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जानें डेंगू टाइमलाइन और इससे जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य

जानें डेंगू टाइमलाइन और इससे जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य

डेंगू विश्व में फैलने वाली सभी बीमारियों में से एक प्रमुख बीमारी है, जो कि मच्छरों की वजह से फैलती है। पूरे भारत में हर वर्ष डेंगू से होने वाली मृत्यु दर में वृद्धि होती है। इस आर्टिकल में जानें कि बीते कुछ वर्षों में किस तरह से डेंगू पूरे भारत में फैल रहा है और इसे कैसे रोका जा सकता है।

भारत में कहां से आया डेंगू?

भारत में डेंगू की शुरुआत हरियाणा से 1996 में हुई थी। इसके बाद ये बीमारी दिल्ली, चंडीगढ़, पांडिचेरी, बैंगलोर, कर्नाटक, लुधियाना और लखनऊ जैसे बड़े हिस्सों को प्रभावित कर चुकी है। 1988 से 1989 के बीच डेंगू के कई बड़े मामले गुजरात के हिस्सों में भी पाए गए थे और फिर यह लगातार बढ़ता चला गया।

उत्तर प्रदेश में हुए सर्वे में पाया गया कि गांवों में डेंगू से पीड़ित लोग 53. 4 % हैं जबकि शहरों में डेंगू के मरीजों की संख्या कम है। ऐसा इसलिए भी हो सकता है क्योंकि शहरों में साफ सफाई और चिकित्सा के साधन गांवों की तुलना में अधिक हैं।

डेंगू से जुड़े कुछ रोचक तथ्य

डेंगू किसी भी मरीज को हो सकता है। इसमें उम्र या फिर लिंग से कोई लेना देना नहीं है। डेंगू में खतरनाक बुखार होने पर कई बार बच्चों की मृत्यु भी हो जाती है।

  • डेंगू एक वायरल बीमारी है और DENV नाम के वायरस की वजह से होती है।
  • डेंगू एडीज एजेप्टाइ (Aedes aegptii) मच्छर की वजह से फैलता है।
  • ये मच्छर दिन के समय संक्रमण फैलाता है।
  • एडीज के काटने पर आपको तुरंत डेंगू के लक्षण दिखाई नहीं देंगे। साफ तौर से लक्षणों के दिखने में कम से कम तीन से चौदह दिन लगेंगे।

डेंगू के लक्षणों में वृद्धि किस तरह से हो सकती है?

आमतौर से डेंगू होने पर फ्लू जैसे लक्षण दिखाई देंगे जैसे कि बुखार होना, आंखों में दर्द होना, जोड़ों में दर्द होना, बहुत अधिक सिर दर्द होना और साथ ही शरीर पर चक्कते पड़ना। इस बीमारी में डेंगू बुखार की वजह से स्थिति अधिक खराब हो सकती है। स्थिति के बहुत अधिक खराब होने पर पेट के निचले हिस्से में दर्द, उल्टी और डायरिया की समस्या भी हो सकती है।

डेंगू से बचाव किन तरीकों से संभव है?

  • मच्छरों से बचाने वाली क्रीम (Repellent) का उपयोग करें।
  • बहुत अधिक गहरे रंग के कपड़े पहनने से बचें क्योंकि बहुत गहरे रंग के कपड़े मच्छरों और कीड़ों को आकर्षित करते हैं।
  • बहुत अधिक संक्रमित जगह पर रहने पर शरीर को पूरी तरह से ढक कर रखें।
  • अपने घर के आसपास पानी न जमा होने दें। जमा हुआ पानी कई बार मच्छरों के लिए घर बन सकता है।

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  • कई बार डेंगू की वजह से पीड़ित की मृत्यु भी हो सकती है। इसे डेंगू शॉक सिंड्रोम कहेंगें और इससे परेशानियां बढ़ सकती हैं।
  • 2019 में फूड और ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने डेंगू की वैक्सीन डेंगवैक्सिया (Dengvaxia) इजात की है जो कि नौ से 16 वर्ष की आयु तक के बच्चों के इलाज में कारगर साबित हुई है।

बीते हुए कई वर्षों में डेंगू की वजह से विश्व भर की मृत्युदर में वृद्धि हुई है। दवाइयों के प्रारूप में हो रहे आधुनिक विकास की वजह से डेंगू के मामलों में गिरावट आने की संभावना है और यह भी हो सकता है कि आगे आने वाले वर्षों में डेंगू से होने वाली मृत्युदर में भी गिरावट आए।

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हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

लेखक की तस्वीर
Suniti Tripathy द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 15/11/2019 को
Dr Sharayu Maknikar के द्वारा एक्स्पर्टली रिव्यूड