Erythematous Mucosa: कितनी गंभीर है एरीथेमेटस म्यूकोसा की समस्या, जानिए

    Erythematous Mucosa: कितनी गंभीर है एरीथेमेटस म्यूकोसा की समस्या, जानिए

    म्यूकोसा एक मेम्ब्रेन को कहा जाता है जो हमारे डायजेस्टिव ट्रैक्ट को लाइन करती है। एरिथेमा का अर्थ है लालिमा। यानी, एरीथेमेटस म्यूकोसा (Erythematous Mucosa) उस लालिमा और इंफ्लेमेशन को कहा जाता है, जो डायजेस्टिव ट्रैक्ट के लायनिंग एरिया में होती है। हालांकि, एरीथेमेटस म्यूकोसा कोई बीमारी नहीं है, लेकिन यह एक समस्या का संकेत हो सकती है, जिसमें मेडिकल हेल्प की जरूरत होती है। आज हम इस बीमारी के बारे में आप को बताने वाले हैं। इसके लक्षणों और कारणों के बारे में भी जानकारी होना आवश्यक है। यही नहीं, एरीथेमेटस म्यूकोसा (Erythematous Mucosa) के उपचार के बारे में भी जानें।

    एरीथेमेटस म्यूकोसा क्या है? (Erythematous Mucosa)

    जैसा पहले ही बताया गया है कि यह कोई बीमारी नहीं है। बल्कि, यह किसी हेल्थ कंडिशन का लक्षण हो सकती है। एरीथेमेटस म्यूकोसा (Erythematous Mucosa) शब्द का इस्तेमाल मुख्य रूप से डॉक्टरों द्वारा यह वर्णन करने के लिए किया जाता है, कि वे रोगी के डायजेस्टिव ट्रैक्ट की जांच के बाद वो किस समस्या का निदान करते हैं। एरीथेमेटस म्यूकोसा (Erythematous Mucosa) से जुड़ी हुई अंडरलायिंग कंडिशंस इस बात पर निर्भर करती हैं कि डायजेस्टिव ट्रैक्ट का कौन सा हिस्सा लाल या इंफ्लेमड है, जैसे:

    • पेट में म्यूकोसल लायनिंग की इंफ्लेमेशन जिसे गैस्ट्राइटिस (Gastritis) कहा जाता है।
    • कोलन में म्यूकोसल लायनिंग की इंफ्लेमेशन जिसे कोलाइटिस (Colitis) कहा जाता है।
    • रेक्टम में म्यूकोसल लायनिंग की इंफ्लेमेशन जिसे प्रोक्टाइटिस (Proctitis) कहा जाता है।
    • एनल कैनल में म्यूकोसल लायनिंग की इंफ्लेमेश जिसे एनासाइटिस (Anusitis) कहा जाता है।

    अब जानते हैं एरीथेमेटस म्यूकोसा (Erythematous Mucosa) के लक्षणों के बारे में।

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    एरीथेमेटस म्यूकोसा के लक्षण क्या हैं?(Symptoms of Erythematous Mucosa)

    एरीथेमेटस म्यूकोसा(Erythematous Mucosa) के लक्षण इस बात पर निर्भर करते हैं कि इंफ्लेमेशन शरीर के किस हिस्से में है। इसके लक्षण इस प्रकार हैं:

    पेट या एंटरम (Stomach or antrum)

    गैस्ट्राइटिस पूरे पेट को प्रभावित करती है। लेकिन, कई बार इससे केवल एंटरम पर ही असर होता है जो पेट का निचला हिस्सा है। गैस्ट्राइटिस शार्ट-टर्म और लॉन्ग-टर्म दोनों हो सकती है। एक्यूट गैस्ट्राइटिस के लक्षण इस प्रकार हैं:

    • खाने के बाद माइल्ड बेचैनी होना या पेट के ऊपरी लेफ्ट साइड का भरा हुआ महसूस होना (Mild discomfort or full feeling)
    • जी मिचलाना और उल्टी आना (Nausea and vomiting)
    • भूख में कमी (Loss of appetite)
    • हार्टबर्न या अपच (Heartburn or indigestion), जिसमें बर्निंग या हल्की दर्द हो सकती है।
    • अगर यह समस्या बदतर हो जाए तो अल्सर का कारण बन सकती है। कई मामलों में एक्यूट गैस्ट्राइटिस का कोई भी लक्षण नहीं होता है। अधिकतर लोग क्रॉनिक गैस्ट्राइटिस में किसी भी लक्षण का अनुभव नहीं करते हैं।

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    कोलन (Colon)

    लार्ज इंटेस्टाइन को कोलन भी कहा जाता है। यह हमारे स्मॉल इंटेस्टाइन को रेक्टम के साथ कनेक्ट करता है। कोलाइटिस के लक्षण इसके कारणों पर निर्भर करते हैं, लेकिन इसके सामान्य लक्षण इस प्रकार हैं:

    एरीथेमेटस म्यूकोसा (Erythematous Mucosa) में दो सबसे सामान्य इंफ्लेमेटरी बॉवेल डिजीज (Inflammatory bowel diseases), क्रोहन’स डिजीज (Crohn’s disease) और अल्सरेटिव कोलाइटिस (Ulcerative colitis) कोलन के पास शरीर में अन्य भागों में इंफ्लेमेशन के कारण हो सकते हैं। इनमें यह सब शामिल है:

    • आंखों के सफेद भाग को प्रोटेक्ट करने वाली क्लियर लेयर में इंफ्लेमेशन होना।
    • घुटनों के नीचे, टांगों के सामने लाल और पेनफुल लम्पस होना।
    • टांगों पर बड़े और पेनफुल घाव होना।

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    प्रोक्टाइटिस और एनासाइटिस (Proctitis and Anusitis)

    • रेक्टम डायजेस्टिव ट्रैक्ट का सबसे अंतिम भाग है। यह वो ट्यूब है, जो कोलन और शरीर के बाहरी हिस्से को कनेक्ट करती है। प्रोक्टाइटिस (Proctitis)के लक्षण इस प्रकार हैं:
    • रेक्टम या लोअर लेफ्ट एब्डोमेन में दर्द होना।
    • मूवमेंट के बाद या बिना मूवमेंट के कारण ब्लड और म्यूकस का पास होना।
    • ऐसा महसूस होना जैसे आपका रेक्टम फुल है और बॉवेल मूवमेंट का फ्रीक्वेंट होना।
    • डायरिया

    इसकी कॉम्प्लिकेशन्स के अन्य लक्षण भी हो सकते हैं, जैसे:

    यह तो थे इस समस्या के लक्षण। अब जानते हैं कि एरीथेमेटस म्यूकोसा (Erythematous Mucosa) के कारण क्या हैं?

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    एरीथेमेटस म्यूकोसा के कारण (Causes of Erythematous Mucosa)

    एरीथेमेटस म्यूकोसा के कारण जानने से पहले आपके लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि गैस्ट्राइटिस कम उम्र की महिलाओं में अधिक सामान्य है। इसके सामान्य कारण इस प्रकार हैं:

    कोलाइटिस (Colitis)

    कोलाइटिस भी आम समस्या है और इसके कारण इस प्रकार हैं:

    एरिथेमेटस म्यूकोसा (Erythematous Mucosa)
    एरीथेमेटस म्यूकोसा (Erythematous Mucosa)

    प्रोक्टाइटिस और (Proctitis and Anusitis)

    कई फैक्टर जो प्रोक्टाइटिस (Proctitis) और एनासाइटिस (Anusitis) का कारण बनते हैं, वो इस प्रकार हैं:

    • स्ट्रेस (Stress)
    • साइट्रस, कॉफी, बियर, गार्लिक, मसले आदि का अधिक सेवन
    • हाइड्रोजन पेरोक्साइड एनेमास (Hydrogen peroxide enemas) का इस्तेमाल
    • कुछ बैक्टीरियल इंफेक्शन या बैक्टीरियल सेक्शुअल ट्रांसमिटेड इंफेक्शन
    • अल्सरेटिव कोलाइटिस (Ulcerative Colitis)

    अब जानते हैं एरीथेमेटस म्यूकोसा (Erythematous Mucosa) का निदान किस तरह से संभव है?

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    एरीथेमेटस म्यूकोसा का निदान (Diagnosis of Erythematous Mucosa)

    एरीथेमेटस म्यूकोसा (Erythematous Mucosa) के निदान के लिए डॉक्टर रोगी के उस अंग की जांच करते हैं, जिसमें समस्या होती है। इसके साथ ही डॉक्टर रोगी से लक्षणों के बारे में भी जानेंगे। अब जानते हैं कि डॉक्टर इस समस्या का निदान कैसे होता है?

    स्टमक या एंटरम (Stomach or antrum)

    गैस्ट्राइटिस का आमतौर पर लक्षणों और मेडिकल हिस्ट्री के आधार पर निदान किया जाता है। इसके साथ ही डॉक्टर कुछ टेस्ट्स के लिए भी कह सकते हैं, जैसे:

    • अगर किसी को हेलिकोबैक्टर पाइलोरी इंफेक्शन (Helicobacter pylori infection) है, तो ब्रीद,स्टूल या ब्लड टेस्ट
    • एंडोस्कोपी, ताकि इंफ्लेमेशन की जांच हो सके। अगर डॉक्टर को कुछ संदेहजनक नजर आता है, तो रोगी को बायोप्सी की सलाह दी जा सकती है।

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    कोलन (Colon)

    कोलन और रेक्टम की जांच के लिए डॉक्टर कोलोनोस्कोपी (Colonoscopy) कहा जाता है। इसके साथ ही डॉक्टर इन टेस्ट्स की सलाह भी दे सकते हैं:

    रेक्टम (Rectum)

    एरीथेमेटस म्यूकोसा (Erythematous Mucosa) में प्रोक्टाइटिस की जांच के लिए सिग्मोइडोस्कोपी (Sigmoidoscope) का इस्तेमाल भी किया जा सकता है।

    इसके साथ ही इन टेस्ट्स की सलाह भी दी जा सकती है:

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    एरीथेमेटस म्यूकोसा का उपचार (Treatment of Erythematous Mucosa)

    एरीथेमेटस म्यूकोसा (Erythematous Mucosa) के उपचार के लिए डॉक्टर अंडरलायिंग हेल्थ कंडिशंस का ट्रीटमेंट करेंगे। यह उपचार इस प्रकार हैं:

    गैस्ट्राइटिस (Gastritis)

    रोगी को हेलिकोबैक्टर पाइलोरी इंफेक्शन (Helicobacter pylori infection) के कारण अगर गैस्ट्राइटिस की समस्या हो रही है, तो डॉक्टर इन एंटीबायोटिक्स की सलाह दे सकते हैं। जैसे:

    ऑटोइम्यून गैस्ट्राइटिस की स्थिति में डॉक्टर रोगी को आयरन और विटामिन B2 सप्लीमेंट्स भी दे सकते हैं। इसके साथ ही अन्य तरीकों से भी गैस्ट्राइटिस के लक्षणों को कम किया जा सकता है, जैसे:

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    कोलाइटिस (Colitis)

    अगर एरीथेमेटस म्यूकोसा (Erythematous Mucosa) का संबंध बैक्टीरियल इंफेक्शन से है, तो डॉक्टर एंटीबायोटिक्स दे सकते हैं। अल्सरेटिव कोलाइटिस (Ulcerative Colitis) के उपचार के लिए डॉक्टर उस उत्पाद की सलाह देंगे जिनमें 5-एमिनोसैलिसिलिक एसिड (5-aminosalicylic acid) यानी मेसालजीन (Mesalazine) हो। लेकिन, यह उपचार क्रोहन’स डिजीज से पीड़ित लोगों के लिए सही नहीं है। उन्हें अन्य दवाईओं की सलाह दी जा सकती है जैसे ट्यूमर नेक्रोसिस फैक्टर अंटागोनिस्ट (Tumor necrosis factor antagonist) आदि।

    डॉक्टर रोगी को कॉर्टिकोस्टेरॉइड (Corticosteroids) के शार्ट कोर्स की सलाह दे सकते हैं इसके साथ ही लक्षणों को कम करने के लिए हेल्दी हैबिट्स को अपनाना भी जरूरी है।

    प्रोक्टाइटिस और एनासाइटिस (Proctitis and anusitis)

    अगर एरीथेमेटस म्यूकोसा (Erythematous Mucosa) की समस्या सेक्शुअल ट्रांसमिटेड इंफेक्शन के कारण है, तो इसके उपचार का फोकस इंफेक्शन पर होता है। जब तक इस समस्या का उपचार नहीं हो जाता सेक्स से बचें और डॉक्टर की सलाह का पालन करें।

    • अगर प्रोक्टाइटिस (Proctitis) की वजह से अल्सर हो, तो डॉक्टर 5-एमिनोसैलिसिलिक एसिड (5-aminosalicylic acid) उपचार की सलाह दे सकते हैं।
    • इसके साथ ही डॉक्टर टोपिकल ट्रीटमेंट की सलाह भी दे सकते हैं जैसे कोई जेल या क्रीम आदि।
    • प्रोक्टाइटिस (Proctitis) और एनासाइटिस (Anusitis) के लक्षणों से बचने के लिए कैफीन, फिजी ड्रिंक्स, बियर, लहसुन, मसालों आदि के सेवन से बचें। इसके साथ ही स्ट्रेस से भी बचें।

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    यह तो थी एरीथेमेटस म्यूकोसा (Erythematous Mucosa) के बारे में जानकारी। यह तो आप समझ ही गए होंगे की यह डायजेस्टिव ट्रैक्ट की म्यूकोसल लायनिंग में होने वाली सूजन है। यह रोग कोलाइटिस (Colitis), प्रोक्टाइटिस (Proctitis) और एनासाइटिस (Anusitis) या गैस्ट्राइटिस (Gastritis) का संकेत भी हो सकता है। इसका कारण एनवायर्नमेंटल फैक्ट्री और इंफेक्शन भी हो सकते हैं। एरीथेमेटस म्यूकोसा के उपचार में दवाइयां, स्ट्रेस से बचना और सही आहार आदि का सेवन करना जरूरी है। इन अंडरलायिंग कंडिशंस से पीड़ित लोगों में गैस्ट्रिक या कोलाइटिस (Colitis) से जुड़ा कैंसर हो सकता है। लेकिन, ध्यान रहे इस समस्या से पीड़ित लोगों को जीवनभर मॉनिटरिंग की जरूरत हो सकती है। अगर आपके मन में इसके बारे में कोई भी सवाल है, तो डॉक्टर से सलाह लेना न भूलें।

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    AnuSharma द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 19/01/2022 को
    डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड