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टाइप टू डायबिटीज का कोलीन और बिटेन से रिलेशन क्या है? जानिए इस आर्टिकल में!

टाइप टू डायबिटीज का कोलीन और बिटेन से रिलेशन क्या है? जानिए इस आर्टिकल में!

डायबिटीज (Diabetes) एक लाइफस्टाइल संबंधित समस्या मानी जाती है। जब किसी व्यक्ति को डायबिटीज की समस्या होती है, तो उसे कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। डायबिटीज के चलते व्यक्ति को अपने खानपान का खास ध्यान रखने की जरूरत पड़ती है। अपने आहार में बदलाव करके और जरूरी सप्लिमेंट को जोड़कर व्यक्ति डायबिटीज की समस्या को सामान्य बनाए रख सकता है। लेकिन कई ऐसे जरूरी तत्व हैं, जिन्हें डायबिटीज में लेने से पहले आपको सही जानकारी होनी चाहिए। आज हम बात करने जा रहे हैं दो ऐसे ही तत्वों के बारे में, जिनका टाइप टू डायबिटीज (Type 2 diabetes) से संबंध माना जाता है। आज हम आपको बताएंगे टाइप टू डायबिटीज का कोलीन और बिटेन से रिलेशन (Association of choline and betaine with risk of T2D) कैसा होता है। टाइप टू डायबिटीज का कोलीन और बिटेन से रिलेशन माना जाता है, लेकिन इसे समझने के लिए आपको कुछ रिसर्च पर ध्यान देने की जरूरत पड़ सकती है आइए जानते हैं टाइप टू डायबिटीज का कोलीन और बिटेन से रिलेशन किस तरह माना जाता है। लेकिन इससे पहले जानते हैं डायबिटीज से जुड़ी है जरूरी बातें।

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क्या है डायबिटीज की समस्या?

डायबिटीज (Diabetes) की तकलीफ का सीधा असर हमारे इम्यून सिस्टम पर पड़ता है। आमतौर पर जब व्यक्ति खाना खाता है, तो शरीर भोजन से मिले शुगर को तोड़कर उसका इस्तेमाल कोशिका में उर्जा बनाने के लिए करता है। इस कार्य को पूरा करने के लिए पैंक्रियाज को इंसुलिन का उत्पादन करना पड़ता है। इंसुलिन हॉर्मोन शरीर में एनर्जी बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन जब आप डायबिटीज की गिरफ्त में होते हैं, तो यही पैंक्रियाज पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन (Insulin) पैदा नहीं कर पाती। इसकी वजह से शरीर में ब्लड शुगर लेवल (Blood sugar level) बढ़ता चला जाता है। जब शरीर में ब्लड शुगर लेवल ज्यादा बढ़ जाता है, तो शरीर के कामकाज पर इसका प्रभाव पड़ता है और शरीर की कार्यप्रणाली कमजोर होती चली जाती है।

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यदि समय पर ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल ना किया जाए, तो डायबिटीज (Diabetes) अपने साथ-साथ कई अन्य जटिलताओं को भी साथ ले आता है। आपके साथ ऐसी स्थिति ना हो, इसलिए जरूरत है आपको डायबिटीज के लक्षण पहचानने की। आइए जानते हैं डायबिटीज के लक्षणों के बारे में।

ये हो सकते हैं डायबिटीज के लक्षण (Symptoms of Diabetes)

यह तो सभी जानते हैं कि डायबिटीज के दो प्रमुख प्रकार होते हैं, टाइप वन डायबिटीज (Type 1 Diabetes) और टाइप टू डायबिटीज (Type 2 Diabetes)। टाइप वन डायबिटीज में पैंक्रियाज (Pancreas) इंसुलिन बनाना बंद कर देता है, जिसकी वजह से बीमार व्यक्ति को इंसुलिन के इंजेक्शन लेने पड़ते हैं। वहीं टाइप टू डायबिटीज में पैंक्रियाज में इंसुलिन बनाने की रफ्तार कम हो जाती है, जिसकी वजह से ब्लड शुगर लेवल बढ़ने लगता है। लेकिन जब आपको डायबिटीज की समस्या रहती है, तब आपको यह लक्षण दिखाई दे सकते हैं –

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ऐसे भी कुछ लक्षण हैं जो व्यक्तिगत रूप से किसी को महसूस हो सकते हैं और किसी को नहीं। जिनमें शामिल हैं:

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जब आपको यह लक्षण दिखाई दें, तो आपको तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। जितनी जल्दी आप डॉक्टर से संपर्क करेंगे, उतनी ही जल्दी आप ब्लड शुगर लेवल को सामान्य स्तर पर ला सकते हैं। इसलिए समय रहते डॉक्टर से संपर्क करना बेहद जरूरी माना जाता है। जैसा कि आपने जाना डायबिटीज के समस्या किसी भी व्यक्ति के लिए परेशानी का सबब बन सकती है, इसलिए डायबिटीज (Diabetes) को समय रहते कंट्रोल करना बेहद जरूरी है। जैसा कि आपने जाना डायबिटीज की समस्या आपके लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकती है, लेकिन इससे जुड़े कॉम्प्लिकेशन के बारे में भी आपको सही जानकारी होना बेहद जरूरी है। आइए जानते हैं डायबिटीज से जुड़े कॉम्प्लिकेशन आपको किस तरह हो सकते हैं।

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टाइप टू डायबिटीज का कोलीन और बिटेन से रिलेशन (Association of choline and betaine with risk of T2D)

कौन से हैं डायबिटीज से जुड़े कॉम्प्लिकेशन? (Diabetes complications)

डायबिटीज (Diabetes) की समस्या एक ऐसी समस्या है, जो अपने साथ कई तरह की बीमारियों को न्यौता देती है। यह धीरे-धीरे आपके शरीर में घर करती जाती है, लेकिन इससे जुड़ी सही जानकारी होने पर आप इसके लक्षणों पर ध्यान देकर इसका इलाज जल्द से जल्द करवा सकते हैं। डायबिटीज के कॉम्प्लिकेशन के रूप में आपको यह तकलीफें दिखाई दे सकती हैं –

  • आंखों की समस्या
  • इंफेक्शन
  • ब्लड प्रेशर
  • कोलेस्ट्रॉल
  • नर्व डैमेज
  • पाचन संबंधी समस्याएं
  • किडनी डैमेज
  • हड्डियों से जुड़ी समस्याएं

यह सभी समस्याएं आपको डायबिटीज के चलते हो सकती हैं, इसलिए इन समस्याओं को डायबिटीज कॉम्प्लिकेशन (Diabetes complications) के रूप में देखा जाता है। दरअसल डायबिटीज से जुड़ी यह सभी समस्याएं किसी भी व्यक्ति को बीमार कर सकती हैं, इसलिए डायबिटीज को सामान्य बनाकर इन कॉम्प्लिकेशन को दूर रखने की कोशिश करनी चाहिए। यही वजह है कि डायबिटीज में आपको कुछ तत्वों के सेवन की सलाह दी जाती है। इसलिए टाइप टू डायबिटीज का कोलीन और बिटेन से रिलेशन समझने की जरूरत होती है। आइए जानते हैं टाइप टू डायबिटीज का कोलीन और बिटेन से रिलेशन (Association of choline and betaine with risk of T2D) क्या है।

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क्या है टाइप टू डायबिटीज का कोलीन और बिटेन से रिलेशन? (Association of choline and betaine with risk of T2D)

डायबिटीज जर्नल (Diabetes journal) में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार टाइप टू डायबिटीज का कोलीन और बिटेन से रिलेशन जानने की कोशिश की गई। टाइप टू डायबिटीज में कोलीन और बिटेन के सेवन के बारे में एक रिसर्च से पता लगाया गया। इस रिसर्च में टाइप टू डायबिटीज (Type 2 diabetes) से कोलीन और बिटेन के संबंध को पहचाना गया। तेरा हजार से भी ज्यादा पेशंट पर कोलीन और बिटेन (Choline aur betaine) के असर को रिसर्च के जरिए परखा गया। इस रिसर्च में पाया गया कि पुरुषों में डायटरी कोलीन और बिटेन का टाइप टू डायबिटीज में प्रभाव नहीं दिखाई दिया और टाइप टू डायबिटीज में पुरुषों में डायटरी कोलीन और बिटेन लेने से किसी प्रकार का बदलाव नहीं आया। लेकिन महिलाओं में इसका सीधा संबंध देखा गया। महिलाओं में पाया गया कि जो महिलाएं डायटरी कोलीन और बिटेन का सेवन कर रही थी, उनमें टाइप टू डायबिटीज का रिस्क बढ़ा हुआ दिखाई दिया। हालांकि टाइप टू डायबिटीज का कोलीन और बिटेन से रिलेशन (Association of choline and betaine with risk of T2D) जानने के लिए और भी रिसर्च की जरूरत पड़ेगी और क्लिनिकल ट्रायल्स के जरिए इसे बेहतर समझा जा सकेगा। हाल की मौजूदा रिसर्च के चलते यह समझा जा सकता है कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं में डायटरी कोलीन और बिटेन (Choline aur betaine) के सेवन से टाइप टू डायबिटीज का रिस्क बढ़ सकता है। टाइप टू डायबिटीज का कोलीन और बिटेन से रिलेशन समझने के लिए इस तरह की रिसर्च काम आ सकती है, लेकिन इस पर और भी स्टडी की जरूरत पड़ेगी।

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यदि आप टाइप टू डायबिटीज में कोलीन और बिटेन Choline aur betaine) का सेवन कर रहे हैं, तो आपको डॉक्टर से एक बार सलाह लेनी चाहिए। आपकी जरूरत के मुताबिक सही मात्रा में इसका सेवन करने से टाइप टू डायबिटीज (Type 2 diabetes) के रिस्क को कम किया जा सकता है। पूरी जांच और डॉक्टर की सलाह के बाद किसी भी तरह के तत्वों का सेवन आपके लिए बेहतर साबित होगा। डायबिटीज के समस्या किसी भी व्यक्ति के लिए बेहद मुश्किल भरी साबित होती है, इसलिए इस स्थिति में आहार में बदलाव आपके लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। डॉक्टर की सलाह लेकर आप अपने आहार को बदल सकते हैं।

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Toshini Rathod द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 03/12/2021 को
Sayali Chaudhari के द्वारा मेडिकली रिव्यूड