वर्किंग मदर्स और शिशु के बीच बॉन्ड बढ़ाएंगे ये 7 टिप्स

By Medically reviewed by Mayank Khandelwal

वर्किंग मॉम्स की जिम्मेदारियां डिलिवरी के बाद और बढ़ जाती हैं। ऐसे में करियर के साथ बैलेंस बनाना काफी कठिन हो जाता है लेकिन “हैलो स्वास्थ्य” के इस आर्टिकल में वर्किंग मदर्स और बच्चे के बीच बॉन्ड को बढ़ाने के सात आसान टिप्स बताए गए हैं। जिन्हें आप रोजमर्रा की जीवन में अपनाकर इस परेशानी को सुलझा सकती हैं।

कई बार वर्किंग मदर्स काम की वजह से बच्चे के साथ कुछ क्वालिटी टाइम मिस कर देती हैं। यू.एस. डिपार्टमेंट ऑफ लेबर के अनुसार, 70 प्रतिशत महिलाओं के पास नौकरी के साथ ही 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चे भी हैं। वहीं 40 प्रतिशत महिलाएं अपने बच्चों के साथ-साथ, परिवार का भी पालन-पोषण करती हैं। इस तरह से पता चलता है कि काम के साथ-साथ वर्किंग मदर्स घर को भी अच्छे से मैनेज कर सकती हैं।

फीडिंग टाइम, स्पेशल बनाएं

बच्चे को खाना खिलाना सबसे बेसिक काम है, लेकिन यदि वर्किंग मदर्स और शिशु के बीच बॉन्ड को बढ़ाना है तो इस काम को भी मां काफी स्पेशल बना सकती हैं। जब भी महिला बच्चे को ब्रेस्टफीडिंग कराए या फिर बोतल से दूध पिलाए, तो ध्यान रखें कि वह बच्चे से साथ आई कांटेक्ट बना कर रखे। साथ ही मां का स्पर्श भी बच्चे के साथ बॉन्ड बनाने में काफी मदद करता है। खाना खिलाते समय शिशु की त्वचा को स्पर्श करें। बच्चे मां के स्पेशल टच को महसूस करने लगते हैं, जिससे धीरे-धीरे मां और बच्चे के बीच बॉन्ड बढ़ने लगता है।

वीकेंड में बच्चों को दें पूरा समय

यदि आप वर्किंग मदर्स हैं, तो ऐसे में कोशिश करें कि पूरा वीकेंड फ्री रहे। वीकेंड का पूरा समय अपने बच्चों के साथ बिताएं। सैटरडे और संडे को बच्चों के साथ एक्टिविटीज में भाग लें। ऐसा करने से वर्किंग मदर्स और शिशु के बीच बॉन्ड मजबूत होता है।

फिटनेस मेथड लेकफीट (LEKfit) की संस्थापक लॉरेन क्लेबन के अनुसार, “जब भी मैं अपने दोनों बच्चों के साथ डांस करती हूं, उस समय उनके साथ स्पेशल बॉन्ड फील कर पाती हूं।” बच्चों के साथ डांस करना, गाना गाना या व्यायाम करना, वर्किंग मदर्स और बच्चे के बीच बॉन्ड बनाने में मदद करता है।

प्लानिंग से काम करें

वैसे तो हर व्यक्ति को प्लानिंग से ही काम करना चाहिए, लेकिन यदि आप वर्किंग मॉम है, तो ऐसे में प्लानिंग से काम करना और भी जरूरी हो जाता है। एक लिस्ट तैयार करें और उसी के अनुसार काम को नियमित रूप से पूरा करें। ऐसा करने से काफी समय बचेगा और वह समय बच्चे के साथ बिता सकेंगी।

मां का स्पर्श

नौ महीने मां के गर्भ में रहने के बाद, बच्चा मां का स्पर्श बखूबी जानता है। मां जब बच्चे को गले से लगाती है, तो शिशु काफी सहज महसूस करता है, ऐसे स्पर्श को “कंगारू केयर” कहा जाता है। मां का स्पर्श साथ ही शिशु के शरीर के तापमान और हृदय गति को नियंत्रित करने में भी मदद करता है। महिला जब बच्चे की मालिश करती है, तब भी शिशु को अपने स्पर्श का एहसास दिलाती है। ऐसा करने से शिशु को काफी आराम मिलने के साथ ही सुरक्षा का भी एहसास होता है।

बच्चे से बातें करें

चाहे बच्चा छोटा हो या बड़ा, हर पेरेंट्स को बच्चों से बात जरूर करनी चाहिए। बच्चा छोटा है और बोल नहीं पाता है ऐसे में भी पेरेंट्स को बच्चों से बातें करनी चाहिए। हालांकि, नवजात शिशु बोलते नहीं है, लेकिन वह समझ सब पाते हैं। आवाज सुनने पर वे रिएक्ट जरूर करते हैं, जिससे उसका भावनात्मक विकास होता है। बच्चों से ज्यादा बात करने से पेरेंट्स का बॉन्ड उनके साथ बढ़ता ही है, साथ ही दो वर्ष की आयु में पहुंचने पर उनकी शब्दावली (vocabulary) भी बेहतर हो जाती है।

बच्चे के संकेतों को समझें

नवजात शिशुओं को किसी भी चीज व काम को सीखने-समझने में वक्त लगता है, क्योंकि हर चीजें उनके लिए नई होती हैं। ऐसे में मां ही बच्चे के संकेतों को समझने में सक्षम हो सकती है। मां ही बच्चे के हाव भाव को देख कर पता लगाने की कोशिश करें कि बच्चे को किस चीज की जरुरत है। यदि बच्चा रोता है, तो वह क्या कहना चाहता है? जितना ज्यादा बच्चे की जरूरतों के प्रति मां संवेदनशील होगी, उतनी ही तेजी से उसकी जरूरत को पूरा कर सकेंगी और उतना ही बेहतर दोनों के बीच का बॉन्ड होगा।

महिला फोकस्ड होकर बच्चों और ऑफिस की जिम्मेदारियों को आसानी से पूरा कर सकती है। वर्किंग मदर्स और शिशु के बीच बॉन्ड बढ़ाने के लिए बच्चे और ऑफिस के बीच बैलेंस बनाने और एक रूटीन सेट करने की जरूरत है।

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रिव्यू की तारीख सितम्बर 12, 2019 | आखिरी बार संशोधित किया गया सितम्बर 13, 2019

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