फिजिकल एक्टिविटी व कार्डियोवैस्कुलर फिटनेस का इंसुलिन सेंसिटिविटी पर पड़ सकता है यह प्रभाव!

    फिजिकल एक्टिविटी व कार्डियोवैस्कुलर फिटनेस का इंसुलिन सेंसिटिविटी पर पड़ सकता है यह प्रभाव!

    व्यायाम करना हमारे संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है। इससे न केवल हमें शारीरिक बल्कि कई मानसिक लाभ भी हो सकते हैं। अन्य हेल्थ कंडिशंस की तरह डायबिटीज में भी नियमित व्यायाम करने को बेहद महत्वपूर्ण माना गया है। ऐसा करने से ब्लड ग्लूकोज लेवल को कंट्रोल रखने में मदद मिल सकती है। आज हम आपको जानकारी देने वाले हैं टाइप 2 डायबिटीज के रोगियों के लिए फिजिकल एक्टिविटी व कार्डियोवैस्कुलर फिटनेस और इंसुलिन सेंसिटिविटी (Physical Activity or Cardiovascular Fitness, And Insulin Sensitivity) के बारे में। लेकिन, फिजिकल एक्टिविटी व कार्डियोवैस्कुलर फिटनेस और इंसुलिन सेंसिटिविटी (Physical Activity or Cardiovascular Fitness, And Insulin Sensitivity) के बारे में जानने से पहले इंसुलिन सेंसिटिविटी (Insulin Sensitivity क्या होती है, इस बारे में जान लेते हैं। फिजिकल एक्टिविटी व कार्डियोवैस्कुलर फिटनेस और इंसुलिन सेंसिटिविटी में सबसे पहले इंसुलिन सेंसिटिविटी से जुड़ी जानकारी आपके साथ शेयर करते हैं।

    इंसुलिन सेंसिटिविटी किसे कहा जाता है? (Insulin Sensitivity)

    इंसुलिन सेंसिटिविटी (Insulin Sensitivity यानी जिस तरह से हमारे शरीर के सेल्स, इंसुलिन का इस्तेमाल करते हैं। हाय इंसुलिन सेंसिटिविटी से शरीर के सेल्स बेहतरीन तरीके से ब्लड ग्लूकोज को प्रयोग कर पाते हैं, जिससे ब्लड शुगर लेवल कम हो सकता है। कुछ लाइफस्टाइल और डाइटरी चेंजेज से यह सेंसिटिविटी सुधरती है। अब बात की जाए इंसुलिन को तो इंसुलिन वो हॉर्मोन है जो ब्लड ग्लूकोज यानी ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने में मददगार है। लो इंसुलिन सेंसिटिविटी को इंसुलिन रेजिस्टेंस भी कहा जाता है। जब हमारी कोशिकाएं अधिक ग्लूकोज को अवशोषित नहीं कर पाती हैं, तो इससे अत्यधिक ब्लड शुगर लेवल बहुत अधिक हो सकता है और बिना मैनेजमेंट के इसके कारण टाइप 2 डायबिटीज की समस्या हो सकती है।

    यह बात भी नोट करने वाली है कि इंसुलिन सेंसिटिविटी (Insulin Sensitivity हर व्यक्ति के लिए अलग हो सकती है और लाइफस्टाइल और खानपान में बदलाव के अनुसार बदल सकती है। फिजिकल एक्टिविटी व कार्डियोवैस्कुलर फिटनेस और इंसुलिन सेंसिटिविटी (Physical Activity or Cardiovascular Fitness, And Insulin Sensitivity) से पहले जानते हैं कि फिजिकल एक्टिविटी व कार्डियोवैस्कुलर फिटनेस के क्या लाभ हैं।

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    फिजिकल एक्टिविटी व कार्डियोवैस्कुलर फिटनेस के फायदे क्या है? (Benefits of Physical Activity or Cardiovascular Fitness)

    कार्डियोवैस्कुलर फिटनेस (Cardiovascular Fitness), कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम की वो क्षमता है, जो काम करने वाली मसल्स को ऑक्सीजन युक्त ब्लड सप्लाई करती है। इसके साथ ही इससे मांसपेशियों को मूवमेंट के लिए ऊर्जा के स्रोत के रूप में ब्लड सप्लाई द्वारा डिलिवर्ड ऑक्सीजन का उपयोग सही से हो पाता है। दूसरे शब्दों में कहा जाए तो कार्डियोवैस्कुलर फिटनेस (Cardiovascular Fitness) शरीर की उस क्षमता को भी कहा जा सकता है, जिससे पूरे शरीर में कितनी अच्छे और प्रभावी तरीके से हमारा ब्लड सर्कुलेट होता है। कार्डियोवैस्कुलर फिटनेस बेहद जरूरी है क्योंकि एक हेल्दी सर्कुलेटरी सिस्टम से कई गंभीर समस्याओं से राहत पाई जा सकती है। फिजिकल एक्टिविटी व कार्डियोवैस्कुलर फिटनेस (Cardiovascular Fitness) से इन समस्याओं से राहत मिल सकती है:

    • पेरिफेरल आर्टरी डिजीज (Peripheral artery disease)
    • ब्लड क्लॉट्स (Blood clots)
    • कंजेस्टिव हार्ट फेलियर (Congestive heart failure)
    • हार्ट अटैक (Heart attack)
    • स्ट्रोक (Stroke)
    • हाय ब्लड प्रेशर (High blood pressure)
    • आर्टेरियल ब्लॉकेज (Arterial blockage)
    • इस्किमिया (Ischemia)
    • कोरोनरी आर्टरी डिजीज Coronary artery disease)
    • एथेरोस्क्लेरोसिस (Atherosclerosis)
    • इंसुलिन रेजिस्टेंस सिंड्रोम (Insulin resistance syndrome)
    • एंजाइना (Angina)
    • कार्डियक एरिथमिया (Cardiac Arrhythmia)

    फिजिकल एक्टिविटी व कार्डियोवैस्कुलर फिटनेस (Cardiovascular Fitness) के फायदों के साथ ही अब जान लेते हैं कि फिजिकल एक्टिविटी (Physical activity) का इंसुलिन सेंसिटिविटी (Insulin Sensitivity पर क्या प्रभाव होता है?

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    फिजिकल एक्टिविटी का इंसुलिन सेंसिटिविटी पर इफेक्ट: पाएं इस बारे में जानकारी

    फिजिकल एक्टिविटी का इंसुलिन सेंसिटिविटी (Insulin Sensitivity पर पॉजिटिव प्रभाव पड़ता है। वास्तव में, यह इंसुलिन सेंसिटिविटी को बेहतर बनाने के लिए किए जा सकने वाले किसी भी उपाय में यह सबसे प्रभावी है। किसी भी तरह की फिजिकल एक्टिविटी में इतना पोटेंशियल होता है कि उससे इंसुलिन बेहतर तरीके से काम कर पाती है। अगर आप एरोबिक एक्टिविटीज जैसे ब्रिस्क वॉकिंग, स्विमिंग और साइकिलिंग के साथ रेजिस्टेंस ट्रेनिंग या वेट ट्रेनिंग को कंबाइन कर लेते हैं, तो इससे भी अच्छा प्रभाव पड़ता है। एरोबिक एक्टीविट्ज से अधिक कैलोरीज बर्न होती हैं वहीं रेजिस्टेंस ट्रेनिंग से मसल्स बिल्ड होते हैं, जिनसे व्यायाम के दौरान ग्लूकोज बर्न होता है।

    एक्सरसाइज यानी शारीरिक एक्टिविटी के दौरान हमारा शरीर ग्लाइकोजन (Glycogen) को भी बर्न करता है जो ग्लूकोज का एक प्रकार हैं और मसल्स में स्टोर होता है। व्यायाम के बाद, हमारे मसल्स ब्लडस्ट्रीम से ग्लूकोज के साथ अपने ग्लाइकोजन के स्टोर की भरपाई करते हैं। फिजिकल एक्टिविटी के दौरान जितना अधिक ग्लाइकोजन बर्न होता, शरीर की इंसुलिन सेंसिटिविटी (Insulin Sensitivity) उतनी ही अधिक सुधरती है। इसका अर्थ यह भी है कि अधिक इंटेंस और अधिक ड्यूरेशन एक्टिविटीज से इंसुलिन सेंसिटिविटी में और अधिक सुधार होता है। अब जानते हैं फिजिकल एक्टिविटी व कार्डियोवैस्कुलर फिटनेस और इंसुलिन सेंसिटिविटी (Physical Activity or Cardiovascular Fitness, And Insulin Sensitivity) के बारे में।

    फिजिकल एक्टिविटी व कार्डियोवैस्कुलर फिटनेस और इंसुलिन सेंसिटिविटी (Physical Activity or Cardiovascular Fitness, And Insulin Sensitivity)

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    फिजिकल एक्टिविटी व कार्डियोवैस्कुलर फिटनेस और इंसुलिन सेंसिटिविटी (Physical Activity or Cardiovascular Fitness, And Insulin Sensitivity): क्या कहता है सर्वे?

    नेशनल हेल्थ और न्यूट्रिशन एग्जामिनेशन सर्वे (National Health and Nutrition Examination Survey) का उद्देश्य फिजिकल एक्टिविटी व कार्डियोवैस्कुलर फिटनेस (Cardiovascular Fitness) का इंसुलिन सेंसिटिविटी पर प्रभाव जानना था। ऐसा माना जाता है कि कार्डियोरेस्पिरेटरी फिटनेस और नियमित फिजिकल एक्टिविटी से कार्डियोवैस्कुलर डिजीज का जोखिम कम हो सकता है। हालांकि, रिस्पॉन्सिबल मैकेनिज्म तरह-तरह के हो सकते हैं, लेकिन यह इंसुलिन सेंसिटिविटी (Insulin Sensitivity) पर प्रभाव में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। ऐसे में इस सर्वे का मोटिव फिजिकल एक्टिविटी, फिटनेस, मोटापा और इंसुलिन रेजिस्टेंस (Insulin resistance) के बीच में इंटररिलेशनशिप के रीसेंट एविडेंस को हायलाइट करना था।

    अगर इस सर्वे के बारे में संक्षेप में कहा जाए तो इससे यह बात साबित हुई थी कि फिजिकल एक्टिविटी को बढ़ाने से इंसुलिन रेजिस्टेंस कम होता है। एक्सरसाइज करने की इंटेंसिटी और जेनेटिक फैक्टर दोनों ही इस प्रभाव के परिमाण को नियंत्रित कर सकते हैं। इसके साथ ही यह भी परिणाम निकला कि फिजिकल एक्टिविटी और कार्डियोवैस्कुलर फिटनेस के बच्चों में इंसुलिन सेंसिटिविटी (Insulin Sensitivity) को इम्प्रूव करने के इंडिपेंडेंट इफेक्ट हो सकते हैं और लड़कियों में वेट मेंटेनेंस में फिजिकल एक्टिविटी प्राइमरी रोल निभा सकती है।

    आसान शब्दों में समझा जाए तो यह बात स्पष्ट है कि फिजिकल एक्टिविटी व कार्डियोवैस्कुलर फिटनेस और इंसुलिन सेंसिटिविटी (Physical Activity or Cardiovascular Fitness, And Insulin Sensitivity) में गहरा संबंध है। यानि, फिजिकल एक्टिविटी व कार्डियोवैस्कुलर फिटनेस से इंसुलिन सेंसिटिविटी सुधरती है। अब जानिए इंसुलिन सेंसिटिविटी (Insulin Sensitivity) को सुधारने के अन्य तरीकों के बारे में।

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    इंसुलिन सेंसिटिविटी (Insulin sensitivity) को सुधारने के अन्य तरीके क्या हैं?

    यह तो थी फिजिकल एक्टिविटी व कार्डियोवैस्कुलर फिटनेस और इंसुलिन सेंसिटिविटी (Physical Activity or Cardiovascular Fitness, And Insulin Sensitivity) के बारे में जानकारी। जैसा कि पहले ही बताया गया है कि इंसुलिन सेंसिटिविटी का अर्थ है इंसुलिन के प्रति हमारे शरीर के सेल्स की संवेदनशीलता। यह हर व्यक्ति की अलग हो सकती है और इसमें सुधार के लिए रोगी के लिए अपनी जीवनशैली और खानपान में सुधार जरूरी है। यह इम्प्रूवमेंट उन लोगों के लिए बेहद लाभदायक है जिन्हें टाइप 2 डायबिटीज जैसा रोग है या जिन्हें इस समस्या का जोखिम है। आइए जानते हैं इंसुलिन सेंसिटिविटी (Insulin Sensitivity) को सुधारने के अन्य तरीकों के बारे में:

    सही आहार (Right food)

    टाइप 2 डायबिटीज, इंसुलिन सेंसिटिविटी (Insulin Sensitivity) या अपने संपूर्ण स्वास्थ्य में सुधार के लिए सही आहार का सेवन बेहद जरूरी है। अपने आहार में फल, सब्जियों और अनाज आदि को शामिल करें। आपके लिए सही आहार के चुनाव में डॉक्टर और डायटीशियन भी आपकी मदद कर सकते हैं।

    तनाव से बचें (Avoid stress)

    तनाव कई शारीरिक और मानसिक समस्याओं का मुख्य कारण है, जिनमें डायबिटीज भी शामिल है। ऐसे में तनाव से बचाव के बारे में सोचें। इसके लिए आप म्यूजिक, योगा या मेडिटेशन का सहारा ले सकते हैं। लेकिन,अगर समस्या अधिक हो तो मेडिकल हेल्प लेना न भूलें। पर्याप्त नींद लेना भी आवश्यक है।

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    वजन को सही रखें (Maintain your weight)

    अधिक वजन या मोटापे को भी डायबिटीज या इंसुलिन सेंसिटिविटी (Insulin Sensitivity) का कारण माना जाता है। इसलिए अपने वजन को संतुलित रखें। इसके लिए सही आहार का सेवन करें और व्यायाम करें।

    नियमित व्यायाम (Regular exercise)

    जैसा कि पहले ही बताया गया है कि हर व्यक्ति के लिए नियमित व्यायाम करना बेहद जरूरी है। दिन में तीस मिनट अवश्य निकालें ताकि आप स्वस्थ रहें। अधिक जानकारी के लिए डॉक्टर और एक्सपर्ट की से बात करें।

    और पढ़ें: प्रेग्नेंसी में डायबिटीज मैनेजमेंट (Management Of Diabetes In Pregnancy) कैसे किया जा सकता है?

    डायबिटीज, इंसुलिन सेंसिटिविटी (Insulin Sensitivity) या किसी भी अन्य समस्या को मैनेज करने के लिए रोगी के लिए नियमित जांच कराना और डॉक्टर की सलाह का पालन करना बेहद जरूरी है। उम्मीद है कि फिजिकल एक्टिविटी व कार्डियोवैस्कुलर फिटनेस और इंसुलिन सेंसिटिविटी (Physical Activity or Cardiovascular Fitness, And Insulin Sensitivity) के बारे में यह जानकारी पसंद आई होगी। यह बात साबित हो चुकी है कि फिजिकल एक्टिविटी व कार्डियोवैस्कुलर फिटनेस से इंसुलिन सेंसिटिविटी इम्प्रूव होती है। अगर इसके बारे में आपके मन में कोई भी सवाल है तो डॉक्टर से इस बारे में अवश्य पूछें।

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    लेखक की तस्वीर badge
    AnuSharma द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 02/02/2022 को
    डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड