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साउथ इंडियन फूड में इस्तेमाल होने वाली सामग्री के हेल्थ बेनेफिट्स और उनकी रेसिपी

साउथ इंडियन फूड में इस्तेमाल होने वाली सामग्री के हेल्थ बेनेफिट्स और उनकी  रेसिपी

साउथ इंडियन फूड के बारे में तो सभी जानते हैं कि इसमें बहुत सारे पोषक तत्व पाए जाते हैं। लेकिन क्या आपको ये पता है कि इसमें इस्तेमाल किए जानें वाली सामग्रिंयां कई तरह की बीमारियों के लिए भी फायदेमंद होती हैं, जैसे कि इसमें इस्तेमाल किया जानें वाला करी पत्ता कई प्रकार की हार्ट डिजीज में फायदेमंद होता है। इसी तरह राई भी स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है, ये कब्ज की समस्या को दूर करता है। इसके अलावा वेट लॉस के लिए भी साउड इंडियन डायट काफी अच्छी मानी जाती है। साउथ इंडियन फूड के और उसमें इस्तेमाल की जाने वाली समाग्री के कई और भी हेल्थ बेनेफिट्स हैं

और पढ़ें: प्रेग्नेंसी में डायट प्लानः जरूर ट्राय करें ये साउथ इंडियन डायट चार्ट

साउड इंडियन फूड में इस्तेमाल होने वाली समाग्री के हेल्थ बेनेफिट्स

कोकोनट

कोकोनट के अपने कई हेल्थ बेनेफिट्स हैं, जिसे आप भी जानकर रह जाएगे हैरान। नारियल एक प्रकार का फल है। इसे खाने से लेकर तेल तक में इसका इस्तेमाल किया जाता है। यह शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाता है। इसके कई हेल्थ बेनेफिट्स होते हैं। एक रिसर्च के अनुसार, जो लोग रोज नारियल का सेवन करते हैं, वो इसे खाने वाले लोगों की तुलना में ज्यादा स्वस्थ साबित हुए हैं। नारियल खाने के अलावा इसका तेल भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके इस्तेमाल से मेटाबॉलिक रेट बढ़ता है और वेट कंट्रोल होने में भी मदद मिलती है। कई हेल्थ एक्स्पर्स कोकोनट ऑयल को अपनी डायट में शामिल करने की सलाह देते हैं। इसके सेवन को पाचन तंत्र को अच्छा होता ही है, साथ में सौदर्य को भी निखारता है।

और पढ़ें: वर्ल्ड कोकोनट डे: जानें नारियल के फायदे, त्वचा से लेकर दिल तक का रखता है ख्याल

हेल्दी इडली रेसिपी

सामग्री:

  • 1 कप ओट्स
  • ½ एक कप सूजी
  • 1 कप दही
  • एक चुटकी बेकिंग सोडा
  • 1 चम्मच जैतून का तेल
  • 1 चम्मच सरसों और जीरा
  • चम्मच उड़द की दाल
  • 1 कसा हुआ गाजर
  • हिंग और साबुत काली मिर्च का एक सामान्य चुटकी
  • 1 हरी मिर्च
  • 1 टुकड़ा अदरक
  • कुछ करी और धनिया पत्ती

विधि

  • ओट्स को भूनकर पाउडर बना लें
  • एक अलग कटोरी लें और पीसा हुआ जई, दही, नमक, रवा, बेकिंग सोडा और पानी में मिलाएं।
  • बैटर को अच्छी तरह मिलाएं और इसे 15 मिनट के लिए रहने दें।
  • अब एक पैन लें और तेल गरम करें। सरसों, जीरा, हिंग, अदरक, करी पत्ते और गाजर का तड़का लगाएं।
  • गाजर की कच्ची महक के चले जाने तक सभी मसालों को अच्छी तरह से पकाएं।
  • इडली बैटर में मिलाएं।
    अब इस मिश्रण को सांचे में रखें। इसे 15-20 मिनट के लिए भाप दें और गर्म परोसें।

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चना दाल

अच्छी हेल्थ के लिए चने की दाल बहुत जरूरी है। इसके सेवन से आपको शरीर को कई पोषक तत्व मिलते हैं, जैसे कि कैल्शियम, प्रोटीन, विटामिन, आयरन, फाइबर। सांबर में इस्तेमेाल होने वाली इस चने की दाल का बेसन के तौर पर भी इस्तेमाल किया जाता है। चने के दाल डायबिटीज वालों के लिए भी बहुत प्रभावकारी है। इससे कई तरह के सूप, सलाद और स्नैक के तौर पर भी तैयार किया जाता है। चने को प्रोटीन का सबसे अच्छा स्त्रोत माना जाता है। इसके अलावा इसमें फाइबर भी होता है ओर कोलेस्ट्रॉल के लेवल को कम करता है। यह हार्ट वालों के लिए बहुत अच्छा है। इसके अलावा इमें जिंक, प्रोटीन और कैल्शियम की भी अच्छी मात्रा होती है।

सांबर बनाने की रेसिपी

सामग्री

  • अरहर की दाल – 1/2 कप
  • टमाटर – 3
  • अदरक – 1 इंच टुकड़ा
  • हरी मिर्च – 2
  • लौकी – 1 कप (बारीक कटी हुई)
  • बीन्स – 10-12 (1 इंच के टुकड़ों में कटी हुई)
  • हरा धनिया – 2-3 टेबल स्पून (बारीक कटा हुआ)
  • करी पत्ता – 15-20
  • इमली का पल्प- 2 टेबल स्पून
  • राई – ½ छोटी चम्मच
  • मेथी के दाने – ¼ छोटी चम्मच
  • हल्दी पाउडर – ¼ छोटी चम्मच
  • नमक – 1.5 छोटी चम्मच या स्वादानुसार
  • तेल – 3-4 टेबल स्पून

सांबर मसाला पाउडर

  • चना दाल – 1 छोटी चम्मच
  • उड़द दाल – 1 छोटी चम्मच
  • लाल मिर्च – 2
  • साबुत धनिया – 2 छोटी चम्मच
  • जीरा – 1/2 छोटी चम्मच
  • मेथी के दाने – 1/2 छोटी चम्मच
  • सरसों के दाने – 1/2 छोटी चम्मच
  • बड़ी इलायची – 2
  • काला मिर्च – 8-10
  • लौंग – 2
  • दालचीनी – 1/2 इंच टुकड़ा

विधि

  • अरहर की दाल को धोकर 1/2 घंटे पानी में भिगोकर ले लीजिए।
  • कुकर में दाल, 1 कप पानी और 1/2 छोटी चम्मच नमक डाल दीजिए। कुकर बंद करके दाल को 1 सीटी आने के बाद, धीमी आंच पर 4 से 5 मिनिट तक पकने दीजिए। इसके बाद, गैस बंद करके कुकर का प्रैशर अपने आप खत्म होने दीजिए। प्रैशर खत्म होने पर दाल को चैक कीजिए और इसे मैश कर लीजिए।
  • अब सांबर मसाला बनाएं। इसके लिए आप छोटी कढ़ाही में सारे साबुत मसाले और दूसरी सामग्रियां डाल दीजिए और धीमी आंच पर हल्का ब्राउन होने तक भूनिये। भुने मसाले को प्लेट में निकाल लीजिए और इन्हें ठंडा होने दीजिए। बाद में भुने मसालों को मिक्सर जार में डालिए। साथ में टमाटर, अदरक और हरी मिर्च को भी काटकर जार में डाल दीजिए और सारी चीजों को एकदम बारीक पीस लीजिए।

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सब्जियां उबालें

  • सारी सब्जियों को एक पैन में डालिए. साथ में 1/2 कप पानी डालकर सब्जियों को ढककर मध्यम आंच पर हल्की नरम होने तक पकने दीजिए। थोड़ी देर बाद सब्जियों को चैक कीजिए। अगर ये नरम ना हुई हो, तो इन्हें 1कुछ देर और पकने दीजिए।
  • सांबर बनाने के लिए एक बड़े बरतन को गरम कीजिए। इसमें 2 टेबल स्पून तेल डाल दीजिए. गरम तेल में सरसों, मेथी डालकर हल्का सा भूनिए और इसके बाद, करी पत्ते, हल्दी पाउडर और पिसा हुआ मसाला डाल दीजिए। मसाले से तेल अलग होने तक इसे मध्यम आंच पर बीच-बीच में चलाते हुए भून लीजिए।
  • मसाला भुन जाने पर उबाली हुई सब्जियों को इसमें डाल दीजिए. साथ में 2 कप पानी भी डाल दीजिए और इसे उबलने दीजिए। मैश की हुई दाल को भी इसमें मिला दीजिए और सांबर में 1 कप पानी, इमली का पल्प और नमक डालकर मिला दीजिए।
  • सांबर में उबाल आने के बाद, सांबर को धीमी आंच पर 4 से 5 मिनिट और पकने दीजिए। 5 मिनिट बाद, सांबर बनकर तैयार हो गया है। इसमें हरा धनिया डालकर मिलाइए। अब सर्व करें।

करी पत्ता

हेल्दी रहने के लिए अच्छा खानपान बहुत जरूरी है। क्या आप को पता है साउथ् इंडियन फूड में इस्तेमाल किए जाने वाले करी पत्ते के कई हेल्थ बनेफिट्स हैं। ये स्वाद को बढ़ान के साथ कई बीमारियों के उपचार में भी फायदेमंद है। इसे करी लीफ के नाम से भी जाना जाता है। पेट के लिए रोगों में इसे उपचार के तौर पर भी काम करते हैं। इसे फ्रिज में भी कई दिनों के लिए स्टोर कर के रखा जा सकता है। करी लीफ में मैग्नेशियम, आयरन, कैल्शियम और विटामिन पाया जाता है। कई औषधि के निमार्ण में भी इसका इस्तेमाल किया जाता है।

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राई

राई भी हेल्थ के लिए बहुत अच्छा माना जाता है। साउथ इंडियन फूड से लेकर इसे घर में कई सब्जियों में भी इस्तेमाल किया जाता है। यह अचार में सबसे ज्यादा अधिक इस्तेमाल किए जाने वाला मसाला है। यह कई फायदों से भरपूर होता है। राई कई रोगियों के लिए फायदेमंद है, जैसे कि डायबिटीज वालों के लिए, हार्ट और ब्लड प्रेशर के मरीजों के लिए। इसके अलावा और भी कई रोगियों के लिए जैसे कि जिन मरीजों को घबराहट की समस्या है। उनके लिए भी यह प्रभावकारी है। इसमें मायरोसीन और सिनिग्रिन जैसे तत्व पाए जाते हैं। राई में एंटी-बैक्टीरियल गुण पाया जाता है, जोकि कई प्रकार त्चचा संबंधित समस्याओं के लिए फायदेमंद है। यह पाचन क्रिया और कब्ज की समस्या के इलाज में भी प्रभावकारी है।

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सूजी

सूजी का सबसे अधिक इस्तेमाल साउथ इंडियन फूड में किया जाता है। इसे हम रवा भी कहते हैं। इंडली, उपमा के अलावा के इसका उपयोग हलवे में भी किया जाता है। इसका सेवन हेल्थ के लिए कई प्रकार से फायदेमंद है, डायबिटीज वालों के लिए सूजी काफी लाभदायक माना जाता है। क्‍योंकि इसका ग्लाइमेक इंडेक्स कम होने की वजह से शुगर बढ़ने का खतरा नहीं रहता। यह डायजेशन में भी काफी आसान है। इसके अलावा और भी कई तरह के पोषण तत्व पाए जाते हैं, जैसे कि फाइबर, विटामिन बी कॉम्‍पलेक्‍स और विटामिन ई आदि। सूजी की सबसे बात यह है कि डायजेस्टिव में ईजी होने के साथ इसमें फैट और कोलेस्‍ट्रॉल की मात्रा कम हाेती है।

सामग्री

सूजी – 180 ग्राम (1 कप)
तेल – 2 टेबल स्पून
मूंगफली के दाने – 1 टेबल स्पून (भुने हुए)
राई के दाने – 1/4 छोटी चम्मच
हरी मिर्च – 1 (बारीक कटी हुई)
हरी मटर के दाने – 1 टेबल स्पून
गाजर – 1 (छोटे टुकड़ों में कटी हुई)
बटर – 1 टेबल स्पून
हरा धनिया – 1 टेबल स्पून (बारीक कटा हुआ)
नमक – 3/4 छोटी चम्मच या स्वादानुसार

विधि

  • सूजी को सूखी कढ़ाई में हल्का भूरा होने तक लगातार चलाते हुये भूनिये. भुनी सूजी को किसी प्लेट में निकाल लीजिये।
  • कढ़ाही मे तेल डालकर गरम करिये। मूंगफली के दानों को तेल में डालकर हल्का सा भून लीजिए। इन्हें भूनने के बाद एक प्लेट में निकाल लीजिए।
  • कढ़ाही में बचे हुए तेल में राई के दाने डाल दीजिये, राई को हल्का सा भुनने दीजिए। राई तड़कने के बाद, हरी मिर्च, कटे हुए गाजर और मटर के दाने डाल कर 2-3 मिनिट तक भूनिये। इसके बाद सूजी और इसका तीन गुना पानी (3 कप पानी) और नमक डालकर मिला दीजिए। जब सूजी के पानी में उबाल आने लगे,तब आप उसे चमचे से चलाते जाइये, घोल गाढ़ा होता जायेगा और थोड़ी ही देर में हलवा जैसा लगने लगेगा। इसमें मूंगफली के दाने डाल दीजिए और रवा उपमा को चमचे से चलाते हुये 3-4 मिनिट तक पकाइए। ऊपर से बटर डालकर मिला लीजिये। इसी के साथ ही हरा धनिया डालकर मिक्स कर दीजिए. स्वादिष्ट रवा उपमा तैयार है।
  • गरमागरम उपमा को हरे धनिये की चटनी के साथ परोसिये और खाइये। आप चाहे तो इसे बच्चों के टिफिन में भी रख सकते हैं, बच्चों को यह बहुत पसंद आएगा।

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उडद दाल

उड़द दाल सबसे अधिक पौष्टिक फलियों में से एक है । यह भले पाचन में थोड़ा भारी हो, लेकिन इसके हेल्थ बेनेफिट्स बहुत हैं। इसे आयुर्वेदिक चिकित्सा में भी इस्तेमाल किया जाता है। यह फाइबर का सबसे अच्छा स्त्रोत है। यदि आपको दस्त, पेट में ऐंठन, कब्ज और सूजन जैसी पाचन संबंधी समस्या है, तो उड़द दाल निश्चित रूप से आपकी मदद करने के लिए आपके आहार में एक अच्छा अतिरिक्त है। उड़द दाल में बहुत अधिक मात्रा में आयरन होता है, वे वास्तव में आपके शरीर में समग्र ऊर्जा स्तर को बढ़ाने में अच्छे होते हैं।

साउथ इंडियन फूड के बनिफिट्स

वेट लॉस में है मददगार

साउथ इंडियन फूड को वेट लॉस के लिए सबसे अच्छीा माना जाता है। इसकी सबसे अच्छी खास बात ये है कि इससे आपका मेटाबॉलिज्म स्वस्थ रहता है। इसमें फैट भी कम होता है। कम फैट के साथ इसमें पार्याप्त पाेषण मिलता है। हम ये भी कह सकते हैं कि इसमें प्रोटीन अधिक और कार्ब्स कम होता है। इन फूड्स की सबसे खास बात यह है कि यह पाचन में भी आसान है। इसके सेवन से पेट संबंधित समस्याएं नहीं होती है।

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प्रोटीन से भरा मूंग दाल का डोसा

सभी दालों की तुलना में मूंग दाल में सबसे ज्यादा प्रोटीन पाया जाता है। तो हाई प्रोटीन के लिए आप मूंग दाल के डोसे का भी सेवन कर सकते हैं। इसमें प्रोटीन के साथ फाइबर की भी अच्छी मात्रा पायी जाती है। अगर आप वेट लाॅस के लिए डायट कर रहे हैं, तो उसमें मूंग दाल डोसे को भी अपने डायट में शामिल कर सकते हैं।

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साउथ इंडियन फूड में फाइबर की अधिक मात्रा

इसमें प्रोटीन क सबसे अच्छी मात्रा पायी जाती है। साउथ इंडियन फूड में, खासतौर पर सांबर में सभी प्रकार की सब्जियों और दाल मौजूद होता है। इसमें प्रोटीन और फाइबर की अच्छी मात्रा मौजूद होती है। इसमें इस्तेमाल की जाने वाली सब्जियां, जैसे कि टमाटर, भिंडी, बैगन और कदृू और ड्रम स्टिक में फाइबर के अलावा विटामिन भी पाया जाते हैं। यह डायबिटीज और हार्ट पेशेंट दोनों के लिए ही बहुत अच्छा है। यह पाचन में भी आसान है।

डायजेशन में भी है ईजी

साउथ इंडियन फूड डायजेशन में काफी आसान होता है, जैसे कि डोसा, सांबर, सभी प्रकार की नारियल की चटनी और उपमा आदि सभी डायजेशन में काफी ईजी है। जिन्हें पेट संबंधित समस्याएं होती है, उनके लिए यह काफी अच्छा है।

एंटीऑक्सीडेंट का अच्छा माध्यम है

साउथ इंडियन फूड में एंटी ऑक्सीडेंट की भरपूर मात्रा हाेती है। इसमें इस्तेमाल किए जाने वाले मसाले भी कई खूबियों से भरपूर होते हैं। इसके अलावा इनमें इस्तेमाल किये जाने वाली कच्ची हल्दी, करी पत्ते और इमली एंटी ऑक्सिडेंट का एक अच्छा स्त्रोत है।

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सूत्र

https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC5628526/

https://www.jstor.org/stable/40459138?seq=1

https://asiasociety.org/blog/asia/multimedia-chitra-agrawal-making-and-finding-good-south-indian-vegetarian-food

https://www.sciencemag.org/news/2020/02/indian-scientists-decry-infuriating-scheme-study-benefits-cow-dung-urine-and-milk

https://www.npr.org/2011/12/07/143251451/the-crackling-spices-of-indian-tempering

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Niharika Jaiswal द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 01/04/2021 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
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