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बच्चों में कॉपर डिफिशिएंसी बन सकती है हार्ट प्रॉब्लम की वजह, हो जाएं अलर्ट!

बच्चों में कॉपर डिफिशिएंसी बन सकती है हार्ट प्रॉब्लम की वजह, हो जाएं अलर्ट!

बच्चों के अच्छे शारीरिक और मानसिक विकास के लिए अधिकतर पेरेंट्स उनके डायट में विटामिन, प्रोटीन और कैल्शियम जैसे पोषक तत्वों का तो ध्यान रखते हैं, लेकिन कॉपर की तरफ उनका ध्यान कम जाता है। पर सभी मिनरल्स की तरह कॉपर भी शरीर के लिए बहुत जरूरी है। कॉपर (copper) शरीर के लिए एक आवश्यक पोषक तत्व है। बच्चों में कॉपर डिफिशिएंसी (Copper deficiency in children) भी सभी मिनरल की तरह जरूरी है। इसकी कमी होने पर बच्चे के विकास में तो रूकावट हो ही सकती है, साथ में कई हेल्थ प्रॉब्ल्म भी खड़ी हो सकती है, जैसे कि किडनी डैमेज, एनीमिया और सिर दर्द की समस्या आदि। यह हड्डियों, रक्त वाहिकाओं, नसों और प्रतिरक्षा प्रणाली को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करता है और आयरन के अवशोषण में भी योगदान देता है। तो जानिए यहां बच्चों में कॉपर डिफिशिएंसी (Copper deficiency in children) होने पर क्या करें? जानें बच्चों के लिए हेल्दी मिनरल्स में कॉपर को डायट में शामिल करने वाले फूड्स भी।

और पढ़ें: Copper: कॉपर क्या है? जानिए इसके उपयोग, साइड इफेक्ट्स और सावधानियां

कॉपर डिफिशिएंसी (Copper) क्या है ?

कॉपर, एक मिनरल है, जोकि शरीर के लिए बहुत जरूरी है। यह कई प्रकार के खाद्य पदार्थों में पाया जाता है, मुख्य रूप में मांस, सी फूड्स, नट्स, सीड्स और अनाज आदि में। हमारे शरीर में कॉपर लिवर (liver), मस्तिष्क (Brain), दिल (heart), किडनी (Kidney), हड्डियों (Bone) और मांसपेशियों (Muscles) में संचित रहता है। कॉपर, शरीर के सभी ऊतकों में पाया जाता है, जोकि लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में मददगार है। इसके अलावा, शरीर में कॉपर का स्तर लिवर और ब्रेन में सबसे ज्यादा होता है। इसी वजह से प्रेग्नेंसी के दौरान कॉपर का लेवल सबसे ज्यादा होता है। बच्चे के शरीर में लगातार इसकी कमी, उनके हार्ट हेल्थ के लिए अच्छी नहीं होती है। शरीर में लगातार आयरन की कमी से विल्सन रोग (Wilson disease) होने का खतरा बढ़ जाता है। पोषक तत्व में कॉपर का भी सेवन शरीर के लिए बहुत जरूरी है। शरीर में कॉपर कुछ प्रकार के एनीमिया के इलाज में भी मददगार है। कॉपर हीमोग्लोबिन बनाने में मदद करता है। लाल रक्त कोशिकाओं के निमार्ण में इसकी आवश्यकता होती है।

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कॉपर का शरीर में कार्य (Copper role in body)?

बच्चों में कॉपर डिफिशिएंसी न होने दें, क्योंकि कॉपर का हमारी बॉडी फंक्शन में महत्वपूर्ण भूमिका होती है, जिनमें शामिल हैं:

  • लाल रक्त कोशिकाओं का उत्पादन (Red Blood Cells)
  • हृदय गति (Heart Beat) और रक्तचाप का विनियमन
  • आयरन का अवशोषण (Iron Absorbed)
  • प्रोस्टेटाइटिस की रोकथाम (Prevention of prostatitis)
  • प्रोस्टेट(Prostate) में होने वाली सूजन का कम करना
  • हड्डी, ऊतक और मस्तिष्क का विकास
  • प्रतिरक्षा प्रणाली (Immunity) को एक्टिव रखना

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बच्चों में कॉपर डिफिशिएंसी के लक्षण (Symptoms of Copper deficiency in children)

कई बार बच्चें में डॉक्टरों के लिए भी कॉपर डिफिशिएंसी का निदान करना मुश्किल हो सकता है क्योंकि लक्षण कई अन्य मिनरल और विटामिन डिफिशिएंसी के तरह भी हो सकते हैं। उदाहरण के लिए, कॉपर की कमी से जुड़े लक्षण विटामिन बी-12 की कमी के लक्षण जैसे हैं। बच्चे में काॅपर डिफिशिएंसी के कुछ लक्षण इस प्रकार नजर आ सकते हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • हमेशा ठंड लगना (Cold)
  • अधिक फ्रैक्चर होना (Fractured)
  • थकान (Fatigue)
  • बार-बार बीमार होना
  • त्वचा की रंग पीला हो जाना (Yellow Skin)
  • बच्चे का उसकी उम्र के अनुसार विकास न होना
  • त्वचा में सूजन (Skin inflammation)
  • त्वचा में घाव
  • मांसपेशियों में दर्द आदि।

और पढ़ें:मानसिक थकान (Mental Fatigue) है हानिकारक, जानिए इसके लक्षण और उपाय

कॉपर की कमी के कारण होने वाली समस्याएं (Causes of Copper deficiency)

बच्चों में कॉपर डिफिशिएंसी के कारण उनका शारीरिक विकास रूकने के साथ, उनमें कई हेल्थ प्रॉब्लम का भी रिस्क बढ़ जाता है, जिनमें शामिल हैं:

हार्ट से संबंधित प्रॉब्लम का रिस्क बढ़ जाता है

इनके अलावा और भी कई तरह की हेल्थ प्रॉब्लम हो सकती है। ऊपर दिए गए लक्षण, यदि आपमें में महसूस होते हैं, तो आपको बच्चे को तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए। कॉपर की कमी से सफेद रक्त की मात्रा कम हो सकती है। इससे आपमें संक्रमण होने की संभावना भी बढ़ सकती है।।कॉपर मेलेनिन संश्लेषण में एक भूमिका निभाता है। कॉपर की कमी से आपकी त्वचा और ऊतकों में समस्या पैदा कर सकती है।

और पढ़ें: Anemia: रक्ताल्पता (एनीमिया) क्या है? जानें इसके कारण, लक्षण और उपाय

बच्चे की उम्र के अनुसार कॉपर की सही मात्रा (Copper Value according to child age)

अभी आपने यह जाना कि बच्चे के लिए काॅपर लेना कितना जरूरी है, लेकिन अधिकतर पेरेंट्स को यह नहीं पता होता है कि रोज बच्चे को किस मात्रा में कॉपर देना चाहिए। ताे आइए जानें यहां कि बच्चे की उम्र के अनुसार उन्हें कितना कॉपर दें। कॉपर को माइक्रोग्राम (एमसीजी) में मापा जाता है।

  • शिशु 6 से 12 महीने के बच्चे के लिए 220 एमसीजी
  • 1 से 3 साल के बच्चे को 340 एमसीजी
  • 4 से 8 साल के बच्चे के लिए 440 एमसीजी
  • 9 से 13 साल के बच्चे के 700 एमसीजी
  • किशोर 14 से 18 वर्ष के 890 एमसीजी
  • वयस्क 19 वर्ष और उससे अधिक के लिए 900 एमसीजी

और पढ़ें: क्या आप जानते हैं कि कुछ हेल्थ कंडीशंस बन सकती हैं पैथोलॉजिक फ्रैक्चर की वजह!

काॅपर के फायदे (Benefits of copper)

बच्चों में कॉपर डिफिशिएंसी उनके हेल्थ पर भारी न पड़ जाए, इसलिए बच्चों में डायट में नियमित रूप से कॉपर को शामिल करना चाहिए। कॉपर के सेवन के शरीर में कई प्रकार के फायदे हैं, जिनमें शामिल हैं

ब्रेन के लिए फायदेमंद है (Brain)

क्या आप जानते हैं कि कॉपर रिच फूड को ब्रेन फूड कहा जाता है। कॉपर, मस्तिष्क के न्यूरोट्रांसमीटर (neurotransmitters) को सक्रिय करने वाले एंजाइमों का एक महत्वपूर्ण घटक है। कॉपर, हमारे मस्तिष्क में भी मौजूद होता है, विशेष रूप से बेसल गैन्ग्लिया (Ganglia), हिप्पोकैम्पस (Hippocampus), सेरिबैलम (Cerebellum), कई सिनैप्टिक झिल्ली और कॉर्टिकल पिरामिडल (Cortical pyramidal) और सेरेबेलर ग्रेन्युलर न्यूरॉन्स के कोशिका निकायों में। कॉपर उचित शारीरिक क्रिया के लिए एंजाइमों के लिए भी सहकारक है। कॉपर का सेवन बच्चे के हेल्दी विकास में सहायक है। आप सुनिश्चित करें कि आप नियमित रूप से बच्चे की प्लेट में कॉपर वाले फूड शामिल कर रहे हों।

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शरीर में एनर्जी को बढ़ाता है (Energy)

शोध से यह भी पता चला है कि कॉपर, कोशिकाओं की ऊर्जा में सहायक एडीनोसिन ट्राइफॉस्फेट (Adenosine triphosphate) के उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जानवरों पर हुए कई अध्ययनों में पता चला है कि काॅपर डिफिशिएंसी माइटोकॉन्ड्रिया (Mitochondria) के एटीपी के उत्पादन को सीमित कर सकता है। इससे बच्चे को थकान को अधिक महसूस होने लगती है। इसके अलावा साइटोक्रोम सी (Cytochrome C) ऑक्सिडेज के निर्माण के लिए कॉपर की आवश्यकता होती है, जिसे सीओएक्स के रूप में जाना जाता है।

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इम्यूनिटी को बढ़ाता है (Immunity)

लाल रक्त कोशिकाओं के उत्पादन के लिए आयरन के साथ काॅपर की मात्रा भी बहुत जरूरी है। कॉपर, हमारी इम्यूनिटी को बूस्ट करने का काम करता है। बच्चों में कॉपर डिफिशिएंसी उनपर भारी पड़ सकती है। इसके अलावा शरीर में कॉपर की कमी से न्यूट्रोपेनिया (neutropenia) रोग का खतरा भी बढ़ जाता है।, जो सफेद रक्त कोशिकाओं में असामान्य रूप से कमी से संबंधित है।

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मेटाबॉलिज्म को अच्छा बनाता है (Good Metabolism )

कई बार बच्चों में मोटापे का कारण, उनका खराब मेटाबॉल्जिम भी हो सकता है। खराब मेटाबॉल्जिम के कारणों में एक बच्चों में कॉपर डिफिशिएंसी भी हो सकती है। कापर हेल्दी मेटाबॉलिज्म (Metabolism) को बढ़ावा देता है। यह खनिज पदार्थ ATP (adenosine triphosphate) के संश्लेषण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, ATP को शरीर के ऊर्जा स्रोत के रूप में जाना जाता है। यही कारण है कि कॉपर की कमी, मेटाबाॅलिज्म को स्लो कर देती है।

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बच्चों में कॉपर डिफिशिएंसी को दूर करने वाले फूड्स (Foods that treat copper deficiency in children)

बच्चों में कॉपर डिफिशिएंसी को दूर करने के लिए आप उनकी डायट में ऐसे फूड्स को शामिल करें, जिससे उन्हें कॉपर की मात्रा नियमित रूप से मिलता रहे। जानिए उन फूड्स की लिस्ट, जिनमें से कुछ आप बच्चे के प्लेट में शामिल कर सकते हैं:

बच्चों में कॉपर डिफिशिएंसी को रोकने वाली सब्जियां (Vegetables)

बच्चों में कॉपर डिफिशिएंसी को रोकने के लिए आप उसे लीक, शलजम का साग, स्विस चार्ड, सरसों का साग, ब्रॉक्ली, फूलगोभी, केल, हरी बीन्स, ब्रूसल स्प्राउट्स, गोभी, शकरकंद, आलू, गाजर, लेट्यूस, आइसबर्ग लेट्यूस, पालक, शीटेक मशरूम, मशरूम, बेक्ड आलू, प्याज, शतावरी, कद्दू, मूली, तोरी, भिंडी, , स्वीट कॉर्न, लोबिया और मेथी आदि दे सकते हैं। इन सब्जियों में कॉपर की उच्च मात्रा पायी जाती है।

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बच्चों में कॉपर की कमी को पूरा करने वाले फल (Fruits)

बच्चे के शरीर में कॉपर जैसे पोषक तत्व की कमी होने पर आप उसे केला, सेब, संतरा, आड़ू, खुबानी, बटरनट स्क्वैश, नींबू, अंगूर, तरबूज, स्ट्रॉबेरी, हरे अंगूर, कीवी, ब्लूबेरी, अंजीर, बैंगन, खजूर, जैतून, नाशपाती, नारियल, क्रैनबेरी, अनार, आम, अनानास, चेरी, खरबूजा, अंगूर, कीनू, किशमिश, आलूबुखारा, टमाटर, एवोकाडो और ककड़ी आदि दे सकते हैं।

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बच्चों में कॉपर डिफिशिएंसी को रोकने वाले ड्रिंक्स (Drinks)

बच्चों में कॉपर डिफिशिएंसी को पूरा करने के लिए आप उसे कुछ ड्रिंक्स भी हैं, जो बच्चे को दिया जा सकता है, जिनमें शामिल हैं, कॉफी, सेब का रस, क्रैनबेरी जूस, स्किम मिल्क, दूध, सोया मिल्क, फ्रूट शेक, नारियल का दूध, संतरे का रस, अंगूर का रस, नींबू का रस या नींबू पानी आदि। यह बहुत ही फायदेमंद हैं।

सीड्स का सेवन (Seeds)

चिया सीड्स, सूरजमुखी के बीज, कद्दू के बीज, हेज़लनट्स, नट्स, बादाम, तिल, अखरोट, काजू, मूंगफली, नारियल, जिन्कगो नट्स और मिक्स नट्स आदि में कॉपर की उच्च मात्रा पायी जाती है।

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बीन्स और दाल (Beans)

कॉपर के लिए आप सोयाबीन, पिंटो बीन्स, किडनी बीन्स, दाल, ब्लैक बीन्स, लीमा बीन्स और नेवी बीन्स आदि भी बच्चे को दे सकते हैं।

डेयरी प्रोडक्ट (Dairy Product)

रिकोटा, दही, पनीर, एक अंडा, अंडे का सफेद भाग, बकरी का पनीर, चेडर, चेडर चीज, पनीर, उबला अंडा, फेटा चीज, मोजरेला आदि में भी कॉपर की अच्छी मात्रा पायी जाती है।

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अन्य फूड्स (Other Foods)

ग्रेनोला, चीयरियोस, दलिया, केलॉग अनाज, सामान्य मिल अनाज, शहद, चीनी, ब्राउन शुगर, टोफू, जैतून का तेल, लहसुन, जई, सलाद ड्रेसिंग, टमाटर का सूप, मशरूम सूप, चिकन सूप, सब्जी का सूप, कुकिंग ऑयल्स, फिश ऑयलस, सोयाबीन का तेल, सोया प्रोटीन, किशमिश, पनीर और बरिटो आदि भी बच्चों में कॉपर डिफिशिएंसी को दूर करते हैं।

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बच्चों में कॉपर डिफिशिएंसी के कारण, लक्षण और इसकी कमी को पूरा करने वाले फूड्स के बारे में जाने आपने। लेकिन यह जरूरी नहीं है कि यह सभी फूड्स, सभी बच्चों के लिए फायदेमंद हो। यदि बच्चे को डायबिटीज है या उसे अन्य किसी फूड से एलर्जी है, तो उसे अपने मन से कोई भी फूड न दें। ऐसा करना उसके लिए नुकसानदेह हो सकता है। अधिक जानकारी के लिए डॉक्टर से संपर्क करें।

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

सूत्र

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https://www.stanfordchildrens.org/en/topic/default?id=copper-19-Copper#:~:text=Copper%20deficiency%20can%20lead%20to,a%20role%20in%20melanin%20synthesis.

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https://biomedpharmajournal.org/vol11no4/copper-concentration-in-the-blood-serum-of-low-birth-weight-newborns/ Accessed 21 July, 2021

https://jandonline.org/article/S0002-8223(07%2901621-5/fulltext Accessed 21 July, 2021

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Niharika Jaiswal द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 2 weeks ago को
और Admin Writer द्वारा फैक्ट चेक्ड
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