इंटेराइटिस : पेट की इस सूजन का कारण है बैक्टीरिया! क्या जानते है आप इस समस्या के बारे में?

    इंटेराइटिस : पेट की इस सूजन का कारण है बैक्टीरिया! क्या जानते है आप इस समस्या के बारे में?

    इंटेराइटिस (Enteritis) स्मॉल इंटेस्टाइन (Small intestine) में होने वाली सूजन और परेशानी को कहा जाता है। स्मॉल इंटेस्टाइन डायजेस्टिव सिस्टम का सबसे लंबा भाग है। कुछ मामलों में यह सूजन पेट और लार्ज इंटेस्टाइन में भी हो सकती है। सूजन के कारण स्मॉल इंटेस्टाइन उस तरह से काम नहीं कर पाता, जैसे उसे करना चाहिए। जिसकी वजह से यह समस्या बेहद परेशान करने वाली हो सकती है। इंटेराइटिस के लक्षण सूजन और सामान्य पाचन में बाधा का परिणाम हैं। इसके सामान्य लक्षणों में पेट-दर्द, दस्त, और मतली और उल्टी शामिल हैं। चलिए जानते हैं इंटेराइटिस (Enteritis) के बारे में विस्तार से। शुरुआत करते हैं इसके प्रकारों से।

    इंटेराइटिस के कितने प्रकार हैं? (Types of Enteritis)

    इंटेराइटिस (Enteritis) एक सामान्य बीमारी है लेकिन कई मामलों में यह गंभीर भी हो सकती है। यह समस्या तीन तरह की होती है, जो यह हैं:

    इंफेक्शियस इंटेराइटिस (Infectious Enteritis)

    इंफेक्शियस इंटेराइटिस एक सामान्य तरह की बीमारी है। यह आमतौर पर दूषित पानी और भोजन से होती है। यह एक एक्यूट इंटेराइटिस (Acute Enteritis)भी है यानी इसके लक्षण बहुत जल्दी बढ़ते हैं। इसके कारणों में बैक्टीरिया, वायरस और परजीवी शामिल हैं। इसका अन्य नाम गेस्ट्रोएंट्राइटिस (Gastroenteritis) भी है।

    एन्टेरायट्स

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    इंफ्लमेटरी इंटेराइटिस (Inflammatory Enteritis)

    इंफ्लमेटरी इंटेराइटिस प्रायमरी और सेकेंडरी दोनों हो सकते हैं। इसका प्रायमरी वर्जन उस बीमारी की वजह से होता है जो सीधे ही सूजन पैदा कर सकती है। इसका उदहारण है क्रोहन रोग (Crohn’s Disease)। सेकेंडरी इंफ्लमेटरी इंटेराइटिस कुछ अन्य बीमारियों के इलाज के कारण होता है। इसका उदहारण है कीमोथेरेपी (Chemotherapy) और रेडिएशन ट्रीटमेंट(Radiation Treatment)

    इस्कीमिक इंटेराइटिस (Ischemic Enteritis)

    इस्कीमिक इंटेराइटिस स्मॉल इंटेस्टाइन में रक्त के प्रवाह में कमी का परिणाम है। यह इंटेराइटिस (Enteritis) का मुख्य प्रकार है और बेहद संक्रामक होता है। इसका सामान्य नाम स्टमक फ्लू है।

    इनमें से इंफेक्शियस इंटेराइटिस से पीड़ित किसी व्यक्ति के आसपास होना भी आपको जोखिम में डाल सकता है। आपको ऐसी जगहों की यात्रा करते समय भी सावधान रहना चाहिए, जहां पानी या भोजन साफ ​​नहीं होता है। अब जानते हैं इंटेराइटिस (Enteritis) के लक्षणों के बारे में:

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    इंटेराइटिस के लक्षण कौन से हैं? (Symptoms of Enteritis)

    इंटेराइटिस के लक्षण इसके प्रकार के अनुसार अलग हो सकते हैं। किसी बैक्टीरिया, वायरस या परजीवी के संपर्क में आने के बाद कुछ ही घंटों या दिनों में इंफेक्शियस इंटेराइटिस (Enteritis) के लक्षण बहुत जल्दी शुरू हो जाते हैं। इसके सामान्य लक्षण इस प्रकार हैं:

    यह लक्षण गंभीर और जानलेवा भी हो सकते हैं। इंटेराइटिस (Enteritis) का सबसे बड़ा खतरा है डिहायड्रेशन। वयस्कों में डिहायड्रेशन के लक्षण हैं डार्क रंग का पेशाब, सामान्य से कम मूत्र त्याग, अधिक प्यास लगना, सिरदर्द, थकावट आदि।

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    एन्टेरायट्स

    किन स्थितियों में तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए?

    इंटेराइटिस (Enteritis) का उपचार इसके कारण और गंभीरता पर निर्भर करता है। वायरल इंटेराइटिस के माइल्ड मामलों में उपचार की जरूरत नहीं होती है। लेकिन बैक्टीरिया और परजीवी के कारण होने वाली इस समस्या का उपचार दवाइयों से किया जाता है। अगर इस समस्या के लक्षण दो से तीन दिनों तक रहते हैं तो अपने डॉक्टर से सलाह लें। अगर आपको यह लक्षण नजर आते हैं तो तुरंत मेडिकल हेल्प लेना आवश्यक है।

    • मल में ब्लड या पस या खून की उल्टी होना (Blood or Pus in your Stool or Bloody Vomit)
    • डिहायड्रेशन (Dehydration)
    • अधिक डायरिया (Diarrhea)
    • 102 डिग्रीज फ़ारेनहाइट से अधिक बुखार होना (Fever over 102 Degrees Fahrenheit)
    • अचानक बहुत अधिक पेट में दर्द होना (Sudden, Severe Abdominal Pain)

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    इंटेराइटिस का क्या कारण है? (Enteritis)

    इंटेराइटिस का सबसे सामान्य रूप है इंफेक्शियस इंटेराइटिस (Enteritis) जो बैक्टीरिया, वायरस और परजीवी के कारण होता है। वायरस इसका मुख्य कारण हैं। नोरोवायरस वो सामान्य वायरस है जो वयस्कों को प्रभावित करता है। बच्चों में रोटावायरस इसका मुख्य कारण है। बैक्टीरिया जो इस समस्या का कारण बन सकते है, उनमें साल्मोनेला (Salmonella), क्रिप्टोस्पोरिडियम पैरासाइट्स (Cryptosporidium parasite) आदि शामिल हैं। इसके कुछ अन्य कारण इस प्रकार हैं:

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    इंटेराइटिस का निदान कैसे है संभव? (Diagnosis of Enteritis)

    इंटेराइटिस के निदान के लिए डॉक्टर सबसे पहले आपकी जांच करेंगे। आपसे इसके लक्षण और यह समस्या कब शुरू हुई थी यह भी जाना जाएगा। इसके अलावा डॉक्टर यह भी जान सकते हैं कि हाल ही में आपने कोई यात्रा तो नहीं की थी। आपकी मेडिकल कंडीशन, आप जो दवाइयां ले रहे हैं या आप हाल ही में किस ट्रीटमेंट से गुजरे हैं, यह सब जानना भी डॉक्टर के लिए जरूरी है। इसके साथ ही डॉक्टर आपको ब्लड टेस्ट के लिए सैंपल देने के लिए भी कह सकते हैं। ताकि इंटेराइटिस (Enteritis) का कारण बने रोगाणुओं के बारे में जाना जा सके।

    U.S. नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन (U.S. National Library of Medicine) के अनुसार इस स्थिति में निम्नलिखित टेस्ट भी कराए जा सकते हैं:

    • स्टूल कल्चर (stool culture) : इंफेक्शन के प्रकार के बारे में जानने के लिए स्टूल कल्चर कराया जा सकता है। हालांकि, यह टेस्ट हमेशा बीमारी का कारण बनने वाले बैक्टीरिया को नहीं पहचान सकता है।
    • कोलोनोस्कोपी (colonoscopy) : कोलोनोस्कोपी या अपर एंडोस्कोपी की मदद से स्मॉल इंटेस्टाइन की जांच की जा सकती है और अगर जरूरत हो तो उसका सैंपल भी लिया जा सकता है।
    • इसके अलावा अन्य इमेजिंग टेस्ट जैसे सिटी स्कैन (CT scan) और मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग (Magnetic Resonance Imaging) के लिए भी कहा जा सकता है।

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    इंटेराइटिस का उपचार कैसे किया जाता है? (Treatment of Enteritis)

    इंटेराइटिस का उपचार इसके कारण पर निर्भर करता है। यह समस्या सही डायट लेने और आराम करने से खुद से भी ठीक हो सकती है या डॉक्टर इस के लिए अन्य तरीकों को भी अपना सकते हैं। यह तरीके इस प्रकार हैं:

    • बैक्टीरिया या परजीवी के कारण होने वाले इंफेक्शन के लिए दवाइयां दी जा सकती हैं। आपको डायरिया या उल्टियों के उपचार के लिए भी दवा की जरूरत होगी। इन दवाइयां का सेवन अपनी मर्जी से न करें। बल्कि अपने डॉक्टर की सलाह के बाद ही इन्हें लें। इसके अलावा इंटेराइटिस (Enteritis) के उपचार के लिए डॉक्टर आपको अन्य कुछ दवाइयां भी दे सकते हैं।
    • ऐसे आहार का सेवन करें जिनसे इंटेराइटिस(Enteritis) के लक्षण कम हों। जैसे अधिक चीनी, फैट युक्त आहार का सेवन करने से बचें। इससे आपको डायरिया में आराम मिलेगा। यही नहीं, इससे आपको लैक्टोज से राहत पाने में भी मदद मिलेगी, जो एक तरह की शुगर है और मिल्क प्रोडक्ट्स में पाई जाती है।

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    • अगर आपको कोई स्पेशल डायट का पालन करना है, तो अपने डॉक्टर और डायटिशन से पूछें। अगर आपको कुछ खास मेडिकल समस्याएं हैं तो खास तरह की डायट जैसे कीटो डायट (Keto Diet ), इंटरमिटेंट फास्टिंग (Intermittent Fasting) आदि का पालन करने से भी बचें।
    • डॉक्टर की सलाह के अनुसार अधिक पानी पीएं। अपने डॉक्टर से पूछ लें कि आपको दिन में कितना और कौन से लिक्विड पीना चाहिए। यह डिहायड्रेशन के उपचार के लिए जरूरी है। अगर आपको उल्टियां या डायरिया की समस्या भी है, तब भी पानी पीना कम न करें। अगर आप डीहाइड्रेटेड हैं, तो आपको IV लिक्विड्स ( IV liquids) की जरूरत हो सकती है।
    • डॉक्टर के द्वारा बताए अनुसार ओरल रिड्रेशन सलूशन (Oral Rehydration Solution) का प्रयोग करें। इसमें पानी, नमक और चीनी होती है, जो शरीर से बाहर निकलें फ्लूइड को रिप्लेस करने के लिए जरूरी है।

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    इंटेराइटिस से बचाव

    जैसा की आप जानते ही हैं कि इंटेराइटिस (Enteritis) का कारण बैक्टीरिया, वायरस और परजीवी हैं। ऐसे में अगर आपको इंटेराइटिस (Enteritis) से बचना है, तो आपको बैक्टीरिया, वायरस और परजीवी से बचना चाहिए। इसके लिए कुछ टिप्स इस प्रकार हैं:

    • बार-बार अपने हाथों को धोएं। हाथों को धोने के लिए साबुन और पानी का प्रयोग करें। बाथरूम का प्रयोग करने के बाद, कुछ भी खाने से पहले या छींकने या खांसने के बाद अपने हाथों को अवश्य साफ करें। खाना बनाने से पहले भी हाथों की सफाई जरूरी है।
    • अपने घर के फर्श को साफ रखें। अपने कपड़ों और तौलियों को अन्य कपड़ों से अलग धोएं। घर के फर्श को एंटीबैक्टीरियल क्लीनर या ब्लीच से साफ करें।
    • खाने की चीजों को भी अच्छे से साफ करें। कच्ची सब्जियों को पकाने से पहले धो लें। मीट, फिश और अंडों को अच्छे से पकाएं।
    • जब आप ट्रेवल कर रहे हों तो सावधानी बरतें। हमेशा साफ पानी ही पिएं। नदी या झीलों का पानी पीने से बचें। छिले हुए फलों को भी न खाएं।

    Enteritis

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    इंटेराइटिस (Enteritis) से जुडी सबसे मुख्य जटिलता है डिहायड्रेशन। अगर आपको इसका कोई लक्षण दिखाई देता है तो तुरंत तरल पदार्थों को लेना शुरू कर देना चाहिए। डिहायड्रेशन किसी के लिए भी एक जोखिम भरी समस्या हो सकती है खासतौर पर नवजात शिशुओं और बच्चों में। इंटेराइटिस (Enteritis) में अन्य तरह की जटिलताएं भी हो सकती है। इसलिए, इस समस्या को कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। बल्कि, जैसे ही आपको इसके लक्षण नजर आते हैं तो तुरंत मेडिकल हेल्प लें। सही डायट, आराम और दवाईयों से इससे छुटकारा संभव है।

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    AnuSharma द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 18/02/2022 को
    डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड