दिमाग को शांत करने के लिए ट्राई करें विपरीत करनी आसन, और जानें इसके अनगिनत फायदें

चिकित्सक द्वारा समीक्षित | द्वारा

अपडेट डेट अगस्त 18, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
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विपरीत करनी आसन को इनवर्टेड पोज या लेग्स अप दी वाल पोज भी कहा जाता है। इस पोज में विपरीत का अर्थ है “उल्टा” और करनी का अर्थ है “करना”। यानी, इस पोज को करते हुए आपको पैरों को ऊपर करना होता है। ऐसा माना जाता है कि यह आसन उम्र के बढ़ती निशानियों को दूर कर सकता है और शरीर, मन व रूह को लाभ पहुंचाता है। यह वास्तव में एक बेहतरीन और आराम पहुंचाने वाला आसन (मुद्रा) है। इस पोज को करने से कई स्वास्थ्य लाभ होते हैं। इसके साथ ही दिमाग को शांत करने में भी यह आसन फायदेमंद है। जानिए क्या हैं विपरीत करनी मुद्रा और जानिए इसे करने के तरीके और फायदों के बारे में।

विपरीत करनी आसन करने का तरीका 

विपरीत करनी आसन एक पुनर्स्थापना(restorative) मुद्रा का एक रूप है। इस मुद्रा को करने के लिए बहुत सारे लोग तकिए या मुड़े हुए कंबल आदि का उपयोग करके इसे करते हैं। शुरुआत में इस आसन को करने के लिए इन चीजों का सहारा लिया जा सकता है। इस आसन को करने का तरीका इस प्रकार है:

  • विपरीत करनी आसन को करने के लिए सबसे पहले एक शांत जगह का चुनाव करें, जो दीवार के पास हो।  अब इस जगह पर इस तरह से बैठ जाएं कि आपकी टांगे जमीन पर सामने की तरफ फैली हुई हों।  इसके साथ ही आपके शरीर का बायां हिस्सा भी दीवार को छू रहा हो। जब आप निपुण हो जाएं तो आप इसे बिना दिवार के सहारे के भी कर सकते हैं।
  • अब एक गहरी सांस ले कर सांस बाहर छोड़े और अपनी पीठ के सहारे लेट जाएं। पैरों के तलवे को ऊपर की ओर मोड़ते हुए पैरों के पिछले हिस्से को दीवार से सटाकर रखें। आपको इस तरह की स्थिति में आरामदायक होने के लिए थोड़ा सा हिलने की आवश्यकता हो सकती है।

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  • अब अपने धड़ के निचले हिस्से को ऊपर उठाएं। हाथों को कूल्हों के नीचे दबाएं और कोहनियों को आधार के रूप में उपयोग करें।
  • अपने धड़ के निचले हिस्से को तिरछी स्थिति में रखें। ध्यान रहे इस दौरान आपके पैर सीधे और पीठ व गर्दन जमीन पर अच्छी तरह से टिके हुए हों।
  • अपनी पीठ को आराम देने के लिए कुछ लोग तकिये या फ्लोड किये हुए कंबल का प्रयोग भी करते हैं। अगर आप चाहे तो इनका प्रयोग भी कर सकते हैं। 
  • जब आप इस स्थिति में आराम महसूस करें तो अपने हाथों को अपनी कमर के नीचे शिफ्ट कर दें और अपने दोनों पैरों को 90 डिग्री कोण तक ऊपर उठाएं।
  • इस दौरान गहरी सांस लेते रहें और अपनी सहूलियत के अनुसार इस स्थिति में बने रहें। शुरुआत में 30-60 सेकंड के लिए करें। 
  • बार-बार अभ्यास करने से आप इसे अधिक समय तक कर सकते हैं। स्वास्थ्य लाभ के लिए हर दिन 3 – 5 मिनट इस आसन को करना काफी है। हालांकि, आध्यात्मिक लाभ के लिए लोग इसे 15 मिनट तक भी करते हैं।

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विपरीत करनी योग को करने के लाभ 

विपरीत करनी आसन के लाभ कुछ इस तरह से हैं:

हाइपोथायरायडिज्म में राहत

यह आसन गर्दन क्षेत्र के साथ-साथ थायरॉयड ग्रंथियों के आसपास रक्त के प्रवाह को बढ़ा सकता है। थायरॉयड ग्रंथियों को उत्तेजित करके, विपरीत करनी आसन हाइपोथायरायडिज्म की स्थिति को दूर करने में प्रभावी है। चूंकि, थायरॉयड ग्रंथि अन्य हार्मोन की प्रभावशीलता को नियंत्रित करती है। इसलिए यह आसन अन्य अंतःस्रावी ग्रंथियों (endocrine glands) को सही से काम करने में मदद करता है।

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पैरों और टांगों के लिए लाभदायक 

यह आसन पैरों और टांगों को आराम पहुंचाता है। इसके साथ ही इस योगासन को करने से धड़ का अगला हिस्सा, टांगों और गर्दन का पिछले हिस्सा में अच्छे से खिंचाव आता है। जिससे शरीर के इन अंगों को लाभ होता है। पीठ में अगर हलकी दर्द हो तो भी यह आसन से यह दर्द दूर होती है।

दिमाग के लिए लाभदायक

विपरीत करनी आसन हमारे दिमाग को शांत करता है। जिससे चिंता और हल्का डिप्रेशन दूर होते हैं। यानी, मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी यह आसन लाभदायक है।

जैसा की बताया गया है कि यह योगासन दिमाग को शांत करता है, इसलिए अनिद्रा जैसे रोग को दूर करने में भी यह प्रभावी है।

उम्र के प्रभाव को कम करे

ऐसा माना जाता है कि इस आसन को 6 महीने करने से बालों का सफेद होना और झुर्रियां आदि परेशानियां दूर होती हैं। उम्र के प्रभावों को दूर करने में भी यह आसन लाभदायक है।

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विपरीत करनी आसन के अन्य लाभ 

  • यह योगासन आर्थराइटिस की समस्या को राहत पहुंचाने में लाभदायक है।
  • पाचन संबंधी समस्याओं को दूर करने में भी यह आसन उपयोगी है। 
  • सिरदर्द जैसे परेशानी और माइग्रेन को यह योगासन राहत पहुंचाता है। 
  • ब्लड प्रेशर को दूर करने में विपरीत करनी आसन फायदेमंद है।
  • सांस संबंधी रोगों को रोकने में भी यह आसन उपयोगी हो सकता है।
  • मूत्र संबंधी विकार में यह आसन करने से लाभ होता है।
  • मासिक धर्म के दौरान ऐंठन और रजोनिवृत्ति की समस्याओं को दूर करने के लिए यह योगासन किया जा सकता है।
  • विपरीत करनी आसन इम्यून सिस्टम को सुधारने में प्रभावी है।

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किन स्थितियों में इसे न करें 

इन स्थितियों में विपरीत करनी आसन को न करे:

  • यह आसन एक हल्का उलटा आसन है और मासिक धर्म और गर्भावस्था के दौरान इसे करने से बचना चाहिए।
  • अगर आपको आंख का रोग (मोतियाबिंद) जैसी गंभीर समस्या है, तो भी इस आसन को करने से बचे।
  • अगर आपको गंभीर पीठ और गर्दन की समस्या है तो इस योगासन को योग विशेषज्ञ के मार्गदर्शन में ही करें।
  • उच्च रक्तचाप या चक्कर आने की स्थिति में विपरीत करनी आसन को करने से बचें।
  • विपरीत करनी आसन को कूल्हे या घुटने में चोट लगने की स्थिति में भी नहीं करना चाहिए। 
  • ग्लूकोमा, उच्च रक्तचाप या हर्निया के रोगियों को भी इस योगासन को नहीं करना चाहिए।
  • इस आसन का प्रभाव रीढ़ की हड्डी पर पड़ता है इसलिए इस आसन को धीरे-धीरे करने की सलाह दी जाती है।

विपरीत करनी आसन को अपनी मर्जी से न करें। बिना सीखे और डॉक्टर की सलाह के किसी भी योगासन को करने से इन आसनों के विपरीत प्रभाव भी हो सकते हैं। इसलिए, किसी भी आसन को करने से पहले डॉक्टर या किसी विशेषज्ञ की सलाह लें। योग विशेषज्ञ के निर्देशन में ही इस आसन को करने की सलाह दी जाती है।

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