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क्या खून के रिश्ते में शादी करना सही है? जानिए वैज्ञानिक कारण

क्या खून के रिश्ते में शादी करना सही है? जानिए वैज्ञानिक कारण

क्या आप किसी दोस्त या अपने करीबी के बारे में जानते हैं, जिसने खून के रिश्ते में शादी यानि ब्लड रिलेशन में शादी की हो? खून के रिश्ते में शादी (Marriage in blood relation) करना चाहिए या नहीं, इसके बारे में आप क्या सोचते हैं? आंकड़ों पर गौर करें, तो एक ही जींस में शादी के बाद जन्में लगभग 11,000 बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास मे बाधा देखी गई। इनमें से 386 बच्चे जन्मजात विकृतियों से पीड़ित थे। जिनमें अपने ही चचेरे या ममेरे रिश्तों में शादी से जन्में बच्चों में इसका अंकड़ा 1.6 फीसदी है। जबकि ऐसे कपल जिन्होंने सगे भाई-बहनों से शादी की है, उनके बच्चों में इसका आंकड़ा तीन फीसदी है।

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ब्लड रिलेशन में 75 फीसदी शादियां हुई हैं

खून के रिश्ते में शादी में शादी (Marriage in blood relation) को लेकर इस आंकड़े को अमेरिकी वैज्ञानिक डॉ. ईमॉन शेरीडेन और उनके सहयोगियों ने जारी किया है। इसके लिए उन्होंने अमेरिका के ब्रैडफोर्ड में जन्में बच्चों के परिणामों का विश्लेषण किया था। ब्रैडफोर्ड यूके का एक छोटा-सा हिस्सा है। जहां पर लगभग 16 फीसदी से अधिक आबादी पाकिस्तानी मुस्लिमों की बसी हुई है। साथ ही, यहां पर 75 फीसदी शादियां चाचा-मामा के बच्चों के साथ हुई हैं। सामाजिक तौर पर ये कुछ ऐसे मुद्दे हैं, जो सोचने पर मजबूर कर देते हैं। वहीं, यह सवाल न सिर्फ सामाजिक तौर पर जुड़ा हुआ है, बल्कि यह वैज्ञानिकों को भी सोचने पर मजबूर कर देता है।

दरअसल, भारतीय समाज में कई तरह की परंपराएं निभाई जाती है। भारत ही एक ऐसा देश हैं, जहां पर आप एक ही मोहल्ले में कई धर्म के लोग देख सकते हैं। जहां हिंदुओं में खून के रिश्ते में शादी (Marriage in blood relation) करना उनके संस्कारों के खिलाफ माना जाता है, तो वहीं ईस्लाम धर्म इसमें तर्क नहीं रखता है। हालांकि, भले ही दोनों के तर्क खून के रिश्ते में शादी के लिए अलग-अलग हों लेकिन, विज्ञान की सोच दोनों के विपरीत है।

ब्लड रिलेशन में शादी (Marriage in blood relation) के लिए क्या कहता है हिंदू समाज?

हिंदू समाज के तहत खून के रिश्ते में शादी (Marriage in blood relation) पाप मानी जाती है। हिंदू धर्म में शादी करने से पहले दोनों परिवार के गोत्र का खास ख्याल रखा जाता है। गोत्र के साथ-साथ हिंदू धर्म में दूर-दूर तक सगे रिश्ते में शादी नहीं करने की परंपरा निभाई जाती है, जिसके मुताबिक किसी भी लड़के या लड़की की शादी हिंदू धर्म के दूसरे गोत्र में ही होनी चाहिए।

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खून के रिश्ते में शादी (Marriage in blood relation) के लिए क्या कहता है इस्लाम धर्म?

इस्लाम धर्म खून के रिश्ते में शादी करने में संकोच नहीं करता है। हालांकि, खून का रिश्ता पूरी तरह से सगा नहीं होना चाहिए। इस धर्म के मुताबिक, कोई भी लड़का या लड़की अपने सगे और चचेरे भाई-बहनों के अलावा, किसी भी रिश्ते में शादी कर सकती है। अपने धर्म के मुताबिक, वो ममेरे रिश्ते यानी बुआ के बच्चे या मामा के बच्चे से निकाह कर सकते हैं।

खून के रिश्ते में शादी (Marriage in blood relation) के बहस पर विज्ञान का तर्क

विश्व भर में एक विज्ञान ही है, जिसके सामने हर तरह की बहस, परंपराओं और मान्यताओं को घुटने टिकाने पड़ते हैं क्योंकि, खून के रिश्ते में शादी का मुद्दा किसी धर्म या परंपरा से नहीं, बल्कि स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ है, जिसे कई बिंदुओं में आसानी से समझा जा सकता है।

1.पैदा होने बच्चे में विकलांगता या जन्म से ही बहुत कमोजरी होना

वैज्ञानिक तर्क के अनुसार, खून के रिश्ते में शादी के बाद पैदा होने वाले बच्चों का स्वास्थ्य कमजोर हो सकता है।

2.धीमा होगा जींस का प्रभाव

आमतौर पर एक बच्चे को उसके सभी गुण दोष अपने माता-पिता से मिलते हैं। अगर माता और पिता में समान दोष हों, तो बच्चे में उसके प्रभाव के गुण बढ़ सकते हैं, जिसके कारण बच्चे के घुटनों के दर्द रहना, हमेशा माइग्रेन होना, किसी भी वस्तु के संपर्क में आने पर बहुत जल्दी एलर्जी होना, कैंसर जैसी कई बीमारियों के लक्षण देखे जा सकते हैं।

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खून के रिश्ते में शादी (Marriage in blood relation) न करने के क्या कोई फायदे भी हैं?

खून के रिश्ते में शादी न करना यह कई मायनों में काफी खास हो सकता है। इसकी खासियत सिर्फ सामाजिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिक तथ्यों से भी यह साबित किया जा चुका है। दरअसल, मनुष्य को अपनी नस्ल में सुधार करने के लिए हमेशा एक नए जीन की जरूरत होती है। जाहिर सी बात है अगर दो लोग अपने ही खून के रिश्ते में शादी करेंगे, तो उनसे होने वाले बच्चे में उनके ही जीन्स के गुण पाए जाएंगे। ऐसे में उस बच्चे के शरीर में किसी भी नए जीन का निर्माण नहीं होगा। लेकिन अगर यही बच्चा दो अलग-अलग जीन के लोगों के जरिए जन्म लेता है, तो उसके शरीर में दोनों ही जीन्स के गुण पाए जा सकते हैं। साथ ही, बच्चा मानसिक और शारीरिक रूप से भी पूरी तरह से स्वस्थ्य हो सकता है। उसके कार्य करने की क्षमता, सोचने की क्षमता उसके माता-पिता से कहीं अधिक हो सकती है, क्योंकि उसके जीन में उन दोनों के ही गुण मौजूद होंगे।

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खून के रिश्ते में शादी (Marriage in blood relation) के मामले पर क्या कहते हैं आंकड़े?

आमतौर पर इस्लामिक समुदाय में खून के रिश्ते में शादी करने का प्रचलन बहुत ज्यादा है। आंकड़ों के मुताबिक पाकिस्तानी समुदाय के बच्चों में मृत्यु दर और जन्मजात असामान्यता की तुलना में उच्चतर दर का सबसे मुख्य कारण खून के रिश्ते में शादी (Marriage in blood relation) करना ही है। इस बात की पुष्टी एक अध्ययन में की गई है। अध्ययन के मुताबि, पहले चचेरे भाई के बीच विवाह जन्म दोष के साथ पैदा होने वाले बच्चों के जोखिम को दोगुना कर देता है। शोधकर्ताओं के निष्कर्ष के मुताबिक, पाकिस्तानी मूल के शिशुओं में सभी जन्म दोषों का लगभग एक तिहाई लगभग 31 फीसदी लोगों ने खून के रिश्ते में शादी (Marriage in blood relation) की है।

इस अध्ययन के मुताबिक, जन्म दोष के साथ पैदा होने वाले बच्चों में आमतौर पर दिल या तंत्रिका तंत्र से जुड़ी समस्याएं, जो कभी-कभी घातक भी हो सकती हैं का जोखिम सबसे अधिक पाया गया है।

कई तर्कों की मानें, तो एक ही गोत्र में शादी न करने के प्रचलन को आनुवंशिक दूरी बनाए रखने के लिए ही बनाया गया था। साथ ही, खून के रिश्ते में शादी (Marriage in blood relation) करने से होने वाला बच्चा एक साथ एक से अधिक बीमारियों से पीड़ित हो सकता है।

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सूत्र

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लेखक की तस्वीर
Ankita mishra द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 6 days ago को
डॉ. हेमाक्षी जत्तानी के द्वारा मेडिकल समीक्षा
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