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क्लाइमेट चेंज के दौरान प्रेग्नेंसी प्लानिंग : इन पहलुओं पर है विचार करने की जरूरत!

क्लाइमेट चेंज के दौरान प्रेग्नेंसी प्लानिंग : इन पहलुओं पर है विचार करने की जरूरत!

क्या आप जानते हैं कि अचानक गर्म जलवायु, बाढ़, ठंड का अत्यधिक प्रभाव जैसे जलवायु परिवर्तन आपके बच्चे के जन्म के वजन पर गहरा प्रभाव डाल सकते हैं? जलवायु परिवर्तन 21 वीं सदी के सबसे बड़े वैश्विक स्वास्थ्य खतरों में से एक है, जिसमें सबसे कमजोर आबादी में तत्काल और दीर्घकालिक परिणाम नज़र आ रहे हैं। जलवायु परिवर्तन ((Climate Change) के संदर्भ में गर्भवती महिलाओं (Pregnant women) और नवजात शिशुओं को कमजोर आबादी के रूप में पहचाना जा रहा है। इसलिए क्लाइमेट चेंज के दौरान प्रेग्नेंसी प्लानिंग को लेकर लोगों के मन में कई सवाल हैं। क्या क्लाइमेट चेंज के दौरान प्रेग्नेंसी प्लानिंग (Climate Change and Pregnancy Planning) की जा सकती है, ये आज के समय में उभरनेवाला सबसे बड़ा सवाल है।

जन्म के समय वजन और स्वास्थ्य संबंधी अन्य संकेत भविष्य के जीवन में महत्वपूर्ण परिणाम के कारण बन सकते हैं, जिसमें बचपन (childhood), किशोरावस्था (Adolescence) और वयस्क स्वास्थ्य (Adult health) शामिल हैं। बहुत लंबे समय से शोधकर्ता मां के गर्भ में शिशुओं के स्वास्थ्य और विकास पर जलवायु परिवर्तन के प्रत्यक्ष संबंध और प्रभाव को समझने की कोशिश कर रहे हैं। वे गर्भाशय में जलवायु परिवर्तन के विभिन्न प्रभावों, जन्म के समय स्वास्थ्य को प्रभावित करने और लंबे समय में इसके प्रभाव का अध्ययन कर रहे हैं। इसलिए क्लाइमेट चेंज के दौरान प्रेग्नेंसी प्लानिंग (Climate Change and Pregnancy Planning) को लेकर आपको कुछ बातों के बारे में जानना जरूरी है।

और पढ़ें: बच्चे की प्लानिंग करने से पहले रखें इन जरूरी बातों का ध्यान

कैसे पड़ता है जलवायु परिवर्तन का गर्भाशय पर प्रभाव?

जलवायु परिवर्तन का मानव स्वास्थ्य पर बहुत प्रभाव पड़ता है। जलवायु परिवर्तन की बात की जाए, तो इस मामले में गर्भवती महिलाएं अधिक संवेदनशील होती हैं। क्लाइमेट चेंज के दौरान प्रेग्नेंसी प्लानिंग (Climate Change and Pregnancy Planning) में वे किस तरह भोजन की आदतों का पालन करती हैं, समय पर भोजन उपलब्धता होता है या नहीं और भोजन हेल्दी है या नहीं – ये सभी पहलू गर्भावस्था में बहुत मायने रखते हैं। हम सभी जानते हैं कि गर्भवती महिलाओं को अपने बच्चे के विकास के लिए संतुलित और पौष्टिक आहार (Nutritious food) की आवश्यकता होती है। यदि वे अपनी गर्भावस्था में उचित आहार नहीं लेतीं, तो प्रीटर्म डिलीवरी और बच्चे के जन्म के समय कम वजन होने की संभावना हो सकती है। इन शिशुओं में हाय मॉर्बिडिटी और मॉर्टालिटी (High Morbidity and Mortality) देखी जाती हैं।

हालांकि, जलवायु परिवर्तन या प्रतिकूल जलवायु परिवर्तन (Adverse climate change) भी बच्चे के विकास को आकार देने और मां के स्वास्थ्य को प्रभावित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। क्लाइमेट चेंज के दौरान प्रेग्नेंसी प्लानिंग के दौरान जो महिलाएं गर्भवती हैं या गर्भवती होने पर विचार कर रही हैं, उनके लिए यह समझना महत्वपूर्ण है कि बच्चे के जन्म का वजन आने वाले वर्षों में बच्चे के स्वास्थ्य को कैसे आकार दे सकता है। अत्यधिक गर्म मौसम गर्भवती महिलाओं में बहुत अधिक संक्रमण (Infection) का कारण बनता है। अगर मां को संक्रमण हो जाता है, तो उसके बच्चे को कई जटिलताओं का सामना करना पड़ सकता हैं। इसी तरह, बाढ़ के कारण उचित भोजन की उपलब्धता की समस्या भी संक्रमण का कारण बन सकती है। इसी तरह, हवा में अधिक धूल और रसायनों, जैसे वायु प्रदूषण (Air pollution) और मौसम का पैटर्न सांस की बीमारियों का कारण बनता है। यदि गर्भवती महिलाओं को सांस लेने से दिक्कत हो, तो शिशु को कम ऑक्सीजन की आपूर्ति होती है, जिससे मॉर्बिडिटी और मॉर्टालिटी बढ़ सकती है। इसलिए क्लाइमेट चेंज के दौरान प्रेग्नेंसी प्लानिंग (Climate Change and Pregnancy Planning) में महिला और उसके परिवार के लिए गर्भावस्था की सही योजना बनाना बहुत जरूरी माना जाता है।

क्या है क्लाइमेट चेंज के दौरान प्रेग्नेंसी प्लानिंग में मां और नवजात बच्चे को प्रभावित करने वाले इनडायरेक्ट मैकेनिज्म? (Climate Change and Pregnancy Planning)

सक्सेसफुल बर्थ और नियोनेटल आउटकम (Neonatal outcome) के लिए क्लाइमेट चेंज के दौरान प्रेग्नेंसी प्लानिंग में मां के स्वास्थ्य का अच्छा होना बेहद महत्वपूर्ण है। मेटर्नल और प्रीनेटल हेल्थ में खतरा पैदा करनेवाले फ़ैक्टर्स में पोषण संबंधी आवश्यकताओं में कमी और कुपोषण, संक्रमण, भारी शारीरिक श्रम, मधुमेह (Diabetes) और मोटापे (Obesity) आदि क्रॉनिक स्थितियां शामिल हैं, जो गर्भावस्था के परिणामों को जटिल बना सकती हैं। इन समस्याओं के साथ जलवायु परिवर्तन गर्भवती महिला के लिए बद से बद्तर स्थितियां पैदा कर सकता है।

तो अब अपने सवाल के जवाब पर आते हैं कि क्लाइमेट चेंज के दौरान प्रेग्नेंसी प्लानिंग सही है?

इसका जवाब है हां, आप क्लाइमेट चेंज के दौरान प्रेग्नेंसी प्लानिंग (Climate Change and Pregnancy Planning) कर सकते हैं। लेकिन इसके लिए गर्भावस्था के दौरान उचित योजना बनाने और मां और बच्चे के लिए बहुत सावधानी बरतने की ज़रूरत है। इस दौरान किन बातों का ख्याल रखा जा सकता है, आइए जानते हैं –
  • बेहद ज्यादा गर्मी में घर के अंदर एयर कंडीशन में रहें
  • अत्यधिक ठंड हो, तो बाहरी गतिविधियों को लिमिटेड रखें
  • हायड्रेटेड (Hydrated) रहने के लिए खूब पानी पियें
  • प्रदूषित क्षेत्रों में यात्रा ना करें
  • अपने घर के पास वायु प्रदूषण के स्तर की जांच ऑनलाइन टूल के जरिये करें, जब भी वायु प्रदूषण (Air pollution) का स्तर अधिक हो, तो आउटडोर गतिविधि से बचें
  • हाय ट्रैफिक एरिया और हाइवे के नजदीक समय बिताने और एक्सरसाइज (Exercise) करना टालें
  • उन स्थानों से परहेज करें, जहां बहुत अधिक धुआं और स्मॉग है
  • ऐसे हाउसहोल्ड क्लीनिंग प्रोडक्ट्स (Household Cleaning Products) का इस्तेमाल करें, जो EPA के सुरक्षित विकल्प लेबल के साथ हों, जो आपको एयरबोर्न केमिकल इर्रिटेशन से बचाएं
  • घर में एक एयर फिल्टर (Air filter) का उपयोग करें
  • यदि आपके घर के आसपास कंस्ट्रक्शन चल रहा है, तो खिड़कियां बंद रखें, एयर फ़िल्टर का इस्तेमाल करें और बाहरी गतिविधि कम करें
देखिए डिलीवरी की पूरी प्रक्रिया का ये खास 3डी मॉडल

इस तरह क्लाइमेट चेंज के दौरान प्रेग्नेंसी प्लानिंग (Climate Change and Pregnancy Planning) के दौरान ध्यान रख कर बच्चे को क्लाइमेट चेंज के प्रभाव से सुरक्षित रख सकते हैं।

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

लेखक की तस्वीर
डाॅ. सुषमा तोमर के द्वारा मेडिकल समीक्षा
डाॅ. सुषमा तोमर द्वारा लिखित
अपडेटेड 6 days ago
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