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सिजेरियन डिलिवरी के बाद टांके: इन बातों का रखें विशेष ख्याल

के द्वारा मेडिकली रिव्यूड Mayank Khandelwal


Sunil Kumar द्वारा लिखित · अपडेटेड 31/10/2020

    सिजेरियन डिलिवरी के बाद टांके: इन बातों का रखें विशेष ख्याल

    सिजेरियन डिलिवरी के बाद टांके की वजह से महिलाओं को चलने-फिरने, उठने-बैठने में काफी तकलीफ होती है। हंसते और छींकते वक्त इन टांकों पर भारी दबाव पड़ता है। सिजेरियन के बाद आए टांके कई बार परेशानी का सबब बन जाते हैं। इनकी उचित देखभाल न करने पर इंफेक्शन भी हो सकता है।

    यदि सिजेरियन डिलिवरी के बाद टांके की देखभाल सही तरीके से की जाए तो आप कुछ दिनों के भीतर आप सामान्य जीवन जी सकती हैं। हम आपको कुछ ऐसे ही तरीके बता रहे हैं, जिनसे आप सिजेरियन डिलिवरी के बाद टांके की देखभाल कर सकती हैं।

    और पढ़ें : किन परिस्थितियों में तुरंत की जाती है सिजेरियन डिलिवरी?

    सी-सेक्शन की जरूरत कब पड़ती है?

    सिजेरियन डिलिवरी के बाद टांके की देखभाल कैसे करें? इसे जानने से पहले जानते हैं कि सी सेक्शन की जरूरत क्यों पड़ती है। सी-सेक्शन करना है या नहीं, यह कई मामलों पर निर्भर करता है। आमतौर पर डॉक्टर गर्भावस्था के 39वें हफ्ते के बाद ही सिजेरियन डिलिवरी करते हैं, ताकि गर्भ में बच्चा पूरी तरह से विकसित हो जाए। वहीं, अगर नॉर्मल डिलिवरी में प्रसव पीड़ा के दौरान गर्भवती और शिशु दोनों की जान को खतरा हो जाए या फिर योनि मार्ग से डिलिवरी होने में कठिनाई हो रही हो, तो भी सिजेरियन डिलिवरी का निर्णय लिया जा सकता है। इसके अलावा, गर्भावस्था के दौरान ही गर्भवती महिलाओं में विभिन्न जटिलताओं के लक्षण नजर आने पर डॉक्टर सर्जरी की सलाह देते हैं। इसके लक्षण कुछ इस प्रकार हो सकते हैं।
    • जेनिटल हर्पीस संक्रमण होने पर ऐसा किया जाता है। अगर इस स्थिति में भी नॉर्मल डिलिवरी की जाए, तो शिशु को भी संक्रमण होने का खतरा रहता है।
    • अगर गर्भाशय ग्रीवा के पास बड़ा गर्भाशय फाइब्रॉइड (गर्भाशय में जरूरत से ज्यादा सेल्स व कोशिकाओं के विकसित होने से बनने वाली गांठ) है तो सिजेरियन की मदद लेनी पड़ती है।
    • गर्भवती को एचआईवी संक्रमण होने पर सी-सेक्शन का निर्णय लिया जाता है।
    • शिशु के दिल की धड़कन असामान्य होना।
    • गर्भाशय में शिशु की पुजिशन ठीक न होना। अगर शिशु क्रॉसवाइज यानी टेढ़ा या फिर ब्रीच पुजिशन यानी पैर नीचे की तरफ हैं, तो सी-सेक्शन का सहारा लिया जाता है।
    • अगर शिशु को विकास संबंधी कोई समस्या यानी हाइड्रोसेफलस या फिर स्पाइना बिफिडा (रीढ़ की हड्डी में समस्या) है, तो सिजेरियन डिलिवरी की जाती है।
    • गर्भ में दो या दो से ज्यादा शिशु होने पर भी सी-सेक्शन किया जाता है।

    इन परिस्थितियों में सिजेरियन की जरूरत पड़ती है और इसके बाद टांके भी आते हैं। सिजेरियन के बाद टांके आने पर कुछ बातों का विशेष ध्यान रखने की जरूरत होती है। जानते हैं उनके बारे में।

    सिजेरियन डिलिवरी के बाद टांके की देखभाल करते वक्त कपड़े जरूर बदलें

    यदि आप अस्पताल से बैंडेड लगाकर घर जा रही हैं, तो दिन में एक बार टांकों को कवर करने वाले कपड़ों को जरूर बदलें। टांकों के गीला होने पर कपड़े एक से अधिक बार बदलें। टांकों को कितने वक्त तक ढंक कर रखना है, इस बारे में डॉक्टर आपको सलाह दे सकते हैं।

    सिजेरियन डिलिवरी के बाद टांके साफ करते वक्त रखें ध्यान

    टांकों के आसपास के हिस्से को साफ-सुथरा रखें। आप इसे पानी और साबुन से धो सकती हैं लेकिन, नल के पानी का नहीं उबले हुए पानी का उपयोग करें। टांकों को धोते वक्त इन्हें रगड़ें नहीं। आपको सिर्फ टांकों के ऊपर पानी डालना है, जिससे यह साफ हो जाएं। स्टिचिस एरिया को साफ करने के लिए बीटाडाइन सॉल्यूशन का यूज किया जा सकता है। बाथटब, स्विमिंग पूल, हॉट टब से दूरी बनाकर रखें। ज्यादातर मामलों में सर्जरी होने के बाद तीन हफ्तों तक ऐसा करने की मनाही होती है।

    और पढ़ें : सिजेरियन के बाद क्या हो सकती है नॉर्मल डिलिवरी?

    सिजेरियन डिलिवरी के बाद टांके आने पर टेप को न निकालें

    सिजेरियन डिलिवरी के बाद पेट पर डॉक्टर कुछ छोटे-छोटे टेप लगा देते हैं। यदि यह टेप टांकों पर चिपक जाता है तो आपको इन्हें जबर्दस्ती निकालना नहीं है। आप इन्हें शावर से धोकर साफ तौलिए से पोछ सकती हैं।

    यह टेप सर्जरी के एक हफ्ते के बाद अपने आप ही नीचे गिर जाएगा। यदि 10 दिन के बाद भी यह नहीं निकलता है तो आप इन्हें डॉक्टर की सलाह से निकाल सकती हैं।

    सिजेरियन डिलिवरी के बाद टांके आने पर स्तनपान कराते वक्त रखें ध्यान

    शिशु को स्तनपान कराते वक्त अक्सर महिलाओं को टांकों में दर्द होता है। कई बार महिलाएं इसकी वजह से शिशु को ठीक से स्तनपान नहीं करा पातीं। इस दर्द से बचने के लिए तकिए का इस्तेमाल किया जा सकता है। यह टांकों और शिशु के बीच में एक दायरा बनाकर रखेगा, जिससे टाकों पर दबाव कम पड़ेगा। इसके अतिरिक्त, आप एक आरामदेह कुर्सी का भी इस्तेमाल कर सकती हैं।

    सिजेरियन डिलिवरी के बाद टांके आने पर ढीले कपड़े पहनें

    एनसीबीआई में प्रकाशित एक शोध के मुताबिक, सिजेरियन डिलिवरी से शिशु को जन्म देने वाली महिलाओं को ढीले कपड़े पहनने चाहिए। सर्जरी के बाद महिलाओं को टाइट कपड़ों को नहीं पहनना चाहिए। उन्हें कॉटन की अंडरवियर ही पहननी चाहिए। इससे वे सहज महसूस करती हैं और टांकों पर भी जोर नहीं पड़ता।

    बर्फ की सिकाई करें

    सी सेक्शन के बाद महिला को कुछ हफ्ते या महीने तक टांके वाले स्थान पर तेज दर्द का अनुभव भी हो सकता है। जिससे राहत पाने के लिए डॉक्टर कुछ दवाओं के नियमित सेवन की भी सलाह दे सकते हैं। हालांकि, अगर दवाओं का सेवन करने के बाद भी दर्द का अनुभव तेज हो रहा है, तो इससे राहत पाने के लिए बर्फ की सिकाई कर सकते हैं। इसके लिए किसी कॉटन के कपड़े में बर्फ का टुकड़ा लपेटें और फिर इसे टांके वाले स्थान के चारों तरफ हल्के हाथों से घुमाएं। ध्यान रखें कि बर्फ को टांके लगे स्थान के ऊपर न रखें। बर्फ की सिकाई दर्द के साथ-साथ सूजन से भी राहत दिलाने में मदद कर सकती है।

    कॉस्‍मेटिक्‍स का इस्‍तेमाल न करें

    जब तक टांके का घाव पूरी तरह से भर नहीं जाता, तब तक वहां पर किसी भी तरह के कॉस्‍मेटिक का इस्‍तेमाल न करें। कॉस्मेटिक्स में कई तरह के केमिकल हो सकते हैं, जो टांके वाली जगह पर खुजली या इंफेक्‍शन का कारण बन सकते हैं। जब आपके टांके वाले घाव पूरी तरह से सूख जाएं, तो यहां पर किसी भी कॉस्मेटिक का इस्तेमाल करने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

    और पढ़ें : डिलिवरी के बाद सूजन के कारण और इलाज

    सिजेरियन डिलिवरी के बाद इन बातों का भी रखें ध्यान

    टेम्प्रेचर को करें मॉनिटरिंग

    सर्जरी के बाद महिलाओं को शरीर के तापमान पर निगाह बनाए रखनी चाहिए। यदि आप ऐसा करने में असमर्थ हैं, तो अपने पार्टनर की मदद लें। कई मामलों में शरीर का तापमान इंफेक्शन का संकेत हो सकता है।

    सर्जरी के बाद तुरंत बदलें कपड़े

    टांकों को जल्द से जल्द ठीक करके सामान्य दिनचर्या प्राप्त करने के लिए आपको कुछ खास बातों का ध्यान रखना है। एनसीबीआई में सिजेरियन डिलिवरी के संबंध में प्रकाशित एक लेख में इस बात पर जोर दिया गया है कि सर्जरी के 24 घंटे बाद महिला के कपड़े तुरंत बदले जाने चाहिए।

    जरूरी सामान को रखें पास

    आपकी और शिशु की जरूरत की सभी चीजों को अपने पास रखें। इससे आपको बार-बार उठने बैठने में होने वाली असुविधा कम होगी। शुरुआती हफ्तों में कोशिश करें कि आप वजनी चीजों को न उठाएं।

    ​सी-सेक्‍शन के बाद सोने की सही पोजीशन

    पीठ के बल सोना

    सी सेक्शन के लिए लगाया गया चीरा सामान्य तौर पर पेट के बीच के हिस्से, निचले हिस्से या किसी भी किनारे की तरफ लगाया जा सकता है। ऐसे में करवट लेकर सोना या पेट के बल सोना टांकों पर दबाव बना सकता है। जिससे इनके घाव खुलने की संभावना भी अधिक हो सकती है। ऐसी स्थिति से बचाव करने लिए आपको कुछ हफ्तों तक पीठ के बल ही सोना चाहिए। सर्जरी के बाद पीठ के बल सोना ज्‍यादा सुविधाजनक और आरामदायक स्थिति महसूस हो सकती है। सिजेरियन के बाद महिलाओं को कमर दर्द की भी समस्या हो सकती है। वहीं, पीठ के बल सोना कमर दर्द से भी राहत दिला सकता है। महिलाएं अपनी सुविधानुसार घुटनों के नीचे या पैर के नीचे भी तकिया भी रख सकती है।

    करवट लेकर सोना

    वैसे कोशिश करें कि अगर सिजेरियन डिलिवरी हुई है, तो करवट लेकर न सोएं। हालांकि, अगर चीरा पेट के बीच या निचले हिस्से पर लगा है या पेट के किनारे पर लगा है, तो आप किनारे वाले हिस्से के दूसरी तरफ करवट लेकर सो सकती हैं। कुछ लोगों को एक ही तरफ करवट लेकर सोने की आदत हो सकती है। ऐसे में दूसरी तरफ करवट लेकर सोना महिला के लिए असहज स्थिति हो सकती है, जो बढ़ने पर नींद न आने की समस्या का कारण भी बन सकती है।

    सिजेरियन के बाद टाकें तो आएंगे ही इसलिए इनको लेकर ज्यादा परेशान न हो। अगर दर्द बहुत ज्यादा और तकलीफ हो तो डॉक्टर से संपर्क करें। हम उम्मीद करते हैं कि सिजेरियन के टांके की देखभाल पर आधारित यह आर्टिकल आपको पसंद आया होगा। सिजेरियन डिलिवरी के बाद महिलाओं को टांकों की देखभाल के साथ ही खानपान का भी पूरा ध्यान रखना चाहिए। ताकि रिकवरी जल्दी हो सके। अधिक जानकारी के लिए डॉक्टर से संपर्क करें।

    डिस्क्लेमर

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