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प्रीकॉर्डियल कैच सिंड्रोम : आपका खराब पोस्चर बन सकता है इस सिंड्रोम की वजह!

प्रीकॉर्डियल कैच सिंड्रोम : आपका खराब पोस्चर बन सकता है इस सिंड्रोम की वजह!

क्या आपने भी कभी अपनी पसलियों में एक ऐसा तेज दर्द महसूस किया है, जो आपके सांस लेने पर बदतर हो गया हो लेकिन कुछ ही देर में यह दर्द एकदम से गायब हो गया हो? चेस्ट पेन को अक्सर हार्ट प्रॉब्लम्स (Heart Problems) के साथ जोड़ा जाता है। लेकिन, ऐसा भी हो सकता है कि इस दर्द के पीछे कोई और कारण हो! इस दर्द का एक कारण हो सकता है प्रीकॉर्डियल कैच सिंड्रोम (Precordial Catch Syndrome)। हो सकता है कि आपने इस सिंड्रोम का नाम भी न सुना हो क्योंकि यह एक दुर्लभ समस्या है। आज हम इस सिंड्रोम के बारे में बात करने वाले हैं, जो अधिकतर बच्चों और बीस साल तक के युवाओं में देखा जाता है। जानिए प्रीकॉर्डियल कैच सिंड्रोम (Precordial Catch Syndrome) क्या है और किस तरह से किया जाता है इस समस्या का उपचार?

प्रीकॉर्डियल कैच सिंड्रोम (Precordial Catch Syndrome) क्या है?

प्रीकॉर्डियल कैच सिंड्रोम (Precordial Catch Syndrome) छाती में होने वाला दर्द है। यह तब होता है जब छाती से सामने वाली नर्व दब जाती हैं या उनमें कोई खराबी आ जाती है। प्रीकॉर्डियल का अर्थ होता है “दिल के सामने”। यानी, इस रोग के दौरान रोगी इसी जगह पर दर्द महसूस करता है। इस समस्या को टक्सिडोर’स ट्वीटच (Texidor’s Twitch) भी कहा जाता है। यह कोई मेडिकल इमरजेंसी नहीं है और इससे पीड़ित व्यक्ति के हेल्थ को कोई नुकसान भी नहीं होता है। लेकिन, यह समस्या दर्द भरी होती है, जिसमें कुछ ही देर में यह छाती में दर्द खुद ही ठीक हो जाती है। हालांकि इससे कोई नुकसान नहीं होता है, लेकिन फिर भी इस दर्द को हल्के में नहीं लेना चाहिए। क्योंकि छाती में दर्द कई अन्य हार्ट समस्याओं के कारण भी होती है।

प्रीकॉर्डियल कैच सिंड्रोम (Precordial Catch Syndrome) या टक्सिडोर’स ट्वीटच (Texidor’s Twitch) की खास बात यह भी है कि इसका अनुभव आमतौर पर हेल्दी बच्चे और किशोर अनुभव करते हैं। अब जानते हैं इसके लक्षणों के बारे में।

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प्रीकॉर्डियल कैच सिंड्रोम के लक्षण (Symptoms of Precordial Catch Syndrome)

अधिकतर मामलों में प्रीकॉर्डियल कैच सिंड्रोम (Precordial Catch Syndrome) के कारण होने वाली दर्द कुछ ही मिनट्स में ठीक हो जाती है। यह दर्द एकदम होती है खासतौर पर जब पीड़ित व्यक्ति आराम कर रहा होता है। इस दौरान होने वाली बेचैनी को तेज दर्द के रूप में परिभाषित किया जा सकता है। यह दर्द छाती के एक बहुत ही खास हिस्से में होता है, आमतौर पर छाती के लेफ्ट भाग में। जब मरीज सांस लेता है तो यह दर्द बदतर हो जाती है। प्रीकॉर्डियल कैच सिंड्रोम (Precordial Catch Syndrome) का दर्द जैसे अचानक से महसूस होता है, वैसे ही अचानक से गायब हो जाता है और बहुत कम समय तक रहता है।

इसके कोई भी लक्षण नहीं है और न ही इससे जुड़ी कोई जटिलताएं हैं। इस दर्द का मरीज के आहार से कुछ लेना देना नहीं होता। ऐसा भी माना गया है कि इस बीमारी के दौरान होने वाली दर्द कुछ सेकंड्स से लेकर दो या तीन मिनट्स तक रह सकती है। यही नहीं, यह परेशानी दिन में एक या कई बार हो सकती है। यह दर्द छाती में अन्य भागों तक नहीं फैलती है, जैसा ही हार्ट अटैक आने पर होने वाले दर्द के साथ होता है। इस दर्द की गंभीरता हर व्यक्ति के अनुसार अलग हो सकती है। कुछ लोग धीमे लेकिन परेशान करने वाली छाती में दर्द का अनुभव कर सकते हैं। जबकि कुछ लोगों को इतनी तेज दर्द अनुभव होती है कि उस समय उन्हें दिखना बंद हो जाता है यह धुंधला दिखाई देता है।

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प्रीकॉर्डियल कैच सिंड्रोम (Precordial Catch Syndrome) में न तो कोई अन्य लक्षण महसूस होता है और न ही शरीर में कोई बदलाव आता है। हालांकि, कुछ मरीज चक्कर आना और बेहोशी सी महसूस कर सकते हैं और उन्हें सांस लेने में भी समस्या होती है। लेकिन, उनकी पल्स रेट और रिदम सामान्य रहती है। अगर आपको छाती में दर्द के साथ कुछ अन्य लक्षण भी नजर आते हैं, तो यह किसी अन्य हार्ट प्रॉब्लम (Heart Problem) के लक्षण हो सकते हैं। अब जान लेते हैं इससे जुड़ी जटिलताओं के बारे में।

प्रीकॉर्डियल कैच सिंड्रोम (Precordial Catch Syndrome) से जुड़ी जटिलताएं कौन सी हैं?

प्रीकॉर्डियल कैच सिंड्रोम (Precordial Catch Syndrome) के कारण होने वाली छाती में दर्द (Chest pain) से सांस लेने में समस्या होती है, जिससे चक्कर आ सकते हैं। इस तरह का दर्द होने से मरीज घबरा सकता है और ऐसा सोच सकता है कि यह किसी गंभीर कार्डिएक कंडिशन जैसे हार्ट अटैक (Heart Attack) का संकेत है। अगर ऐसा है तो तुरंत डॉक्टर से बात करें ताकि सही समस्या का निदान हो सके।

नैशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन (National Center for Biotechnology Information) के अनुसार प्रीकॉर्डियल कैच सिंड्रोम (Precordial Catch Syndrome) टीनएजर्स और यंग एडल्ट्स में होना सामान्य है। लेकिन, 6 साल की उम्र के छोटे बच्चे भी इसका अनुभव कर सकते हैं। दुर्लभ मामलों में वयस्कों को भी यह समस्या हो सकती है। अब जानिए क्या हैं इस समस्या के कारण?

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प्रीकॉर्डियल कैच सिंड्रोम के कारण (Causes of Precordial Catch Syndrome)

प्रीकॉर्डियल कैच सिंड्रोम (Precordial Catch Syndrome) के सही कारणों की जानकारी नहीं है। न ही इस बारे में जानकारी है कि इस रोग को कौन सी चीजें बदतर बना सकती हैं। लेकिन, डॉक्टर्स के अनुसार यह समस्या हार्ट या लंग प्रॉब्लम के कारण नहीं होती। लेकिन कुछ डॉक्टर्स यह मानते हैं कि यह दर्द शायद लंग की लायनिंग की नर्व्स में समस्या के कारण होती है। हालांकि, चेस्ट वॉल में पसलियों या कार्टिलेज से दर्द भी इसके लिए जिम्मेदार हो सकता है। इन नर्वज को नुकसान किसी भी चीज से हो सकता है जैसे पुअर पोस्चर (Poor Posture) और कोई इंजरी (Injury) आदि। यह तो थे इस सिंड्रोम के कारण, अब जानिए कैसे संभव है इसका निदान?

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प्रीकॉर्डियल कैच सिंड्रोम का निदान (Diagnosis of Precordial Catch Syndrome)

प्रीकॉर्डियल कैच सिंड्रोम (Precordial Catch Syndrome) के निदान के लिए डॉक्टर रोगी से लक्षणों के बारे में जानेंगे। इसके साथ ही उसकी मेडिकल हिस्ट्री (Medical History) के बारे में जाना जाएगा। रोगी की शारीरिक जांच भी की जा सकती है। शारीरिक जांच में वो रोगी के हार्ट और लंग को स्टेथोस्कोप की मदद से सुनेंगे। इसके बाद जब वो पूरी तरह से निश्चित हो जाते हैं कि यह लक्षण किसी अन्य हेल्थ कंडिशन या समस्या के नहीं हैं, तो वो आपको कोई भी टेस्ट कराने के लिए नहीं कहेंगे। क्योंकि, प्रीकॉर्डियल कैच सिंड्रोम (Precordial Catch Syndrome) से रोगी को कोई नुकसान नहीं होता है और यह बहुत सामान्य है।

ऐसे में, अधिकतर मामलों में डॉक्टर को इसके निदान के लिए कोई टेस्ट नहीं कराना पड़ता। लेकिन, अगर उन्हें लगता है कि आपको कोई अन्य परेशानी है, तो आपको एक्स रे (X-Ray) या अल्ट्रासाउंड (Ultrasound) कराने की जरूरत हो सकती है। रोगी की स्थिति और रोग के अनुसार कुछ अन्य टेस्ट्स की सलाह भी दी जा सकती है। इस सिंड्रोम का उपचार इस तरह से किया जा सकता है।

प्रीकॉर्डियल कैच सिंड्रोम (Precordial Catch Syndrome)

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प्रीकॉर्डियल कैच सिंड्रोम का उपचार (Treatment of Precordial Catch Syndrome)

प्रीकॉर्डियल कैच सिंड्रोम (Precordial Catch Syndrome) में होने वाली दर्द खुद ही ठीक हो जाती है तो आमतौर पर किसी भी उपचार की जरूरत नहीं होती। लेकिन, डॉक्टर इस छाती में दर्द से आराम पाने के लिए आपको ओवर-द-काउंटर एंटी-इंफ्लेमेटरी (Over-the-counter Anti-Inflammatory) दवाईयां दे सकते हैं। कुछ लोग इतनी गंभीर दर्द को महसूस करते हैं कि उन्हें सांस लेने में समस्या होती है। यही नहीं, अगर रोगी गहरी सांस लेता है तो यह दर्द बदतर होती जाती है। ऐसे में स्ट्रेचेस और पोस्चर में बदलाव से रोगी को बेहतर महसूस हो सकता है। इसके साथ ही आराम करने से और धीमे-धीमे सांस लेने से भी आप रिलैक्स महसूस करेंगे।

ऐसा माना जाता है कि रोगी का पोस्चर भी इस दर्द के लिए जिम्मेमदार हो सकता है। ऐसे में रोगी को अपने पोस्चर का खास ध्यान रखने की सलाह दी जाती है खासतौर पर जब वो बैठते, लेटते और खड़े होते हैं तो उस समय। ऐसा भी कहा गया है कि पोस्चर को सुधारने से इस समस्या की फ्रीक्वेंसी और गंभीरता से भी छुटकारा मिलता है।

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क्या प्रीकॉर्डियल कैच सिंड्रोम से बचाव संभव है? (Treatment of Precordial Catch Syndrome)

यह तो थी प्रीकॉर्डियल कैच सिंड्रोम (Precordial Catch Syndrome) के बारे में पूरी जानकारी। लेकिन अब सवाल यह है कि क्या इस समस्या से बचा जा सकता है? अगर इस बीमारी का कारण ग्रोथ स्पर्ट (Growth spurt) है, तो इससे बचा नहीं जा सकता। अगर यह समस्या अन्य कारणों जैसे जैसे छाती में चोट लगने की वजह से हुई है, तो इससे बचा जा सकता है। बैड पोस्चर (Bad Posture) भी यह समस्या होने का मुख्य कारण माना जाता है। इसे भी नजरअंदाज किया जा सकता है। बस इसके लिए आपको अपने पोस्चर पर ध्यान देना है। इससे प्रीकॉर्डियल कैच सिंड्रोम (Precordial Catch Syndrome) के भविष्य में होने वाले एपिसोड्स से भी बचा जा सकता है।

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उम्मीद है कि आपको प्रीकॉर्डियल कैच सिंड्रोम (Precordial Catch Syndrome) के बारे में सही जानकारी मिल चुकी होगी। इस सिंड्रोम के बारे में जुड़े तथ्य यह हैं कि यह समस्या बच्चों और किशोरों को प्रभावित करती है। इसके पेनफुल एपिसोड्स कम फ्रीक्वेंट होते हैं, लेकिन यह बैचैन करने वाले हो सकते हैं। इस समस्या से कोई नुकसान नहीं होता है और न ही इसके लिए किसी खास उपचार की जरूरत होती है। लेकिन, अगर इस छाती में दर्द के साथ आपको अन्य लक्षण भी नजर आते हैं तो अपने डॉक्टर से सम्पर्क करें। कई बार कुछ लोग किसी अन्य हार्ट कंडिशन (Heart Condition) को भी प्रीकॉर्डियल कैच सिंड्रोम (Precordial Catch Syndrome) मान लेते हैं लेकिन, ऐसी गलती न करें। ऐसा करना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।

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चेस्ट पेन को हमेशा गंभीर समस्या मानें। अगर आपको कोई अन्य समस्या भी हो रही है जैसे उल्टी, सिरदर्द, सांस फूलना, बेहोशी आदि और यह दर्द ठीक न हो रही है तो तुरंत मेडिकल हेल्प लें। ताकि जाना जा सके कि यह किसी अन्य हार्ट कंडिशन का संकेत तो नहीं है। इसके साथ ही अगर आप सम्पूर्ण रूप से स्वस्थ रहना चाहते हैं तो हेल्दी आदतों को अपनाएं। सही आहार के साथ ही नियमित व्यायाम करें। सही व्यायाम से आपको अपना पोस्चर सुधारने में भी मदद मिलेगी। इसके साथ ही तनाव से बचें, पर्याप्त नींद लें और एल्कोहॉल का सेवन न करें। प्रीकॉर्डियल कैच सिंड्रोम (Precordial Catch Syndrome) के बारे में अधिक जानकारी के लिए आप अपने डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं।

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

सूत्र

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AnuSharma द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 29/07/2021 को
डॉ. हेमाक्षी जत्तानी के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
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