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टाइप 2 डायबिटीज में माइक्रोएल्बुमिन्यूरिया की स्थिति को कैसे करें मैनेज?

टाइप 2 डायबिटीज में माइक्रोएल्बुमिन्यूरिया की स्थिति को कैसे करें मैनेज?

टाइप 2 डायबिटीज में माइक्रोएल्बुमिन्यूरिया (Microalbuminuria in type 2 diabetes) की समस्या हो सकती है। यह एक ऐसी कंडिशन है जो कुछ मामलों में किडनी डिजीज (Kidney disease) का संकेत हो सकती है। माइक्रोएल्बुमिन्यूरिया साधारण तौर पर यूरिन में मौजूद प्रोटीन जिसे एल्बुमिन (Albumin) कहा जाता है कि उपस्थिति को दर्शाती है। टाइप 2 डायबिटीज में माइक्रोएल्बुमिन्यूरिया को डायट और एक्सरसाइज से ठीक किया जा सकता है। माइक्रोएल्बुमिन्यूरिया कंडिशन इस बात का संकेत है कि आपकी किडनी ठीक से काम नहीं कर रही है। इससे कार्डियोवैस्कुलर डिजीज का भी रिस्क हो सकता है। इस कंडिशन का पता यूरिन टेस्ट के जरिए लगाया जाता है। डायबिटीज में माइक्रोएल्बुमिन्यूरिया किन परेशानियों की वजह बन सकती है और इस स्थिति को मैनेज कैसे किया जाए इसके बारे में इस आर्टिकल में जानकारी दी जा रही है।

टाइप 2 डायबिटीज में माइक्रोएल्बुमिन्यूरिया (Microalbuminuria in type 2 diabetes)

आम तौर पर माइक्रोएल्बुमिन्यूरिया के लक्षण नहीं दिखाई देते हैं। यूरिन टेस्ट के जरिए इस कंडिशन का पता लगाना किडनी डिजीज को डिटेक्ट करने का सबसे प्राथमिक तरीका है। टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज के अलावा हाय ब्लड प्रेशर, ओबेसिटी और मेटाबॉलिक सिंड्रोम, जेनेटिक इनहेरिटेड किडनी डिजीज भी इसका कारण बन सकती हैं। अमेरिका में डायबिटीज इस कंडिशन का सबसे प्रमुख कारण है। डायबिटीज जर्नल में छपी स्टडी के अनुसार मेटाबॉलिक सिंड्रोम रिलेटेड माइक्रोएल्बुमिन्यूरिया को एक्सरसाइज चेंजेस और डायट के जरिए ठीक किया जा सकता है। इस स्टडी के अनुसार कच्ची सब्जियों और फलों का सेवन बढ़ाकर, मीट, जूस और प्रोसेस्ड कार्बोहायड्रेट को कम करके, अखरोट, बादाम, दालें, बीन्स, पीनट बटर को शामिल करके और एक्सरसाइज रूटीन को फॉलो करके इस कंडिशन को ठीक किया जाता है। एक्सरसाइज में कार्डियो के साथ ही रेजिस्टेंस ट्रेनिंग बेहद फायदेमंद बताई गई है।

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टाइप 2 डायबिटीज में माइक्रोएल्बुमिन्यूरिया का निदान (Diagnosis of microalbuminuria in type 2 diabetes)

टाइप 2 डायबिटीज में माइक्रोएल्बुमिन्यूरिया (Microalbuminuria in type 2 diabetes) का निदान लेबोरेटरी यूरिन टेस्ट के जरिए ही किया जाता है। इस टेस्ट को करवाने के लिए आपको कुछ अतिरिक्त तैयारी नहीं करनी होती है। यह टेस्ट कई प्रकार से किया जाता है कुछ मामलों में यूरिन सैम्पल को लेब्रोरेटरी में देना पड़ सकता है या कुछ मामलों में लेब खुद की सैम्पल कलेक्ट कर लेते हैं। इसमें यूरिन मौजूद एल्ब्यूमिन की मात्रा का पता लगाया जाता है। माइक्रो टर्म का मतलब होता है कि यूरिन में कम मात्रा में एल्बुमिन मौजूद है वहीं किडनी डैमेज बढ़ने पर एल्बुमिन की मात्रा बढ़ सकती है। डायबिटीज में माइक्रोएल्बुमिन्यूरिया का निदान एल्ब्यूमिन के बारे में पता लगाने के लिए किया जाता है ये तो आप समझ गए। अब ये भी जान लीजिए कि यह होता क्या है?

एल्ब्यूमिन (Albumin) क्या है?

एल्ब्यूमिन एक छोटा प्रोटीन है जो रक्तप्रवाह में बड़ी मात्रा में पाया जाता है। इसके कई कार्य हैं, जिसमें रक्त वाहिकाओं में तरल पदार्थ रखने और रक्त के माध्यम से कुछ पदार्थों को ले जाने में मदद करना शामिल है। चूंकि एल्ब्यूमिन एक छोटा प्रोटीन होने के साथ-साथ आम भी है, यह किडनी की बीमारी के लिए एक अच्छा प्रयोगशाला मार्कर बनता है। दूसरे शब्दों में, एल्ब्यूमिन उन पहले प्रोटीनों में से एक है जो किडनी खराब होने यूरिन में डिटेक्ट किए जा सकते हैं। इसलिए किडनी की बीमारी के लक्षण शुरू होने से पहले ही इसके बारे में पता करना मददगार होता है।

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टाइप 2 डायबिटीज (Type 2 diabetes) में माइक्रोएल्बुमिन्यूरिया के लिए डायट एंव एक्सरसाइज

टाइप 2 डायबिटीज में माइक्रोएल्बुमिन्यूरिया (Microalbuminuria in type 2 diabetes) को ठीक करने में डायट और एक्सरसाइज फायदेमंद हो सकती है। चलिए इन दोनों के बारे में जान लेते हैं, लेकिन इस बाता का ध्यान अपने रूटीन में किसी प्रकार का बदलाव करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

टाइप 2 डायबिटीज में माइक्रोएल्बुमिन्यूरिया (Microalbuminuria in type 2 diabetes)

टाइप 2 डायबिटीज में माइक्रोएल्बुमिन्यूरिया के लिए डायट (Diet for microalbuminuria in type 2 diabetes)

कुछ डॉक्टर टाइप 2 डायबिटीज में माइक्रोएल्बुमिन्यूरिया (Microalbuminuria in type 2 diabetes) इलाज करने के लिए लो प्रोटीन डायट फॉलो करने की सलाह देते हैं। प्रोटीन किडनी पर अधिक भार डालता है। कम प्रोटीन वाली डायट यूरिन में प्रोटीन लॉस को कम कर सकता है और ब्लड में प्रोटीन के स्तर को बढ़ा सकता है। लो प्रोटीन डायट फॉलो करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें। डायट्री चेंजेस के तहत आपको शुगर और हाय कार्बोहायड्रेट वाले फूड्स का इंटेक कम कर देना चाहिए।

साथ ही सॉल्ट इंटेक भी कम करना अच्छा होगा। यह डायबिटीज और किडनी दोनों के लिए अच्छा होगा। समय के साथ किडनी सोडियम वाटर बैलेंस को कंट्रोल करने की क्षमता खो देती है। डायट में सोडियम की मात्रा कम होने पर ब्लड प्रेशर कम होगा और बॉडी में फ्लूइड का बिल्ड अप नहीं होगा जो कि किडनी डिजीज में कॉमन होता है।घर के बने ताजे खाद्य पदार्थ खाएं और रेस्ट्रोरेंट के या पैकेज्ड फूड का सेवन कम करें क्योंकि इनमें नमक अधिक मात्रा में होता है।

स्थिति के हिसाब से डायट से फास्फोरस (Phosphorus), पोटेशियम (Potassium) को भी कम करना होगा। किडनी अतिरिक्त फास्फोरस को बॉडी से नहीं निकाल पाती है। मीट डेयरी प्रोडक्ट्स, बीन्स, नट्स और होल ग्रेन ब्रेड इन सभी में फास्फोरस पाया जाता है। इसके साथ ही पोटेशियम युक्त फूड्स को सेवन भी कम करना होगा।

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आप निम्न चीजों टाइप 2 डायबिटीज में माइक्रोएल्बुमिन्यूरिया (Microalbuminuria in type 2 diabetes) की स्थिति में खा सकते हैं।

  • फल: जामुन, अंगूर, चेरी, सेब, आलूबुखारा
  • सब्जियां: फूलगोभी, प्याज, बैंगन, शलजम
  • प्रोटीन: लीन मीट (मछली), अंडे, अनसाल्टेड सी फूड
  • कार्ब्स: सफेद ब्रेड, सैंडविच बन्स, अनसाल्टेड क्रैकर्स, पास्ता
  • पेय: पानी, बिना चीनी वाली चाय

टाइप 2 डायबिटीज में माइक्रोएल्बुमिन्यूरिया को मैनेज करने के लिए एक्सरसाइज (Exercise to manage microalbuminuria in type 2 diabetes)

निम्न एक्सरसाइज को टाइप 2 डायबिटीज में माइक्रोएल्बुमिन्यूरिया (Microalbuminuria in type 2 diabetes) को मैनेज करने के लिए अपनाया जा सकता है, लेकिन इस बारे में फिटनेस एक्सपर्ट और डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

लो इंपैक्ट कार्डियो एक्सरसाइज (Low-Impact Cardiovascular Exercise) कार्डियो एक्सरसाइज उन ब्लड वेसल्स की हेल्थ में सुधार करती है जो डायबिटीज रिलेटेड किडनी प्रॉब्लम्स से डील करती हैं। यह ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल लेवल को कम करने में भी मददगार हैं। इसमें आप स्विमिंग, साइकलिग, जॉगिंग और वॉकिंग को शामिल कर सकते हैं। इसके अलावा आप रेजिस्टेंस एक्सरसाइज और वेट ट्रेनिंग भी कर सकते हैं। ये ब्लड शुगर को मैनेज करने और वेट कम करने भी मददगार होती हैं। अगर आप किसी भी प्रकार के डायबिटीज कॉम्प्लिकेशन का सामना कर रहे हैं तो किसी भी एक्सरसाइज को शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें। साथ ही अपने ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल में रखें ताकि डायबिटीज कॉम्प्लिकेशन के रिस्क को कम किया जा सके। अपनी दवाओं को समय पर लें।

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उम्मीद करते हैं कि आपको डायबिटीज में माइक्रोएल्बुमिन्यूरिया (Microalbuminuria in type 2 diabetes) और इसके उपचार से संबंधित जरूरी जानकारियां मिल गई होंगी। अधिक जानकारी के लिए एक्सपर्ट से सलाह जरूर लें। अगर आपके मन में अन्य कोई सवाल हैं तो आप हमारे फेसबुक पेज पर पूछ सकते हैं। हम आपके सभी सवालों के जवाब आपको कमेंट बॉक्स में देने की पूरी कोशिश करेंगे। अपने करीबियों को इस जानकारी से अवगत कराने के लिए आप ये आर्टिकल जरूर शेयर करें।

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Manjari Khare द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 03/12/2021 को
और Hello Swasthya Medical Panel द्वारा फैक्ट चेक्ड