Angina Pectoris: छाती में दर्द हो सकती है एंजाइना पेक्टरिस के कारण, जानिए कैसे करें इससे बचाव?

    Angina Pectoris: छाती में दर्द हो सकती है एंजाइना पेक्टरिस के कारण, जानिए कैसे करें इससे बचाव?

    एंजाइना पेक्टरिस (Angina Pectoris) को एंजाइना के नाम से भी जाना जाता है। यह चेस्ट में होने वाली दर्द या डिस्कम्फर्ट है, जो बार-बार हो सकती है। यह समस्या तब होती है जब हार्ट के कुछ भाग को पर्याप्त मात्रा में खून और ऑक्सीजन नहीं मिल पाते हैं। एंजाइना या एंजाइना पेक्टरिस (Angina Pectoris), कोरोनरी आर्टरी डिजीज (Coronary artery disease) का एक लक्षण भी हो सकती है। कोरोनरी आर्टरी डिजीज तब होती है, जब वो आर्टरीज जो हार्ट तक ब्लड ले जाती हैं, नैरो या ब्लॉक हो जाती हैं। यह परेशानी अनस्टेबल प्लाक, नैरो हार्ट वॉल्व के कारण पुअर ब्लड फ्लो, हार्ट मसल्स के कम पम्पिंग फंक्शन के कारण भी हो सकती है। आइए, जानें एंजाइना पेक्टरिस (Angina Pectoris) के बारे में विस्तार से।

    एंजाइना पेक्टरिस क्या है? (Angina Pectoris)

    एंजाइना पेक्टरिस (Angina Pectoris) की समस्या तब होती है, जब हार्ट मसल्स पर्याप्त ऑक्सीजन प्राप्त नहीं कर पाते हैं। जब हम व्यायाम करते हैं या इमोशनल स्ट्रेस का अनुभव करते हैं, तो हमारे हार्ट को अधिक काम करना पड़ता है। कुछ फैक्टर्स जैसे आर्टरीज का तंग होने से हार्ट को सही ऑक्सीजन नहीं मिल जाती हैं। प्लाक के कारण आर्टरीज ब्लॉक हो जाती हैं। ब्लड क्लॉट्स के कारण भी आर्टरीज ब्लॉक हो सकती हैं और हार्ट से ऑक्सीजन-रिच ब्लड का फ्लो कम हो सकता है।

    नेशनल हार्ट लंग एंड ब्लड इंस्टिट्यूट (National heart lung and blood Institute) के अनुसार इस समस्या से पीड़ित अधिकतर लोग चेस्ट पेन और प्रेशर का अनुभव करते हैं या वो छाती में स्क्वीजिंग सेंसेशन का अनुभव भी कर सकते हैं।यह सेंसेशंस कुछ मिनट्स तक रह सकती हैं या उसके बाद ठीक हो सकती हैं। इस रोग के लक्षण सीढ़ियां चढ़ते हुए, व्यायाम करते हुए या स्ट्रेस का अनुभव होने पर बदतर हो जाते हैं। जबकि, इसके लक्षण तब सुधर सकते हैं, जब आप व्यायाम करना बंद कर देते हैं या स्ट्रेस को मैनेज करने के लिए उपाय करते हैं। अब जानते हैं इसके लक्षणों के बारे में विस्तार से।

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    एंजाइना पेक्टरिस के लक्षण क्या हैं? (Symptoms of Angina Pectoris)

    एंजाइना पेक्टरिस (Angina Pectoris) की समस्या बेहद सामान्य है। हालांकि, यह समस्या किसी को भी हो सकती है। लेकिन, 45 की अधिक उम्र के पुरुषों और 55 से अधिक उम्र की महिलाओं में इस रोग की संभावना अधिक होती है। इसका सबसे सामान्य लक्षण है चेस्ट पेन, लेकिन यह रोग लोगों को अलग-अलग तरह से प्रभावित करता है। इसके कुछ लक्षण इस प्रकार हैं:

    • चेस्ट पेन (Chest pain)
    • छाती में जलन (Burning)
    • चेस्ट डिस्कंफर्ट (Discomfort)
    • चक्कर आना (Dizziness
    • थकावट (Fatigue)
    • छाती में फुलनेस महसूस होना (Feeling of fullness in Chest)
    • हैवीनेस और प्रेशर का अनुभव होना (Feeling of heaviness or pressure)
    • पेट का खराब होना या उल्टी आना (Upset stomach or vomiting)
    • सांस लेने में समस्या (Shortness of breath)
    • स्क्वीजिंग (Squeezing)
    • पसीना आना (Sweating)

    इसके लक्षणों को अधिकतर लोग हार्टबर्न या गैस के कारण होने वाली दर्द या बर्निंग के साथ कंफ्यूज किया जा सकता है। हालांकि, एंजाइना पेक्टरिस (Angina Pectoris) में होने वाली दर्द अक्सर रेस्ट करके बेहतर हो जाती है।

    एंजाइना पेक्टरिस

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    एंजाइना पेक्टरिस के रिस्क फैक्टर (Risk factors of Angina Pectoris)

    कुछ चीजों से इस समस्या का रिस्क बढ़ सकता है। यह रिस्क फैक्टर इस प्रकार हैं:

    • वजन का अधिक होना (Overweight)
    • हार्ट डिजीज की हिस्ट्री होना (History of heart disease)
    • हाय कोलेस्ट्रॉल या हाय ब्लड प्रेशर होना (High cholesterol or high blood pressure)
    • डायबिटीज होना (Having diabetes)
    • स्मोकिंग (Smoking)
    • एक्सरसाइज न करना (Not exercising)

    अधिक आहार का सेवन, कुछ फिजिकल वर्कऑउट्स और बहुत अधिक हॉट या कोल्ड वेदर के कारण भी इस रोग का रिस्क फैक्टर बढ़ सकता है। अब जानते हैं कि इसका निदान कैसे किया जा सकता है?

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    एंजाइना पेक्टरिस का निदान कैसे संभव है? (Diagnosis of Angina Pectoris)

    एंजाइना पेक्टरिस (Angina Pectoris) के निदान के लिए डॉक्टर सबसे पहले रोगी से उसकी मेडिकल हिस्ट्री के बारे में जानेंगे और उसको मेडिकल जांच करेंगे। रोगी में नजर आने वाले लक्षणों से इस समस्या का निदान किया जा सकता है। इसके अलावा इसके निदान के लिए कुछ टेस्ट्स के लिए भी कहा जा सकता है, जैसे:

    इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (Electrocardiogram)

    इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम को (ECG) भी कहा जाता है। इससे हार्ट की इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी को रिकॉर्ड किया जा सकता है। जिससे एब्नार्मल रिदम (Abnormal Rhythm) और हार्ट मसल डैमेज (Heart muscle damage) को डिटेक्ट किया जा सकता है।

    स्ट्रेस टेस्ट (Stress test)

    स्ट्रेस टेस्ट Stress test को ट्रेडमिल और एक्सरसाइज ECG भी कहा जाता है। इसमें रोगी को स्ट्रेस (जैसे एक्सरसाइज) में रखा जाता है और उसकी हार्ट की फंक्शन की क्षमता को मॉनिटर किया जाता है। । इसके साथ ही ब्रीदिंग और ब्लड प्रेशर रेट को भी मॉनिटर किया जाता है। कोरोनरी आर्टरी डिजीज को डिटेक्ट करने के लिए भी यह टेस्ट किया जा सकता है।

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    कार्डिएक कैथेटेराइजेशन (Cardiac catheterization)

    इस प्रोसीजर में कोरोनरी आर्टरीज में एक वायर को पास किया जाता है। इसके बाद आर्टरी में एक कंट्रास्ट एजेंट को इंजेक्ट किया जाता है। किसी खास आर्टरीज की अब्नॉर्मोलिटीज, ब्लॉकेज और तंग होनी की समस्या को एक्स-रेज के माध्यम से डिटेक्ट किया जा सकता है।

    कार्डियक मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग (Cardiac Magnetic resonance imaging)

    इस टेस्ट से हार्ट मसल्स तक ब्लड फ्लो की मात्रा को डिटेक्ट किया जा सकता है।

    कोरोनरी कंप्यूटेड टोमोग्राफी स्कैन (Coronary CT scan)

    कोरोनरी CT स्कैन से हार्ट के ब्लड वेसल्स के अंदर कैल्शियम और प्लाक की मात्रा को जाना जा सकता है। यह तो थे एंजाइना पेक्टरिस (Angina Pectoris) के लिए कुछ टेस्ट्स। अब जान लेते हैं कि इसका उपचार कैसे संभव है?

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    एंजाइना पेक्टरिस का उपचार कैसे किया जा सकता है? (Treatment of Angina Pectoris)

    डॉक्टर उन हार्ट कंडिशंस का उपचार करेंगे, जिससे रोगी को एंजाइना से राहत मिल सके। रोगी को कोरोनरी एंजियोप्लास्टी (Coronary angioplasty) और स्टेंटिंग (Stenting) या कोरोनरी आर्टरी बायपास ग्राफ्टिंग (Coronary artery bypass grafting) सर्जरी की जरूरत हो सकती है। ताकि, हार्ट तक ब्लड फ्लो इम्प्रूव हो सके। कई लोगों को केवल दवाईयों से ही इस समस्या से राहत मिल जाती है। इस समस्या का उपचार रोगी के लक्षणों और टेस्टिंग के परिणामों पर निर्भर करता है। ट्रीटमेंट के साथ भी कुछ लोगों को एंजाइना की समस्या हो सकती है। आपके डॉक्टर जब आपको दर्द हो, आपके ब्लड वेसल्स को खोलने के लिए भी कुछ दवाइयों की सलाह दे सकते हैं। नाइट्रोग्लिसरीन ड्रग्स (Nitroglycerin drugs) सबसे सामान्य एंजाइना मेडिकेशन है। इसकी अन्य दवाईयां इस प्रकार हैं:

    यह तो थी एंजाइना पेक्टरिस (Angina Pectoris) के उपचारों के बारे में जानकारी। एंजाइना का कारण बनने वाली यह कंडिशंस से बचाव संभव है। इससे बचाव कैसे किया जा सकता है, जानिए।

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    एंजाइना पेक्टरिस से बचाव कैसे हो सकता है? (Prevention of Angina Pectoris)

    एंजाइना का कारण बनने वाली कई कंडिशंस से बचाव संभव है। बेहतर हार्ट हेल्थ के लिए आप इन तरीकों को अपना सकते हैं:

    • हार्ट की देखभाल के लिए रोजाना कुछ मिनटों के लिए व्यायाम या फिजिकल एक्टिविटी करना आवश्यक है। इसके लिए आप डॉक्टर की सलाह भी ले सकते हैं।
    • हार्ट-हेल्दी डायट का सेवन अवश्य करें।
    • स्ट्रेस जैसी मेडिटेशन को मैनेज करने के लिए हेल्दी तरीकों को अपनाएं। जैसे मेडिटेशन, योगा आदि।
    • वजन को सही बनाएं रखें। अगर आपका वजन अधिक है तो उसे कम करने के उपायों के लिए डॉक्टर से बात करें।
    • हाय ब्लड प्रेशर, हाय कोलेस्ट्रॉल और डायबिटीज को मैनेज करें।
    • स्मोकिंग से बचें। स्मोकिंग को हार्ट के लिए रिस्क फैक्टर माना जाता है।

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    उम्मीद है कि एंजाइना पेक्टरिस (Angina Pectoris) के बारे में यह जानकारी आपको अवश्य पसंद आई होगी। अगर आपको कोई हार्ट डिजीज है, जो एंजाइना का कारण बन सकती है, तो इस कंडिशन को मैनेज करने के लिए डॉक्टर की सलाह का पालन करें। अगर आपको इसके बाद भी चेस्ट पेन होती है, तो मेडिकल हेल्प अवश्य लें। ट्रीटमेंट से भी इस समस्या से राहत मिल सकती है। अगर आपके मन में एंजाइना पेक्टरिस (Angina Pectoris) के बारे में कोई भी सवाल है तो अपने डॉक्टर से इस बारे में अवश्य पूछें।

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    AnuSharma द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 27/12/2021 को
    Sayali Chaudhari के द्वारा मेडिकली रिव्यूड