कई बीमारियों को दावत देता है हाई कोलेस्ट्रॉल, जानिए इससे बचने के उपाय

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Update Date जुलाई 1, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
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आज के समय में खराब लाइफस्टाइल और गलत खानपान की आदतों के चलते ज्यादातर लोग हाई कोलेस्ट्रॉल से ग्रसित है। युवाओं से लेकर बुजुर्ग तक हर उम्र के लोग इसकी चपेट में है। हाई कोलेस्ट्रॉल के चलते व्यक्ति कई बीमारियों की चपेट में आ जाता है। इसके कारण हार्ट और सर्कुलेटरी डिजीज जैसे हार्ट अटैक, स्ट्रोक और वर्सक्युलर डेमेंशिया होने का खतरा होता है। वक्त रहते हाई कोलेस्ट्रॉल की परेशानी को काबू न किया जाए तो इसमें व्यक्ति की मौत भी हो सकती है।

कोलेस्ट्रॉल क्या होता है?

कोलेस्ट्रॉल खून में मौजूद मोम जैसा पदार्थ होता है। कोलेस्ट्रॉल को हिंदी में पित्तसांद्रव कहा जाता है। इसका उत्पादन लिवर करता है। शरीर का सुचारु रूप से काम करने के लिए यह अति आवश्यक होता है। विटामिन-डी इसका प्रयोग कई तरह के हॉर्मोंन्स और हेल्दी सेल्स को बनाने के लिए करता है। कोलेस्ट्रॉल में प्रोटीन होता है जो कणों के रूप में रक्तप्रवाह के जरिए शरीर के दूसरे अंगों तक पहुंचता है। प्रोटीन और कोलेस्ट्रॉल के इस कॉम्बीनेशन को लिपोप्रोटीन कहते हैं।

कोलेस्ट्रॉल दो तरह के होते हैं। गुड कोलेस्ट्रॉल और बैड कोलेस्ट्रॉल। गुड कोलेस्ट्रॉल यानी हाई डेंसिटी लिपोप्रोटीन (High-density lipoprotein) हृदय को स्वस्थ रखता है। जबकि बैड कोलेस्ट्रॉल यानी लो डेंसिटी लिपोप्रोटीन (Low-density lipoprotein) आर्टरीज में ब्लॉकेज का कारण बनता है। इससे हृदय रोगों के होने की संभावना होती है।

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हाई कोलेस्ट्रॉल क्या होता है?

खाने पीने की उन चीजों को अत्यधिक मात्रा में खाना, जिनमें अधिक मात्रा में फैट होता है वो शरीर में एलडीएल कोलेस्ट्रॉल के लेवल को बढ़ाते है। इसे हाई कोलेस्ट्रॉल और हायपरकोलेस्ट्रॉलेमिआ (hypercholesterolemia) और हायपरलिपिडेमिया (hyperlipidemia) कहा जाता है।

शरीर में कोलेस्ट्रॉल लेवल कितना होना चाहिए?

किसी भी उम्र के महिला या पुरुष में कोलेस्ट्रॉल का लेवल 200 एमजी/डीएल से कम होना चाहिए। शरीर द्वारा कोलेस्ट्रॉल का इससे अधिक कई बीमारियों को दस्तक दे सकता है। इससे खासतौर पर हृदय रोग होने का खतरा होता है।

20 या उससे ज्यादा उम्र के पुरुष

टोटल कोलेस्ट्रॉल: 125 से 200 एमजी/डीएल
नॉन एचडीएल: 130 एमजी/डीएल से कम
एलडीएल: 100 एमजी/डीएल से कम
एचडीएल: 40 एमजी/डीएल से ज्यादा

20 या उससे ज्यादा उम्र की महिला में:

टोटल कोलेस्ट्रॉल: 125 से 200 एमजी/डीएल
नॉन एचडीएल: 130 एमजी/डीएल से कम
एलडीएल: 100 एमजी/डीएल से कम
एचडीएल: 50 एमजी/डीएल से ज्यादा

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हाई कोलेस्ट्रॉल के लक्षण

आमतौर पर हाई कोलेस्ट्रॉल के किसी तरह के कोई लक्षण नहीं नजर आते हैं। ज्यादातर मामलों में किसी एमेरजेंसी के आने पर इसका पता चलता है। उदाहरण के लिए, दिल का दौरा या स्ट्रोक उच्च कोलेस्ट्रॉल के कारण होने वाले नुकसान के परिणामस्वरूप हो सकता है।

ये परेशानियां आमतौर पर तब तक नहीं होती हैं जब तक कि उच्च कोलेस्ट्रॉल आपकी धमनियों में पट्टिका के गठन की ओर नहीं जाता है। पट्टिका धमनियों को संकीर्ण कर सकती हैं ताकि उनमें से बल्ड कम मात्रा में पास हो सके। पट्टिका का निर्माण आपके धमनी अस्तर को प्रभावित कर सकता है। इससे गंभीर जटिलताएं हो सकती हैं।

हाई कोलेस्ट्रॉल के बारे में जानने का एकमात्र तरीका ब्लड टेस्ट है। 20 साल की उम्र के होने के बाद अपने डॉक्टर से आपको कोलेस्ट्रॉल टेस्ट चैक करवाने के लिए कहें। इसके बाद अपने कोलेस्ट्रॉल को हर 4 से 6 साल में चैक कराएं।  यदि आपके परिवार में हाई कोलेस्ट्रॉल का इतिहास है तो आपका डॉक्टर आपको हर कुछ समय में इसे चैक कराने की सलाह दे सकते हैं। निम्नलिखित जोखिम कारकों के नजर आने पर भी हाई कोलेस्ट्रॉल को नियमित रूप से चैक कराएं:

आनुवांशिक स्थितियां (Genetic conditions)

जींस के जरिए भी यह परेशानी आपमें पास हो सकती है। इसे फैमिलीअल हायपर कोलेस्ट्रॉलेमिया (familial hypercholesterolemia) कहते हैं। जिन लोगों में यह परेशानी होती है उनमें कोलेस्ट्रॉल लेवल 300 mg/dL या उससे अधिक रहता है। ये लोग जेंथोमा (xanthoma) का अनुभव कर सकते हैं, जो त्वचा के ऊपर पीले पैच के रूप में दिखाई दे सकता है, या त्वचा के नीचे एक गांठ हो सकती है।

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खराब कोलेस्ट्रॉल के जोखिम को बढ़ाने में निम्नलिखित कारक शामिल हैं:

खराब खानपान की आदते (Poor diet): सैचुरेटेड फैट जो एनिमल प्रोडक्ट्स में पाए जाते हैं और कूकीज और क्रैकर्स में पाए जाने वाले ट्रांस फैट का सेवन करने से कोलेस्ट्रॉल लेवल बढ़ सकता है। खाद्य पदार्थ जो कोलेस्ट्रॉल में उच्च होते हैं, जैसे रेड मीट और फुल फैट डेयरी प्रोडक्ट्स भी आपके कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने का काम करते हैं।

मोटापा (Obesity): 30 से ज्यादा बीएमआई होने पर हाई कोलेस्ट्रॉल होने की अधिक संभावना होती है।

एक्सरसाइज न करना (Lack of exercise): एक्सरसाइज करने से शरीर में गुड कोलेस्ट्रॉल बूस्ट होता है। एचडीएल का स्तर अधिक होने से एलडीएल यानी बैड कोलेस्ट्रॉल को कम हानिकारक बनाया जा सकता है।

स्मोकिंग (Smoking): सिगरेट पीने से ब्लड वैसल्स की वॉल डैमेज हो जाती है जिससे फैट जमा होने का अधिक खतरा होता है। स्मोकिंग आपके शरीर में एचडीएल यानी गुड कोलेस्ट्रॉल के स्तर को भी कम कर सकता है।

उम्र (Age): उम्र के बढ़ने के साथ शरीर में कई बदलाव होते हैं, जिसके कारण हाई कोलेस्ट्रॉल बढ़ने की भी संभावना होती है। उदाहरण के लिए, उम्र के बढ़ने पर आपका लिवर पहले जितना दुरुस्त नहीं होता है और एलडीएल यानी बैड कोलेस्ट्रॉल को रिमूव करने में पहले जितना सक्षम नहीं होता है।

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हाई कोलेस्ट्रॉल की परेशानी से बचाव के लिए क्या करें:

हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्या से खुद को कोसों दूर रखने के लिए सबसे पहले हेल्दी लाइफस्टाइल को अपनाएं। ये शरीर में कोलेस्ट्रॉल लेवल को कम कर आपको हाई कोलेस्ट्रॉल से बचाने में मदद करेंगे। हाई कोलेस्ट्रॉल की परेशानी से बचाव के लिए अपने लाइफस्टाइल में निम्नलिखित बदलाव करें:

  • लो-सॉल्ट डायट लें। फल, सब्जियों और साबुत अनाज का सेवन करें।
  • एनिमल फैट को सीमित मात्रा में लें
  • गुड फैट का इस्तेमाल करें लेकिन मॉडरेशन में करें
  • हेल्दी वेट मेंटेन करना बेहत जरूरी है। एक्सट्रा वेट को कम करने के लिए डायटिंग और एक्सरसाइज की मदद लें।
  • यदि आप सिगरेट पीते हैं तो बेहतर होगा कि आप स्मोकिंग छोड़ दें।
  • रोजाना आधे घंटे के लिए एक्सरसाइज करें। रोजाना वॉक पर जाएं। जितना हो सके उतना चला करें।
  • स्ट्रेस को मैनेज करें
  • एल्कोहॉल का सेवन कम से कम करें
  • अपने डॉक्टर से दिखाएं। यदि आपको कोलेस्ट्रॉल लेवल को नियंत्रित करने के लिए दवाओं की जरूरत है तो आपक डॉक्टर आपको वो दवा रिकमेंड करेंगे।

 अगर आपको किसी भी तरह की समस्या हो तो आप अपने डॉक्टर से जरूर पूछ लें।

हैलो हेल्थ ग्रुप चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार प्रदान नहीं करता है

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