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डायबिटीज और ब्लाइंडनेस का भी है कनेक्शन! क्या जानते हैं आप?

डायबिटीज और ब्लाइंडनेस का भी है कनेक्शन! क्या जानते हैं आप?

डायबिटीज और ब्लाइंडनेस (Diabetes and blindness) का संबंध अक्सर तभी देखा जाता है जब डायबिटीज को ठीक से मैनेज नहीं किया जाए यानी अपने ब्लड शुगर लेवल को टार्गेट रेंज में ना रखा जाए। ब्लाइंडनेस डायबिटीज का एक रेयर कॉम्प्लिकेशन है। हाय ब्लड शुगर लेवल (High Blood sugar level) सीधे ब्लाइंडनेस का कारण नहीं बनता, लेकिन यह गंभीर आय कंडिशन जिसे डायबिटिक रेटिनोपैथी (Diabetic retinopathy) कहते हैं, उसके विकास को बढ़ावा देता है जो बाद में परमानेंट विजन लॉस या ब्लाइंडेनस का कारण बनता है। इस कंडिशन में आंख की रेटिना डैमेज हो जाती है। इस आर्टिकल में डायबिटीज और ब्लाइंडनेस (Diabetes and blindness) कैसे एक दूसरे से संबंधित इसके बारे में विस्तार से बताया जा रहा है।

डायबिटीज और ब्लाइंडनेस (Diabetes and blindness)

डायबिटीज और ब्लाइंडनेस कैसे संबंधित हैं इसको ऐसे समझें। समय के साथ अनियंत्रित ब्लड ग्लूकोज (Blood Glucose) लेवल रेटिना के अंदर मौजूद छोटी ब्लड वेसल्स को डैमेज कर सकता है। रेटिना आंख के पीछे स्थित कोशिकाओं की एक परत होती है जो सामने आने वाली चीजों का पिक्चर लेती है और उन्हें ब्रेन तक भेजती है। रेटिना में होने वाला डैमेज निम्न दो तरह से ब्लाइंडनेस का कारण बनता है।

  • कमजोर और असामान्य ब्लड वेसल्स (Weak, abnormal blood vessels) रेटिना के सरफेस पर डेवलप हो सकती हैं जिनकी वजह से आंख के मध्य में फ्लूइड लीक होता है और दृष्टि धुंधली हो जाती है। इसे डायबिटिक आय डिजीज की अर्ली स्टेज कहा जाता है।
  • फ्लूइड ब्लड वेसल्स से लीक होकर मेकुला (Macula) के मध्य में पहुंच सकता है। जो कि रेटिना का सबसे सेंसटिव सेंट्रल एरिया होता है और सेंट्रल विजन प्रदान करता है। फ्लूइड के पहुंचने से इसमें सूजन आ जाती है। इसे मेकुलर इडीमा (Macular oedema) कहा जाता है जो कि डायबिटिक आय डिजीज की किसी भी स्टेज पर हो सकता है।

अगर इन दोनों स्थितियों का इलाज नहीं किया जाए तो इससे एक या दोनों आखों का विजन लॉस और ब्लाइंडनेस का खतरा बढ़ जाता है। अब आप समझ गए होंगे कि डायबिटीज और ब्लाइंडनेस (Diabetes and blindness) को कैसे एक दूसरे से संबंधित माना जाता है।

और पढ़ें: काेर्टिकोस्टेरॉइड का उपयोग बन सकता है डायबिटीज का कारण, ऐसे में इस तरह करें कंडिशन को मैनेज

डायबिटीज और ब्लाइंडनेस (Diabetes and blindness) : क्या डायबिटीज से पीड़ित सभी लोगों को होता है विजन लॉस का खतरा

बता दें टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज (Diabetes) से पीड़ित सभी लोगों को विजन लॉस का खतरा होता है। अगर आप लंबे समय से इस बीमारी से पीड़ित हैं तो खतरा बढ़ जाता है। 2002 में इंग्लैंड के रॉयल लिवरपूल यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल ने डायबिटीज और ब्लाइंडनेस (Diabetes and blindness) का संबंध पता करने के लिए यह रिव्यू किया था जिसमें टाइप 1 डायबिटीज के 831 पेशेंट और टाइप 2 डायबिटीज के 7231 पेशेंट शामिल थे। टाइप 1 डायबिटीज (Type 1 diabetes) के 45.7% मरीजों में डायबिटिक आय डिजीज का कोई ना कोई रूप था। वहीं टाइप 2 डायबिटीज (Type 2 Diabetes) के 25.3% पेशेंट में डायबिटिक आय डिजीज का कोई ना कोई रूप पाया गया था। जिसे डायबिटिक रेटिनोपैथी भी कहते हैं। जेस्टेशनल डायबिटीज (गर्भावस्था के दौरान होने वाली डायबिटीज) में भी आय डिजीज हो सकती है।

डायबिटीज और ब्लाइंडनेस (Diabetes and blindness) : डायबिटीज के कारण होने वाले विजन लॉस से कैसे बचा जा सकता है?

डायबिटीज और ब्लाइंडनेस संबंधित है ये तो आप समझ ही गए होंगे अब ये भी जान लीजिए इससे बचने का एकमात्र तरीका अपने ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित और नॉर्मल रेंज में रखना है। इसके साथ ही आपको ग्लाइसेमिक कंट्रोल भी रखना होगा। ब्लड प्रेशर (Blood Pressure) और कोलेस्ट्रॉल (Cholesterol) को कंट्रोल में रखकर भी आप डायबिटीज के कारण होने वाले विजन लॉस के रिस्क को कम कर सकते हैं। आंख में होने वाली किसी प्रकार की परेशानी पर शुरुआत में ही ध्यान देकर भी आप रिस्क को कम कर सकते हैं।

डायबिटीज और ब्लाइंडनेस (Diabetes and blindness) : इसका इलाज कैसे किया जाता है?

बेस्ट ट्रीटमेंट डायबिटीज और ब्लड प्रेशर को कंट्रोल में रखना है। बीमारी की गंभीरता के आधार पर डॉक्टर लेजर सर्जरी (Laser surgery) कर सकते हैं। जिसमें लीकी ब्लड वेसल्स को सील करने के साथ ही दूसरे ब्लड वेसल्स से होने वाले लीकेज को रोका जा सकता है। वे इंफ्लामेशन और नई ब्लड वेसल्स को फॉर्म होने से रोकने के लिए आंख में दवा इंजेक्ट कर सकते हैं। जिन लोगों की स्थिति गंभीर होती है उनमें सर्जिकल प्रॉसीजर की मदद से आय के पीछे मौजूद फ्लूड को रिमूव और रिप्लेस किया जाता है।

और पढ़ें: क्या डायबिटीज कॉम्प्लिकेशन्स का रिवर्सल संभव है?

डायबिटिक ब्लाइंडनेस (Diabetic blindness) और ब्लड शुगर लेवल

जैसा कि आप जान ही चुके हैं कि ब्लड शुगर को कंट्रोल करके डायबिटीज और ब्लाइंडनेस के कनेक्शन को कम किया जा सकता है। इसके साथ ही किडनी डिजीज और हार्ट डिजीज के खतरे को कम किया जा सकता है, जो कि डायबिटीज के ही कॉम्प्लिकेशन्स हैं। इसके लिए ब्लड शुगर को मॉनिटर करना बेहद जरूरी है।

अपने ब्लड शुगर लेवल (Blood sugar level) को चेक करते रहें

इसके लिए ग्लूकोमीटर (Glucometer) का उपयोग करें। ग्लूकोमीटर के जरिए आप अपने ब्लड शुगर लेवल को बेहद आसानी से मॉनिटर कर सकते हैं। इसमें ज्यादातर ब्लड की ड्रॉप से शुगर लेवल का पता किया जाता है। आपका ब्लड शुगर लेवल डायबिटीज के टाइप और डायबिटीज के लिए दी जा रही दवाओं पर निर्भर करता है। आपको दिन में इतनी बार ब्लड शुगर लेवल चेक करना चाहिए :

  • सुबह उठने के बाद जब आपने कुछ भी खाया या पिया ना हो।
  • खाना खाने के पहले
  • खाना खाने के दो घंटे बाद
  • सोने से पहले

डायबिटीज और ब्लाइंडनेस (Diabetes and blindness)

ब्लड शुगर लेवल की टार्गेट रेज क्या है? (What are blood sugar targets?)

ब्लड शुगर लेवल की टार्गेट रेंज तक पहुंचने के लिए आपको प्रयासरत रहना चाहिए। टार्गेट रेंज इस प्रकार है:

  • खाना खाने के पहले 80 से 130 mg/dL
  • खाना खाने के बाद 180 mg/dL से कम

आपका शुगर लेवल टार्गेट रेंज उम्र, हेल्थ कंडिशन और दूसरे फैक्टर्स पर निर्भर करती है। डॉक्टर से इसके बारे में पूछ लें और अपने ब्लड शुगर लेवल को इसी रेंज में रखने की कोशिश करें।

और पढ़ें: सर्दियों में क्या डायबिटीज के पेशेंट्स को होती है अधिक परेशानियां?

ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल कैसे करें? (How to control blood sugar level?)

ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल में रखने के लिए निम्न तरीके अपनाएं जा सकते हैं।

  • रेगुलर एक्सरसाइज करें। इससे वेट कम होने के साथ ही इंसुलिन सेंसटिविटी (Insulin sensitivity) बढ़ती है। जिससे बॉडी ब्लडस्ट्रीम में मौजूद शुगर का उपयोग अच्छी तरह से कर सकती है। एक्सरसाइज करने से मसल्स भी ब्लड शुगर को एनर्जी के लिए यूज करती हैं।
  • कार्ब के इंटेक को कम करें। हमारी बॉडी कार्ब्स को शुगर में ब्रेकडाउन करती है इसके बाद शुगर को एनर्जी के लिए यूज करने और स्टोर करने में इंसुलिन बॉडी की मदद करता है। जब आप अधिक मात्रा में कार्ब का सेवन करते हैं तो यह प्रॉसेस प्रभावित होती है। जिससे ब्लड ग्लूकोज का लेवल बढ़ सकता है।
  • फायबर का इंटेक बढ़ाएं। फायबर कार्ब का डायजेशन और एब्जॉर्बप्शन स्लो करने में मदद करता है। जिससे यह ब्लड शुगर लेवल को धीरे-धीरे बढ़ावा देता है। सब्जियां, फल और अनाज में अधिक मात्रा में फायबर पाया जाता है।

ब्लड शुगर लेवल को प्रभावित करती हैं ये आदतें भी

  • पर्याप्त नींद लें। नींद की खराब आदतें और आराम की कमी भी ब्लड शुगर लेवल और इंसुलिन इंसुलिन सेंसटिविटी को प्रभावित कर सकती है। जिससे भूख और वजन बढ़ सकता है।
  • यदि आप स्कोकिंग (Smoking) करते हैं या किसी अन्य प्रकार की तंबाकू का उपयोग करते हैं, तो यह डायबिटिक आय डिजीज के रिस्क को बढ़ाने में मदद करेगी। इसलिए डॉक्टर की मदद से इसे छोड़ने का प्रयास करें।
  • तनाव से दूरी बनाकर रखें। यह आपको ब्लड शुगर को बढ़ा सकता है। बता दें कि तनाव के दौरान ग्लुकागॉन और कोर्टिसोल जैसे हॉर्मोन रिलीज होते हैं। ये हॉर्मोन रक्त शर्करा के स्तर को बढ़ाते हैं। तनाव दूर करने के लिए मेडिटेशन और योगा का सहारा लिया जा सकता है।

और पढ़ें: डायबिटिक रेटिनोपैथी में एक्सरसाइज: जानिए कौन सी एक्सरसाइज करें और किन्हें करें अवॉइड

उम्मीद करते हैं कि आपको डायबिटीज और ब्लाइंडनेस (Diabetes and blindness) संबंधित जरूरी जानकारियां मिल गई होंगी। अधिक जानकारी के लिए एक्सपर्ट से सलाह जरूर लें। अगर आपके मन में अन्य कोई सवाल हैं तो आप हमारे फेसबुक पेज पर पूछ सकते हैं। हम आपके सभी सवालों के जवाब आपको कमेंट बॉक्स में देने की पूरी कोशिश करेंगे। अपने करीबियों को इस जानकारी से अवगत कराने के लिए आप ये आर्टिकल जरूर शेयर करें।

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Manjari Khare द्वारा लिखित आखिरी अपडेट कुछ दिन पहले को
डॉ. हेमाक्षी जत्तानी के द्वारा मेडिकली रिव्यूड