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प्रीडायबिटीज और हार्ट डिजीज में क्या संबंध है, जानिए यहां...

प्रीडायबिटीज और हार्ट डिजीज में क्या संबंध है, जानिए यहां...

अधिकतर लोग यह बात जानते हैं कि डायबिटीज पेशेंट को हार्ट डिजीज का खतरा ज्यादा होता है, खासतौर पर तब जब डायबिटीज हाय हो। लेकिन क्या आपको यह पता है कि प्रीडायबिटीज में हार्ट डिजीज होने का खतरा और भी ज्यादा होता है। हां, यह सही है, प्रीडायबिटीज (Pre Diabetes) लोगों में दिल की बीमारी और जान का जोखिम बढ़ जाता है, खासतौर पर हार्ट अटैक का खतरा। प्रीडायबिटीज, डायबिटीज शुरू होने से पहली की स्थिति को कहते हैं। तो आइए जानते हैं कि प्रीडायबिटीज और हार्ट डिजीज (Prediabetes and Heart Disease) है क्या और इसके लक्षण। इसी के साथ यह भी जानें कि प्रीडायबिटीज और हार्ट डिजीज (Prediabetes and Heart Disease) का क्या संबंध है।

और पढ़ें: प्रीडायबिटीज के लिए डायट में क्या करना चाहिए शामिल और किनसे बनानी चाहिए दूरी?

प्रीडायबिटीज (Prediabetes) क्या है?

प्रीडायबिटीज और हार्ट डिजीज के बारे में जानने से पहले आप जानें कि प्रीडायबिटीज है क्या। प्रीडायबिटीज, डायबिटीज के शुरू होने के पहले बॉर्डरलाइन वाली स्थिति को कहते हैं, जोकि डायबिटीज की समस्या से कोई कम खतरनाक नहीं है। प्रीडायबिटीज में, शरीर में शुगर लेवल (Sugar Level) सामान्य से ज्यादा होता है, लेकिन डायबिटीज के लेवल के बॉर्डरलाइन से कम। यानि कि यदि किसी व्यक्ति के रक्त में ग्लूकोज का लेवल सामान्य से अधिक है, लेकिन वो डायबिटीज के लेवल स्केल तक नहीं हो, तो इसे “प्री-डायबिटीज” कहा जाता है। इसमें भी टाइप-2 डायबिटीज की तरह शुरीर में इंसुलिन का निमार्ण कम हो जाता है

प्रीडायबिटीज, मधुमेह एक ऐसी स्थिति है, जिसमें आगे जाकर टाइप 2 डायबिटीज के होने का खतरा और भी बढ़ जाता है। अमेरिकन डायबिटीज एसोसिएशन के अनुसार, बॉर्डरलाइन डायबिटीज वाले अनुमानित 10 से 23 प्रतिशत लोगों को 5 साल के भीतर टाइप 2 डायबिटीज की समस्या हो जाती है।

और पढ़ें: महिलाओं में डायबिटीज और हार्ट प्रॉब्लम्स के बीच का क्या है कनेक्शन?

प्रीडायबिटीज के लक्षण (Symptoms)

प्रीडायबिटीज के लक्षण स्पष्ट रूप से नजर नहीं आते हैं। इसलिए लोगों को इसके बारे में समय रहते नहीं पता चल पाता है। कुछ परिक्षण द्वारा इसे पहचाना जा सकता है, इंसुलिन से जुडी समस्या के लक्षण का अनुभव किया जा सकता है, जिनमें शामिल हैं:

  • पैरो में दर्द (foot pain)
  • यूरिन प्रॉब्लम (Urine problem)
  • अधिक प्यास लगना (Water Intake)
  • आंखों में दिक्कत होना (Eye problem)
  • चोट लगने पर जल्दी ठीक न होना (Injury)
  • थकान महसूस करना (Feeling tired)

प्रीडायबिटीज में कुछ लक्षणों पर गौर किया जा सकता है। यहां पर दिए गए लक्षणों के अलावा और भी बहुत से लक्षण देखने को मिल सकते हैं। आपको लक्षण महसूस हाेने पर तुरंत डॉक्टर से मिलकर जांच करवानी चाहिए।

और पढ़ें: तनाव से हार्ट डिजीज और डायबिटीज का बढ़ता रिस्क, जानें एक्सपर्ट से बचाव के टिप्स!

प्रीडायबिटीज के कारण (Causes)

डायबिटीज और प्रीडायबिटीज, दोनों ही लाइफस्टाइल डिजीज है। लेकिन इसके होने के अन्य कई कारण हो सकते हैं। कई लोगों में इसके होने का कारण जैनेटिक यानि परिवारिक इतिहास भी हो सकता है। शरीर में भोजन को पचाने के लिए जब इंसुलिन का निमार्ण नहीं हो पाता है, तो यह समस्या होना शुरू हो जाती है। इसके होने के कई कारण हो सकते हैं, जैसे कि:

  • अत्यधिक मोटापा होना (Overweight)
  • भोजन पाचन क्रिया में दिक्कत (Food digestion)
  • लंबे समय से चल रहा तनाव (Stress)
  • खराब खानपान (Bad Diet)
  • अधिक ध्रमपान (Smoking)
  • जेनिटिक यानि परवारिक इतिहास (Genetic)

और पढ़ें: डायबिटीज में कटहल का सेवन क्यों माना जाता है उपयोगी?

प्रीडायबिटीज और हार्ट डिजीज (Prediabetes and Heart Disease)

प्रीडायबिटीज के अन्य जोखिमों में शामिल है (Risk):

  • उम्र अधिक होने पर डायबिटीज का जोखिम (Risk of diabetes) बढ़ जाता है।
  • कोई अन्य क्रॉनिक डिजीज होने पर भी डायबिटीज की समस्या हो सकती है।
  • गर्भवती महिला में भी इसका रिस्क बढ़ जाता है।
  • किसी भी प्रकार का वर्कआउट न करना।
  • पॉलीसिस्टिक अंडाशय सिंड्रोम की समस्या भी इसकी बड़ी वजह हो सकती है।
  • जिन लोगों को अनिद्रा की समस्या है, उनमें भी इसके जाेखिम को बहुत ज्यादा देखा जाता है।

और पढ़ें: तनाव से हार्ट डिजीज और डायबिटीज का बढ़ता रिस्क, जानें एक्सपर्ट से बचाव के टिप्स!

प्रीडायबिटीज के निदान (Diagnosis of prediabetes)

प्रीडायबिटीज का निदान के लिए डॉक्टर आपको कुछ ब्लड टेस्ट की सलाह दे सकते हैं । जिसके परिणाम के अनुसार वो पता लगा सकते हैं कि उन्हें प्रीडायबिटीज है या नहीं

फास्टिंग प्लाज्मा टेस्ट (Fasting Plasma Test)

इस टेस्ट से पहले डॉक्टर 8 घंटे तक कुछ न खाने की सलाह देते हैं। फास्टिंग प्लाज्मा टेस्ट से प्राप्त रक्त शर्करा के परिणाम इस प्रकार हो सकते हैं:

  • सामान्य स्तर (Normal level) : 100 mg/dl से कम रक्त शर्करा।
  • प्रीडायबिटीज की श्रेणी (Prediabetes): 100 से 125 mg/dl के मध्य।
  • डायबिटीज (Diabetes) : 126 mg/d से अधिक रक्त शर्करा का स्तर हो सकता हैं।

हीमोग्लोबिन A 1c टेस्ट (Hemoglobin A 1c Test)

हीमोग्लोबिन की जांच में रक्त परीक्षण किया जाता है। यह रक्त परीक्षण दो से तीन महीनो के रक्त शर्करा को मापा जाता है। रक्त शर्करा के आधार पर यह परिणाम हो सकता हैं।

  • सामान्य स्तर (Normal level): 5.6 से कम रक्त शर्करा हो।
  • प्रीडायबिटीज (Prediabetes): 5.7 से 6 .4 रक्त शर्करा हो।
  • डायबिटीज (Diabetes): 6.5 से अधिक हो।

ग्लूकोज टॉलरेंस टेस्ट (Glucose tolerance test)

यह टेस्ट मरीज में दो बार किया जाता है, पहले खाली पेट और दूसरा ग्लूकोज पिलाकर, जिसके परिणाम कुछ इस प्रकार हो सकते हैं:

  • सामान्य स्तर (Normal level): 140 mg/dl से कम आया हो।
  • प्रीडायबिटीज का स्तर (Prediabetes): 140 से 199 mg/dl हो।
  • डायबिटीज (Diabetes): 200 मिलीग्राम/डिएल से अधिक आया हो।

और पढ़ें: डायबिटीज में वेलवेट बीन्स का सेवन हो सकता है लाभकारी, लेकिन डॉक्टर से सलाह के बाद

प्रीडायबिटीज और हार्ट डिजीज (Prediabetes and Heart Disease) में संबंध

जिन्हें डायबिटीज नहीं है, लेकिन वो प्रीडायबिटीज के शिकार हैं, तो उनके शरीर में कुछ बदलाव देखने को मिल सकते हैं। प्रीडायबिटीज एक प्रकार का मेटाबॉलिक सिंड्रोम है, जिसकी वजह से ब्लड क्लॉटेज और कोरोनरी आर्टिज के डैमेज होने का खतरा बढ़ जाता है। जिसकी वजह प्रीडायबिटीज और हार्ट डिजीज का बहुत गहरा संबंध है। इसकी वजह से प्रीडायबिटीज पेशेंट में स्ट्रोक और हार्ट डिजीज का खतरा बढ़ जाता है। ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन में 1 मिलियन से अधिक लोगों के रिकॉर्ड का विश्लेषण किया गया था और पाया कि प्रीडायबिटीज वाले लोग में यह देखा गया:

  • हृदय रोग होने की संभावना 13% अधिक थी।
  • कोरोनरी धमनी के डैमेज होने का 10% अधिक जोखिम था।
  • स्ट्रोक होने की संभावना 6% अधिक थी।

यहां तक ​​कि जिन लोगों का ए1सी स्तर प्रीडायबिटीज के ठीक नीचे था, उनमें भी पहली दो स्थितियां होने की संभावना अधिक थी।

और पढ़ें: कॉन्जेनिटल हार्ट डिजीज के ट्रीटमेंट में एंजियोटेंसिन II रिसेप्टर ब्लॉकर्स की भूमिका के बारे में जानें!

हार्ट डिजीज के शुरूआती लक्षण

दुनियाभर में दिल से जुड़ीं बीमारियां मृत्यु की सबसे बड़ी वजह बनती जा रही है। प्रीडायबिटीज पेशेंट में हार्ट प्रॉब्लम के कुछ शुरूआती लक्षण नजर आ सकते हैं। इसके जोखिम से बचने के लिए इन लक्षणों पर निगरानी रखें, जिनमें शामिल हैं:

  • गैस की समस्या (Gas Problem)
  • चक्कर आना (Dizziness)
  • बहुत अधिक पसीना आना (Sweating)
  • गले और जबड़े का दर्द (Pain)
  • सीने में दर्द (Chest Pain)
  • हाय कोलेस्ट्रॉल होना (High cholesterol)
  • ब्लड प्रेशर का हाय रहना (High Blood Pressure)

इनके अलावा हार्ट डिजीज के और भी लक्षण (Symptoms) हो सकते हैं। जरूरी नहीं है कि यह लक्षण सभी में नजर आएं। सभी में इसके अलग-अलग लक्षण दिख सकते हैं। अगर आपको हार्ट से संबंधित कोई भी लक्षण महसूस हो रहा है, तो आपको तुरंत डॉक्टर से मिलने की जरूरत है।

और पढ़ें:पीडियाट्रिक हार्टबर्न में किस तरह से फायदेमंद हो सकती हैं H2 ब्लॉकर्स?

प्रीडायबिटीज में हार्ट डिजीज का खतरा (Heart Problem Risk)

एरिथमिया (Arrhythmia)

एरिथमिया में दिल की धड़कन अनियमित हो जाती है। जिसकी वजह से रोगी के दिल की धड़कन सामान्य से तेज हो जाती है और कभी सामान्य से धीरे हो जाती है। इस दौरान आपमें इस तरह के लक्षण नजर आ सकते हैं, जैसे कि:

  • हार्ट बीट तेज होना
  • ब्लड प्रेशर कम हो जाना
  • सीने में तेज दर्द महसूस होना
  • बोलने में दिक्कत होना
  • अधिक थकान महसूस होना
  • चक्कर आना
  • सांस लेने में तकलीफ

और पढ़ें: दिल से जुड़ी तकलीफ ‘मायोकार्डियम इंफेक्शन’ बन सकती है परेशानी का सबब, कुछ ऐसे रखें अपना ख्याल!

एथेरोस्क्लेरोसिस (Atherosclerosis)

एथेरोस्क्लेरोसिस के कारण आपके दिल में ब्लड की सप्लाई कम हो जाती है। हार्ट में सही मात्रा में रक्त न पहुंचने से रोगी की स्थति गंभीर हो सकती है। इसके लक्षण इस प्रकार हैं:

  • कंपकंपी महसूस होना
  • शरीर में दर्द होना
  • कमजोरी महसूस होना
  • सांस लेने में दिक्कत
  • सिरदर्द की समस्या

और पढ़ें: पेरिपार्टम कार्डियोमायोपैथी: प्रेग्नेंसी के बाद होने वाली दिल की समस्या के बारे में जान लें

कोरोनरी आर्टरी डिजीज (Coronary artery disease)

कोरोनरी धमनी रोग (सीएडी) या कोरोनरी हृदय रोग (सीएचडी) एक गंभीर अवस्‍था है। इसमें हृदय को ऑक्सिजन और पोषक तत्वों युक्त रक्त पहुंचाने वाली धमनियों में प्लाक जमने के कारण या क्षतिग्रस्त होने के कारण ये हृदय तक पूरी मात्रा में रक्त नहीं पहुंचा पाती हैं। इसके लक्षण इस प्रकार हैं:

  • सीने में तेज दर्द होना
  • सीने में दबाव महसूस होना
  • बेचैनी और पसीना निकलना
  • जी मिचलाना
  • सांस लेने में परेशानी

और पढ़ें: टोटल एनोमलस पल्मोनरी वेनस कनेक्शन: जानिए जन्मजात होने वाले इस हार्ट डिफेक्ट के बारे में

हार्ट अटैक (Heart Attack)

हार्ट अटैक हृदय रोग का कोई प्रकार नहीं है बल्कि ये एरिथमिया के अंतर्गत ही आता है। इसमें दिल में दबाव के साथ रक्त संचार कम हो जाता है, इसके लक्षण इस प्रकार हैं:

  • सीने में दर्द (Chest Pain)
  • जी मिचलाना (Nausea)
  • चक्कर आना (Dizziness)
  • सांस लेने में तकलीफ होना (Breathing Problem)
  • बेचैनी (Restlessness)

और पढ़ें: Tricuspid Regurgitation: हार्ट वॉल्व के ठीक से काम न करने के कारण पैदा होती है ये कंडिशन!

प्रीडायबिटीज और हार्ट डिजीज (Prediabetes and Heart Disease) से बचाव

प्रीडायबिटीज और हार्ट डिजीज में बहुत गहरा संबंध है। प्रीडायबिटीज पेशेंट को अलग हार्ट प्रॉब्लम से बचना है और यह स्थिति कहीं गंभीर न हो जाए। इसलिए पहले से कुछ खास बातों का ध्यान रखना आवश्यक है, जैसे कि:

अपनी कुछ आदतों में सुधार लाएं (Healthy Habits)

आपका इस गंभीर स्थिति से बचना चाहते हैं, तो आपको हृदय रोग जोखिम कारकों को नियंत्रण में रखना होगा। जिसके लिए अपनी कुछ आदतों में सुधार लाएं:

  • यदि आप धूम्रपान करते हैं, तो उसे छोड़ने की कोशिश करें।
  • अपने रक्तचाप को 120/80 मिमी एचजी से कम रखें यानि कि ब्लड प्रेशर को कंट्रोल रखें।
  • आपमें एलडीएल कोलेस्ट्रॉल के स्तर को 100 मिलीग्राम / डीएल से कम हो।

और पढ़ें: डायबिटीज के लिए एक्यूपंक्चर थेरिपी, कंट्रोल हो सकती है आपकी बढ़ी हुई शुगर

प्रीडायबिटीज और हार्ट डिजीज : अधिक फल, सब्जियां और अनाज खाएं (Diet)

डाॅक्टर प्रीडायबिटीज की समस्या से बचने के लिए ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले खाद्य पदार्थ खाने की सलाह देते हैं, क्योंकि कार्बोहाइड्रेट वाले खाद्य पदार्थ जल्दी रक्त शर्करा बढ़ा देते हैं। इसलिए डायट में खानपान का विशेष ध्यान दें और अपने भोजन में हेल्दी फूड शामिल करें। आप डायट में हरी सब्जियां, विशेषतौर पर पालक, टमाटर, लौकी, तोरी, पनीर, कम मीठे फल आदि खाएं। ऑयली फूड के सेवन से बचें। अनाज में खाली गेहूं कि जगह बेसन, जौ और बाजरे की मिक्स रोटी खाएं।

प्रीडायबिटीज और हार्ट डिजीज: व्यायाम रोज करें (Exercise)

हृदय रोग के जोखिम को कम करने के लिए व्यायाम भी बहुत जरूरी है। यदि आपका वजन सामान्य भी है, तो भी रोज 30 मिनट का वॉक रोज जरूरी है। यदि आपको वजन कम करने की आवश्यकता है, तो आप रोज एक घंटे की वॉक जरूर करें। डायबिटीज में योगा सबसे ज्यादा प्रभावकारी होता है।

प्रीडायबिटीज के लक्षण अक्सर दिखायी नहीं देते हैं। लेकिन यह साइलंट किलर की तरह होता है। इससे आपको बचने के लिए आपको अपने लाइफस्टाइल, डायट और वर्कआउट की नियमित जरूरत है।

तो इस तरह से आपने प्रीडायबिटीज और हार्ट डिजीज (Prediabetes and Heart Disease) में संबंध जाना। प्रीडायबिटीज, आपमें डायबिटीज का रूप न ले लें और आप हार्ट डिजीज के शिकार न हो जाएं, इससे बचाव के लिए अपने लाइफस्टाइल से लेकर खानपान तक का ध्यान रखें। जिन्हें मरीजों काे प्रीडायबिटीज का पता चल गया है, उन्हें खास सावधानी रखने की जरूरी होती है, क्योंकि उनकी छोटी सी गलती भी उन पर भारी पड़ सकती है। इसके लिए ऊपर दिए गए लक्षणों पर अपनी निगरानी भी रखें। प्रीडायबिटीज में अपने मन से कोई भी डायट न लें। अधिक जानकारी के लिए डॉक्टर से संपर्क करें।

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बीएमआई कैलक्युलेटर

अपने बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) की जांच करने के लिए इस कैलक्युलेटर का उपयोग करें और पता करें कि क्या आपका वजन हेल्दी है। आप इस उपकरण का उपयोग अपने बच्चे के बीएमआई की जांच के लिए भी कर सकते हैं।

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Niharika Jaiswal द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 2 days ago को
और Admin Writer द्वारा फैक्ट चेक्ड
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