ओरल कैंसर (Oral Cancer) क्या है? जानें इसके लक्षण और रोकथाम के उपाय।

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अपडेट डेट September 27, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
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ओरल कैंसर एक जानलेवा बीमारी नहीं है बशर्ते, इसके लक्षणों को जल्द से जल्द पहचान कर इलाज सही वक्त पर शुरू कर देना चाहिए। इंडिया अगेंस्ट कैंसर की रिपोर्ट के अनुसार भारत में सभी तरह के कैंसरों का लगभग एक तिहाई हिस्सा ओरल कैंसर (Oral Cancer) से पीड़ित है। ओरल कैंसर होंठ से लेकर टॉन्सिल्स तक के हिस्से को प्रभावित करता है।     

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) के अनुसार साल पुरे देश में कैंसर के मामले 60 प्रतिशत तक बढ़ें हैं। वहीं अगर बात सिर्फ भारत की करें तो यहां 1.16 मिलियन नय कैंसर पेशेंट देखे गए हैं। एक अनुमान के मुताबिक भारत में 10 में से 1 वयक्ति कैंसर से पीड़ित है और 15 कैंसर मरीजों में 1 व्यक्ति की मौत कैंसर की वजह से ही होती है। भारत में साल 2018 में 784,800 लोगों की जान कैंसर की वजह से गई।

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मौखिक कैंसर (Oral Cancer) के क्या लक्षण हैं?

ओरल कैंसर के लक्षण निम्नलिखित हो सकते हैं। जैसे-

  • मुंह के (होंठ से टॉन्सिल तक) अंदर सूजन आना
  • मुंह में गांठ बनना
  • पपड़ी बनना या फिर मसूड़ों पर कटे का निशान आना 
  • मुंह में लाल या सफेद पैच का निशान पड़ना
  • मुंह से किसी भी वक्त खून आना
  • मुंह में दर्द होना और चेहरे या गर्दन की त्वचा बहुत ज्यादा सॉफ्ट हो जाना
  • चेहरे, गर्दन या मुंह में घाव होना और घाव का जल्दी ठीक न होना और फिर से दुबारा होने की संभावना होना या बार-बार घाव होना 
  • चबाने, निगलने, बोलने, जबड़े या जीभ को हिलाने में भी कठिनाई महसूस हो सकती है 
  • गले में खराश या आवाज में बदलाव आना 
  • कान में दर्द महसूस होना
  • अचानक से वजन कम हो जाना     
  • परिवार में किसी को पहले ओरल कैंसर हुआ हो (जेनेटिकल)
  • एचपीवी के संक्रमण से भी ओरल कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। यह खासकर युवा वर्ग में ज्यादा होता है

इन लक्षणों के अलावा अन्य लक्षण भी हो सकते हैं। इसलिए किसी भी तरह के नकारात्मक बदलाव महसूस होने पर नजरअंदाज न करें।

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ओरल कैंसर (Oral Cancer) की रोकथाम कैसे करें ?

  • तम्बाकू, गुटखा और सिगरेट का सेवन बंद करें। ओरल कैंसर तम्बाकू, गुटखा और सिगरेट पीने वालो में ज्यादा होता है। 
  • अल्कोहल का सेवन नहीं करना चाहिए। शराब न पीने वालो की तुलना में पीने वाले लोगों में ओरल कैंसर होने की संभावना लगभग छह गुना अधिक बढ़ जाती है।
  • ताजे फल और हरी सब्जियों का सेवन सेहत के साथ-साथ किसी भी बीमारी से लड़ने में सहायक होता है।  
  • जंक फूड और पैक्ड जूस का सेवन नहीं करना चाहिए। 

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खुद से ओरल कैंसर (Oral Cancer) की जांच कैसे करें? 

ओरल कैंसर की जांच खुद से भी की जा सकती है। यह जांच आपको शीशे के सामने खड़े होकर तेज रोशनी में अपने मुंह की जांच करें। इससे मुंह में हो रहे बदलावों को समझने में आसानी होगी। 

  • सबसे पहले हाथों को साफ करें। 
  • उंगली की मदद से मुंह के अंदर हल्का दवाब डालें और महसूस करें कि क्या किसी तरह की परेशानी हो रही है?
  • सिर को पीछे की ओर झुकाएं और मुंह के ऊपरी हिस्से की जांच करें। 
  • मसूड़ों को भी ध्यान से देखें और किसी भी तरह के बदलाव को समझने की कोशिश करें। 
  • जीभ की भी ठीक तरह से जांच करें। 
  • गर्दन के दोनों साइड ध्यान से देखें और उंगली की मदद से बढ़े हुए मांस या नोड्स को महसूस करें। 

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ओरल कैंसर से बचाव के लिए हाइजीन का ध्यान कैसे रखें?

ओरल कैंसर होने पर हाइजीन का ध्यान निम्नलिखित तरह से किया जा सकता है। जैसे –

ओरल केयर का सबसे अच्छा तरीका है कि दांतों की दो बार ब्रश से अच्छी तरह से सफाई करें। इससे प्लाक के जमने की संभावना न के बराबर होती है। प्लाक दांतों और मसूढ़ों के बीच एक चिपचिपी परत की तरह जमता रहता है। यह खाने के छोटे-छोटे कण होते हैं जो ब्रश करने के बावजूद नहीं निकलते हैं। यह प्लाक दांतों और मसूढ़ों को खराब कर कैविटी और सूजन (गिंगिवाइटिस) का कारण बनता है। नियमित रूप से ब्रश न करने पर यह परत और भी ठोस होने लगती है। इसलिए एक दिन में दो बार ब्रश अवश्य करना चाहिए। ब्रश दो से तीन मिनट से ज्यादा देर न करें नहीं तो इससे भी दांतों को नुकसान पहुंच सकता है।

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ओरल हाइजीन का ध्यान रखने के लिए फ्लोराॅइड युक्त टूथपेस्ट का ही इस्तेमाल करें। इससे दांतों की बाहरी परत इनेमल को मजबूत रहती है और दांतों को सड़न से बचाने में भी मदद मिलती है। यही नहीं अगर आप माउथवॉश का इस्तेमाल करते हैं, तो फ्लोराइड युक्त माउथवॉश का ही चयन करें। अकसर लोग माउथवॉश का इस्तेमाल ब्रश करने के बाद करते हैं लेकिन, ऐसा नहीं करना चाहिए। माउथवॉश का इस्तेमाल पहले करें और फिर ब्रश करें।

टूथपेस्ट बेहतर क्वॉलिटी का होने के साथ-साथ टूथब्रश का भी चुनाव ठीक से करें। टूथब्रश खरीदते वक्त ध्यान रखें कि ब्रश के ब्रिसल्स मुलायम हों, जिससे दांतों की सफाई भी हो जाए और मसूड़ों को नुकसान भी न पहुंचे। हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार ढ़ाई से तीन महीने के अंतराल के बाद नय टूथब्रश का इस्तेमाल करें।

दांतों की सफाई के लिए जिस तरह से फ्लोराइड युक्त टूथपेस्ट, सॉफ्ट टूथब्रश के आवश्यकता होती है ठीक वैसे ही फ्लॉसिंग का भी इस्तेमाल करने बेहद जरूरी होता है। दरअसल मुंह में दांतों और मसूढ़ों के अलावा ऐसी कई जगह हैं जहां ब्रश ठीक तरह से नहीं पहुंच पाता है। इन जगहों की सफाई के लिए फ्लॉसिंग का इस्तेमाल करना सही विकल्प माना जाता है जो दांतों के बीच के हिस्से में पहुंचकर खाद्य पदार्थों के अवशेषों को पूरी तरह से बाहर निकालने में मददगार होता है।

इन सबके साथ-साथ किसी भी खाद्य पदार्थों के सेवन के बाद मुंह की सफाई अच्छी तरह से करें। दांतों और मुंह की सफाई रखना बेहद जरूरी होता है क्योंकि इसके कारण न केवल ओरल कैंसर जैसी गंभरी बीमारियां बल्कि कई छोटे रोग भी आपको परेशान कर सकते हैं।

ओरल कैंसर से जुड़े एक्सपर्ट्स का मानना है कि कैंसर का इलाज कैंसर के पहले और दूसरे स्टेज में करने से इससे आसानी से लड़ा जा सकता है। हालांकि, यह ध्यान रखना बहुत जरूरी है कि मुंह में हो रहे किसी भी तरह के बदलाव को ज्यादा समय तक नजरअंदाज करना ठीक नहीं होता है। इसलिए कोई भी पीड़ा या परेशानी होने पर डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना बेहतर होगा। यही नहीं अगर आप ओरल कैंसर से जुड़े किसी तरह के कोई सवाल का जवाब जानना चाहते हैं तो विशेषज्ञों से समझना बेहतर होगा।

हैलो हेल्थ ग्रुप चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार प्रदान नहीं करता है

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