नाखूनों में ये बदलाव हो सकते हैं नेल इंफेक्शन के लक्षण, जानिए इसके उपचार

चिकित्सक द्वारा समीक्षित | द्वारा

अपडेट डेट मई 26, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
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नेल इंफेक्शन होना बहुत ही आम हैं। ज्यादार व्यक्तियों को शायद पता भी नहीं हो कि उनके नाखूनों में किसी तरह का संक्रमण हुआ है। नाखूनों में फंगल का संक्रमण नाखूनों की सबसे आम बीमारियों में से एक है। नाखूनों में फंगल का कारण बनने वाले कवक सामान्य रूप से शरीर पर ही मौजूद होता है। लेकिन, अगर इसके विकास को बढ़ावा मिले, तो यह स्वास्थ्य के लिए एक बड़ी समस्या बन सकता है। ये कवक बहुत ही छोटे जीव हैं, जिन्हें केवल माइक्रोस्कोप की मदद से ही देखा जा सकता है।

नेल इंफेक्शन को ऑनिकोमाइकोसिस या टिनिया अनगियम भी कहा जाता है। हाथों और पैरों दोनों में इस तरह के संक्रमण का खतरा रहता है। नाखूनों में होने वाले संक्रमण का प्रभाव धीरे-धीरे होता है, जिसकी वजह से इनके इलाज में देरी हो सकती है। यही सबसे बड़ा कारण है कि लगभग 10 फीसदी आबादी नाखून के संक्रमण से पीड़ित है।

नेल फंगस नाखूनों पर कैसा असर कर सकता है?

नेल फंगस यानी ऑनिकोमाइकोसिस या टिनिया अनगियम पैरों के नीचे रहता है। हालांकि, यह पैरों की त्वचा पर हमला नहीं करता है बल्कि, यह नखूनों पर हमला करता है। ये कवक नाखूनों के किनारों में पनपते हैं। क्योंकि, इन्हें पनपने के लिए अंधेरे और गर्म स्थान की जरूरत होती है। जिसकी वजह से नाखून के संक्रमण सबसे ज्यादा पैरों के नाखूनों में ही देखे जाते हैं। इसके अलावा, हमारे पैरों की उंगलियों में हाथों की उंगलियों की तुलना में ब्लड फ्लो (blood flow) भी कम होता है, जिससे कारण पैरों में नाखून के संक्रमण जल्दी फैल सकते हैं।

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नेल फंगस के लक्षण

नेल में फंगस इंफेक्शन के कारण ये लक्षण दिखाई दे सकते हैं जैसे-

  • नेल्स के रंग में बदलाव होना (भूरा, पीला या सफेद)
  • नाखूनों का आकार बदलना
  • नाखून के किनारों का टूटना
  • नाखून का ढीला होना या ऊपर उठना
  • नेल्स का सामान्य से मोटा होना
  • नाखून का टूटना या उसमें दरार पड़ना
  • नाखून का कड़क हो जाना
  • नाखूनों की नेचुरल चमक का खो जाना या एकदम डल दिखना
  • नाखूनों के किनारे सफेद या पीले रंग की धारियों का बनना

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किन लोगों को नेल इंफेक्शन का ज्यादा खतरा होता है?

नेल इंफेक्शन 65 साल से बड़े बुजुर्गों में ज्यादा होता है। इसके अलावा, इसकी पुरुषों में महिलाओं की तुलना में होने की संभावना अधिक होती है। बूढ़े लोगों के साथ-साथ, ऐसे लोग जिनका इम्यून सिस्टम कमजोर है या मधुमेह रोगी है, तो उन्हें भी नेल इंफेक्शन का खतरा ज्यादा रहता है। इसके अलावा, जो लोग पसीने रहित जूते पहनते हैं, उन्हें भी नाखून के संक्रमण का खतरा अधिक रहता है।

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कैसे करें नेल इंफेक्शन का उपचार?

नेल इंफेक्शन और फंगस का इलाज लंबे समय तक चल सकता है। इसका इलाज काफी महंगा भी हो सकता है। इसका उपचार, एंटीफंगल दवाओं, मरहम जैसी उपचार विधि से किया जा सकता है। इसके अलावा, नाखून के संक्रमण दूर करने के लिए दवा की दुकानों पर कई तरह के क्रीम और मरहम भी उपलब्ध हैं।

नेल इंफेक्शन रोकने के उपाय

नेल इंफेक्शन से बचाव के लिए नीचे बताए गए टिप्स फॉलो करें-

  • अपने हाथों और पैरों को हमेशा साफ-सुथरा रखें।
  • इन्हें साफ करने के लिए अच्छी क्वालिटी के साबुन का इस्तेमाल करें। साबुन को उंगलियों के बीच अच्छे से लगाएं।
  • हर हफ्ते हाथों पैरों के नाखूनों को छांटें।
  • ऐसे मोजे पहनें, जो पसीने से राहत दिलाएं।
  • अगर आपके पैरों में बहुत पसीना आता है, तो अपने दिन भर में जो मोजे बदलें।
  • पूरे दिन जूते पहन कर न रखें। कुछ घंटे बाद पैरों से जूते निकाल दें।
  • एंटीफंगल पाउडर या स्प्रे का प्रयोग अपने पैरों के साथ-साथ अपने जूतों में भी करें।
  • बहुत ज्यादा पुराने या गंदे मोजे न पहनें।
  • अगर परिवार के किसी सदस्य के नाखून में संक्रमण है, तो उनके मोजे, जूते, साबुन या तौलिया शेयर न करें।

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नेल इंफेक्शन के लिए घरेलू उपचार

1.विक्स वेपोरब

साल 2011 में प्रकाशित एक अध्ययन में दावा किया जा चुका है कि विक्स वेपोरब नाखूनों के फंगस को खत्म कर सकता है। हालांकि, आमतौर पर इसका इस्तेमाल सर्दी-खांसी के इलाज के लिए किया जाता है।

2. अजवाइन का तेल

इसमें थाइमोल की मात्रा पाई जाती है, जो एंटीफंगल होता है। इसलिए, नाखूनों में सक्रमण होने पर आप अजवाइन का तेल लगा सकते हैं। इस समस्या से निपटने में आसानी होगी।

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3.जैतून का तेल (olive oil)

जैतून का तेल नाखून फंगस दूर करने में मददगार हो सकते है। यह एंटीफंगल दवाओं से ज्यादा प्रभावी होता है। इसलिए, नेल इंफेक्शन के इलाज के लिए इसका इस्तेमाल प्रभावी रूप से काम करता है।

4.सूरजमुखी का तेल

यह भी नाखून के संक्रमण के इलाज में काफी मददगार हो सकता है। इसमें पाए जाने वाले गुण फंगस को बढ़ने से रोकते हैं।

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5. टी-ट्री ऑयल

टी-ट्री ऑयल में पाए जाने वाले एंटी-फंगल गुण नेल इंफेक्शन से बचाने में मदद कर सकते हैं। इसके इस्तेमाल से नेल फंगल के लक्षणों को कम किया जा सकता है।

6. सिरके का इस्तेमाल करें

हाथ-पैर में हुए नेल इंफेक्शन को दूर करने के लिए सिरके का उपयोग किया जा सकता है। इसमें मौजूद एंटीमाइक्रोबियल गुण की वजह से यह संक्रमण को दूर करने में मददगार साबित माना जाता है। पानी में थोड़ी-सी मात्रा में सिरका डालकर हाथ-पैरों को थोड़ी देर के लिए उसमें डुबोकर रखें आराम मिलेगा।

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7. लहसुन से दूर होगा नेल इंफेक्शन

लहसुन में ऐजीन (Ajoene) नाम का एक यौगिक पाया जाता है। इसमें एंटीमाइकोटिक ड्रग के गुण होते हैं, जो एंटीफंगल की तरह काम करते हैं। लहसुन को पीसकर नाखूनों पर लगाने से यह नेल्स के फंगस इंफेक्शन को ठीक करने में मदद कर सकता है।

8. बेकिंग सोडा (सोडियम बाइकार्बोनेट)

एंटीफंगल गुणों से भरपूर बेकिंग सोडा का इस्तेमाल फंगल इंफेक्शन (fungal infection) से लड़ने में मदद कर सकता है।

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9. एलोवेरा जेल (aloevera)

एलोवेरा में मौजूद एंटीफंगल और एंटीमाइक्रोबियल गुण नेल्स में इंफेक्शन को फैलने से रोकता है। इसके लिए घृतकुमारी जेल को प्रभावित हिस्से पर लगाएं

ऊपर बताए गए नेल इंफेक्शन के घरेलु उपाय अपनाए। इसके अलावा, हाथों या पैरों के नाखून के आसपास सूजन या लालिमा की शिकायत होने पर तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करें। ओवर द काउंटर पर मिलने वाली दवाओं या मरहम के इस्तेमाल से पहले उसके बारे में अपने डॉक्टर की सलाह लेना न भूलें।

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