हार्ट एंजियोप्लास्टी और स्टेंट प्लेसमेंट: ये है दिल का मामला, ना बरतें लापरवाही!
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (World Health Organization) में पब्लिश्ड रिपोर्ट के अनुसार पूरे विश्व में 75 प्रतिशत डेथ का कारण कार्डियोवैस्कुलर डिजीज (Cardiovascular Disease) माना गया है। ज्यादातर लोगों में ब्लड प्रेशर बढ़ने (High Blood Pressure) के बाद धीरे-धीरे दिल की बीमारी (Heart Disease) का खतरा बढ़ जाता है। दिल से जुड़ी एक नहीं, बल्कि कई बीमारियां हैं और आज इस आर्टिकल में हार्ट एंजियोप्लास्टी और स्टेंट प्लेसमेंट (Heart Angioplasty and Stent Placement) से जुड़ी जानकारी शेयर करेंगे।
हार्ट एंजियोप्लास्टी और स्टेंट प्लेसमेंट क्या है?
हार्ट एंजियोप्लास्टी और स्टेंट प्लेसमेंट की जरूरत कब पड़ती है?
हार्ट एंजियोप्लास्टी और स्टेंट प्लेसमेंट के रिस्क फैक्टर क्या हो सकते हैं?
हार्ट एंजियोप्लास्टी और स्टेंट प्लेसमेंट के पहले किन-किन बातों का ध्यान रखें?
हार्ट एंजियोप्लास्टी और स्टेंट प्लेसमेंट कैसे की जाती है?
हार्ट एंजियोप्लास्टी और स्टेंट प्लेसमेंट (Heart Angioplasty and Stent Placement) से जुड़े इन सवालों का जवाब जानते हैं।
हार्ट एंजियोप्लास्टी और स्टेंट प्लेसमेंट (Heart Angioplasty and Stent Placement) क्या है?
हार्ट एंजियोप्लास्टी (Heart Angioplasty)-
हार्ट एंजियोप्लास्टी एक सर्जिकल प्रोसेस है, जिसमें हार्ट की मसल्स तक ब्लड सप्लाई (Blood Supply) करने वाले ब्लड वेसेल्स को खोला जाता है। इन ब्लड वेसेल्स को मेडिकल टर्म में कोरोनरी आर्टरीज (Coronary Artery) कहते हैं। हार्ट एंजियोप्लास्टी (Heart Angioplasty) की जरूरत हार्ट अटैक (Heart Attack) या स्ट्रोक (StrokE) जैसी स्थितियों में पड़ती है।
स्टेंट प्लेसमेंट (Stent Placement)-
स्टेंट मेटल से बनाया गया एक ट्यूब होता है। स्टेंट को स्टेंट ग्राफ्ट भी कहा जाता है। स्टेंट प्लेसमेंट हार्ट डिजीज जैसे हार्ट अटैक के पेशेंट्स के लिए की आवश्यकता पड़ती है। अगर इसे और ज्यादा आसान शब्दों में समझें, तो सिकुड़ी हुई आर्टरीज को खोलने के लिए स्टेंट लगाई जाती है। इस प्रक्रिया को एंजियोप्लास्टी (Angioplasty) भी कहा जाता है।
हार्ट एंजियोप्लास्टी और स्टेंट प्लेसमेंट (Heart Angioplasty and Stent Placement) की जरूरत कब पड़ती है?
नैशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इन्फॉर्मेशन (National Center for Biotechnology Information) में पब्लिश्ड रिपोर्ट के अनुसार आर्टरीज के वॉल पर जब प्लाक (Plaque) जमा होने लगे, तो ऐसी स्थिति एथेरोस्क्लेरोसिस (Atherosclerosis) कहलाती है। एथेरोस्क्लेरोसिस की समस्या होने पर हार्ट एंजियोप्लास्टी और स्टेंट प्लेसमेंट (Heart Angioplasty and Stent Placement) की जरूरत पड़ सकती है। आर्टरीज के वॉल पर जब प्लाक जमने लगे, तो ऐसे में आर्टरीज सिकुड़ने लगती है, जिससे ब्लड फ्लो (Blood Flow) में बाधा पहुंचने लगता है।
आर्टरीज के वॉल पर जब प्लाक जमा होने लगता है, तो इस कंडिशन को कोरोनरी हार्ट डिजीज (Coronary heart disease) भी कहते हैं और इसे सीरियस हेल्थ कंडिशन माना जाता है। गंभीर स्थिति इसलिए भी माना जाता है, क्योंकि इससे हार्ट को फ्रेश ऑक्सिजिनेटेड ब्लड (Oxygenated blood) की पूर्ति नहीं हो पाती है।
हार्ट एंजियोप्लास्टी और स्टेंट प्लेसमेंट (Heart Angioplasty and Stent Placement) की मदद से आर्टरीज में हुए ब्लॉकेज (Blockage) को दूर करने में मदद मिलती है। वहीं हार्ट अटैक (Heart attack) जैसे इमरजेंसी सिचुऐशन में भी हार्ट एंजियोप्लास्टी और स्टेंट प्लेसमेंट की प्रक्रिया अपनाई जाती है।
रिसर्च रिपोर्ट्स के अनुसार कोरोनरी आर्टरीज बायपास सर्जरी (Coronary artery bypass surgery) की स्थिति में हार्ट एंजियोप्लास्टी और स्टेंट प्लेसमेंट की जरूरत नहीं पड़ती है। वहीं अगर ब्लॉकेज (Multiple blockage) की समस्या एक से ज्यादा हो या पेशेंट डायबिटिक (Diabetic) हों, तो ऐसी स्थिति में भी कोरोनरी आर्टरीज बायपास सर्जरी का विकल्प अपनाते हैं।
हार्ट एंजियोप्लास्टी और स्टेंट प्लेसमेंट के रिस्क फैक्टर क्या हो सकते हैं? (Risk factor of Heart Angioplasty and Stent Placement)
किसी भी सर्जिकल प्रोसेस में खतरा ज्यादा रहता है। हार्ट एंजियोप्लास्टी और स्टेंट प्लेसमेंट हार्ट के आर्टरीज में होने की वजह से यह प्रक्रिया ज्यादा रिस्की हो जाता है। इसलिए हार्ट एंजियोप्लास्टी और स्टेंट प्लेसमेंट (Heart Angioplasty and Stent Placement) के कारण निम्नलिखित शारीरिक परेशानियां हो सकती है। जैसे:
दवाओं के सेवन से एलर्जी (Allergy) की समस्या हो सकती है।
सांस लेने में कठिनाई (Breathing problems) महसूस होना।
सर्जरी की वजह ब्लीडिंग (Bleeding) की संभावना बढ़ सकती है।
स्टेनटेड आर्टरी (Stented artery) में ब्लॉकेज की समस्या होना।
सर्जरी की वजह से इंफेक्शन (Infection) का खतरा बढ़ जाता है।
आर्टरी (Artery) सिकुड़ सकती है।
यहां ऊपर बताई गई समस्या हार्ट एंजियोप्लास्टी और स्टेंट प्लेसमेंट (Heart Angioplasty and Stent Placement) के बाद हो सकती है। हालांकि ऐसी स्थिति ना हो इसलिए डॉक्टर हार्ट एंजियोप्लास्टी और स्टेंट प्लेसमेंट के बाद पेशेंट की सेहत पर नजर बनाये रहते हैं और आवश्यक दवा देते हैं। हार्ट एंजियोप्लास्टी और स्टेंट प्लेसमेंट के बाद पेशेंट की देखभाल पर भी ध्यान देना जरूरी बताया गया है। हालांकि अगर डॉक्टर ने हार्ट एंजियोप्लास्टी और स्टेंट प्लेसमेंट (Heart Angioplasty and Stent Placement) रिकमेंड किया है, तो सर्जरी की प्रक्रिया से पहले कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है।
हार्ट एंजियोप्लास्टी और स्टेंट प्लेसमेंट के पहले किन-किन बातों का ध्यान रखें? (Things to follow before Heart Angioplasty and Stent Placement)
हार्ट एंजियोप्लास्टी और स्टेंट प्लेसमेंट के पहले निम्नलिखित बातों का ध्यान रखें। जैसे:
अगर आप किसी भी तरह की दवा (Drugs), हर्ब्स (Herbs) या सप्लिमेंट्स (Supplements) का सेवन करते हैं, तो इसकी जानकारी डॉक्टर को दें।
ब्लड क्लॉट करने वाली दवाएं जैसे एस्प्रिन (Aspirin), प्लाविक्स (Plavix), एडविल (Advil) या नैप्रोक्सिन naproxen जैसी दवाओं का सेवन ना करें और इसकी जानकारी डॉक्टर को जरूर दें।
हार्ट एंजियोप्लास्टी और स्टेंट प्लेसमेंट कैसे की जाती है? (Process of Heart Angioplasty and Stent Placement)
हार्ट एंजियोप्लास्टी और स्टेंट प्लेसमेंट के दौरान ग्रोइन में हल्का चीरा लगाकर फ्लैक्सिबल कैथेटर ट्यूब (Catheter Tube) आर्टरी तक पहुंचाया जाता है। कार्डियोलॉजिस्ट कैथेटर की मदद से वायर पहुंचाई जाती है। कैथेटर में एक छोटा बैलून अटैच होता है। जैसी ही यह ब्लॉक्ड आर्टरी (Blocked Artery) में पहुंचता है, तो यह फ्लैट हो जाता है। इस प्रक्रिया के बाद मरीज को राहत मिलती है।
हार्ट एंजियोप्लास्टी और स्टेंट प्लेसमेंट नए जीवन मिलने के जैसा है, लेकिन इस सर्जरी (Surgery) के बाद भी हेल्दी लाइफस्टाइल जैसे हेल्दी डायट (Healthy Diet), नियमित शारीरिक क्षमता एवं डॉक्टर द्वारा दिए गए एडवाइस के अनुसार एक्सरसाइज (Exercise), योगासन (Yoga) या वॉक (Walk) करें। ऐसा करने से हार्ट को हेल्दी रखने में मदद मिलती है।
हार्ट एंजियोप्लास्टी और स्टेंट प्लेसमेंट (Heart Angioplasty and Stent Placement) के बाद मरीज को ठीक होने में तकरीबन तीन महीने का वक्त लग सकता है। वहीं सर्जरी के बाद डॉक्टर से समय-समय पर या डॉक्टर द्वारा बताये अनुसार समय पर कंसल्ट करें।
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डिस्क्लेमर
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