क्या होगा अगर छोटे बच्चों को ना लगवाए जाएं टीके?

चिकित्सक द्वारा समीक्षित | द्वारा

अपडेट डेट February 20, 2021 . 5 मिनट में पढ़ें
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कुछ पेरेंट्स जानकारी के आभाव में तो कुछ धार्मिक अंधविश्वासों के चलते बच्चों को टीका नहीं लगवाते। इससे बच्चों के लिए जानलेवा बीमारियों का खतरा पैदा हो जाता है। कुछ पेरेंट्स ऐसे सवाल भी करते हैं, कि बचपन में टीकाकरण क्यों जरूरी है? तो इसका जबाव सीडीसी (सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन) से जान लीजिए है। सीडीसी के अनुसार, ‘यद्यपि वैक्सिनेशन ने संक्रामक बीमारियों (Infectious diseases) से लोगों के संक्रमित होने के आकंड़ों और इन बीमारियों के कारण उत्पन्न होने वाली जटिलताओं को कम किया है, लेकिन वे बैक्टीरिया (Bacteria ) और वायरस (viruses) अभी भी मौजूद हैं जो मौत का कारण बनते हैं और जिनकी वजह से वैक्सीन बनाई गई थीं। वैक्सीन (Vaccine) या टीके के बिना वैक्सिन प्रिवेंटेबल डिजीज महामारी बनकर लौट आएंगी।’

इससे आप समझ सकते हैं कि अगर छोटे बच्चे बिना वैक्सिनेशन के रह जाते हैं तो उनके और दूसरे लोगों के लिए संक्रामक बीमारियों का खतरा कितना बढ़ जाता है। छोटे बच्चों के लिए वैक्सिनेशन कितना जरूरी है ये जानने से पहले एक नजर इन आकंड़ों पर भी डाल लीजिए।

  • कुछ समय पहले नॉर्थ कैरोलिना (North carolina) में 36 बच्चों में चिकनपॉक्स (Chickenpox) पाया गया जो कि टीकाकरण ना कराने का बुरा उदाहरण साबित हुआ
  • न्यूयॉर्क स्टेट हेल्थ ऑफिशियल्स ने लोगों को चेतावनी दी है कि मीजल्स दुनिया का सबसे संक्रामक वायरस (Infectious virus) है और इसका टीका ना लगवाने पर 90 प्रतिशत लोग वायरस के संपर्क में आने पर इससे संक्रमित हो सकते हैं। जिसे टीकाकरण से ही रोका जा सकता है
  • वहीं कुछ दिनों पहले WHO ने चेतावनी दी थी कि 2017 में कई देशों में मीजल्स (measles) का जो स्पाइक हुआ था उसका कारण भी पर्याप्त वैक्सिनेशन (vaccination) कवरेज में कमी थी
  • WHO के अनुसार भारत में 20-25 प्रतिशत बच्चे बिना टीकाकरण के रह जाते हैं। (यह आंकड़ा 2013 के रिपोर्ट पर आधारित है)
  • इन आंकड़ों के आधार पर कहा जा सकता है कि बच्चों के लिए वैक्सिनेशन बेहद जरूरी है इसके बारे में अधिक जानकारी आगे दी जा रही है

और पढ़ें: बच्चों के टीकाकरण के बाद दिखें ये साइड-इफेक्ट्स, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं

छोटे बच्चों के लिए वैक्सिनेशन क्यों है जरूरी (Why is vaccination important for toddlers)

छोटे बच्चों के लिए वैक्सिनेशन

टीकाकरण बच्चों को ना सिर्फ जानलेवा बीमारियों जैसे कि पोलियो (Polio), डिप्थीरिया (diphtheria) और मीजल्स (measles) से बचाता है बल्कि ये एक बच्चे से दूसरे बच्चों में फैलने वाली इन खतरनाक बीमारियों का रिस्क कम कर देता है। बता दें कि वैक्सीन मरे हुए या कमजोर रोगाणु का एक हिस्सा होती जो बीमारी का कारण बनते हैं। जब बच्चों को वैक्सीन के रूप में उस बीमारी के संपर्क में लाया जाता है, तो उनकी प्रतिरक्षा प्रणाली (immune system) जो शरीर की जर्म्स से लड़ने वाली मशीन (germ fighting machine) है, एंटीबॉडीज (antibodies) का निर्माण करने में सक्षम हो जाती है जो वास्तविक बीमारी के संपर्क में आने पर बच्चों को बीमारी से बचाने में मदद करती हैं।

कई वर्षों तक वैक्सीन की सेफ्टी को लेकर कंट्रोवर्सी हुई है, लेकिन अब तक इनके नुकसान को लेकर कोई पुख्ता प्रमाण नहीं मिले हैं। हालांकि छोटे बच्चों में वैक्सिनेशन के कुछ साइड- इफेक्ट्स नजर आते हैं, लेकिन ये इसके फायदों से ज्यादा नहीं है।

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और पढ़ें: क्यों जरूरी है बच्चों को वैक्सीन लगवाना

अगर छोटे बच्चे वैक्सिनेशन के बिना रह जाते हैं तो? (What Happens When Children Don’t Get Vaccinated)

वैक्सीन का निमार्ण खतरनाक और जानलेवा बीमारियों से बचाने के लिए किया जाता है। ये बीमारियां खतरा बना रहता है। वैक्सीन सुरक्षित हें और यह एक इफेक्टिव प्रोटेक्शन है। अगर बच्चों को वैक्सीन नहीं लगाई जाती है तो निम्न कॉम्प्लिकेशन्स हो सकती हैं।

  • इंफ्लुएंजा (Influenza) या फ्लू (flu) एक सीरियस रेस्पिरेट्री (respiratory disease) बीमारी है जो कि जानलेवा हो सकती है। हेल्दी बेबीज और स्पेशली टॉडलर्स इसकी चपेट में आसानी से आ जाते हैं। हर साल अमेरिका में बच्चों की मौत इंफ्लुएंजा के कारण होती है।
  • व्हूपिंग कफ (whooping cough) बीमारी भी बच्चों के लिए बेहद खतरनाक है। इसका इलाज आसानी से नहीं किया जा सकता और इसका परिणाम परमानेंट ब्रेन डैमेज या डेथ होती है। व्हूपिंग कफ एक साल से बड़ें बच्चों में होने वाली जानलेवा बीमारी है। जिन बच्चों को वैक्सीन नहीं लगा होता है उन्हें इस बीमारी से प्रोटेक्ट करना बेहद मुश्किल होता है। यह संक्रामक बीमारी है और बड़े बच्चों में इसका पता लगाना मुश्किल होता है क्योंकि इसके लक्षणों में फीवर के बिना माइल्ड कफ होता है।
  • मीजल्स (Measles) तेजी से फैलने वाला संक्रामक रोग है जो मौत का कारण बन सकता है। अगर छोटे बच्चे वैक्सिनेशन के बिना रह जाते हैं तो यह उनमें सीरियस कॉम्प्लिकेशन का कारण बन सकता है। कुछ सालों पहले अमेरिका में मीजल्स का आउटब्रेक हुआ था जिसमें ऐसे टीनेजर और बच्चे जिन्हें टीका नहीं लगा था वे इसका शिकार बने थे।
  • चिकनपॉक्स (Chickenpox) वैक्सीन बनने से पहले हजारों लोग की मौत चिकनपॉक्स से होती थी। यह बेहद संक्रामक बीमारी है। चिकनपॉक्स का शिकार होने पर बच्चों को घर में लगभग एक हफ्ते तक रखा जाता है ताकि वे दूसरों में इस बीमारी को ना फैलाने पाएं।
  • जो छोटे बच्चे वैक्सिनेशन के बिना रह जाते हैं वे वैक्सीन प्रिवेंटेबल डिजीज को स्कूल और दूसरी जगहों पर ट्रांसमिट कर सकते हैं।
  • इसके साथ ही वे किसी भी एज ग्रुप के ऐसे किसी भी व्यक्ति को इंफेक्ट कर सकते हैं जो किसी कारणवश टीका नहीं लगवाया पाया।

और पढ़ें: बच्चों को निमोनिया की वैक्सीन लगाना है जरूरी

छोटे बच्चों के लिए वैक्सिनेशन के 3 फायदे ( benefits of vaccination for toddlers)

छोटे बच्चे वैक्सिनेशन के बिना रह जाते हैं तो यह खतरनाक साबित हो सकता है

पेरेंट्स अपने बच्चों की परवरिश इतने अच्छे ढंग से करते हैं कि वे बच्चों से जुड़ी हर छोटी से छोटी बात का ध्यान रखते हैं, लेकिन हम आपको बता दें कि अगर आपकी किसी भी गलती या लापरवाही की वजह से छोटे बच्चे वैक्सिनेशन के बिना रह जाते हैं तो उनका जीवन खतरे में पड़ सकता है। आगे जानिए छोटे बच्चों के लिए वैक्सिनेशन क्यों फायदेमंद है।

1.छोटे बच्चों के लिए वैक्सिनेशन है लाइफ सेवर (life saver)

आज मेडिकल साइंस ने इतनी तरक्की कर ली है कि वैक्सिनेशन के जरिए आपका बच्चा उन बीमारियों से बच सकता है जिनके कारण पहले कई बच्चों की जान गई है। पहले ऐसा संभव नहीं था। पोलियो (Polio) इसका एक उदाहरण है। पहले जहां पोलियो से लाखों बच्चे ग्रसित होते थे और विकलांग होने के साथ ही अपनी जान तक गंवाते थे, लेकिन अब इक्का दुक्का मामले ही कभी-कभार सामने आते हैं। यह सब निरंतर चलने वाले वैक्सिनेशन से ही संभव हो पाया है।

2.टीकाकरण से आप बचा सकते हैं फैमिली टाइम और पैसा भी (Immunizations can save your family time and money)

कई स्कूलों में वैक्सीन प्रिवेंटेबल डिजीज से पीड़ित बच्चों को प्रवेश नहीं मिलता। वहीं वैक्सीन प्रिवेंटेबल डिजीज के कारण लंबे समय तक चलने वाली डिसेब्लिटी (disabilities) फाइनेशियल टॉल का कारण भी बनती है और साथ ही तनाव का भी। इन सभी परेशानियों से बचने के लिए बच्चे का वैक्सिनेशन करवाना बेस्ट ऑप्शन है।

और पढ़ें: अल्सरेटिव कोलाइटिस- बच्चों में क्यों होती है यह समस्या?

3.टीकाकरण फ्यूजर जनरेशन को बचाने के लिए जरूरी है (Immunization protects future generations)

रूबेला (rubella)से लेकर चिकनपॉक्स ने कई बच्चों की जान ली है, लेकिन आज इनके टीकाकरण के चलते इनका रिस्क काफी कम हो गया है। यहां तक कि प्रेग्नेंट महिला से भ्रूण तक पहुंचने वाले इस वायरस का रिस्क बहुत कम हो चुका है। अगर इसी तरह वैक्सिनेशन की प्रॉसेस चलती रहेगी तो पेरेंट्स इस बात पर पूरा तरह विश्वास कर सकते हैं कि जिन बीमारियों का डर आज उन्हें हैं वो फ्यूचर में उनके बच्चों को नुकसान नहीं पहुंचाएगी।

इस तरह पैरेंट्स बच्चों का वैक्सिनेशर करवा अपने बच्चों औद दूसरों की भी सुरक्षा कर सकते हैं। उन्हें इसके लिए कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है।

पैरेंट्स छोटे बच्चों के वैक्सिनेशन का रिकॉर्ड रखें

छोटे बच्चों के लिए वैक्सिनेशन

ज्यादातर बच्चों में वैक्सिनेशन जन्म के बाद से 6 वर्षों तक कंप्लीट हो जाता है। कई टीके अलग-अलग उम्र में एक बार से ज्यादा दिए जाते हैं। इसलिए पेरेंट्स के लिए जरूरी है कि वे छोटे बच्चों को दिए जाने वाले टीकों का रिकॉर्ड मैंटेन करें। हालांकि जिस डॉक्टर या हॉस्पिटल से वे वैक्सिनेशन ले रहे होते हैं वे भी इसका पूरा रिकॉर्ड रखते हैं, लेकिन कई बार लोग डॉक्टर चेंज कर देते हैं जिससे रिकॉर्ड नहीं रह जाता। ऐसे में टीकों की पूरी जानकारी रखना आपकी जिम्मेदारी है। कई बार बच्चे के बीमार होने या किसी अन्य कारण के चलते कोई टीका छूट जाता है तो उसे बाद में जरूर लगवाएं। इसके लिए आपको पुराने टीके भी फिर नहीं लगवाना होंगे बस मिस हुए टीके को डॉक्टर को शेड्यूल कर देंगे। वैक्सिनेशन करवाएं और अपने बच्चे की संपूर्ण सुरक्षा करें।

और पढ़ें: शिशु की गर्भनाल में कहीं इंफेक्शन तो नहीं, जानिए संक्रमित अम्बिलिकल कॉर्ड के लक्षण और इलाज

उम्मीद करते हैं कि आपको यह आर्टिकल पसंद आया होगा और अगर छोटे बच्चे बिना वैक्सिनेशन के रह जाते तो उन्हें किन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है इससे संबंधित जरूरी जानकारियां मिल गई होंगी। अधिक जानकारी के लिए एक्सपर्ट से सलाह जरूर लें। अगर आपके मन में अन्य कोई सवाल हैं तो आप हमारे फेसबुक पेज पर पूछ सकते हैं। हम आपके सभी सवालों के जवाब आपको कमेंट बॉक्स में देने की पूरी कोशिश करेंगे। अपने करीबियों को इस जानकारी से अवगत कराने के लिए आप ये आर्टिकल जरूर शेयर करें।

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चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Pooja Bhardwaj
के द्वारा लिखा गया Shivani Verma

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