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टाइप 1 डायबिटीज की समस्या है, तो यह व्यायाम आ सकते हैं आपके काम

टाइप 1 डायबिटीज की समस्या है, तो यह व्यायाम आ सकते हैं आपके काम

एक्सरसाइज करना हमारी संपूर्ण हेल्थ के लिए जरूरी है। नियमित रूप से व्यायाम करने से न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक और भावनात्मक रूप से हेल्दी रहने में भी मदद मिलती है। डायबिटीज को मैनेज करने के लिए भी रेगुलर व्यायाम करने को महत्वपूर्ण माना गया है। ऐसा माना जाता है डायबिटीज में व्यायाम करने से कई कॉम्प्लीकेशन्स से भी बचा जा सकता है। इसमें हाय ब्लड प्रेशर, हार्ट डिजीज, नर्व डैमेज और विजन लॉस आदि शामिल है। टाइप 2 डायबिटीज (Type 2 Diabetes) की तरह टाइप 1 डायबिटीज (Type 1 Diabetes) सामान्य नहीं है लेकिन यह गंभीर रोग है। आज हम बात करने वाले हैं टाइप 1 डायबिटीज में व्यायाम (Exercise with Type 1 Diabetes) के बारे में। जानिए टाइप 1 डायबिटीज में व्यायाम (Exercise with Type 1 Diabetes) के महत्व के बारे में। लेकिन, सबसे पहले टाइप 1 डायबिटीज (Type 1 Diabetes) के बारे में थोड़ा जान लेते हैं।

टाइप 1 डायबिटीज क्या है? (Type 1 Diabetes)

टाइप 1 डायबिटीज (Type 1 Diabetes) में आपका शरीर इंसुलिन का उस तरह से रिस्पॉन्ड नहीं करता है जैसे उसे करना चाहिए। टाइप 1 डायबिटीज वो कंडिशन है, जिसमें रोगी का इम्यून सिस्टम पैंक्रियाज में इंसुलिन मेकिंग सेल्स को नष्ट कर देता है। इन्हें बीटा सेल्स (Beta cells) कहा जाता है। इस कंडिशंस का निदान आमतौर पर बच्चों में या कम उम्र के लोगों में होता है। इसलिए इसे जुवेनाइल डायबिटीज (Juvenile diabetes) भी कहा जाता है। यही नहीं, इस स्थिति को सेकेंडरी डायबिटीज भी कहते हैं और यह टाइप 2 डायबिटीज (Type 2 Diabetes) से अलग होती है। टाइप 1 डायबिटीज में व्यायाम (Exercise with Type 1 Diabetes) से पहले इसके लक्षणों के बारे में भी जान लें।

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टाइप 1 डायबिटीज के लक्षण (Type 1 Diabetes Symptoms)

टाइप 1 डायबिटीज (Type 1 Diabetes) के लक्षण आमतौर पर माइल्ड होते हैं और गंभीर नहीं होते। इस बीमारी के सामान्य लक्षण इस प्रकार हो सकते हैं:

  • बहुत अधिक प्यास (Extreme thirst)
  • भूख का बढ़ना (Increased hunger)
  • ड्राय मुंह (Dry mouth)
  • पेट का खराब होना (Upset stomach)
  • उल्टी आना (Vomiting)
  • लगातार यूरिनेशन (Frequent urination)
  • अचानक वजन का कम होना (Unexplained weight loss)
  • थकावट (Fatigue)
  • नजरों का कमजोर होना (Blurry vision)
  • लगातार स्किन, यूरिनरी ट्रैक्ट या वजाइनल इंफेक्शन होना (Frequent infections)
  • मूड में बदलाव (Mood changes)
  • बच्चों में बेड वेटिंग की समस्या (Bedwetting in child)

टाइप 1 डायबिटीज के गंभीर लक्षण इस प्रकार के भी हो सकते हैं:

यह तो थे टाइप 1 डायबिटीज (Type 1 Diabetes) के लक्षण। इसके उपचार के लिए डॉक्टर दवाइयों, इंसुलिन और जीवनशैली में स्वस्थ बदलावों की सलाह देते हैं। इन बदलावों में नियमित व्यायाम भी शामिल है। आइए जानते हैं कि टाइप 1 डायबिटीज में व्यायाम (Exercise with Type 1 Diabetes) क्यों जरूरी हैं?

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टाइप 1 डायबिटीज में व्यायाम क्यों जरूरी हैं? (Importance of Exercise with Type 1 Diabetes)

यह तो हम जानते ही हैं कि नियमित व्यायाम करने से वजन सही रहता है, मूड सुधरता है और नींद अच्छी आती है। इसीलिए, सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (Centers for Disease Control and Prevention) के अनुसार नियमित व्यायाम करना डायबिटीज के रोगियों के लिए लाभदायक होता है। हालांकि, बहुत अधिक शारीरिक एक्टिविटीज आपके ब्लड ग्लूकोज (Blood glucose) को कम कर सकती है। इससे लो ब्लड शुगर लेवल की समस्या हो सकती है, जिसे हायपोग्लाइसीमिया (hypoglycemia) कहा जाता है।

यही नहीं, अधिक व्यायाम करने से भी आपका ब्लड ग्लूकोज (Blood glucose) बढ़ भी सकता है। यदि यह सामान्य स्तर से बढ़ जाता है, तो इसे हायपरग्लेसेमिया (Hyperglycemia) के रूप में जाना जाता है। इन तथ्यों के बावजूद, व्यायाम संपूर्ण स्वास्थ्य को बनाए रखने और टाइप 1 डायबिटीज (Type 1 Diabetes) के मैनेजमेंट को सपोर्ट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसके साथ ही, व्यायाम आपको स्वास्थ्य लक्ष्यों तक पहुंचने में मदद कर सकता है जैसे A1C टार्गेट्स , लो ब्लड प्रेशर और लेस डेली इंसुलिन। टाइप 1 डायबिटीज में व्यायाम (Exercise with Type 1 Diabetes) के लाभ इस प्रकार हैं:

उम्मीद है कि टाइप 1 डायबिटीज में व्यायाम के महत्व के बारे में आप जान गए होंगे। अब जानते हैं टाइप 1 डायबिटीज में व्यायाम (Exercise with Type 1 Diabetes) के उदाहरणों के बारे में।

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टाइप 1 डायबिटीज में व्यायाम के उदाहरण (Exercise with Type 1 Diabetes)

ऐसे कई तरह के व्यायाम हैं, जिन्हें करने से टाइप 1 डायबिटीज (Type 1 Diabetes) में लाभ हो सकता है। इन सब व्यायामों के अपने अलग-अलग प्रभाव और लाभ होते हैं। लेकिन ,इन व्यायामों को करने से पहले आपको डॉक्टर की राय अवश्य लेनी चाहिए। इन्हें करने से पहले, इस दौरान और बाद में ब्लड ग्लूकोज लेवल (Blood glucose level) टेस्ट करना भी जरुरी हैं। आइए जानें टाइप 1 डायबिटीज में व्यायाम (Exercise with Type 1 Diabetes) के उदाहरणों के बारे में:

एरोबिक एक्सरसाइज (Aerobic exercise)

एरोबिक एक्सरसाइज को कार्डियो एक्सरसाइज भी कहा जाता है। इसे उस एक्टिविटी के रूप में परिभाषित किया जाता है, जो आपकी हार्ट रेट और ब्रीदिंग रेट को 10 मिनट से अधिक समय तक बढ़ा देती है। इसके उदाहरण इस प्रकार हैं:

लेकिन, इन व्यायामों के दौरान अपने ग्लूकोमीटर को अपने पास ही रखें, ताकि ब्लड ग्लूकोज (Blood glucose) को मॉनिटर किया जा सके। हाय इंटेंसिटी कार्डियो एक्सरसाइज को करने से पहले अपने डॉक्टर या किसी एक्सपर्ट की सलाह अवश्य लें। उम्मीद है कि टाइप 1 डायबिटीज में व्यायाम (Exercise with Type 1 Diabetes) के बारे में यह जानकारी आपको पसंद आ रही होगी। इसका अगला उदाहरण है स्ट्रेंथ ट्रेनिंग।

टाइप 1 डायबिटीज में व्यायाम

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स्ट्रेंथ ट्रेनिंग (Strength Training)

इसे एनारोबिक एक्सरसाइज के रूप में परिभाषित किया जाता है। स्ट्रेंथ ट्रेनिंग एक्टिविटीज को स्ट्रेंथ बिल्ड करने और लीन मसल्स मास को बढ़ाने के लिए डिजाइन किया जाता है। लेकिन, यह ग्लूकोज लेवल को बढ़ने से भी रोक सकती है। यह एक्टिविटी की इंटेंसिटी पर निर्भर करता है। इसके उदहारण इस प्रकार हैं:

  • फ्री वेट लिफ्टिंग (Lifting free weights)
  • वेट मशीन पर ट्रेनिंग करना (Training on weight machines)
  • इलास्टिक रेजिस्टेंस बैंड्स का इस्तेमाल (Using elastic resistance bands)

वेट लिफ्टिंग के कारण सेशन के कई घंटों बाद तक ब्लड ग्लूकोज लेवल (Blood glucose level) बढ़ा रह सकता है। इसके लिए इंसुलिन करेक्शन (Insulin correction) की जरूरत हो सकती है। हालांकि, यह भी आवश्यक है कि कोई भी इंसुलिन करेक्शन (Insulin correction) सही से हो, क्योंकि ओवर-करेक्शन के परिणामस्वरूप सीवियर नोक्टर्नल हायपोग्लाइसीमिया (Severe nocturnal hypoglycemia) हो सकता है। यह एक गंभीर स्थिति है जिसमें सोते हुए रोगी का ब्लड ग्लूकोज (Blood glucose ) काफी कम हो जाता है

टाइप 1 डायबिटीज में व्यायाम

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फ्लेक्सिबिलिटी ट्रेनिंग (Flexibility Training)

यह भी एनारोबिक एक्सरसाइज (Anaerobic exercise) का एक प्रकार है। यह एक फ्लेक्सिबिलिटी बेस्ड एक्सरसाइज हैं, जिसका फोकस मसल्स स्ट्रेचिंग और कनेक्टिव टिश्यू पर होता है। ताकि, मोबिलिटी को सुधारा और मेंटेन किया जा सके। यह एक्टिविटीज (जैसे योगा के खास प्रकार) बिना हार्ट रेट या ब्रीडिंग रेट को बढाए मसल्स टोन और स्ट्रेंथ को सुधारने में मददगार साबित हो सकती हैं। हालांकि, अधिकतर फ्लेक्सिबिलिटी एक्टिविटीज लो इम्पेक्ट वाली होती हैं। लेकिन, यह ग्लूकोज लेवल को बढ़ा सकती है। ऐसे में टाइप 1 डायबिटीज में व्यायाम (Exercise with Type 1 Diabetes) में से इन एक्सरसाइजेज के दौरान भी मॉनिटरिंग की जरूरत होती है। अब जानते हैं टाइप 1 डायबिटीज में व्यायाम (Exercise with Type 1 Diabetes) करते हुए किन बातों का रखना चाहिए ध्यान?

टाइप 1 डायबिटीज में व्यायाम

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टाइप 1 डायबिटीज में व्यायाम करते हुए बरते कुछ सावधानियां

एक नयी एक्सरसाइज रूटीन शुरू करने से पहले सबसे पहले आपको अपने डॉक्टर या डायबिटीज एक्सपर्ट से बात करनी चाहिए। वो यह निर्धारित करने में आपकी मदद कर सकते हैं कि कौन सा वर्कआउट आपके लिए सुरक्षित है। इसके साथ ही वो आपको इस बारे में भी गाइड कर सकते हैं कि अपने आहार, दवाईयों आदि के साथ कोऑर्डिनेट करते हुए ब्लड शुगर को मेंटेन कैसे रखा जाए? व्यायाम के दौरान या बाद में लो ब्लड शुगर (Low Blood sugar) से बचने के लिए डॉक्टर आपको इन चीजों का ध्यान रखने के लिए कह सकते हैं। यानी, टाइप 1 डायबिटीज में व्यायाम (Exercise with Type 1 Diabetes) करते हुए आपको इन चीजों का ध्यान रखना चाहिए:

  • व्यायाम से पहले, दौरान या व्यायाम के बाद आप जो बोलस (Bolus) या बेसल इंसुलिन (Basal insulin) लेते हैं, उसकी मात्रा कम करें।
  • एक्सरसाइज से पहले, दौरान और बाद में अपने आहार में कार्बोहायड्रेट्स की मात्रा को बढ़ा दें।
  • अपने एरोबिक वर्कआउट में स्प्रिंट या हाय इंटेंसिटी इंटरवेल्स (High-intensity intervals ) को शामिल करें।
  • एरोबिक वर्कआउट से पहले रेजिस्टेंस एक्टिविटीज को पूरा करें।
  • अपने वर्कआउट की टाइमिंग, इंटेंसिटी या ड्यूरेशन को एडजस्ट करें।
  • अगर आपको टाइप 1 डायबिटीज (Type 1 Diabetes) की समस्या है तो आपका किसी ऐसे व्यक्ति के साथ वर्कआउट करना सुरक्षित है, जिसे पता हो कि आपको यह रोग है। ताकि, वो आपमें गंभीर हायपोग्लाइसीमिया (Hypoglycemia) के लक्षणों को पहचान सके और उनका उपचार कर सके। एक स्पोर्ट फ्रेंडली मेडिकल ID ब्रेसलेट भी इसमें आपके लिए मददगार साबित हो सकता है।
  • सोने से दो घंटे पहले ही अपने वर्कआउट को समाप्त कर लें। इससे आप सोते हुए हायपोग्लाइसीमिया (Hypoglycemia) की समस्या से बच सकते हैं। वर्कआउट से पहले और बाद में ब्लड शुगर को चेक करें। अगर आप अधिक समय तक व्यायाम कर रहे हैं तो हर तीस से साठ मिनटों में ब्लड शुगर जांचें।
  • वर्कआउट के बाद फिर से ब्लड शुगर की जांच करें। एक्सरसाइज के बहुत घंटों के बाद भी ब्लड शुगर ड्रॉप हो सकती है

इसमें कोई संदेह नहीं है कि टाइप 1 डायबिटीज में व्यायाम (Exercise with Type 1 Diabetes) करना बेहद लाभदायक है। लेकिन, इस दौरान अपने शरीर को समझना और सुनना भी जरूरी है। अगर व्यायाम करते हुए आपको कोई भी समस्या होती है तो व्यायाम करना बंद कर देना चाहिए और मेडिकल हेल्प लेनी चाहिए। यह तो थी टाइप 1 डायबिटीज में व्यायाम (Exercise with Type 1 Diabetes) के कुछ टिप्स के बारे में जानकारी अब जानते हैं व्यायाम के बाद हाय ब्लड शुगर (High Blood Sugar) और लो ब्लड शुगर (Low blood sugar) के बारे में।

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टाइप 1 डायबिटीज में व्यायाम के बाद हाय ब्लड शुगर

अधिकतर मामलों में, एक्सरसाइज करने से ब्लड शुगर ड्रॉप होती है। लेकिन, कई बार शार्ट या इंटेंस एक्सरसाइज करने से ब्लड शुगर लेवल बढ़ सकता है। ऐसा स्ट्रेस हॉर्मोन्स के कारण होता है जो हाय इंटेंसिटी एक्टिविटी के दौरान रिलीज होते हैं। अगर वर्कआउट से पहले आपका ब्लड शुगर लेवल (Blood sugar level) बहुत अधिक हो, तो वर्कआउट के दौरान और बाद में बार-बार आपने ब्लड शुगर को चेक करें। इसके साथ ही इस बात को भी सुनिश्चित करें कि आप अधिक से अधिक तरल पदार्थों का सेवन करें। ताकि, शरीर में पानी की कमी न हो। डिहायड्रेशन के कारण ब्लड शुगर कंसंट्रेशन बढ़ सकती है।

अगर अभी भी व्यायाम के बाद अपना ब्लड शुगर लेवल हाय है, तो आप रेपिड एक्टिंग इंसुलिन का स्माल बोलस ले सकते हैं, ताकि इसे लो किया जा सके। आप इंसुलिन पंप का प्रयोग भी कर सकते हैं। अगर आपका ब्लड शुगर लेवल रेट 250 मिलीग्राम पर डेसिलिटर (250 milligrams per decilitre) से अधिक हो, तो अपने यूरिन और ब्लड की जांच कीटोन्स के लिए कराएं और डॉक्टर की सलाह लें।

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टाइप 1 डायबिटीज में व्यायाम के बाद लो ब्लड शुगर

टाइप 1 डायबिटीज में व्यायाम (Exercise with Type 1 Diabetes) के दौरान हमारा शरीर एक्टिविटी के फियूल के रूप में ब्लडस्ट्रीम से शुगर को पुल करता है। यह आपकी मांसपेशियों और लिवर में ग्लाइकोजन के रूप में संग्रहित शुगर को भी ड्रॉ करता है। यही कारण है कि वर्कआउट के दौरान ब्लड शुगर लेवल (Blood sugar level) ड्रॉप होने लगता है। अगर किसी का ब्लड शुगर लेवल 70 mg/dL या इससे भी कम हो जाता है, तो उसे लो ब्लड शुगर (Low blood sugar) या हायपोग्लाइसीमिया (Hypoglycemia) कहा जाता है।

इसका उपचार फास्ट एक्टिंग कार्बोहायड्रेट्स युक्त चीजों का सेवन कर के किया जा सकता है जैसे ग्लूकोज टेबलेट, फ्रूट जूस, नॉन डायट सोडा आदि। अगर आपकी ब्लड शुगर वर्कआउट शुरू करने से पहले 100 मिलीग्राम्स पर डेसिलिटर (100 milligrams per deciliter) से लो हो तो व्यायाम शुरू करने से पहले लगभग पंद्रह ग्राम फ़ास्ट एक्टिंग कार्बोहाइड्रेट्स का सेवन कर लें।

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यह तो थी टाइप 1 डायबिटीज में व्यायाम (Exercise with Type 1 Diabetes) के बारे में जानकारी। अपनी संपूर्ण देखभाल और स्वास्थ्य के लिए नियमित रूप से व्यायाम करना जरूरी है। लेकिन, कई बाद व्यायाम आपकी ब्लड शुगर (Blood sugar level) को बहुत कम कर सकता है, जो हायपोग्लाइसीमिया का कारण बन सकता है या किन्हीं स्थितियों में यह ब्लड शुगर लेवल बहुत अधिक भी हो सकता है। ऐसे में टाइप 1 डायबिटीज में व्यायाम (Exercise with Type 1 Diabetes) से पहले डॉक्टर और डायटीशियन से बात करें। आपके डॉक्टर और डायटीशियन आपको सही सलाह दे कर आपका मार्गदर्शन कर सकते हैं।

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सूत्र

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Accessed on 12/11/21

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AnuSharma द्वारा लिखित आखिरी अपडेट कुछ हफ्ते पहले को
Sayali Chaudhari के द्वारा मेडिकली रिव्यूड