पीरियड्स जिसे आम भाषा मे मासिक धर्म या माहवारी कहा जाता है, यह हर महिला को हर महीने आता है. लेकिन, हर महिला को कभी ना कभी अनियमित पीरियड्स का सामना करना ही पड़ता. आमतौर पर पीरियड्स की शुरुआत हर महिला में 10-16 साल की उम्र से शुरू हो जाती है। पीरियड्स हर महीने में एक बार आता है और एक पीरियड्स से दूसरे पीरियड्स के बीच में 28 से 32 दिनों का अंतर सही माना जाता है. लेकिन, समय से पहले या समय के बाद अगर पीरियड्स आते है, तो उसे अनियमित होना माना जाता है। अनियमित पीरियड्स की समस्या पीरियड्स के शुरुआती समय में लड़कियां को होना सामान्य होता है लेकिन, 3 से 4 महीनों में यह परेशानी ठीक हो सकती है। अगर यह परेशानी लगातर बनी रहे तो इसका इलाज करवाना जरूरी होता है।
एक एप द्वारा किये गए सर्वे के अनुसार 50 प्रतिशत भारतीय महिलाएं इरेगुलर पीरियड्स की समस्या से परेशान हैं। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है की 68 प्रतिशत महिलाएं पीरियड्स के दौरान होने वाले क्रैंप अत्यधिक परेशान रहती हैं और इन्हें अत्यधिक थकावट भी महसूस होती है।
और पढ़ें : पीरियड सेक्स- क्या सेक्स के लिए सुरक्षित अवधि है?
अनियमित पीरियड्स के कारण क्या हैं? (Causes of Irregular Periods)
पीरियड्स में देरी की वजह के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जैसे-
इनसभी कारणों के अलावा अन्य कारण भी हो सकते हैं।
अनियमित पीरियड्स को नियमित करने के लिए घरेलू उपाए क्या हैं?
अनियमित पीरियड्स को नियमित करने के घरेलू उपाय निम्नलिखित हैं। जैसे-
अनियमित पीरियड्स से राहत के लिए गाजर का जूस (carrot juice for irregular periods)
गाजर में पर्याप्त मात्रा आयरन होता है, जो शरीर में हो रहे खून की कमी को पूरा करता है। नियमित रूप से गाजर के रस का सेवन करने से पीरियड्स में होने वाली देरी से बचा जा सकता है। यही नहीं पीरियड्स के दौरान होने वाली शारीरिक परेशानी जैसे ब्लीडिंग, पेट दर्द या कमजोरी महसूस होती है। इनसभी समस्याओं से भी गाजर का जूस आपकी परेशानी को कम कर सकता है। अगर आप गाजर के जूस का सेवन नहीं कर पा रहीं हैं, तो आप गाजर खा भी सकती हैं।
अनियमित पीरियड्स से राहत के लिए कच्चा पपीता (raw papaya for irregular periods)
पपीता गर्भाशय में मांसपेशियों को सिकुड़ने में मदद करता है, इस प्रकार मासिक धर्म के प्रवाह को नियंत्रित करता है। कुछ दिनों तक कच्चे पपीते का रस पीने से लाभ मिलता है। पपीते में मौजूद विटामिन-ए, विटामिन-बी, विटामिन-बी 6, विटामिन-बी 1, फोलोक एसिड, कैल्शियम और पोटैशियम मौजूद होता है। इसके सेवन से पीरियड्स में होने वाली देरी से बचा जा सकता है।
सौंफ में एमिनअगोग (Emmenagogue), पाया जाता है, जो पीरियड्स के रक्तप्रवाह (blood flow) को उत्तेचित करता है। पानी और सौंफ के मिश्रण को उबालकर पिने से पीरियड्स में हुई देरी ठीक हो सकती है।
शरीर में एस्ट्रोजन के संतुलित होने से नियमित पीरियड्स आते है। तिल के बीज में एस्ट्रोजन मात्रा भरपूर होती है, जिससे अगर एस्ट्रोजन शरीर में कम हो तो यह बीज उसकी कमी पूरी करने में मदद करता है, इससे पीरियड्स को नियमित रखने में मदद मिलती है।
और पढ़ें : कम उम्र में पीरियड्स होने पर ऐसे करें बेटी की मदद
विटामिन सी (vitamin C for irregular periods)
विटामिन सी एस्ट्रोजनऔर प्रोजेस्टेरोन के स्तर को कम कर सकता है। यह, बदले में, गर्भाशय को सिकुड़ने का कारण बनता है और गर्भाशय का अस्तर टूट जाता है, जिससे मासिक धर्म की शुरुआत होती है। विटामिन-सी युक्त फलों के सेवन से भी पीरियड्स से जुड़ी समस्या खत्म होती है।
अनियमित पीरियड्स से राहत के लिए दालचीनी (daalchini)
दालचीनी शरीर के तापमान को बढ़ाने में मदद करती है। दूध या फिर चाय में दालचीनी मिलाकर पीने से लाभ होता है। इसमें मौजूद विटामिन-के, आयरन और कैल्शियम महिलाओं के लिए अत्यधिक लाभकारी माना जाता है।
अजवायन शरीर में एस्ट्रोजन की मात्रा को असंतुलित से संतुलित (imbalanced to balanced) करने में मददगार साबित होता है, जिससे पीरियड्स नियमित होने में सहायता मिलती है। इसके सेवन से पीरियड्स समय पर आता है।
इन ऊपर बताये गए घरेलू उपाय को अपनाकर अनियमित पीरियड्स से बचा जा सकता है लेकिन, अगर इन उपाय के बावजूद पीरियड्स जुड़ी परेशानी होने पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
अनियमित पीरियड्स होने की वजह से क्या परेशानी हो सकती है?
अनियमित पीरियड्स के वजह से इसका गर्भधारण पर नकारात्मक असर पड़ता है।
और पढ़ें : Dysmenorrhea (menstrual cramps) : डिसमेनोरिया (पीरियड में दर्द) क्या है?
डॉक्टर से कब संपर्क करना जरुरी है
- पीरियड्स में सामान्य से ज्यादा दर्द होना
- सात दिनों से ज्यादा ब्लीडिंग होना
- सामान्य रक्त प्रवाह से ज्यादा रक्त प्रवाह (bleeding) होना
- 35 दिनों के अंतराल पर पीरियड आना नहीं आना
- एक से दो महीने पीरियड का न आना
- एक महीने में एक बार से ज्यादा पीरियड्स आना
- पीरियड्स के दौरान या बाद में स्पॉटिंग होना
इन ऊपर बताई गई परिस्थितियों के साथ-साथ अन्य परेशानी समझ आने पर या महसूस होने पर घरलू इलाज से बचना चाहिए और जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
अनियमित पीरियड्स की समस्या होने पर डॉक्टर कौन-कौन से टेस्ट करवाने की सलाह देते हैं?
ऐसी स्थिति में निम्नलिखित टेस्ट की सलाह डॉक्टर देते हैं। जैसे-
- ब्लड टेस्ट
- एब्डॉमिनल अल्ट्रासाउंड
- सी टी स्कैन
- एम आर आई
- पेल्विस टेस्ट
इन शारीरिक जांच के अलावा अन्य टेस्ट भी करवाने की सलाह हेल्थ एक्सपर्ट आपको दे सकते हैं।
और पढ़ें : ब्रेस्टफीडिंग के दौरान पीरियड्स रुकना क्या है किसी समस्या की ओर इशारा?
अनियमित पीरियड्स से जुड़ी परेशानी से बचने के लिए क्या करना चाहिए?
इससे बचने के लिए निम्नलिखित उपाय किये जा सकते हैं। जैसे-
- नियमित रूप से योगा करना चाहिए
- मेडिटेशन करें
- डीप ब्रीदिंग टेक्निक अपनाएं
- पौष्टिक आहार का सेवन करें
- एक दिन में 2 से 3 लीटर पानी का सेवन करें
- एल्कोहॉल का सेवन न करें
- स्मोकिंग न करें
- गर्भनिरोधक दवाओं का सेवन न करें (गर्भधारण से बचने के लिए कोंडम का इस्तेमाल करें)
- जंक फूड का सेवन न करें
- आवश्यकता अनुसार एक्सरसाइज करें। ध्यान रखें जरूरत से ज्यादा वर्कआउट करने से नुकसान पहुंच सकता है
- वजन संतुलित बनाय रखें
पीरियड्स में किसी भी तरह की समस्या होने पर बेहतर होगा की आप डॉक्टर से संपर्क करें और अपनी परेशानी बताये। चिकित्सक द्वारा जो भी सलाह और जांच बताई जाती है उसे फॉलो करें।
अगर आप अनियमित पीरियड्स से जुड़े किसी तरह के कोई सवाल का जवाब जानना चाहते हैं तो विशेषज्ञों से समझना बेहतर होगा।