चिंता VS डिप्रेशन : इन तरीकों से इसके बीच के अंतर को समझें

By Medically reviewed by Dr. Hemakshi J

आजकल हर दूसरा इंसान चिंताओं से घिरा रहता है। लोग दिन रात-काम के साथ-साथ कई तरह की मानसिक लड़ाइयां अपने भीतर ही भीतर लड़ रहे हैं। इसके अलावा, काफी लोग तो डिप्रेशन के भी शिकार है। लेकिन, कुछ लोगों को चिंता और डिप्रेशन में फर्क नहीं पता होता। इसलिए, आज इस लेख में हम आपको चिंता और अवसाद को समझने के कुछ टिप्स देंगे। ये टिप्स आपको अपनी लाइफ को बैलेंस और रिलैक्स करने में मदद कर सकते हैं।

चिंता क्या है?

यह कोई बीमारी नहीं है। यह एक भावना है, जिसमें आप खुद को मानसिक और भावनात्मक रूप से बहुत ही दबा हुआ महसूस करते हैं, जो किसी भी स्थितियों या कारणों की वजह से हो सकता है। आजकल की रोजमर्रा लाइफ में तनाव, टेंशन, चिंता, फ्रिक जैसें शब्द आम हो गए हैं क्योंकि, आजकल हर कोई इन समस्याओं से घिरा हुआ खुद को पाता है।

डिप्रेशन क्या है?

यह एक ऐसा तनाव है, जिससे व्यक्ति लंबे समय से ग्रस्त होता है। इसमें व्यक्ति खुद को बहुत ही डिप्रेस्ड और दबा हुआ महसूस करता है। यह किसी भी पूर्व समय में घटित घटनाओं की वजह से होता है। चिंता और अवसाद (डिप्रेशन) दोनों ही मानसिक पीड़ा है और इनके लक्षण भी लगभग एक जैसे होते हैं। हालांकि, यह दोनों ही एक दूसरे से बहुत अलग हैं। हम यहां इनके बीच कुछ अंतर देखेंगे।

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चिंता और डिप्रेशन में अंतर क्या है?

  • चिंता या तनाव आपके जीवन में चल रहे वर्तमान कारणों से संबंधित होती हैं लेकिन, डिप्रेशन किसी भी ऐसे कारण से हो सकती है, जो पूर्व समय में घटित हुआ हो।
  • चिंता कुछ समय में ठीक हो सकती है लेकिन, डिप्रेशन बहुत ही लंबे समय तक रहता है, जैसे कि एक साल या उससे भी ज्यादा।
  • यदि चिंता का इलाज नहीं किया जाता, तो व्यक्ति तनावग्रस्त और चिंता विकार जैसी दिक्कतों का सामना करता है। लेकिन, यदि डिप्रेशन का इलाज नहीं किया गया, तो व्यक्ति के भीतर खुद को हानि पहुंचाने जैसे विचार लाता है।
  • चिंता या तनाव के कारण एड्रेनालाइन का स्तर बढ़ जाता है लेकिन, अवसाद या डिप्रेशन में मस्तिष्क में थकान बढ़ जाती है।
  • चिंता यदि कम हो, तो वो लाभदायक भी साबित हो सकती है लेकिन, डिप्रेशन से सिर्फ नुकसान ही होता है।
  • चिंता के कारण स्पष्ट होते हैं लेकिन, अवसाद का कोई भी कारण हो सकता है।
  • चिंता को समाज सहज नजरिए से देखता है लेकिन, डिप्रेशन को आज भी सामाजिक रूप से अपमानजनक माना जाता है।

चिंता और डिप्रेशन दोनों के ही उचित उपाय के लिए इनके बीच का अंतर मालूम होना आवश्यक हैं। अपने रोजमर्रा के कामों को लेकर जीवन में थोड़ी-बहुत चिंता, एंजायटी हर इंसान को होती है। लेकिन, यदि कोई व्यक्ति अधिक चिंतित रहने लगे और हर छोटी बात पर गहनता से विचार करें, जिससे तनाव होने लगे, तो यह सोच का विषय है।

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रिव्यू की तारीख सितम्बर 10, 2019 | आखिरी बार संशोधित किया गया सितम्बर 11, 2019

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