टाइप 1 डायबिटीज और ग्लूकागन: क्या ग्लूकागन की मिनी-डोज हो सकती है लाभकारी?

    टाइप 1 डायबिटीज और ग्लूकागन: क्या ग्लूकागन की मिनी-डोज हो सकती है लाभकारी?

    डायबिटीज कोई नई बीमारी नहीं है, लेकिन दिन प्रतिदिन डायबिटीज पेशेंट्स की बढ़ती संख्या इस बीमारी के प्रति सतर्क जरूर करते हैं। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) में पब्लिश्ड रिपोर्ट के अनुसार भारत में डायबिटीज के पेशेंट्स की संख्या 77 मिलियन है और आने वाले सालों में डायबिटीज पेशेंट्स की संख्या बढ़ सकती है। डायबिटीज की समस्या जेनेटिकल कारणों से साथ-साथ अनहेल्दी लाइफ स्टाइल की वजह से भी हो सकती है। सिर्फ यही नहीं, डायबिटीज की समस्या अपने साथ कई गंभीर बीमारियों को लाती है। धीरे-धीरे या एकसाथ ये बीमारियां शरीर पर और मेंटल हेल्थ दोनो पर बुरा प्रभाव डालती है। इसलिए ऐसी स्थितियों का सामना ना करना पड़े इसलिए आज इस आर्टिकल में टाइप 1 डायबिटीज और ग्लूकागन (Type 1 Diabetes and Glucagon) से जुड़े महत्वपूर्ण जानकारी आपके साथ शेयर करेंगे।

    • टाइप 1 डायबिटीज क्या है?
    • ग्लूकागन क्या है?
    • टाइप 1 डायबिटीज और ग्लूकागन पर क्या है रिसर्च?
    • मिनी-डोज ग्लूकागन की मात्रा कितनी हो सकती है?
    • इंसुलिन और ग्लूकागोन दोनों में क्या अंतर है?
    • इंसुलिन और ग्लूकागोन में क्या समानता है?
    • टाइप 1 डायबिटीज को कंट्रोल करने के लिए क्या करें?

    टाइप 1 डायबिटीज और ग्लूकागन (Type 1 Diabetes and Glucagon) से जुड़े इन सवालों का जवाब जानते हैं।

    टाइप 1 डायबिटीज (Type 1 Diabetes) क्या है?

    टाइप 1 डायबिटीज और ग्लूकागन (Type 1 Diabetes and Glucagon)

    जब बॉडी में इंसुलिन बनना किसी भी कारण से बंद हो जाता है, तो ऐसी स्थिति में टाइप-1 डायबिटीज (Type 1 Diabetes) दस्तक दे सकती है या ऐसी स्थिति टाइप 1 डायबिटीज कहलाती है। टाइप 1 डायबिटीज की समस्या होने पर ब्लड शुगर लेवल (Blood Sugar Level) को बैलेंस रखना जरूरी बताया गया है। टाइप 1 डायबिटीज बच्चों में और किशोरों को अपना शिकार ज्यादा बनाती है। वैसे यह बच्चों और बड़ों में अचानक होने वाली बीमारी है। ऐसे में ब्लड शुगर लेवल बैलेंस में रखने के लिए इंसुलिन इंजेक्शन की आवश्यकता पड़ती है। इस आर्टिकल के शुरुआत में हमनें टाइप 1 डायबिटीज और ग्लूकागन (Type 1 Diabetes and Glucagon) दो विषय की बात की है, तो चलिए ग्लूकागन (Glucagon) को पहले समझने की कोशिश करते हैं और फिर टाइप 1 डायबिटीज और ग्लूकागन पर क्या है रिसर्च रिपोर्ट्स यह समझेंगे।

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    ग्लूकागन (Glucagon) क्या है?

    ग्लूकागन एक पेप्टाइड हॉर्मोन है, जो पैंक्रियाज (Pancreas) के अल्फा सेल्स (Alpha cells) से प्रोड्यूस होता है। यह ब्लड फ्लो में ग्लूकोज (Glucose) और फैटी एसिड (Fatty acids) की एकाग्रता को बढ़ाता है और इसे शरीर का मुख्य कैटोबोलिक हॉर्मोन माना जाता है। यू.एस के नैशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन (National Library of Medicine, US) में पब्लिश्ड रिपोर्ट के अनुसार ग्लूकागन (Glucagon) का इस्तेमाल मेडिसिन की तरह भी कुछ हेल्थ कंडिशन (Health conditions) के इलाज के लिए किया जाता है। चलिए अब टाइप 1 डायबिटीज और ग्लूकागन (Type 1 Diabetes and Glucagon) से जुड़ी क्या है रिसर्च रिपोर्ट्स यह समझने की कोशिश करते हैं।

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    टाइप 1 डायबिटीज और ग्लूकागन पर क्या है रिसर्च? (Research onType 1 Diabetes and Glucagon)

    टाइप 1 डायबिटीज और ग्लूकागन (Type 1 Diabetes and Glucagon)

    नैशनल सेंटर फॉर बायोटक्नोलॉजी इन्फॉर्मेशन (National Center for Biotechnology Information) में पब्लिश्ड रिपोर्ट के अनुसार ग्लूकागन की लो डोज (Low-dose glucagon) टाइप 1 डायबिटीज के मरीजों के लिए लाभकारी हो सकती है। इसलिए अगर माइल्ड से मॉडरेट ब्लड शुगर के लक्षणों वाले मरीज खाना नहीं खा रहें हों या उन्हें उल्टी हो रही हो, तो ऐसी स्थिति में ग्लूकागन की कम डोज दी सकती है, जिसे मिनी-डोज ग्लूकागन (Mini-dose glucagon) भी कहते हैं। मिनी-डोज ग्लूकागन से ब्लड शुगर लेवल (Blood Sugar Level) आधे घंटे में 50 to 100 mg/dl तक बढ़ सकता है और इस दौरान जी मिचलाने (Nausea) जैसी समस्या भी नहीं होती है। अगर यहां गौर करें, तो डायबिटीज पेशेंट्स के लिए इंसुलिन भी ब्लड शुगर लेवल को बैलेंस करने में सहायक है। ठीक वैसे ही ग्लूकागन भी टाइप 1 डायबिटीज पेशेंट्स के लिए काम करता है, लेकिन ग्लूकागन की डोज कम (मिनी-डोज ग्लूकागन) दी जाती है।

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    मिनी-डोज ग्लूकागन (Mini-dose glucagon) की मात्रा कितनी हो सकती है?

    नेशनवाइड चिल्ड्रेन्स हॉस्पिटल (Nationwide Children’s Hospital) के अनुसार मिनी-डोज ग्लूकागन (Mini-dose glucagon) इस प्रकार है-

    • 0 से 2 साल के बच्चों के लिए 2 यूनिट
    • 3 से 15 साल के बच्चों के लिए 1 यूनिट
    • 16 वर्ष या इससे ज्यादा उम्र के लिए 15 यूनिट

    नोट : मिनी-डोज ग्लूकागन (Mini-dose glucagon) की मात्रा यहां सिर्फ जानकारी के लिए दी गई है। आप अपनी मर्जी से मिनी-डोज ग्लूकागन ना दें और जो डोज प्रिस्क्राइब की गई है वही दें।

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    टाइप 1 डायबिटीज और ग्लूकागन: इंसुलिन और ग्लूकागोन में क्या समानता है? (Similarities between Insulin and Glucagon)

    इंसुलिन और ग्लूकागोन में निम्नलिखित समानता है। जैसे:

    • इंसुलिन और ग्लूकागोन दोनों हॉर्मोन (Hormone) है।
    • दोनों ही ब्लड शुगर लेवल (Blood Sugar Level) को बैलेंस करता है।
    • इंसुलिन और ग्लूकागोन दोनों अग्न्याशय (Pancreas) से प्रोड्यूस होता है।
    • दोनों ही पेप्टाइड हॉर्मोन (Peptide hormone) हैं।

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    इंसुलिन और ग्लूकागोन दोनों में क्या अंतर है? (Difference between Insulin and Glucagon)

    इंसुलिन और ग्लूकागोन दोनों में समानता होते हुए भी कुछ अंतर हैं। जैसे इंसुलिन पैंक्रियाज के सेल्स से प्रोड्यूस होता है और ब्लड में बढ़े हुए ग्लूकोज लेवल (Glucose level) को कम करता है। वहीं ग्लूकागन पैंक्रियाज के अल्फा सेल्स (Alpha Cells [α-cells]) से प्रोड्यूस होता है और ग्लाइकोजन के टूटने में सहायक होता है।

    टाइप 1 डायबिटीज और ग्लूकागन से जुड़ी इन जानकारियों के साथ अब समझते हैं टाइप 1 डायबिटीज के लक्षण (Symptoms of Type 1 Diabetes) को समझते हैं, जिससे वक्त पर बीमारी की जानकारी मिले और इलाज आसानी से हो सके।

    टाइप 1 डायबिटीज के लक्षण क्या हैं? (Symptoms of Type 1 Diabetes)

    टाइप 1 डायबिटीज के लक्षण निम्नलिखित हैं। जैसे:

    • अत्यधिक प्यास (Thirsty) लगना।
    • बार-बार पेशाब (Urine) लगना।
    • अत्यधिक भूख (Hungerness) लगना।
    • क्लियर दिखाई (Blurred Vision) नहीं देना।
    • थकान (Tiredness) महसूस होना।
    • बिना कारण वजन कम (Weight loss) होना।

    टाइप 1 डायबिटीज के लक्षणों को इग्नोर ना करें और डॉक्टर से कंसल्ट करें।

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    टाइप 1 डायबिटीज को कंट्रोल करने के लिए क्या करें? (Tips to Control Type 1 Diabetes)

    टाइप 1 डायबिटीज को कंट्रोल करने के हेल्दी डायट फॉलो करें और निम्नलिखित एक्सरसाइज अपने दिनचर्या में शामिल करें। जैसे:

    एक्सरसाइज के साथ-साथ आप टेनिस (Tennis) या बास्केटबॉल (Basketball) जैसे स्पोर्ट्स एक्टिविटी में भी हिस्सा ले सकते हैं और ब्लड शुगर लेवल को बैलेंस रख सकते हैं।

    नोट : एक्सरसाइज करने के दौरान या आउटडोर गेम्स में हिस्से लेने के वक्त डायबिटीज मरीजों (Diabetes patients) को सतर्कता बरतनी चाहिए, क्योंकि चोट लगने पर घाव ठीक होने में वक्त लग सकता है और आपकी तकलीफ बढ़ सकती है।

    अगर आप डायबिटीज के मरीज हैं और टाइप 1 डायबिटीज और ग्लूकागन (Type 1 Diabetes and Glucagon) से जुड़े सवालों का जवाब तलाश कर रहें थें, तो उम्मीद करते हैं कि टाइप 1 डायबिटीज और ग्लूकागन (Type 1 Diabetes and Glucagon) को समझने में सुविधा हुई होगी। वैसे अगर आप या आपके कोई भी करीबी डायबिटिक हैं, तो उन्हें ब्लड शुगर लेवल को बैलेंस बनाये रखने की सलाह दें, जिससे अन्य बीमारियों से दूर रहने में मदद मिल सकती है।

    स्वस्थ रहने के लिए अपने डेली रूटीन में योगासन शामिल करें। नीचे दिए इस वीडियो लिंक पर क्लिक कर योगासन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी जानिए।

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    सूत्र

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    Nidhi Sinha द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 19/01/2022 को
    डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड