Gingivitis जिंजूवाईटिस क्या है ? जाने इसके कारण लक्षण और उपचार

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अपडेट डेट अप्रैल 13, 2020 . 5 मिनट में पढ़ें
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परिचय

Gingivitis जिंजूवाईटिस क्या है 

मसूड़ों(gingiva) में होने वाली सूजन को जिंजूवाईटिस के नाम से जाना जाता है। जिंजूवाईटिस गंभीर बीमारी नहीं है, पर अगर इसका इलाज समय पर न किया जाये तो गंभीर पेरिओडोन्टल(दांत सम्बंधित) बीमारी होने की आशंका हो सकती है।

दांतो की सबसे सामान्य समस्या होती है बैक्टीरिया की। यही बैक्टीरिया भोजन के अवशेषों के साथ मिल कर मसूड़ों और दांतो के बीच की जगह में जमा हो जाते हैं, जिसे प्लाक(plaque) कहा जाता है। ये प्लाक दांतो पर एक कठोर परत बना देता है, जिसकी वजह से मसूड़ों में सूजन होती है और खून भी आने लगता है।

कितना सामान्य है जिंजूवाईटिस

अपने जीवनकाल में अधिकांश लोगो को दांतो के समस्या से दो चार होना पड़ता है। जिंजूवाईटिस, दांतो की सबसे सामान्य समस्या है, जो वयस्कों को हो सकती है। जिंजिवा(gingiva) या मसूड़े दांतो पर पकड़ बना कर उनकी सुरक्षा करते हैं। लम्बे समय तक दांतो के बीच जब प्लाक जमा होता है तब जिंजूवाईटिस की समस्या होती है।

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कारण

जिंजूवाईटिस होने का क्या कारण है?

जिंजूवाईटिस एक बैक्टीरिया की समस्या है। बैक्टीरिया खाने के अवशेषों के साथ मसूड़ों और दांतो की जगह में इकठ्ठा हो जाता है और प्लाक बन जाता है। प्लाक एक चिपचिपा पदार्थ होता है, जो लम्बे समय तक ठीक से नहीं साफ करने पर कठोर हो जाता है और दाँतों की समस्याओ को जनम देता है। 

जिंजूवाईटिस के मुख्य कारण ये हैं 

धूम्रपान या तम्बाकू का सेवन 

जिन लोगो को तम्बाकू के व्यसन की आदत होती है, उनको जिंजूवाईटिस होने की सम्भावना 7 गुणा ज्यादा होती है। तम्बाकू सेवन प्लाक को जमने में मदद करता है, वही इस व्यसन को अलविदा कह कर इलाज में तेज़ी लायी जा सकती है। 

दाँतों की ठीक से सफाई न करना 

अगर दातों की ठीक से सफाई की जाये तो प्लाक को जमने और कठोर परत बनाने से रोका जा सकता है। इसलिए डेंटिस्ट दिन में दो बार ब्रश करने की सलाह देते हैं। 

दांतों के ऊपर दूसरे दांत का होना 

ये ऐसी समस्या है, जिसमे पीछे के दांतो या दो दांतो के बीच की जगह में ठीक से सफाई नहीं हो पाती है और प्लाक इकठ्ठा जाता है। 

हार्मोन में परिवर्तन 

हार्मोन में परिवर्तन के कई कारण हो सकते हैं जैसे की गर्भावस्था, मेनोपॉज़, या फिर यौवन अवस्था की शुरुआत।   ऐसे स्थितियों में मसूड़े के रक्त वाहिनियों में खून का दबाव बढ़ जाता है। जिसके फलस्वरूप मसूड़े, बैक्टीरिया के चपेट में जल्दी आ जाते हैं। रिसर्च के हिसाब से यौवन के शुरुआत के दौर में 70 से 90% सम्भावना होती है जिंजूवाईटिस होने के।

कैंसर या कैंसर का इलाज 

अगर किसी व्यक्ति को कैंसर हो या उसका इलाज चल रहा हो, ऐसी स्थिति में उसके शरीर काफी सवेदनशील हो जाता है। इस वजह से किसी भी प्रकार की मसूड़ों की समस्या या फिर जिंजूवाईटिस होने की प्रबल सम्भावना होती है।

लार का कम मात्रा में बनना

लार मुँह को गीला रखने का काम करती है, जिसकी वजह से बैक्टीरिया की मात्रा कम हो जाती है। परन्तु अगर लार नहीं बनता या कम बनता है तो ये सीधे सीधे बैक्टीरिया को आमंत्रण देता है।

स्ट्रेस या तनाव 

तनाव शरीर के सामान्य चक्र में बाधा डालता है। इस वजह से बैक्टीरिया के हमले का खतरा बढ़ जाता है। 

मुँह से सांस लेना 

सीधे मुँह से साँस लेने पर बहुत तरह के बैक्टीरिया मुँह में जा सकते हैं।

खाने में पोषण की कमी 

अगर खाने में मीठा ज्यादा लिया जाये जिसमे कार्बोहायड्रेट की मात्रा ज्यादा शरीर में जाती है। इसके साथ अगर पानी कम पीना और विटामिन C को खाने में शामिल नहीं करते हैं तो रोग प्रतिकारक शक्ति कम होती है। जिसका असर बाकि शरीर के साथ दांतो पर भी पड़ता है।

डायबिटीज 

डायबिटीज शरीर की घाव भरने की क्षमता को कम कर देता है। ऐसी स्थिति किसी भी प्रकार के दांत की समस्या या जिंजूवाईटिस को न्योता दे सकता है।

दवाइया

कई दवाइया मुँह में लार का बनना कम कर देती हैं जिसकी वजह से मसूड़ों में समस्या हो सकती है।

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कब डेंटिस्ट को मिलना जरुरी हो जाता है 

  • मसूड़ों में सूजन हो तथा उनका रंग लाल हो जाये।
  • दांतो को ब्रश या फ्लॉसिंग के साथ खून आता हो।
  • मसूड़ों की पकड़ दातों पर कमज़ोर दिखे या मसूड़े दातों से अलग हो रहे हो।
  • दांतो का गिरना 
  • दांतो और मसूड़ों के बीच से मवाद का निकलना 
  • खाना चबाने में dard होना 
  • दांतो में झनझनाहट होना 
  • डेन्चर्स(नकली दातों) का ठीक से न लग पाना 
  • मुँह से अत्यधिक बदबू का आना

जिंजूवाईटिस के प्रकार 

एक्यूट नेक्रोटाईज़िंग अल्सरेटिव जिंजूवाईटिस (Acute Necrotizing Ulcerative Gingivitis (ANUG)

ANUG एक विशिष्ट प्रकार के बैक्टीरिया और तनाव से ही होता है, जो की बहुत ही कम देखने को मिलता है। इस स्थिति में मरीज़ को बुखार, मुँह में बहुत ज्यादा दर्द, लार का अत्यधिक मात्रा में बनना, लिम्फ नोड्स (lymph nodes) का बड़ा हो जाना, अस्वस्थ्य महसूस करना, और शरीर की दुर्गन्ध जैसे लक्षण हो सकते हैं।

एक्टिनोमयकोसिस जिंजूवाईटिस(Actinomycotic Gingivitis)

जब सामान्य जिंजूवाईटिस का इलाज नहीं किया जाता है, तब वो एक्टिनोमयकोसिस जिंजूवाईटिस में परिवर्तित हो जाता है। इस स्थिति में मरीज़ को बहुत ज्यादा दर्द की शिकायत होती है। साथ ही मसूड़ों में भी लालिमा दिखाई देती है। इसके बारे में जानने के लिए ब्योप्सी (biopsy) की जरुरत पड़ती है, jahan पता चलता है की फंगल इन्फेक्शन कितना है।

प्रेगनेंसी जिंजूवाईटिस (Pregnancy Gingivitis)

ये एक ह्यपरप्लास्टिक(hyperplastic) प्रतिक्रिया है जिसमे प्लाक की वजह से टिश्यू बड़े हो जाते हैं। ये दशा गर्भवती महिलाओ में ही देखी जाती है। एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन की बढ़ी हुई मात्रा इसके लिए जवाबदार मानी गयी है। प्रेगनेंसी जिंजूवाईटिस में मसूड़े, सूजन के साथ लाल हो जाते हैं। इस तरह का जिंजूवाईटिस नियमित दातों की अच्छी सफाई से ठीक हो जाता है।

डायबिटिक जिंजूवाईटिस (Diabetic Gingivitis)

1 से 3 % डायबिटिक मरीज़ो में  जिंजूवाईटिस की शिकायत हो सकती है। इस स्थिति में शुगर लेवल के साथ ब्लड प्रेशर भी बढ़ जाता है, तथा खुजली के साथ वजन कम होता है। इसके अलावा मुँह का सुखना, जीभ में जलन के लक्षण देखे जा सकते हैं। इलाज के लिए घर पर देखभाल के अलावा इन्सुलिन के डोज़ दिए जाते हैं।  

जिंजूवाईटिस का इलाज तथा बचाव

इलाज

जिंजूवाईटिस का इलाज तीन प्रकार से होता है

  •  डेंटिस्ट के पास मुँह की अच्छे से सफाई करवाना 
  • एंटीबायोटिक दवाये 
  • मुँह की सर्जरी

जिंजूवाईटिस से बचाव 

सबसे पहले ये जरुरी हो जाता है कि संक्रमण कैसे फैला है वो पता किया जाये और उसे ख़तम किया जाये। कुछ घरेलु इलाज ऐसे हैं जिन्हे अपना कर दांतो को बचाया जा सकता है। 

दांतो की अच्छे से सफाई

दांतो का अच्छे से देखभाल के लिए जरुरी है कि उनकी सफाई का ध्यान रखा जाये। दांतों कि सफाई के लिए इलेक्ट्रॉनिक टूथब्रश या कोई भी मुलायम ब्रिस्टल वाले टूथब्रश का इस्तेमाल किया जा सकता है। 

फ्लोराइड युक्त टूथपेस्ट

डेंटिस्ट फ्लोराइड वाले टूथपेस्ट इस्तेमाल करने कि सलाह देते हैं। फ्लोराइड वाले टूथपेस्ट प्लाक को जमने से रोकने में काफी असरकारक है। 

फ्लॉसिंग(flossing)

दिन में एक बार फ्लॉसिंग करने कि सलाह दी जाती है, जिसके दो दांतो के बीच प्लाक को जमने नहीं देता। फ्लॉस दांत साफ़ करने का धागा होता है जिसकी मदद से दातों के बीच फंसे खाने को साफ़ किया जा सकता है। 

डेंटिस्ट से नियमित जांच

डेंटिस्ट के पास नियमित रूप से जांच करवाना जरुरी होता है। डेंटिस्ट किसी भी प्रकार कि दांतो की समस्या जैसे कठोर प्लाक को निकलने में समर्थ होते हैं। 

ट्रीटमेंट के बाद का रखरखाव

प्लाक निकलवाने के बाद नियमित रूप से ब्रश और फ्लॉसिंग करना जरुरी होता है ताकि प्लाक फिर से इकठ्ठा न हो पाए। 

धूम्रपान को ना कहें

धूम्रपान प्लाक को जमने में सहायक होता है इसलिए ध्रूम्रपान से दूर रहना चाहिए। 

मीठा कम लेना चाहिए

चीनी और मीठी वस्तुओ का सेवन कम करना चाहिए, ये दांतो के शत्रु होते हैं। 

पानी का सेवन

पानी सही मात्रा में लेना चाहिए, ये शरीर से अनावश्यक चीज़ो की निकासी में सहायक है। 

एंटीबायोटिक्स

जिंजूवाईटिस में कई बार बैक्टीरिया कम करने के लिए एंटीबायोटिक लेने की सलाह देते हैं, जो शरीर में रोग प्रतिकारक शक्ति बढ़ा देती है। परन्तु किसी भी दवा का सेवन डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं करना चाहिए।

बेकिंग सोडा एवं पेरोक्साइड

रीसर्च में ये कहा गया है की बेकिंग सोडा को पेरोक्साइड में मिला कर ब्रश करने से दांतो के बीच प्लाक और बैक्टीरिया का सफाया होता है। 

एसेंशियल आयल

कुछ एसेंशियल आयल ऐसे होते हैं जिनसे कुल्ला करना प्लाक को कम करता है, साथ ही जिंजूवाईटिस को भी ठीक करने में मदद करता है। लेकिन इसके लिए नियमित दांतो को साफ़ करना भी जरुरी होता है। कुछ ऐसे एसेंशियल आयल अजवाइन का तेल, यूकलिप्टोल, मेताइल सॅलिसीलेट, और मेंथोल मुख्य हैं।

हैलो स्वास्थ्य किसी भी तरह की मेडिकल सलाह नहीं दे रहा है। अगर आपको किसी भी तरह की समस्या हो तो आप अपने डॉक्टर से जरूर पूछ लें।

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चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Pranali Patil
के द्वारा लिखा गया Shayali Rekha
प्रकाशित हुआ अप्रैल 21, 2020 . 6 मिनट में पढ़ें