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बच्चे को सुनाई देना कब शुरू होता है?

बच्चे को सुनाई देना कब शुरू होता है?

कई लोगों का सवाल रहता है कि बच्चे को सुनाई देना कब शुरू होता है। वैसे तो बच्चा जब मां के गर्भ में छह महीने से अधिक बड़ा हो जाता है, तभी से मां की आवाज को सुनने लगता है। गर्भ में पल रहे बच्चे को खासतौर पर सिर्फ मां की ही आवाज सुनाई देती है, क्योंकि वह मां की आवाज को ही सबसे करीब से सुनता है। हालांकि, वह मां के गर्भ में ही मां के दिल की धड़कन, मां के पाचन तंत्र की आवाज और यहां तक कि परिवार के अन्य सदस्यों की आवाजें भी सुन सकता है। इसके अलावा बहुत तेज शोर भी गर्भ में पल रहे बच्चे को सुनाई देना शुरू हो जाता है। शायद यही एक वजह भी है कि शिशु जन्म के बाद मां की आवाज से ही मां को सबसे पहले पहचानना शुरू करता है। तो चलिए यहां पर इस बारे में जानते हैं कि जन्म के बाद बच्चे को सुनाई देना कब शुरू होता है।

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जन्म के बाद बच्चे को सुनाई देना कब शुरू होता है?

जन्म के बाद ही बच्चों में कई तरह के शारीरिक विकास होते हैं। जिनमें इम्यून सिस्टम, रंगों को देखने के लिए आंखो का विजन, हड्डियों को मजबूती, पेट का विकास, मांसपेशियों का विकास और सुनने की प्रक्रिया भी शामिल होती है। वैसे तो आपके बच्चे के कान जन्म के समय ही पूरी तरह से विकसित होते हैं, लेकिन यह पूरी तरह से सुनने और ध्वनियों को समझने में कम से कम छह महीने तक का समय ले सकते हैं, यानी जन्म के छह महीने बाद से बच्चे को सुनाई देना शुरू हो जाता है।

जन्म के तुरंत बाद बच्चे को सुनाई देना क्यों संभव नहीं है?

दरअसल, जन्म के बाद बच्चे को सुनाई देना शुरू नहीं होता है, इसके पीछे कुछ खास कारण होते हैं। जो दो चरणों में होते हैं-

  1. पहला चरणः सबसे पहले, जन्म के समय, बच्चे के कानों में एक तरह का तरल पदार्थ भरा होता है। जिसमें पूरी तरह से साफ होने में कुछ समय लग सकता है।
  2. दूसरा चरणः दूसरा यह कि, बच्चे के ब्रेन के कुछ भाग जो आवाजों को सुनने और उनपर प्रतिक्रिया करने का कार्य करते हैं, उनका विकास अभी तक हुआ नहीं होता है। ब्रेन के कई भाग शिशु के जन्म के बाद धीरे-धीरे विकसित होते है। इस वजह से कई तरह की शारीरिक क्रियाएं भी अपने कार्य को सुचारू रूप से करने में समय लेती हैं।

हालांकि, सुनने की इतनी प्रक्रिया होने के बाद भी नवजात शिशु कई तरह की आवाजों पर तुरंत रिएक्ट करते हैं। छोटे बच्चे खासतौर पर मां की आवाज के साथ ही बहुत ही कोमल आवाज और फैमिलियर आवाज को सुनने पर अपनी प्रक्रिया जरूर करते हैं। इसके अलावा जब भी कोई छोटे बच्चे को खिलाता है तो आवाज के साथ-साथ वो व्यक्ति चेहरे से भी अपने भाव को जाहिर करता है, जिसकी वजह से बच्चे हंसते और तरह-तरह के रिएक्शन भी करते हैं।

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बच्चे को सुनाई देने की प्रक्रिया कैसे विकसित होती है?

अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑन डेफनेस एंड अंडर कम्युनिकेशन डिसऑर्डर (एनआईडीसीडी) के अनुसार बच्चे को सुनाई देने की प्रक्रिया कैसे शुरू होगी यह बच्चे के विकास और पोषण पर निर्भर करता है। बच्चे को सुनाई देना बच्चे के विकास के अलग-अलग चरण के दौरान होता है, जिसमें शामिल हैंः

नवजात शिशु

जन्म के तुंरत बाद से ही, नवजात बच्चे तरह-तरह की आवाजों पर विशेष रूप से अपना ध्यान केंद्रित करने लगते हैं। नवजात शिशु विशेषकर तेज आवाजों को सुनने पर ज्यादा जोर देते हैं। इसके अलावा बहुत ही मधुर आवाज जैसे किसी की आवाज में लोरी सुनना, ताली बजाना या धीरे-धीरे हंसी के साथ किसी के बात करने की प्रक्रिया को नवजात शिशु बहुत जल्दी रिएक्ट करते हैं।

3 महीने के बच्चे को सुनाई देना

जब तक आपका बच्चा तीन महीने तक का होता है, तब तक बच्चे के ब्रेन का वह हिस्सा जो सुनने, बोलने और सूंघने में मदद करता है, उसका विकास कर चुका होता है। ब्रेन के इस हिस्से को टेम्पोरल लोब कहा जाता है। आपने देखा भी होगा कि तीन माह तक के बच्चे थोड़ा-बहुत बात करने का प्रयास भी करना शुरू कर देते हैं। इस दौरान बच्चे कितनी तरह की बोली सुनते हैं उसे ही समझना और बोलना भी सीखते हैं। इसलिए, तीन माह के बच्चों को खिलाते समय आप उससे थोड़ी बहुत बातें भी कर सकते हैं। हालांकि, अगर बच्चे तीन माह के होने पर भी किसी भी तरह की आवाज पर कोई रिएक्ट नहीं करते हैं, यानि कान से कम सुनते हैं तो आपको अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। कुछ स्थितियों में यह समस्या गंभीर भी हो सकती है।

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4 महीने के बच्चे को सुनाई देना

चार महीने का शिशु आपको हर तरह की आवाजों पर अपनी प्रतिक्रिया देने के लिए काफी उत्साहित हो सकता है। आपकी आवाज पर हंसने और रोने की भी प्रतिक्रिया देना शुरू कर देते हैं। इस दौरान बच्चे मां या अन्य आस-पास के अन्य व्यक्तियों द्वारा बोले गए शब्दों को दोहारने का भी प्रयास करते हैं। आपने अक्सर देखा भी होगा कि छोटे बच्चे जब बोलना शुरू करते हैं, तो उनका पहला अक्षर “एम” और “बी” जैसे हो सकते हैं। इसके बाद मम्मा, प्पपा जैसे शब्द बोलना शुरू करते हैं।

6 से 7 महीने के बच्चे को सुनाई देना

छह महीने या सात महीने के छोटे बच्चे अक्सर बोलने के लिए उतावले रहते हैं। इस दौरान वे यह सीख लेते हैं कि आवाज कहां से आती है। साथ ही, वे अपने करीबीयों की आवाज भी दूर से ही पहचान सकने में सक्षम भी हो जाते हैं।

1 साल के बच्चे को सुनाई देना

एक साल तक का बच्चा अपने पसंदीदा और न पसंद आवाजों को बहुत अच्छे से पहचानना शुरू कर सकता है। इस दौरान आप बच्चे को बहलाने फुसलाने के लिए उसकी पसंद का गाना, लोरी या वीडियो का भी इस्तेमाल बखूबी कर सकते हैं। कुछ बच्चे एक साल की उम्र तक कुछ शब्दों को साफ-साफ बोलना भी शुरू कर सकते हैं। हालांकि, हर बच्चों के मामले में यह अलग-अलग हो सकता है, जिसमें आनुवांशिकता भी शामिल हो सकती है।

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कैसे जानें कि आपका शिशु आवाजों को साफ सुन सकता हैं?

बच्चे की सुनने क्षमता कैसी है इसका अनुमान आप शिशु की बढ़ती उम्र के साथ लगा सकते हैं। आपकी और अन्य लोगों की तरह-तरह की आवाजों पर वो कैसे रिएक्ट करते हैं, आपको इन बातों को नोटिस करने की जरूरत हो सकती है। हालांकि, इस बात की पुष्टि के लिए आप डॉक्टरी सलाह पर कई तरह के टेस्ट भी करवा सकते हैं। इसके अलावा, इस बात का भी ध्यान रखें कि जब भी बच्चे सोते रहते हैं, तो उन्हें फोन की घंटी, गाड़ी की आवाज या डोरबेल जैसी आवाज नहीं सुनाई देती है क्योंकि, छोटे बच्चे वयस्कों की तुलना में अधिक गहरी नींद में सोते हैं।

शिशु की सुनने की क्षमता को प्रभावित करने वाले जोखिम क्या हो सकते हैं?

ऐसी कई स्थितियां हैं, तो बच्चे के सुनने की क्षमता को प्रभावित कर सकती हैं। इसके लिए आपको विशेष ध्यान भी रखना चाहिए, जिनमें शामिल हैंः

  • चिल्ला-चिल्ला कर बात करना
  • जन्म के दौरान ऑक्सीजन की कमी
  • समय से पहले बच्चे की डिलीवरी होना
  • बहुत तेज आवाज में गाने बजाना, जैसे डीजे और पटाखों का शोर
  • किसी तरह का आनुवंशिक विकार
  • प्रेग्नेंसी के दौरान महिला को रूबेला जैसे इंफेक्शन होना
  • बच्चे के सिर में चोट लगना
  • कान का संक्रमण
  • क्यू-टिप्स या ईयरबड्स के कारण एर्ड्रम्स को नुकसान पहुंचना

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बच्चे की सुनने की क्षमता कैसे बढ़ाएं?

आप अपने बच्चे की सुनने की क्षमता बढ़ाने के लिए निम्न तरीकों अपना सकती हैंः

  • बच्चे को नई आवाज सुनाना, जैसे किसी तरह की कविता या गाना
  • बच्चे जिस भी ध्वनि के साथ खेलने की इच्छा जाहिर करे, उसे उस ध्वनि को बार-बार सुनाना
  • उसके उम्र के दूसरों बच्चों के साथ रखना
  • बच्चे को सुलाते या ब्रेस्टफीडिंग कराते समय लोरी या कविता सुनाना।

अगर बच्चे को सुनाई देने में परेशानी हो तो उसे कैसे समझें?

आमतौर पर जब बच्चे नींद से भूख या किसी तरह की तेज आवाज से डर कर जागते हैं। अगर बच्चा जागने के बाद खेलता है, तो यह भी सामान्य स्थिति होती है। लेकिन, अगर बच्चा जागा हुआ है और मां की आवाज या आस-पास की आवाज पर किसी तरह की प्रक्रिया नहीं करता है, तो इसके बारे में डॉक्टर को बताना चाहिए।

हैलो स्वास्थ्य किसी भी तरह की कोई भी मेडिकल सलाह नहीं दे रहा है। अगर इससे जुड़ा आपका कोई सवाल है, तो अधिक जानकारी के लिए आप अपने डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं।

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सूत्र

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Ankita mishra द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 24/07/2020 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड