Early Endothelial Dysfunction In Type 1 Diabetes: जानिए एंडोथेलियल डिसफंक्शन और डायबिटीज से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी

    Early Endothelial Dysfunction In Type 1 Diabetes: जानिए एंडोथेलियल डिसफंक्शन और डायबिटीज से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी

    टाइप 1 डायबिटीज में अर्ली एंडोथेलियल डिसफंक्शन … टाइप 1 डायबिटीज की समस्या से तो हम सभी परिचित हैं, लेकिन क्या आप एंडोथेलियल डिसफंक्शन के बारे में जानते हैं? टाइप 1 डायबिटीज और एंडोथेलियल डिसफंक्शन का क्या है आपसी तालमेल? इस आर्टिकल में टाइप 1 डायबिटीज में अर्ली एंडोथेलियल डिसफंक्शन (Early Endothelial Dysfunction In Type 1 Diabetes) से जुड़ी सभी जानकारी आपके साथ शेयर करेंगे।

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    एंडोथेलियल डिसफंक्शन (Endothelial dysfunction) क्या है?

    टाइप 1 डायबिटीज में अर्ली एंडोथेलियल डिसफंक्शन (Early Endothelial Dysfunction In Type 1 Diabetes)

    कार्डियोवैस्कुलर कंडिशन जैसे कोरोनरी आर्टरी डिजीज (Coronary artery disease), हायपरटेंशन (Hypertension), माइक्रोवैस्कुलर एंजाइना (Microvascular angina) एवं डायालोस्टिक डिसफंक्शन (Diastolic dysfunction) को समझने के लिए एंडोथेलियल डिसफंक्शन (Endothelial dysfunction) की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। अब अगर सामान्य शब्दों में समझें तो एंडोथेलियल लेयर (Endothelium) इनर लाइन है, जो स्मॉल आर्ट्रिज को ठीक तरह से काम करने में सहायक होता है। नैशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इन्फॉर्मेशन (National Center for Biotechnology Information) में पब्लिश्ड रिपोर्ट के अनुसार एंडोथेलियम ब्लड वेसल के डायलेशन एवं कॉन्ट्रैक्शन को मेंटेन रखने का कार्य करता है। एंडोथेलियम के इसी फंक्शन से अलग-अलग टिशू से रिसीव किये जाने वाले ब्लड की जानकारी मिलती है। ये है एंडोथेलियल डिसफंक्शन (Endothelial dysfunction) से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी। अब टाइप 1 डायबिटीज में अर्ली एंडोथेलियल डिसफंक्शन (Early Endothelial Dysfunction In Type 1 Diabetes) को रिसर्च के आधार पर समझने की कोशिश करते हैं।

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    टाइप 1 डायबिटीज में अर्ली एंडोथेलियल डिसफंक्शन (Early Endothelial Dysfunction In Type 1 Diabetes) क्या है?

    नैशनल सेंटर फॉर बायोटेकोनोलॉजी इन्फॉर्मेशन (National Center for Biotechnology Information) में पब्लिश्ड रिपोर्ट के अनुसार टाइप 1 डायबिटीज में अर्ली एंडोथेलियल डिसफंक्शन मेटाबॉलिक चेंज की वजह से होता है, ऐसा विशेष रूप से हाइपरग्लेसेमिया (Hyperglycemia) की वजह से होता है। हाइपरग्लेसेमिया को सामान्य शब्दों में समझें तो शरीर में ब्लड शुगर या ग्लूकोज लेवल के बढ़ने की स्थिति है। ऐसा तब होता है जब शरीर पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन का निर्माण नहीं कर पाता ही और न ही उसका सही तरह से इस्तेमाल कर पाता है। रिसर्च रिपोर्ट्स के अनुसार टाइप 1 डायबिटीज होने की स्थिति में उम्र बढ़ने के साथ-साथ रेटिनोपैथी (Retinopathy), नेफ्रोपैथी (Nephropathy) और डायबिटिक फूट (Diabetic foot) जैसी तकलीफें बढ़ जाती हैं। टाइप 1 डायबिटीज में अर्ली एंडोथेलियल डिसफंक्शन (Early Endothelial Dysfunction In Type 1 Diabetes) के साथ-साथ एंडोथेलियल डिसफंक्शन को टाइप 2 डायबिटीज (Type 2 diabetes) से भी जोड़कर देखा गया है और उनमें कार्डियोवैस्कुलर डिजीज (Cardiovascular disease) की संभावना भी बढ़ जाती है। इसलिए टाइप 1 डायबिटीज में अर्ली एंडोथेलियल डिसफंक्शन (Early Endothelial Dysfunction In Type 1 Diabetes) बढ़ जाती है, लेकिन टाइप 1 डायबिटीज की तुलना में टाइप 2 डायबिटीज (Type 2 Diabetes) पेशेंट्स एंडोथेलियल डिसफंक्शन ज्यादा कॉम्प्लिकेटेड होते हैं।

    नोट: टाइप 1 डायबिटीज और एंडोथेलियल डिसफंक्शन (Type 1 Diabetes and Endothelial Dysfunction) के अलावा टाइप 2 डायबिटीज (Type 2 Diabetes) दोनों ही स्थिति में कार्डियोवैस्कुलर डिजीज (Cardiovascular disease) की संभावनाओं को बढ़ाने वाला हो सकता है।

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    टाइप 1 डायबिटीज में अर्ली एंडोथेलियल डिसफंक्शन: एंडोथेलियम ठीक तरह से किन स्थितियों में काम नहीं कर सकते हैं?

    टाइप 1 डायबिटीज में अर्ली एंडोथेलियल डिसफंक्शन (Early Endothelial Dysfunction In Type 1 Diabetes)

    अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (American Heart Association) में पब्लिश्ड रिपोर्ट के अनुसार एंडोथेलियम हार्ट और शरीर के सभी वैस्कुलर सिस्टम (Vascular system) के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन एंडोथेलियम से जुड़ी समस्या निम्नलिखित कारणों की वजह से हो सकती है। जैसे:

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    ऊपर बताई गई स्थिति एंडोथेलियम को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसलिए निम्नलिखित बातों का ध्यान रखें जैसे:

    • स्मोकिंग (Smoking) ना करें।
    • ब्लड शुगर लेवल (Blood Sugar Level) को बैलेंस रखें।
    • शरीर का वजन (Weight) संतुलित बनाये रखें।
    • फिजिकल एक्टिविटी करने की आदत डालें।
    • डायबिटीज (Diabetes) या हार्ट (Heart) से जुड़ी कोई भी बीमारी है, तो डॉक्टर से द्वारा दी गई एडवाइस को फॉलो करें।
    • तनाव से दूर रहें

    नैशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इन्फॉर्मेशन (National Center for Biotechnology Information) में पब्लिश्ड रिपोर्ट के अनुसार एंडोथेलियल डिसफंक्शन और डायबिटीज से बचाव के लिए हेल्दी लाइफ स्टाइल मेंटेन करना बेहद जरूरी है।

    टाइप 1 डायबिटीज में अर्ली एंडोथेलियल डिसफंक्शन: ब्लड शुगर लेवल (Blood Sugar Level) कैसे रखें कंट्रोल में?

    नैशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (National Centre for Disease Control) में पब्लिश्ड रिपोर्ट के अनुसार भारत में 6.51 करोड़ डायबिटीज के मरीज हैं वहीं अनुमान यह भी लगाया जा रहा है कि साल 2035 तक भारत में डायबिटीज पेशेंट्स की संख्या 10.9 करोड़ तक बढ़ सकती है। वहीं एनसीडीसी (NCDC) की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 3.5 डायबिटीज पेशेंट (Diabetes patients) अनरजिस्टर्ड भी हो सकते हैं। हालांकि इन आंकड़ों को देखकर ऐसा नहीं समझना चाहिए कि ब्लड शुगर लेवल को बैलेंस नहीं रखा जा सकता है। ब्लड शुगर लेवल (Blood Sugar Level) को इम्बैलेंस होने ना दें इसलिए सबसे पहले टाइप 1 डायबिटीज को समझते हैं और फिर इसे कैसे कंट्रोल किया जाए यह भी समझेंगे, जिससे टाइप 1 डायबिटीज में अर्ली एंडोथेलियल डिसफंक्शन (Early Endothelial Dysfunction In Type 1 Diabetes) की स्थिति ही पैदा ना हो।

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    टाइप 1 डायबिटीज (Type 1 Diabetes) क्या है?

    परिवार में डायबिटीज की समस्या होना, जेनेटिक परेशानियों के साथ नवजात का जन्म, जिससे शरीर में इंसुलिन का निर्माण नहीं होना, सिस्टिक फाइब्रोसिस (Cystic fibrosis), हेमोक्रोमैटोसिस (Hemochromatosis), मम्पस (Mumps) या रूबेला साइटोमेगालोवायरस (Rubella cytomegalovirus) के कारण टाइप 1 डायबिटीज (Type 1 Diabetes) की समस्या हो सकती है। वहीं इन्हीं स्थितियों की वजह से शरीर में इन्सुलिन का निर्माण बंद हो जाए, तो टाइप-1 डायबिटीज की समस्या शुरू हो जाती है। ऐसी स्थिति किशोरों और वयस्कों दोनों में देखी जाती है। ऐसी स्थिति होने पर डायबिटीज की दवा (Diabetes medicine) या इंसुलिन इंजेक्शन (Insulin injection) की मदद से ब्लड शुगर लेवल को मेंटेन रखा जाता है।

    टाइप 1 डायबिटीज में अर्ली एंडोथेलियल डिसफंक्शन (Early Endothelial Dysfunction In Type 1 Diabetes): टाइप 1 डायबिटीज से बचाव कैसे करें? (Tips to prevent Type 1 Diabetes)

    टाइप 1 डायबिटीज से बचाव के लिए एक्सरसाइज (Workout), योगासन (Yogasan) एवं वॉकिंग (Walking) के साथ-साथ निम्नलिखित खाद्य पदार्थों को डेली डायट में शामिल करना चाहिए। जैसे:

    • बीन्स (Beans)
    • हरी पत्तेदार सब्ज़ियां (Green vegetables)
    • खट्टे फल (Citrus fruit)
    • बेरीज (Berries)
    • टमाटर (Tomato)
    • ओमेगा-3 फैटी एसिड्स वाली मछलियां (Omega 3 Fatty Acid fish)
    • साबुत अनाज (Whole grain)
    • नट्स (Nuts)
    • फैट-फ्री दही और दूध (Fat free milk and curd)

    इनके सेवन से डायबिटीज (Diabetes) और हार्ट (Heart) से जुड़ी बीमारियों से बचा जा सकता है।

    किसी भी बीमारी का इलाज अगर ठीक से किया जाए तो आप जानलेवा बीमारी को भी हरा सकते हैं, जिससे आप स्वस्थ रह सकते हैं। अगर आप टाइप 1 डायबिटीज में अर्ली एंडोथेलियल डिसफंक्शन (Early Endothelial Dysfunction In Type 1 Diabetes) से जुड़े किसी तरह के कोई सवाल का जवाब जानना चाहते हैं तो विशेषज्ञों से समझना बेहतर होगा। अगर आपको डायबिटीज (Diabetes), हार्ट डिजीज (Heart Disease) या कोई अन्य बीमारी (Health Condition) है, तो खुद से इलाज ना करें और लापरवाही ना बरतें। इसलिए डॉक्टर से कंसल्ट करें।

    स्वस्थ रहने के लिए अपने डेली रूटीन में योगासन शामिल करें। नीचे दिए इस वीडियो लिंक पर क्लिक कर योगासन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी जानिए।

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    सूत्र

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    लेखक की तस्वीर badge
    Nidhi Sinha द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 12/01/2022 को
    डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड