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डायबिटीज और माइंडफुलनेस: डायबिटीज को मैनेज करने में काम आ सकता है मेडिटेशन का यह तरीका

Written by डॉ. हेमाक्षी जत्तानी · डेंटिस्ट्री · Consultant Orthodontist


अपडेटेड 06/12/2021

डायबिटीज और माइंडफुलनेस: डायबिटीज को मैनेज करने में काम आ सकता है मेडिटेशन का यह तरीका

डायबिटीज यानी वह कंडिशन है जिसमें प्रभावित व्यक्ति के शरीर में पैंक्रियाज ठीक से इंसुलिन नहीं बना पाता या इसका ठीक से प्रयोग नहीं कर पाता। इंसुलिन उस हॉर्मोन को कहा जाता है, जो ब्लड शुगर को रेगुलेट करता है, लेकिन अगर डायबिटीज यानी मधुमेह को सही समय पर कंट्रोल न किया जाए, तो यह कई कॉम्प्लिकेशन्स की वजह बन सकती है। डायबिटीज को मैनेज करने के लिए जीवनशैली में बदलाव बेहद जरूरी है। डॉक्टर भी इसके लिए रोगी को तनाव से बचने खानपान में बदलाव, व्यायाम, योगा और मेडिटेशन करने के साथ ही वजन कम करने की सलाह देते हैं। आज हम बात करने वाले हैं डायबिटीज और माइंडफुलनेस (Diabetes and Mindfulness) के बारे में। माइंडफुलनेस मेडिटेशन का ही एक तरीका है। जानिए क्या है डायबिटीज और माइंडफुलनेस (Diabetes and Mindfulness) के बीच में लिंक? लेकिन, इससे पहले माइंडफुलनेस के बारे में जान लेते हैं।

माइंडफुलनेस (Mindfulness) क्या है?  

जैसा की पहले ही बताया गया है कि माइंडफुलनेस, मेडिटेशन की एक थेरेपी है, जिसमें ध्यान के माध्यम से हमें अपने भीतर और आसपास में हो रही चीजों के प्रति जागरूक होने में मदद मिलती है। जैसा की इसके नाम से ही पता चल रहा है कि इस स्थिति में दिमाग पूरी तरह से ध्यान देता है कि आपके भीतर और आसपास क्या हो रहा है या क्या आप कर रहे हैं आदि। यह प्रक्रिया सुनने में मामूली लग रही होगी लेकिन प्राचीन समय से ही इस प्रक्रिया का प्रयोग किया जाता रहा है। यही नहीं, कई देशों में इसका इस्तेमाल ईटिंग हैबिट्स (Healthy habits) और डायबिटीज मैनेजमेंट (Diabetes Management) में भी किया जाता है। इसके अलावा मानसिक शांति के लिए भी यह बेहद लाभदायक है। डायबिटीज और माइंडफुलनेस (Diabetes and Mindfulness) के लिंक के बारे में जानने से पहले जानते हैं कि माइंडफुलनेस कैसे काम करती है?

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माइंडफुलनेस (Mindfulness) कैसे काम करती है?

माइंडफुलनेस स्ट्रेस्ड और डिप्रेस्ड होने के कांस्टेंट सायकल को ब्रेक डाउन करती है। रोजाना के जीवन में प्रेशर या स्ट्रेन से व्यक्ति इंटरनल परेशानियों और समस्याओं का अनुभव करता है। माइंडफुलनेस की तकनीक को अपना कर व्यक्ति नेगेटिव इमोशंस जैसे अपराध बोध, उदासी, हताशा और गुस्से आदि को से बचने का प्रयास करते हैं और इसके बजाय खुशी और संतोष की भावनाओं की ओर आकर्षित होते हैं। यानी, इस तकनीक के जरिए लोगों को यह विश्वास करना सिखाया जाता है कि इन ‘नकारात्मक’ भावनाओं को महसूस करना गलत है। माइंडफुलनेस अटेंशन को प्रोत्साहित करती है और प्रेजेंट मोमेंट और नॉन-जजमेंटल कांशसनेस के विकास पर ध्यान केंद्रित करती है, इससे व्यक्ति खुद को उस तरह से स्वीकार कर पाता है जैसा वो है। इससे वो लगातार खुद को बदलने के संघर्ष से बच जाता है। अब जानिए डायबिटीज और माइंडफुलनेस (Diabetes and Mindfulness) के बीच के संबंध को।

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डायबिटीज और माइंडफुलनेस के बीच के लिंक को जानिए (Link Between Diabetes and Mindfulness) 

ऐसा माना गया है कि माइंडफुलनेस डायबिटीज की समस्या से राहत पाने का एक अच्छा तरीका हो सकता है। डायबिटीज से जुड़े कई इश्यूज में इस तकनीक का प्रयोग करने से लाभ होता है। जानिए इनके बारे में विस्तार से:

डायबिटीज और माइंडफुलनेस: माइंडफुलनेस और हायपोग्लाइसेमिया (Mindfulness and Hypoglycemia)

डायबिटीज से पीड़ित व्यक्ति के लिए हायपोग्लाइसेमिया एक चिंता का विषय है। जिसमें पीड़ित व्यक्ति की ब्लड शुगर सामान्य से भी कम हो जाती है। हालांकि, टाइप 2 डायबिटीज से पीड़ित व्यक्ति में  हायपोग्लाइसेमिया कम सामान्य है। लेकिन, इस स्थिति में व्यक्ति में एंग्जायटी बेहद कॉमन है। ऐसा पाया गया है कि माइंडफुलनेस (Mindfulness) करने वाले लोगों में ग्लाइसेमिक कंट्रोल (Glycemic Control) बढ़ता है जिससे हायपोग्लाइसेमिया की संभावना कम होती है। इससे डायबिटीज मैनेजमेंट (Diabetes Management) से जुड़े मेंटल डिस्ट्रेस (Mental Distress) को कम करने के लिए भी मदद मिलती है। जानिए डायबिटीज और माइंडफुलनेस (Diabetes and Mindfulness) के बीच के अन्य कनेक्शंस के बारे में।

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माइंडफुलनेस, ब्लड प्रेशर और ब्लड ग्लूकोज लेवल (Mindfulness, Blood Pressure and  Blood Glucose levels)

ऐसा माना जाता है कि अगर डायबिटिक व्यक्ति में ब्लड प्रेशर कंट्रोल रहता है, तो उसे डायबिटीज से जुडी कॉम्प्लीकेशन्स होना का खतरा कम रहता है। जिसमें हार्ट अटैक और स्ट्रोक आदि भी शामिल हैं। एक स्टडी से यह बात भी साबित हो चुकी है कि एक डायबिटीज से पीड़ित व्यक्ति के जीवन की गुणवत्ता में ब्लड ग्लूकोज लेवल के मुकाबले हाय ब्लड प्रेशर (High Blood Pressure) अधिक प्रभाव डालता है। लेकिन, अमेरिकन डिपार्टमेंट ऑफ़ इंटरनल मेडिसिन (American Department of Internal Medicine) के द्वारा की गई रिसर्च के अनुसार नियमित माइंडफुलनेस मेडिटेशन (Mindfulness Meditation) करने से रोगी में ब्लड प्रेशर को सही रहने में मदद मिलती है। जिससे कारण हार्ट संबंधी समस्याओं के साथ-साथ ब्लड शुगर लेवल (Blood Sugar Level) के सही रहने में भी आसानी होती है। डायबिटीज और माइंडफुलनेस (Diabetes and Mindfulness) में यह जानकारी बेहद जरूरी है।

डायबिटीज और माइंडफुलनेस

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डायबिटीज और माइंडफुलनेस: माइंडफुलनेस और स्ट्रेस (Mindfulness and Stress)

स्ट्रेस को डायबिटीज को कंट्रोल करने में एक बाधा माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि चिंता, तनाव या स्ट्रेस के कारण मधुमेह के रोगी के लिए इसे मैनेज करना मुश्किल हो सकता है। लेकिन, माइंडफुलनेस से स्ट्रेस कम होने में मदद मिलती है। जिससे स्लीप डिस्टर्बेंस कम होती है और स्लीप क्वालिटी बढ़ती है। इसके साथ ही स्ट्रेस लेवल, मूड डिस्टर्बेंस और थकावट को कम होने में भी मदद मिलती है। यानी, माइंडफुलनेस कई अन्य समस्याओं को दूर करने में भी बेहद प्रभावी है। कुछ अन्य स्थितियों में भी माइंडफुलनेस (Mindfulness) लाभदायक साबित हो सकती है, जैसे

  • दिमाग को शांत करने और विचारों को स्लो डाउन करने में
  • अपने और अपने शरीर के बारे में अधिक जागरूक होने के लिए
  • अच्छी नींद आने के लिए
  • आप उस समय क्या कर रहे हैं, इस पर ध्यान देने के लिए
  • आपको रिलैक्स महसूस कराने के लिए
  • स्ट्रेस, डिप्रेशन और एंग्जायटी से बचने में

उम्मीद है कि डायबिटीज और माइंडफुलनेस (Diabetes and Mindfulness) के बारे में आप जान गए होंगे। इसमें कोई शक नहीं है कि माइंडफुलनेस (Mindfulness) डायबिटीज को मैनेज करने में एक लाभदायक तकनीक साबित हो सकती है। लेकिन, केवल यही काफी नहीं है। अगर आप अपने ब्लड शुगर लेवल (Blood Sugar Level) को कंट्रोल में रखना चाहते हैं, तो आपको अपनी जीवनशैली में और भी बदलाव करने चाहिए। जानिए इन तरीकों के बारे में।

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डायबिटीज (Diabetes) को मैनेज कैसे करें?

डायबिटीज को मैनेज करने के लिए रोगी के लिए सही दवाईयां लेना, नियमित जांच के साथ ही जीवनशैली में हेल्दी बदलाव भी जरुरी हैं। जीवनशैली में बदलाव के लिए रोगी को इन तरीकों को अपनाने की सलाह दी जाती है:

  • डायबिटीज से पीड़ित लोगों के लिए सही आहार का सेवन बेहद जरूरी है। इसलिए अपने आहार में अधिक से अधिक फल, सब्जियों, साबुत अनाज आदि को शामिल करें। इसके साथ ही अधिक मीठे या प्रोसेस्ड फूड्स को खाने से भी बचना चाहिए। इस स्थिति में सही खानपान के बारे में जानने के लिए डॉक्टर और डायटीशियन की सलाह बेहद जरूरी है।
  • नियमित व्यायाम करना भी डायबिटीज को कंट्रोल करने का एक तरीका है। दिन में कुछ समय व्यायाम के लिए आवश्यक निकालें।
  • अपने वजन को सही रखें। अपने वजन को संतुलित बनाए रखने से भी आपको ब्लड शुगर लेवल (Blood Sugar Level) को मैनेज करने में मदद मिल सकती है। इसके लिए आपको व्यायाम करना चाहिए और अपने खाने-पीने का ध्यान रखना चाहिए। इसमें आप डॉक्टर की सलाह भी ले सकते हैं।
  • तनाव से बचाव और पर्याप्त नींद लेना भी ब्लड शुगर लेवल (Blood Sugar Level) को सही बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। डायबिटीज और माइंडफुलनेस (Diabetes and Mindfulness) के बारे में तो आप जान ही गए होंगे। इसके अलावा तनाव से बचाव के लिए आप योगा का सहारा भी ले सकते हैं। लेकिन, गंभीर स्थिति में डॉक्टर की सलाह लेना न भूलें।

क्या आप जानते हैं कि डायबिटीज को रिवर्स कैसे कर सकते हैं? तो खेलिए यह क्विज!

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यह तो थी डायबिटीज और माइंडफुलनेस (Diabetes and Mindfulness) के बारे में जानकारी। माइंडफुलनेस को डिप्रेशन (Depression), एंग्जायटी (Anxiety), स्ट्रेस (Stress) आदि समस्याओं से राहत पाने में बेहद लाभदायक माना गया है। इस तकनीक के कोई भी साइड-इफेक्ट्स नहीं हैं। डायबिटीज मैनेजमेंट और कई अन्य समस्याओं से राहत पाने में भी इस तकनीक को लाभदायक माना गया है। अगर आपके मन में इसके बारे में कोई भी संदेह, चिंता या सवाल है तो आप अपने डॉक्टर से बात अवश्य करें। अगर आपके मन में कोई भी सवाल है तो आप हमारे फेसबुक पेज पर भी अपने सवालों को पूछ सकते हैं। हम आपके सभी सवालों के जवाब आपको कमेंट बॉक्स में देने की पूरी कोशिश करेंगे। अपने करीबियों को इस जानकारी से अवगत कराने के लिए आप ये आर्टिकल जरूर शेयर करें।

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