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बच्चों में डिस्लेक्सिया: इस तरह की डायट से किया जा सकता है कंडिशन को मैनेज

बच्चों में डिस्लेक्सिया: इस तरह की डायट से किया जा सकता है कंडिशन को मैनेज

बच्चों में डिस्लेक्सिया (Dyslexia in Kids) होने पर उन्हें पढ़ने, लिखने और उच्चारण करने में परेशानी होती है। साथ ही उनकी मेमोरी अच्छी नहीं रहती है, मैथमेटिक्स और फोकस करने में भी उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। स्पेशलिस्ट टीचिंग और कुछ स्ट्रेटजी की मदद से स्थिति पर काफी हद तक काबू पाया जा सकता है।डिस्लेक्सिया का कारण लैंग्वेज बेस्ड इंफॉर्मेशन (Language based information) को प्रॉसेस करने में होने वाली कमजोरी से होता है। यह जेनेटिक भी हो सकती है यानी परिवार के एक सदस्य को होने पर दूसरे में इसके होने का रिस्क रहता है, लेकिन इसमें एंवायरमेंटल फैक्टर्स (Environmental factors) जैसे कि न्यूट्रिशन भी योगदान करते हैं। बच्चों में डिस्लेक्सिया बौद्धिक क्षमता के किसी भी स्तर पर हो सकता है। यह उनमें मोटिवेशन की कमी, इमोशनल डिस्टर्बेंस और अवसरों की कमी का परिणाम नहीं है, लेकिन यह इनमें से किसी भी एक के साथ हो सकता है।

बच्चों में डिस्लेक्सिया के लक्षण (Symptoms of dyslexia in children)

बच्चों में डिस्लेक्सिया (Dyslexia in Kids) के लक्षण हल्के से लेकर गंभीर तक हो सकते हैं और हर बच्चे में ये भिन्न हो सकते हैं। डिस्लेक्सिया वाले अनुमानित 25% बच्चों में एडीएचडी भी होता है। यहां कुछ कॉमन लक्षणों के बारे में बताया जा रहा है। बच्चों में डिस्लेक्सिया (Dyslexia in Kids) के लक्षण निम्न हैं।

  • बोलने में देर होना
  • शब्दों का उच्चारण करने में परेशानी
  • तुकबंदी में परेशानी आना
  • वर्णमाला, संख्या या रंग को पहचाना सीखने में कठिनाई होना
  • हाथ से लिखने और अन्य मोटर कौशल (Motor skill) में कठिनाई
  • भ्रमित करने वाले अक्षर “बी” और “डी” समान दिखाई देना
  • अक्षरों और उनकी ध्वनियों के बीच संबंध सीखने में परेशानी

बच्चों में डिस्लेक्सिया (Dyslexia in Kids)

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बच्चों में डिस्लेक्सिया और न्यूट्रिशन की भूमिका (Dyslexia and the role of nutrition in children)

बच्चों में डिस्लेक्सिया (Dyslexia in Kids) को लेकर की गई स्टडीज में इस बात का पता चला है कि कुछ मामलों में डिस्लेक्सिया और दूसरी लर्निंग डिफिकल्टीज (Learning difficulties) विटामिन और मिनरल डेफिसिएंशी की वजह से हो सकती हैं। कई वैज्ञानिक अध्ययनों में बताया गया है कि दृष्टि विकास, सीखने की क्षमता और समन्वय विकसित करने के लिए पोषण से भरपूर आहार आवश्यक है। यह पढ़ने में अजीब लग सकता है कि बच्चों में डिस्लेक्सिया (Dyslexia in Kids)का संबंध डायट से हैं, लेकिन कई प्रकार के दूसरे लर्निंग डिसऑर्डर की तरह इनके बीच भी संबंध है। कुछ प्रकार के फूड्स जो ब्रेन को फीड करते हैं और डिस्लेक्सिया से लड़ने में मदद कर सकते हैं। आगे जानिए बच्चों में डिस्लेक्सिया और फूड में क्या कनेक्शन है।

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बच्चों में डिस्लेक्सिया (Dyslexia in Kids) के लिए जिम्मेदार हो सकती है फैटी एसिड्स की कमी

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के अनुसार ओमेगा-3 (Omega-3) और ओमेगा-6 (Omega-6) फैटी एसिड (Fatty acids) में इम्बैलेंस डिस्लेक्सिया का कारण बन सकता है। उन्होंने अध्ययन के लिए डिस्लेक्सिक और नॉन-डिस्लेक्सिक वयस्कों के एक समूह से साक्ष्य एकत्र किए और उनके शरीर में फैटी एसिड को मापा। परिणाम 2007 के जनवरी में यूरोपीय न्यूरोसाइकोफार्माकोलॉजी में प्रकाशित किए गए थे, जिसमें दिखाया गया था कि आवश्यक ओमेगा-3 फैटी एसिड की अधिक मात्रा वाले लोगों में उन लोगों की तुलना में अधिक पढ़ने की समझ थी जिनमें अधिक मात्रा में ओमेगा-6 अधिक था।

बच्चों की डायट में ओमेगा-3 को आसानी से शामिल किया जा सकता है। इसके लिए उन्हें अलसी के बीज, साल्मन या टूना मछली, अखरोट आदि खिलाए जा सकते हैं। इसके अलावा ओमेगा-3 के इंटेक में सुधार के लिए डॉक्टर की मदद से सप्लिमेंट्स भी लिए जा सकते हैं।

बच्चों में डिस्लेक्सिया (Dyslexia in Kids)

आर्टिफिशियल फूड्स को बच्चों की डायट से बाहर करें (Eliminate artificial foods from children’s diet)

बच्चों में डिस्लेक्सिया (Dyslexia in Kids) होने पर उनके पोषण का ध्यान रखना कितना जरूरी है ये तो आप समझ ही गए होंगे। डॉ बेन फेनगोल्ड (Dr. Ben Feingold) जो कैलिफोर्निया के एक पीडियाट्रिक एलर्जी स्पेशलिस्ट (Pediatric allergy specialist) थे, ने इस बात की पुष्टि की थी कि फूड्स में पाए जाने वाले आर्टिफिशियल कलर और फ्लेवर बच्चों में हायपरएक्टिविटी (Hyperactivity) का कारण बनते हैं। उन्होंने कई सालों तक रिसर्च करने के बाद एक स्पेशल डायट बनाई थी जो लर्निंग डिसेबिलिटी (Learning disability) का सामना कर रहे बच्चों के लिए मददगार है।

सैल्सियलेट सेंटिविटी (Salciylate Sensitivity)

उनकी रिसर्च के अनुसार बहुत सारे फूड्स में सैल्सियलेट (Salciylate) कैमिकल पाया जाता है जो कि एक प्रिजर्वेटिव (Preservative) है। हालांकि, जो लोग इसके प्रति संवेदनशील नहीं है उनके के लिए यह नुकसानदायक नहीं है। डॉक्टर फेनगोल्ड की रिसर्च के अनुसार यह कैमिकल कई प्रकार के लर्निंग और बिहेवियरल ईशूज से जुड़ा है।

बच्चों में डिस्लेक्सिया (Dyslexia in Kids) : डायट से ग्लूटेन को आउट करना हो सकता है मददगार

एक और एक्सपेरिमेंट 2004 में ग्रेट ब्रिटेन में किया गया था। जब एक छात्र को ग्लूटेन फ्री डायट (Gluten free diet) पर रखा गया था और उसके व्यवहार में भारी बदलाव आया था। इसके बाद उन्होंने छात्रों के एक बड़े समूह का परीक्षण किया, उनके आहार से ग्लूटेन (Gluten) को हटा दिया। छात्रों में आहार परिवर्तन के छह महीने बाद, उनके पढ़ने का स्तर औसत से नीचे चला गया, लेकिन ओवरऑल ग्रेड-स्तर में सुधार की दर से प्रगति कर रहा था।

ग्लूटेन एक प्रोटीन (Protein) है जो गेहूं, जौ, राई और अधिकांश जई में पाया जाता है। ग्लूटेन फ्री डायट का हाल ही में फैशन में बढ़ा है और आप शायद कम से कम एक व्यक्ति को जानते हों जो इसे खाता है। हालांकि, यह सिर्फ एक दिखावा नहीं है। अधिकांश लोगों के पास इससे बचने का एक अच्छा कारण हो सकता है।

और पढ़ें : बच्चों में बढ़ते मिनरल डिफिशिएंसी को रोकने के लिए अपनाएं इस तरह की डायट..

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बच्चों में डिस्लेक्सिया और विटामिन डी की कमी (Dyslexia and Vitamin D Deficiency in Children)

हाल के शोध से पता चलता है कि पर्याप्त विटामिन डी नहीं लेने से एडीएचडी (ADHD), एस्पर्जर (Asperger’s), ऑटिज्म (Autism) और डिस्लेक्सिया जैसी सभी प्रकार की बीमारियां हो रही हैं। इन सभी स्थितियों में एक बात समान है कि उनके सिस्टम में विटामिन डी की कमी है, जिससे बच्चे का विकास धीमा हो जाता है। यह देखने के लिए परीक्षण करते समय अपने बच्चे के स्वस्थ फलों और सब्जियों के सेवन की नियमित रूप से निगरानी करना महत्वपूर्ण है कि क्या उनके शरीर उचित विकास के लिए आवश्यक चीजों को पर्याप्त रूप से अवशोषित नहीं कर रहे हैं। विटामिन डी का सबसे अच्छा सोर्स सूर्य है। इसलिए अपने बच्चे को बाहर ले जाएं।

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इस तरह की अलग-अलग रिपोर्ट्स हैं, लेकिन वे पूरी तरह से डिस्लेक्सिया का इलाज या उपचार कहने के लिए पर्याप्त नहीं हैं, लेकिन अगर आपका बच्चा इस स्थिति से जूझता है, तो यह देखने के लिए वह जो खा रहा वह बीमारी का कारण तो नहीं है एक्सपेरिमेंट करना हानिकारक नहीं है। रसायन, कीटनाशक, आनुवंशिक रूप से संशोधित खाद्य पदार्थ आदि सभी को सुरक्षित, स्वस्थ भोजन के रूप में बताया जाता है, लेकिन वे ऐसा कुछ भी नहीं हैं। इसलिए जो भी खाएं ध्यान से खाएं और बच्चों को भी हेल्दी खाना खिलाएं। बच्चों में किसी प्रकार की डेफिसिएंशी होने पर सप्लिमेंट का उपयोग डॉक्टर की सलाह के बिना ना करें। डायट के लिए आप डायटीशियन या डॉक्टर की मदद ले सकते हैं।

उम्मीद करते हैं कि आपको बच्चों में डिस्लेक्सिया (Dyslexia in Kids) संबंधित जरूरी जानकारियां मिल गई होंगी। अधिक जानकारी के लिए एक्सपर्ट से सलाह जरूर लें। अगर आपके मन में अन्य कोई सवाल हैं तो आप हमारे फेसबुक पेज पर पूछ सकते हैं। हम आपके सभी सवालों के जवाब आपको कमेंट बॉक्स में देने की पूरी कोशिश करेंगे। अपने करीबियों को इस जानकारी से अवगत कराने के लिए आप ये आर्टिकल जरूर शेयर करें।

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Manjari Khare द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 26/07/2021 को
डॉ. हेमाक्षी जत्तानी के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
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