कीटो डायट और इंटरमिटेंट फास्टिंग: दोनों है फायदेमंद, लेकिन वजन घटाने के लिए कौन है बेहतर?
फिट रहना हर कोई चाहता है, लेकिन स्वस्थ रहना सिर्फ कहने से नहीं रहा जा सकता। इसलिए इनदिनों कई लोग तरह-तरह के डायट प्लान का विकल्प अपनाते हैं। आज कीटो डायट और इंटरमिटेंट फास्टिंग का विकल्प कई लोग वजन संतुलित रखने के लिए या बढ़े हुए अतिरिक्त वजन को कम करने के लिए अपनाते हैं। कीटो डायट और इंटरमिटेंट फास्टिंग क्या है? कीटो डायट और इंटरमिटेंट फास्टिंग में क्या अंतर है? कीटो डायट और इंटरमिटेंट फास्टिंग से जुड़े कई अन्य सवालों और उनके जवाब को भी समझने की कोशिश करेंगे।
कीटो डायट और इंटरमिटेंट फास्टिंग क्या है?
कीटो डायट (Keto diet) क्या है?
कीटो डायट से करें वजन कम
कीटो डायट को केटोजेनिक डायट (Ketogenic diet) के नाम से भी जाना जाता है। इनदिनों वजन कम करने के लिए कीटो डायट प्लान का ट्रेंड काफी तेजी से बढ़ता जा रहा है।आम लोगों से लेकर बॉलीवुड स्टार्स, स्पोर्ट्स प्लेयर भी कीटो डायट प्लान फॉलो कर रहें हैं। कीटो डायट में कार्ब्स की मात्रा कम होती है, वहीं फैट की मात्रा ज्यादा होती है। दरअसल कीटोसिस एक नैचुरल प्रोसेस है और इस प्रोसेस के तहत जिन खाद्य पदार्थों का सेवन किया जाता है, तो वह खाद्य पदार्थ ग्लूकोज और इंसुलिन में बदल जाता है। लेकिन कीटोसिस प्रोसेस के तहत या कीटो डायट फॉलो करने पर कार्बोहाइड्रेट की मात्रा का सेवन कम किया जाता है और फैट से बॉडी को एनर्जी मिलती है। इसी प्रक्रिया को कीटोसिस कहते हैं। कीटो डायट प्लान में कार्ब्स की मात्रा कम होती है, प्रोटीन की मात्रा सामान्य होती है वहीं फैट की मात्रा ज्यादा होती है।
इंटरमिटेंट फास्टिंग डायट प्लान के अंतर्गत आने वाला एक तरह का डायट शेड्यूल है। इंटरमिटेंट फास्टिंग (IF) को इंटरमिटेंट कैलोरी रेस्ट्रिक्शन (Intermittent calorie restriction) भी कहा जाता है। इस डायट प्लान के अंतर्गत क्या खाने की बजाये कब खाएं इस पर विचार किया जाता है। इसलिए इंटरमिटेंट फास्टिंग के दौरान डायट प्लान शेड्यूल किया जाता है। कीटो डायट और इंटरमिटेंट फास्टिंग में सबसे प्रमुख अंतर यही है कि कीटो डायट में क्या खाना है और इंटरमिटेंट फास्टिंग में कब खाना है, यह सुनिश्चित किया जाता है। इंटरमिटेंट फास्टिंग के दौरान शरीर में मौजूद फैट एनर्जी में तब्दील होती है, जिससे वजन कम करने में सहायता मिलती है। यह ध्यान रखें की इंटरमिटेंट फास्टिंग वास्तव में आहार नहीं बल्कि खाने का एक तरह का पैटर्न है।
कीटो डायट और इंटरमिटेंट फास्टिंग पूरे विश्व के लोग वजन कम करने के लिए फॉलो करते हैं, लेकिन कई लोग इस बात से परेशान भी रहते हैं कि वजन कम करने के लिए कीटो डायट और इंटरमिटेंट फास्टिंग दोनों में कौन बेहतर है? हैलो स्वास्थ्य की टीम ने मुंबई की रहने वाली 31 वर्षीय ईशा तनेजा से बात की। ईशा कहती हैं “मैं एक प्रोडक्शन हॉउस में बतौर सीनियर प्रोड्यूसर की तरह काम करती हूं, जिसमें मुझे कई घंटे लगातर बैठना पड़ता है। घंटों बैठने की वजह से मेरा वजन लगातार बढ़ते जा रहा था ऐसी स्थिति में कीटो डायट प्लान फॉलो करना पड़ा। तकरीबन तीन महीने मुझे यह डायट प्लान फॉलो करने के बाद मेरा वजन कुछ हद तक कम हुआ है। मैं अभी भी डायट प्लान के साथ-साथ रेगुलर वर्कआउट फॉलो करती हूं।’
इंटरमिटेंट फास्टिंग के बारे में हैलो स्वास्थ्य की टीम ने बैंगलोर के रहने वाले 33 वर्षीय चंदन सिंह से बात की। चंदन कहते हैं “मेरा वजन 78 kg था और अगर मैं अपने बढ़ते वजन को कंट्रोल नहीं करता, तो मेरी शारीरिक परेशानी बढ़ जाती। इसलिए मैंने इंटरमिटेंट फास्टिंग का सहारा लिए। थोड़े लंबी अवधी तक न खाने की वजह से शुरुआत में इस डायट प्लान को फॉलो करना मेरे लिए डिफिकल्ट था, लेकिन कुछ ही दिनों में मैंने डायट शेड्यूल को फॉलो कर लिया। तकरीबन दो से ढ़ाई महीने के बाद मेरा वजन कंट्रोल हुआ है।’
कीटो डायट या इंटरमिटेंट फास्टिंग: कौन है बेहतर विकल्प?
कीटो डायट और इंटरमिटेंट फास्टिंग में क्या है अंतर?
कीटो डायट और इंटरमिटेंट फास्टिंग में मुख्य अंतर निम्नलिखित हैं:-
कीटो डायट: कीटो डायट में कार्ब्स की मात्रा कम होती है, प्रोटीन की मात्रा सामान्य होती है और फैट की मात्रा ज्यादा होती है।
इंटरमिटेंट फास्टिंग: इंटरमिटेंट फास्टिंग वास्तव में आहार नहीं बल्कि खाने का एक तरह का पैटर्न है।
कीटो डायट और इंटरमिटेंट फास्टिंग: इन दोनों में से कौन है वजन कम करने का बेहतर विकल्प?
कीटो डायट और इंटरमिटेंट फास्टिंग दोनों ही वजन कम करने में सहायक होते हैं। लेकिन दोनों ही अलग-अलग स्थिति या शारीरिक बनावट पर भी निर्भर करता है। इंटरमिटेंट फास्टिंग की मदद से वजन को घटाना आसान होता है, लेकिन जैसे ही इस डायट पैटर्न को आप रोक देते हैं, तो आपका वजन फिर से और तेजी से बढ़ने लगता है। इंटरमिटेंट फास्टिंग को दो महीने तक फॉलो करने से लाभ मिलता है। लेकिन अगर इसे ज्यादा लंबे वक्त तक फॉलो किया जाए, तो थकावट या कमजोरी जैसे शारीरिक परेशानी शुरू हो सकती है। वहीं नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन (NCBI) के अनुसार इंटरमिटेंट फास्टिंग का लाभ ज्यादा मिले इस पर रिसर्च जारी है। इंटरमिटेंट फास्टिंग की तुलना में कीटो डायट ज्यादा वक्त तक फॉलो किया जा सकता है और इस डायट के दौरान आपको कमजोरी जैसी परेशानी महसूस नहीं होगी। इसलिए बेहतर होगा वजन संतुलित रखने के लिए या बढ़ते वजन को कम करने के लिए अगर आप कीटो डायट और इंटरमिटेंट फास्टिंग या कोई अन्य डायट प्लान फॉलो करना चाहते हैं, तो आहार विशेषज्ञ से संपर्क करें।
कीटो डायट और इंटरमिटेंट फास्टिंग के फायदे क्या हैं?
कीटो डायट:-
कीटो डायट के फायदे से पहले इस डायट प्लान कितने तरह का होता है? कीटो डायट चार अलग-अलग तरह के होते हैं। जैसे: स्टैंडर्ड केटोजेनिक डायट, साइक्लिक केटोजेनिक डायट, टार्गेटेड केटोजेनिक डायट एवं हाई प्रोटीन केटोजेनिक डायट।
कीटो डायट के फायदे क्या हैं?
कीटो डायट के फायदे निम्नलिखित हैं। जैसे:
शरीर के बढ़े हुए अतिरिक्त वजन को कम करना।
कीटो डायट फॉलो करने से ब्लड शुगर लेवल बैलेंस्ड रहता है। इसलिए कीटो डायट डायबिटीज पेशेंट के लिए होता है लाभकारी।
शरीर में एनर्जी लेवल रहता है बेहतर और आप अपने आपको एक्टिव महसूस कर सकते हैं।
कुछ रिसर्च के अनुसार कीटो डायट के फायदे मिर्गी के मरीजों को भी मिलता है।
शरीर में कोलेस्ट्रॉल लेवल को बैलेंस्ड करने का काम कीटो डायट से किया जा सकता है।
कीटो डायट फॉलो करने पर बार-बार भूख लगने की भी परेशानी होती है दूर।
मेटाबोलिक सिंड्रोम जैसे हाई ब्लड प्रेशर की समस्या, हाई ब्लड शुगर की परेशानी, कोलेस्ट्रॉल लेवल बैलेंस्ड न रहना एवं कमर के आसपास अत्यधिक फैट की समस्या से पीड़ित लोगों को भी कीटो डायट का लाभ मिलता है।
वैसे लोग जिनका ब्लड प्रेशर सामान्य से ज्यादा रहता है, उनके लिए भी कीटो डायट फायदेमंद होता है।
इंटरमिटेंट फास्टिंग:-
इंटरमिटेंट फास्टिंग के दौरान डायट शेड्यूल करना पड़ता है। जैसे 16/8 विधि, 5:2 विधि या वॉरियर डायट। यहां 16/8 विधि का अर्थ है 16 घंटे फास्ट रहना और 8 घंटे में तीन से चार बार खाया जा सकता है। फास्ट के दौरान बिना मीठे वाला पेय पदार्थों का सेवन किया जा सकता है। वहीं 5:2 विधि का अर्थ है हफ्ते में पांच दिन हेल्दी डायट का सेवन करना और दो दिनों का उपवास रखना। अगर कोई वॉरियर डायट प्लान फॉलो कर रहें हैं, तो उन्हें अपने आहार में कैलोरी की मात्रा कम से कम रखनी होगी।
रिसर्च के अनुसार इंटरमिटेंट फास्टिंग से वजन कम करने के साथ ही लिपिड प्रोफाइल भी बेहतर होता है, जिससे बैड कोलेस्ट्रॉल का निर्माण नहीं हो पाता है।
शरीर में ब्लड शुगर रहता है बैलेंसड।
सेल्स के निर्माण में वैसे सेल्स जो किसी कारण नष्ट हो रहें हैं, उन्हें भी बेहतर बनाने का कार्य इंटरमिटेंट फास्टिंग के जरिए किया जा सकता है।
कुछ रिसर्च में यह बताया गया है की कैंसर पेशेंट्स के लिए भी इंटरमिटेंट फास्टिंग लाभकारी हो सकता है। कैंसर पेशेंट्स शार्ट टर्म फास्टिंग का विकल्प अपना सकते हैं। इससे शरीर में विषाक्त जमा नहीं हो पाता है और यह कीमोथेरिपी में सहायक होता है। कैंसर विशेषज्ञों की मानें, तो कीमोथेरिपी के दौरान डीएनए को जो नुकसान पहुंचता है, उसे ठीक करने का कार्य शार्ट टर्म फास्टिंग की मदद से किया जा सकता है। हालांकि शार्ट टर्म फास्टिंग या किसी अन्य डायट प्लान को फॉलो करने के पहले अपने हेल्थ एक्सपर्ट से जरूर सलाह लें।
इंटरमिटेंट फास्टिंग से शरीर में सूजन की समस्या से भी राहत मिल सकता है।
रिसर्च के अनुसार मस्तिष्क को स्वस्थ्य रखने में इंटरमिटेंट फास्टिंग आपकी सहयता कर सकता है।
इन ऊपर बताई गई स्थितियों में किसी भी डायट को फॉलो करने से पहले डॉक्टर से संपर्क करें।
दोनों ही डायट के अपने-अपने फायदे हैं और नुकसान भी। लेकिन अगर आप वजन कम करने के लिए कीटो या इंटरमिटेंट फॉलो करना चाहते हैं, तो खुद से डायट प्लान या किसी के कहने पर फॉलो न करें। क्योंकि हर एक व्यक्ति के शरीर की बनावट अलग होती है। अगर आप सिर्फ कीटो डायट फॉलो करते हैं, तो लंबे वक्त तक एक ही तरह के खाद्य पदार्थों का सेवन करना पड़ेगा और शायद आपको बोरियत महसूस हो। वहीं अगर आप इंटरमिटेंट फास्टिंग का विकल्प लंबे वक्त तक अपनाते हैं, तो आप कमजोरी महसूस कर सकते हैं। इसलिए हेल्दी डायट मेंटेन रखने के लिए हेल्दी फूड का सेवन करें।
अगर आप कीटो डायट और इंटरमिटेंट फास्टिंग या किसी अन्य डायट प्लान से जुड़े किसी तरह के कोई सवाल का जवाब जानना चाहते हैं, तो विशेषज्ञों से समझना बेहतर होगा।
बीएमआई कैलक्युलेटर
डिस्क्लेमर
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