सेल्फ मेडिकेशन (Self Medication) से किडनी प्रॉब्लम को न्यौता दे सकते हैं आप

चिकित्सक द्वारा समीक्षित | द्वारा

अपडेट डेट नवम्बर 3, 2020 . 6 मिनट में पढ़ें
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कोई भी शारीरिक परेशानी होती है, तो कई बार हमसभी डॉक्टर से बिना पूछे ही सेल्फ मेडिकेशन यानि खुद से अपना इलाज शुरू कर देते हैं। लेकिन सेल्फ मेडिकेशन से किडनी प्रॉब्लम की परेशानी शुरू हो सकती है। अन्य बॉडी ऑर्गेन की तरह किडनी भी शरीर के महत्वपूर्ण अंगों में से एक है। किडनी में परेशानी की वजह से जान भी जा सकती है। क्लिनिकल जर्नल ऑफ द अमेरिकन सोसाइटी ऑफ नेफ्रोलॉजी (CJASN) द्वारा साल 2018 की रिपोर्ट के अनुसार भारत समेत दुनियाभर भर में किडनी की बीमारी से पीड़ित लोगों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। लोग किडनी संबंधित किसी भी परेशानी को गंभीरता से नहीं लेते हैं, जिससे आगे चलकर एक्यूट किडनी इंजरी की समस्या हो सकती है। हैरानी वाली बात यह है कि लोग हमारे शरीर के इतने जरूरी अंग के महत्व के बारे में ही नहीं जानते हैं। शायद उन्हें यह मालूम नहीं है कि सेल्फ मेडिकेशन से किडनी प्रॉब्लम उन्हें किस तरह प्रभावित कर रही है। यही नहीं, सेल्फ मेडिकेशन से किडनी प्रॉब्लम की समस्या लगातार बढ़ती ही जा रही है।

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सेल्फ मेडिकेशन से किडनी प्रॉब्लम

सेल्फ मेडिकेशन से किडनी प्रॉब्लम की समस्या शुरू हो सकती और आप एक्यूट इंटरस्टेटियल नेफ्रैटिस (Acute Interstitial Nephritis), एक्यूट किडनी इंजरी (Acute Kidney Injury), क्रॉनिक किडनी डिजीज (Chronic Kidney Disease) से लेकर ‘एंड स्टेज रीनल डिजीज’ (End-Stage Renal Disease) जैसी बीमारियों का खतरा हो सकता है। इन सभी किडनी संबंधित परेशानियों में पेशेंट्स को अंत में डायलिसिस करवाने की जरूरत पड़ सकती है। दुनियाभर में 80 करोड़ से ज्यादा लोग किसी ना किसी किडनी के रोग से ग्रसित हैं। हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो किडनी पेशेंट्स एक साल में डायलिसिस के लिए 3-4 लाख रुपये खर्च कर देते हैं। वहीं किडनी ट्रांसप्लांट में 6-7 लाख रुपए तक का खर्च आता है और इसके साथ में 1 लाख रुपये तक का खर्च डॉक्टर द्वारा लिखी गई दवाओं का होता है। सेल्फ मेडिकेशन से किडनी प्रॉब्लम की समस्या ना हो इसलिए खुद से किसी भी बीमारी का इलाज ना करें।

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शरीर में क्या काम करती है किडनी? (Role of kidney in our body)

किडनी के मुख्य कार्य इस प्रकार हैं –

  • किडनी खून में मौजूद टॉक्सिन्स को साफ करने का काम करती है। बॉडी के टॉक्सिन को निकालने की वजह से ही इसे बॉडी का फिल्टर भी कहा जाता है। इसलिए सेल्फ मेडिकेशन से किडनी प्रॉब्लम शुरू हो सकती है।
  • शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स और पानी का संतुलन बनाने का काम किडनी करती है।
  • यह शरीर में जरूरी मात्रा में पानी को रखकर अधिक जमा हुए पानी को यूरिन के रूप में बाहर निकालती है।
  • किडनी द्वारा रिलीज किए गए हॉर्मोन्स ब्लड प्रेशर को भी मेंटेन रखने में भी अहम भूमिका निभाते हैं।
  • किडनी रेड ब्लड सेल्स और विटामिन-डी को बनाने में मदद करती है। विटामिन-डी हड्डियों को मजबूत बनाने और ओवरऑल हेल्थ को बनाए रखने में मदद मिलती है।

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सेल्फ मेडिकेशन से किडनी प्रॉब्लम का बढ़ रहा जोखिम (Self Medication leads to Kidney Problems) 

बहुत सारे लोग थोड़ा सा दर्द होता नहीं कि पेनकिलर दवा का सेवन कर लेते हैं। ये दवाएं किडनी को नुकसान पहुंचाती हैं। डॉक्टर्स के अनुसार सेल्फ मेडिकेशन से किडनी प्रॉब्लम की खतरा बढ़ जाता है क्योंकि प्रायः लोग सिरदर्द या अन्य बॉडी पेन होने पर दर्द की दवा का सेवन कर लेते हैं। डॉक्टर्स भी अक्सर इस बात की शिकायत करते हैं कि कई मरीज ऐसे हैं, जो महीनों या सालों पहले लिखी दवाओं का सेवन नियमित करते रहते हैं। स्थानीय मेडिकल स्टोर से बिना प्रिस्क्रिपशन के मिलने वाली दवाओं का लोग सेवन करते हैं। उन्हें यह मालूम भी नहीं होता कि ये दवाएं उनकी किडनी पर कितना बुरा असर डाल रही होती हैं या कि ये सेल्फ मेडिकेशन उनकी किडनी प्रॉब्लम को बढ़ा सकती हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों की लोगों को सलाह है कि कभी भी अपने डॉक्टर से पूछे बिना किसी दवा का सेवन ना करें। पेनकिलर टैबलेट (पैरासिटामोल, आइबूप्रोफेन, एस्पिरिन, निमेसुलाइड आदि), एंटीबायोटिक्स (सल्फोनामाइड्स, टोबरामायसिन, वैंकोमायसिन आदि), एसिडिटी के लिए प्रोटॉन पंप इन्हिबिटर्स, जैसे ओमेप्राजोल, लांसोप्राजोल, पैंटोप्राजोल, रेबेप्राजोल आदि) ऐसी दवाएं हैं, जिन्हें डॉक्टर और मेडिकल एक्सपर्ट्स अक्सर रिकमेंड करते हैं, लेकिन इन दवाओं का सेवन तबतक ही करना चाहिए जब आपके डॉक्टर से इसके सेवन की सलाह दी हो। इसे लेकर यूएसएफडीए (यूनाइटेड स्टेट्स फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेटर) और कई अन्य अंतरराष्ट्रीय निकायों ने दवाओं के दुष्प्रभावों को लेकर सार्वजनिक रूप से लोगों को सतर्क भी किया है। लेकिन अक्सर लोग इसे तब तक नहीं समझते जब तक कोई बड़ी शारीरिक परेशानी नहीं आ जाती। अगर इसे आसान शब्दों में समझें तो सेल्फ मेडिकेशन से आप खुद ही बीमारी को अनजाने में दावत दे रहें हैं।

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नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इन्फॉर्मेशन (NCBI) के अनुसार, गैस या एसिडिटी के उपचार के लिए दी जाने वाली पीपीआई (Proton Pump Inhibitor) दवाओं का लंबे समय तक इस्तेमाल करने से किडनी पर बुरा असर पड़ता है। पीपीआई ड्रग्स जैसे ओमेप्राजोल, लांसोप्राजोल, पैंटोप्राजोल, रेबेप्राजोल आदि का इस्तेमाल  6-8 हफ्तों से ज्यादा समय तक करने से क्रॉनिक किडनी डिजीज का खतरा बढ़ जाता है। जो लोग इन दवाओं का सेवन करते हैं, उन्हें इसके जोखिम की जानकारी भी होनी चाहिए। इसलिए यह ध्यान रखें कि आपके डॉक्टर आपको जितने दिनों के लिए दवाओं के सेवन की सलाह दे रहें, उसे उसी टाइम पीरियड तक सेवन करें। अगर आप डोज से ज्यादा दवाओं का सेवन कर रहें हैं, तो इसका अर्थ है आप सेल्फ मेडिकेशन से किडनी प्रॉब्लम को इन्वाइट कर रहें हैं।

हाल ही में डीसीजी आई (ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया) ने इसे लेकर कदम उठाते हुए, ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने सभी प्रोटॉन पंप इनहिबिटर यानी पीपीआई दवाओं जैसे कि ओमेप्राजोल, लांसोप्राजोल, पैंटोप्राजोल, रेबेप्राजोल आदि के लेबल पर ‘एक्यूट किडनी डैमेज’ की चेतावनी को शामिल करने के निर्देश जारी किए हैं।

ये सभी दवाएं एक्यूट और क्रॉनिक किडनी डिजीज का कारण बन सकती हैं। खासकर तब, जब आप लंबे समय तक गैस की दवा के रूप में इसका सेवन कर रहे हैं।

हेल्थ एक्सपर्ट्स एवं डीसीजीआई के अनुसार प्रोटॉन पंप इन्हिबिटर्स (पीपीआई) का सेवन केवल डॉक्टर के परामर्श के बाद ही किया जाना चाहिए। इसके अलावा, जो रोगी पीपीआई थेरिपी पर हैं। अंतर्राष्ट्रीय संगठन सुझाव देते हैं कि इसके दीर्घकालिक गंभीर परिणामों को कम करने के लिए समय के साथ धीरे-धीरे इसकी खुराक को कम करने का प्रयास किया जाना चाहिए। इसकी अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से इसके बारे में बात करें।

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किडनी से संबंधित बीमारी कौन-कौन सी है?

एक्यूट किडनी डिजीज- किडनी में अचानक से हुई खराबी एक्यूट किडनी डिजीज या एक्यूट किडनी इंजूरी के अंतर्गत आती है। हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार इनफेक्शन या किसी दवा के साइड इफेक्ट्स की वजह से किडनी टिशू डैमेज होने की स्थिति में एक्यूट किडनी डिजीज की समस्या शुरू हो जाती है। कई बार किडनी स्टोन की वजह से एक्यूट किडनी डिजीज का खतरा बढ़ जाता है।

क्रॉनिक किडनी डिजीज– उम्र बढ़ने के साथ-साथ किडनी कमजोर होने लगती है और धीरे-धीरे किडनी फेल होने का खतरा बढ़ जाता है। क्रॉनिक किडनी डिजीज से पीड़ि पेशेंट्स को डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ती है।

किडनी स्टोन- नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इन्फॉर्मेशन (NCBI) के साल 2018 के रिपोर्ट अनुसार 12 प्रतिशत लोग किडनी स्टोन की समस्या से पीड़ित हैं। किडनी स्टोन शरीर में प्रोटीन बढ़ने के कारण या खान-पान की वजह से होने वाली समस्या है।

किडनी इंफेक्शन- किडनी इंफेक्शन यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन का ही एक कारण है। यूटीआई (UTI) के कई कारण हो सकते हैं।

इन परेशानियों के साथ-साथ निम्नलिखित किडनी की बीमारी हो सकती है। जैसे किडनी पेन या यूरिन से ब्लड आने की समस्या।

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सेल्फ मेडिकेशन से किडनी प्रॉब्लम से बचने के लिए क्या करें? 

सेल्फ मेडिकेशन से किडनी प्रॉब्लम ना हो या किसी भी शारीरिक परेशानी से बचने के लिए निम्नलिखित टिप्स को फॉलो करें। जैसे :

  • प्रोटॉन पंप इन्हिबिटर्स (पीपीआई) जैसी दवाओं को लंबे समय तक लेने से परहेज करें। यदि आप या आपके प्रियजन डॉक्टर द्वारा रिकमेंड की गई दवा की खुराक के बाद भी इसका सेवन कर रहे हैं, तो एक बार डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।
  • इन दवाओं को लेने के दौरान शराब पीने से बचें, क्योंकि इससे आपको डिहाइड्रेशन और रक्तचाप में वृद्धि की समस्या हो सकती है। इससे गुर्दे की शिथिलता का खतरा बढ़ सकता है।
  • शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने के लिए पर्याप्त तरल पदार्थ पिएं। डिहाइड्रेशन से किडनी फेल का खतरा अधिक होता है, क्योंकि यह दवा को लंबे समय तक शरीर में जमा रखता है।
  • इसके अलावा अपने लाइफस्टाइल में बदलाव भी जरूरी है, जैसे कि नियमित रूप से एक्सरसाइज करना, खाने में नमक की कम मात्रा लेना, स्मोकिंग ना करना, ब्लड प्रशर और शुगर का कंट्रोल में रहना आदि।

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सिरदर्द या बॉडी पेन की परेशानी को खत्म करने के लिए पेन किलर का सेवन जितने आसानी से किया जाता है, लेकिन अनजाने में ही सही पर हमसभी किडनी की बीमारियों के साथ-साथ अन्य बीमारियों को भी खतरा बढ़ जाता है। पेन किलर के सेवन से होने वाली शारीरिक परेशानी को भी ध्यान रखना आवश्यक है।

मेमोरियल स्लोअन केटरिंग कैंसर सेंटर (MSKCC) के अनुसार दर्द की दवाओं के कई साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं। जैसे:

  • कॉन्स्टिपेशन होना या लूज मोशन की बीमारी
  • पेट का अल्सर या इंटरनल ब्लीडिंग
  • नींद नहीं आना
  • सांस लेने में परेशानी महसूस होना
  • त्वचा संबंधी परेशानी होना
  • लिवर डैमेज

किडनी की बीमारी के साथ-साथ इन ऊपर बताये शारीरिक परेशानियों की संभावना ज्यादा रहती है।

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इन ऊपर बताये पॉइंट्स को ध्यान में रखकर दवाओं का सेवन करने से बचें और समय रहते किडनी समस्याओं को ठीक कर लें। अगर आपको एसिडिटी की समस्या रहती है, तो आप निम्नलिखित टिप्स का सहारा ले सकते हैं। जैसे:

  • नारियल पानी- नारियल पानी बॉडी के टेम्प्रेचर को बैलेंस बनाये रखने में मददगार होने के साथ-साथ बॉडी के टॉक्सिन को बाहर निकालने में मदद करता है। इसलिए नारियल पानी का सेवन करें
  • सौंफ- हमसभी सौंफ को माउथफ्रेशनर के तौर से तो जानते हैं, लेकिन सौंफ एसिडिटी के लिए भी रामबाण माना जाता है। लंच या डिनर के बाद सौंफ के सेवन से गैस की परेशानी से बचा जा सकता है।
  • खीरा- एसिडिटी की समस्या बॉडी के डिहाइड्रेट होने की वजह से भी हो सकती है। इसलिए बॉडी को डिहाइड्रेशन से बचाने के लिए पानी के साथ-साथ खीरे का भी सेवन लाभकारी माना जाता है।
  • दूध- स्वस्थ्य रहने के सीक्रेट है दूध और अगर आपको गैस की समस्या रहती है, सेल्फ मेडिकेशन ना कर नियमित रूप से ठंडे दूध का सेवन करें। नियमित दूध के सेवन से शरीर में कैल्शियम की कमी भी नहीं होती है और आप एसिडिटी की परेशानी से भी बचे रहते हैं।
  • अजवाइन- एसिडिटी की समस्या से बचने के लिए अजवाइन भी लाभकारी माना जाता है। अद्धे या एक स्पून अजवाइन को गर्म पानी के साथ सेवन करें। इससे जल्द ही आपको एसिडिटी से राहत मिल सकती है।

इसलिए अगर आपको एसिडिटी की समस्या रहती है, तो ऊपर बताये घरेलू उपायों की मदद से इस परेशानी से बच सकते हैं और अगर आपकी परेशानी खत्म नहीं होती है, तो सेल्फ मेडिकेश (Self Medication) ना करें और डॉक्टर से कंसल्ट करें। डॉक्टर आपको जो सलाह दें उसका पालन करें और स्वस्थ्य रहें।

अगर सेल्फ मेडिकेशन से बचें और किडनी से जुड़े किसी तरह के कोई सवाल का जवाब जानना चाहते हैं, तो विशेषज्ञों से समझना बेहतर होगा।

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