको काफी जलन का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा, आपको बार-बार महसूस हो सकता है कि आपको पेशाब आ रहा है। आमतौर पर, पांच से सात दिन एंटीबायोटिक्स का सेवन करने से इस समस्या का उपचार किया जा सकता है। यूटीआई की समस्या उम्र, डायबिटीज, कमजोर इम्यून सिस्टम, यूरिनरी ट्रैक्ट में ब्लॉकेज आदि की वजह से हो सकती है। जिसकी, ब्लड टेस्ट, अल्ट्रासाउंड, सिस्टोस्कोपी या सीटी स्कैन की मदद से जांच की जा सकती है।

और पढ़ेंः किडनी की बीमारी कैसे होती है? जानें इसे स्वस्थ रखने का तरीका

अन्य पेशाब संबंधित बीमारियां या समस्याएं क्या हैं?

ऊपर बताई गई तमाम पेशाब संबंधित समस्याओं के अलावा और भी कई परेशानियां यूरिन संबंधित दिक्कते पैदा कर सकती हैं। जैसे-

  • इरेक्टाइल डिस्फंक्शन (Erectile Dysfunction)
  • ओवरएक्टिव ब्लैडर (Overactive bladder)
  • प्रोस्टेटिटिस (Prostatitis)
  • प्रोस्टेट कैंसर (Prostate cancer)
  • ब्लैडर कैंसर (Bladder cancer)
  • ब्लैडर प्रोलैप्स (Bladder Prolapse)
  • पेनफुल ब्लैडर सिंड्रोम (Painful bladder syndrome)
  • हेमाट्यूरिया (hematuria)

पेशाब संबंधित बीमारियों को कैसे पहचान सकते हैं?

जब शरीर में पेशाब संबंधित परेशानियां या बीमारियां होती हैं, तो हमारा शारीरित तंत्र कई संकेत देता है। जिससे, हम अनुमान लगा सकते हैं कि हमें पेशाब संबंधित बीमारियां हो सकती हैं। हालांकि, यूरिनरी सिस्टम में अलग-अलग परेशानियों की वजह से संकेत भी विभिन्न हो सकते हैं। आइए, इन संकेतों के बारे में जानते हैं।

  • यूरिन के दौरान जलन होना (Irritation during urine)
  • बार-बार पेशाब आना, लेकिन हर बार ब्लैडर का पूरी तरह खाली न हो पाना (Frequent urination)
  • पेशाब में खून आना (blood in urine)
  • दबाव के साथ पेशाब आना (Urination with pressure)
  • पेशाब में झाग बनना (Foaming in urine)
  • पेशाब का रंग ब्राउन या लाल होना (The color of urine is brown or red)
  • पेशाब में काफी गंध आना (Smell in urine)
  • पुरुषों में रेक्टल दर्द होना (Rectal pain in men)
  • महिलाओं में पेल्विक दर्द होना (Pelvic pain in women)
  • बुखार (Fever)
  • जी मिचलाना (Nausea)
  • उल्टी (Vomiting)
  • शारीरिक थकान (Fatigue)

और पढ़ेंः पेशाब में संक्रमण क्यों होता है? जानें इसके कारण और इलाज

पेशाब संबंधित बीमारियों को कैसे डायग्नोज किया जाता है?

यदि आपके चिकित्सक को यूटीआई या इनकॉन्टिनेंस का संदेह है, तो प्रारंभिक जांच के बाद डॉक्टर आपके यूरिन सैंपल देने के लिए कहेंगे। यूरिनरी इनकॉन्टिनेंस के लिए रक्त के निशान, असामान्यताओं और संक्रमण के लिए यूरिन की जांच की जाएगी। डॉक्टर आपको आपने कितना पानी लिया, यूरिन करते समय पेशाब की मात्रा और यूरिन करने की इच्छा का ए रिकॉर्ड बनाने के लिए कह सकते हैं। इसके बाद अगला स्टेप है पोस्ट वोएडल यूरिन। यूरिन करने के बाद आपके ब्लेडर में बचे यूरिन को मापेंगे। इससे यह पता लगाया जाएगा कि कहीं कोई यूरिन ब्लॉकेज तो नहीं है। इन टेस्ट के बाद डॉक्टर यूरिनरी सिस्टम में क्या प्रॉब्ल्म है, इससे जुड़ी जानकारी देंगे।

पेशाब संबंधित बीमारियां दूर करने के लिए टिप्स

हम जीवनशैली या डायट से जुड़े कुछ टिप्स अपनाकर आप पेशाब संबंधित बीमारियोंसे बच सकते हैं। आइए, इन टिप्स के बारे में जानते हैं।

  1. यूटीआई या पेशाब संबंधित बीमारियों से बचने के लिए आप खूब पानी पिएं। जिससे शरीर में मौजूद सभी बैक्टीरिया आसानी से शरीर से बाहर निकल जाता है। अगर आप शरीर को हाइड्रेट रखेंगे, तो आपको जल्दी-जल्दी पेशाब आएगा और इस तरह आप यूरिनरी ट्रैक्ट में किसी भी बैक्टीरिया को विकसित होने से रोक सकते हैं।
  2. अगर आप मल त्यागने के बाद हिप्स के साथ पेनिस या वजायना को भी साफ करेंगे, तो इससे यूरेथ्रा तक बैक्टीरिया पहुंचने की आशंका कम हो जाती है।
  3. सेक्स की वजह से भी कई लोगों में यूटीआई की समस्या हो जाती है। इससे बचने के लिए आप, सेक्स से पहले अपने जननांगों की अच्छे से साफ-सफाई करें और सेक्स के बाद पेशाब जरूर करें। जिससे, अगर कोई भी बैक्टीरिया आपके जननांगों के संपर्क में आता है, तो वह शरीर से बाहर निकाला जा सके।
  4. बर्थ कंट्रोल के तरीकों के चुनाव के समय का काफी ध्यान रखना होगा। क्योंकि, डायाफ्राम या स्पर्मीसाइड कॉन्डम की वजह से यूटीआई की आशंका बढ़ सकती है। क्योंकि, यह चीजें बैक्टीरियल ग्रोथ में मदद कर सकती हैं। अगर, आप इनमें से कोई चीज इस्तेमाल करते हैं और आपको यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन होता रहता है, तो आपको वजाइनल ड्राईनेस को दूर करने के लिए वाटर बेस्ड ल्यूब्रीकेंट की तरफ स्वीच करना चाहिए या बर्थ कंट्रोल के मेथड को बदलने के लिए डॉक्टर की मदद लेनी चाहिए।
  5. इसके अलावा, आप यूटीआई से बचने के लिए क्रैनबेरी जूस का सेवन कर सकते हैं, जिससे यूटीआई से बचाव में मदद मिलती है।
  6. डायट में नमक और कैफीन की मात्रा कम करें।
  7. अगर आप स्मोक करते हैं, तो इसे बिल्कुल छोड़ दें।
  8. रात को सोने से पहले तरल पदार्थों का सेवन संयमित कर दें।
  9. पेशाब का प्रेशर होने पर ज्यादा देर तक रोकना नहीं चाहिए। क्योंकि, लंबे समय तक ब्लैडर में यूरिन रहने से बैक्टीरिया के पनपने की आशंका बढ़ जाती है।

उम्मीद करते हैं आपको हमारा यह लेख पसंद आया होगा। हैलो हेल्थ के इस आर्टिकल में पेशाब संबंधित बीमारियां से जुड़ी जानकारी देने की कोशिश की गई है। यदि आप इससे जुड़ी अन्य जानकारी पाना चाहते हैं तो बेहतर होगा इसके लिए किसी विशेषज्ञ से संपर्क करें।

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

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Surender aggarwal द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 29/08/2020 को
डॉ. हेमाक्षी जत्तानी के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
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